शनिवार, 7 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क  |  हिन्दी English
सरकारी योजनाएँ

मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन हरियाणा 2026: ₹20,000 महीना

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन हरियाणा 2026: ₹20,000 महीना
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 1:00 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन हरियाणा 2026: ₹20,000 महीना

हरियाणा सरकार हिंदी आंदोलन-1957 के मातृभाषा सत्याग्रहियों को अब ₹20,000 प्रति माह पेंशन देती है। यह राशि पहले ₹15,000 थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 25 जून 2024 को इस बढ़ोतरी की घोषणा की थी, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई, और 28 दिसंबर 2024 को हरियाणा कैबिनेट ने इस बढ़ोतरी को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी। कैबिनेट के फैसले के साथ यह भी साफ किया गया था कि पात्रता की शर्तों और योजना की अन्य शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन हरियाणा के तहत यह पेंशन सत्याग्रही को और उनके बाद उनके जीवनसाथी को आजीवन मिलती है।

अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य 1957 के हिंदी आंदोलन में शामिल रहा है, तो यह लेख आपके लिए है। इसमें योजना की पूरी जानकारी दी गई है — यह पेंशन किसे मिलती है, कितनी मिलती है, कौन से दस्तावेज चाहिए, आवेदन कहाँ और कैसे करना है, और आवेदन के बाद क्या होता है।

एक जरूरी चेतावनी: इंटरनेट पर कई जगह इस योजना की राशि अब भी ₹15,000 लिखी हुई है। वह जानकारी पुरानी है। सही और मौजूदा राशि ₹20,000 प्रति माह है। इसी तरह यह योजना समाज कल्याण विभाग की नहीं है — यह सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा की योजना है। आवेदन भी उसी विभाग की सेवा के रूप में अंत्योदय सरल पोर्टल पर सूचीबद्ध है।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन योजना (Matribhasha Satyagrahi Pension Scheme)
राज्य हरियाणा
विभाग सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा
मासिक पेंशन ₹20,000 प्रति माह
लाभार्थी हिंदी आंदोलन-1957 के मातृभाषा सत्याग्रही और उनकी मृत्यु के बाद उनके जीवित पति/पत्नी
शुरुआत घोषणा 31 अक्टूबर 2017; योजना 12 दिसंबर 2017 से लागू
आवेदन का माध्यम अंत्योदय सरल पोर्टल (ऑनलाइन) और जिला कार्यालय (ऑफलाइन)
आधिकारिक पोर्टल saralharyana.gov.in

पेंशन राशि का इतिहास: ₹10,000 से ₹20,000 तक

इस योजना की राशि समय-समय पर बढ़ाई गई है। राशि का पूरा इतिहास इस प्रकार है:

समय मासिक पेंशन किसने/कैसे तय हुई
नवंबर 2017 ₹10,000 योजना की शुरुआत के समय तय राशि
अक्टूबर 2023 ₹15,000 तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की घोषणा
1 जुलाई 2024 से ₹20,000 मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की 25 जून 2024 की घोषणा
28 दिसंबर 2024 ₹20,000 हरियाणा कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी, तुरंत प्रभाव से

इस तालिका से एक बात साफ है — ₹15,000 वाली राशि अक्टूबर 2023 से जून 2024 के बीच की थी। 1 जुलाई 2024 से ₹20,000 लागू है और दिसंबर 2024 की कैबिनेट मंजूरी के बाद इस पर कोई संदेह नहीं रह जाता। अगर किसी पुराने लेख, वीडियो या फॉर्म में ₹15,000 लिखा दिखे, तो उसे पुरानी जानकारी समझें।

दिसंबर 2024 में जब कैबिनेट ने बढ़ोतरी को मंजूरी दी, तब इस योजना के तहत 161 सत्याग्रही या उनके जीवित पति/पत्नी पेंशन पा रहे थे। बढ़ोतरी पर सरकार का अतिरिक्त सालाना खर्च करीब ₹96.60 लाख आँका गया था, जिससे योजना की कुल सालाना लागत लगभग ₹3.86 करोड़ हो गई।

हिंदी आंदोलन-1957 क्या था?

1957 में तत्कालीन पंजाब के हिंदी-भाषी इलाकों के लोगों ने अपनी मातृभाषा हिंदी के सम्मान, प्रचार और लागू करने के लिए आंदोलन छेड़ा था। यह आंदोलन पंजाब आर्य प्रतिनिधि सभा के नेतृत्व में 30 अप्रैल 1957 को शुरू हुआ और 27 दिसंबर 1957 तक चला। आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को ही मातृभाषा सत्याग्रही कहा जाता है।

इस आंदोलन के दौरान कई सत्याग्रहियों को जेल जाना पड़ा था। रोहतक जिले के नया बाँस गाँव के निवासी सुमेर सिंह ने इस सत्याग्रह के दौरान अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। सरकार के अनुसार, इस आंदोलन ने हरियाणा को एक अलग राज्य के रूप में बनाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

हरियाणा सरकार ने राज्य के स्वर्ण जयंती समारोह के समापन पर 31 अक्टूबर 2017 को हिसार में इस पेंशन की घोषणा की थी। इसके बाद 22 नवंबर 2017 को कैबिनेट ने योजना को मंजूरी दी और 12 दिसंबर 2017 को योजना औपचारिक रूप से शुरू हुई। योजना के पहले चरण में कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के कार्यक्रम में आठ लाभार्थियों को नवंबर 2017 की पेंशन के ₹10,000-₹10,000 के चेक दिए गए थे।

यह पेंशन किसे मिलती है? पात्रता की शर्तें

यह योजना हर किसी के लिए नहीं है। यह एक विशेष सम्मान पेंशन है, जो सिर्फ उन लोगों को मिलती है जो 1957 के हिंदी आंदोलन में सत्याग्रही के रूप में शामिल थे और जिनकी पहचान सरकार की तय प्रक्रिया से हुई हो। पात्रता की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  • हिंदी आंदोलन-1957 में भागीदारी: आवेदक ने 1957 के हिंदी आंदोलन में मातृभाषा सत्याग्रही के रूप में भाग लिया हो। आंदोलन में भाग लेने का मतलब है कि वह व्यक्ति सत्याग्रह के दौरान जेल गया हो या आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहा हो।
  • जिला समिति से पहचान: सत्याग्रहियों की पहचान हर जिले में उपायुक्त (DC) की अध्यक्षता में बनाई गई समितियों के माध्यम से की गई थी। समितियाँ सत्याग्रहियों का रिकॉर्ड संबंधित पुलिस अधीक्षक (SP) से जेल रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापित कराती थीं। योजना की शुरुआत में सरकार ने इस तरह 194 मातृभाषा सत्याग्रहियों की पहचान की थी।
  • हरियाणा का निवासी: लाभार्थी हरियाणा का निवासी होना चाहिए, क्योंकि यह हरियाणा सरकार की योजना है।
  • जीवित पति/पत्नी को भी लाभ: सत्याग्रही की मृत्यु के बाद यह मासिक पेंशन उनके जीवित पति या पत्नी को मिलती रहती है। यह पेंशन आजीवन (lifetime) प्रकृति की है — पहले सत्याग्रही को और उनके बाद उनके जीवनसाथी को।
  • दूसरे राज्य से पेंशन का नियम: अगर कोई सत्याग्रही किसी दूसरे राज्य की सरकार से भी किसी तरह की पेंशन या मानदेय पा रहा है, तो भी वह इस योजना का पात्र रहता है। लेकिन 2017 के नियम के अनुसार, अगर दूसरे राज्य से उसी उद्देश्य के लिए मिलने वाली पेंशन ₹10,000 प्रति माह से कम है, तो इस योजना की पेंशन में से वह राशि घटा दी जाती थी। ध्यान दें: यह ₹10,000 की सीमा 2017 के नियम की है — ₹20,000 की बढ़ोतरी के बाद यह सीमा बदली है या नहीं, यह सत्यापित स्रोतों से पुष्ट नहीं हो सका है। इसलिए अगर आप दूसरे राज्य से भी ऐसी पेंशन पा रहे हैं, तो आवेदन के समय यह जानकारी कार्यालय को जरूर दें और वहीं से सही गणना पूछें।

जेल रिकॉर्ड न मिलने पर क्या करें? (फरवरी 2022 का संशोधन)

कई सत्याग्रहियों के सामने एक दिक्कत आई थी — वे जेल गए थे, लेकिन जेल में उनका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। फरवरी 2022 में हरियाणा कैबिनेट ने योजना की पात्रता शर्तों में संशोधन करके इसका हल निकाला:

  • अगर कोई सत्याग्रही दावा करता है कि वह जेल गया था, लेकिन जेल रिकॉर्ड में उसका नाम नहीं मिलता, तो उसे एक सह-कैदी (co-prisoner) का प्रमाण-पत्र देना होगा, जिसमें लिखा हो कि वह उन्हीं तारीखों/महीनों में उनके साथ जेल में था।
  • शर्त यह है कि उन सह-कैदियों का जेल रिकॉर्ड उपलब्ध हो और FIR में आवेदक का नाम दर्ज हो।
  • नए आवेदकों की पेंशन का दावा उस तारीख से माना जाएगा, जिस तारीख से इस काम के लिए बनाई गई समिति ने सिफारिश की हो।

यह संशोधन उन परिवारों के लिए बहुत अहम है जिनके पास जेल का सीधा रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन FIR या सह-कैदी का प्रमाण मौजूद है।

इस योजना में क्या-क्या मिलता है?

  • ₹20,000 प्रति माह पेंशन: सत्याग्रही को या उनकी मृत्यु के बाद उनके जीवित पति/पत्नी को हर महीने ₹20,000 मिलते हैं।
  • आजीवन सम्मान: यह पेंशन जीवनभर के लिए है — पहले सत्याग्रही को, फिर उनके जीवनसाथी को।
  • कोई आय सीमा नहीं बताई गई: सत्यापित स्रोतों में इस योजना के लिए कोई आय सीमा या उम्र सीमा दर्ज नहीं है। यह आम सामाजिक सुरक्षा पेंशनों से अलग है — यहाँ आधार आंदोलन में भागीदारी और उसकी पहचान है, आय नहीं।
  • अन्य पेंशन योजनाओं से अलग: यह योजना वृद्धावस्था, विधवा या दिव्यांग पेंशन जैसी योजनाओं से अलग है। उन योजनाओं में आय और उम्र की शर्तें होती हैं, जबकि इस योजना में आंदोलन में भागीदारी ही मुख्य शर्त है।

हरियाणा की अन्य पेंशन योजनाओं के बारे में जानने के लिए ये लेख भी पढ़ें: दिव्यांग पेंशन योजना हरियाणा ₹3,200, लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता हरियाणा और मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना।

जरूरी दस्तावेज

इस योजना के दस्तावेज दो तरह के हैं — एक वे जो योजना की खास पहचान से जुड़े हैं और जिनका उल्लेख सरकारी घोषणाओं में है, और दूसरे वे सामान्य दस्तावेज जो हरियाणा की पेंशन सेवाओं में आमतौर पर माँगे जाते हैं। नीचे दी गई सूची में दोनों को अलग-अलग बताया गया है, ताकि कोई भ्रम न रहे।

योजना से जुड़े खास दस्तावेज (सत्यापित)

दस्तावेज किस काम आएगा
जेल रिकॉर्ड / जेल प्रमाण सत्याग्रही के जेल जाने का सबूत; जिला समिति SP के माध्यम से सत्यापित करती है
सह-कैदी का प्रमाण-पत्र अगर जेल रिकॉर्ड न मिले तो — सह-कैदी लिखकर दे कि आवेदक उन्हीं तारीखों में साथ जेल में था
FIR की प्रति जिसमें आवेदक का नाम हो सह-कैदी प्रमाण के साथ अनिवार्य शर्त (फरवरी 2022 संशोधन)
सत्याग्रही का मृत्यु प्रमाण-पत्र जब जीवित पति/पत्नी पेंशन के लिए आवेदन कर रहे हों

आमतौर पर माँगे जाने वाले सामान्य दस्तावेज (कार्यालय की अंतिम सूची ही मान्य होगी)

  • आधार कार्ड (पहचान के लिए)
  • हरियाणा निवास का प्रमाण (राशन कार्ड / वोटर कार्ड / निवास प्रमाण-पत्र)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • बैंक खाते का विवरण (पासबुक की फोटोकॉपी) — पेंशन इसी खाते में आएगी
  • परिवार पहचान पत्र (Family ID / PPP ID) — अगर उपलब्ध हो
  • पति/पत्नी के मामले में विवाह/संबंध का प्रमाण

ध्यान दें: इस योजना के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज-सूची सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। ऊपर दी गई सामान्य सूची हरियाणा की अन्य पेंशन सेवाओं के आधार पर दी गई है। आवेदन करने से पहले जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय या सरल पोर्टल पर दिख रही उस समय की दस्तावेज-सूची को ही अंतिम मानें। अधूरा आवेदन लौटाया जा सकता है, इसलिए सारे कागज पहले से तैयार रखना बेहतर है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें: अंत्योदय सरल पोर्टल

यह योजना अंत्योदय सरल पोर्टल की सेवा-सूची में जनसंपर्क (Public Relations) विभाग के तहत “Pension Scheme for Matribhasha Satyagrahi” के नाम से दर्ज है। इसलिए ऑनलाइन आवेदन सरल पोर्टल से किया जा सकता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. पोर्टल खोलें: अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर आधिकारिक पोर्टल saralharyana.gov.in खोलें। ध्यान रखें कि आप सही सरकारी वेबसाइट पर ही जाएँ — किसी एजेंट या फर्जी साइट पर अपनी जानकारी न डालें।
  2. रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करें: अगर आप पहली बार आ रहे हैं, तो “New User Register Here” पर क्लिक करके नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी से रजिस्ट्रेशन करें। मोबाइल पर आया OTP डालकर खाता सत्यापित करें। पहले से रजिस्टर्ड हैं, तो सीधे लॉगिन करें।
  3. सेवा खोजें: लॉगिन के बाद “Apply for Services” पर क्लिक करें, फिर “View All Available Services” खोलें। सर्च बार में “Pension Scheme for Matribhasha Satyagrahi” या “Matribhasha Satyagrahi” लिखकर खोजें।
  4. फॉर्म भरें: सेवा खुलने पर आवेदन फॉर्म में सत्याग्रही का नाम, पता, आंदोलन में भागीदारी का विवरण, जेल/सह-कैदी प्रमाण की जानकारी और बैंक खाते का विवरण भरें।
  5. दस्तावेज अपलोड करें: ऊपर बताई गई सूची के दस्तावेजों की साफ स्कैन कॉपी या फोटो अपलोड करें। धुंधली कॉपी अपलोड करने से आवेदन अटक सकता है।
  6. सबमिट करें और रसीद सँभालें: फॉर्म जमा करने के बाद आपको एक आवेदन संदर्भ संख्या (Application Reference Number) मिलेगी। इसे लिखकर या स्क्रीनशॉट लेकर सुरक्षित रखें — इसी से स्टेटस चेक होगा।

एक सावधानी: इस योजना के ऑनलाइन फॉर्म का चरण-दर-चरण लाइव स्वरूप सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सका है, क्योंकि यह एक छोटे और बंद लाभार्थी-समूह वाली योजना है। पोर्टल पर सेवा का नाम और विभाग सत्यापित है, लेकिन फॉर्म के अंदर के खानों की सूची समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए पोर्टल पर दिख रहा फॉर्म ही अंतिम माना जाए। अगर ऑनलाइन फॉर्म न खुले या सेवा न दिखे, तो नीचे दिया गया ऑफलाइन तरीका अपनाएँ।

ऑफलाइन आवेदन कैसे करें

ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत हो, या परिवार के बुजुर्ग सदस्य खुद पोर्टल न चला पाते हों, तो ऑफलाइन आवेदन भी किया जा सकता है:

  1. कार्यालय जाएँ: अपने जिले के जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (District Information & Public Relations Office) या उपायुक्त (DC) कार्यालय जाएँ। सत्याग्रहियों की पहचान के लिए बनी जिला समिति की अध्यक्षता उपायुक्त ही करते हैं, इसलिए यही कार्यालय इस योजना का सही संपर्क बिंदु है।
  2. फॉर्म लें और भरें: कार्यालय से योजना का आवेदन फॉर्म लें। उसमें सत्याग्रही का पूरा विवरण, आंदोलन में भागीदारी और जेल/सह-कैदी प्रमाण की जानकारी भरें।
  3. दस्तावेज जोड़ें: ऊपर बताई गई सूची के सभी दस्तावेजों की स्व-सत्यापित (self-attested) फोटोकॉपी फॉर्म के साथ लगाएँ। मूल दस्तावेज सत्यापन के लिए साथ ले जाएँ, लेकिन कार्यालय में सिर्फ फोटोकॉपी ही जमा करें।
  4. जमा करें और रसीद लें: भरा हुआ फॉर्म कार्यालय में जमा करें और जमा करने की रसीद या पावती जरूर लें। इस पर आवेदन संख्या या प्राप्ति की तारीख दर्ज होनी चाहिए।
  5. CSC/अटल सेवा केंद्र से मदद: अगर आप खुद फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं, तो नजदीकी CSC (Common Service Centre) या अटल सेवा केंद्र पर जाकर भी सरल पोर्टल के माध्यम से आवेदन करवाया जा सकता है। वहाँ सिर्फ जरूरी दस्तावेज लेकर जाएँ और आवेदन की रसीद लेना न भूलें।

आवेदन के बाद क्या होता है?

इस योजना में आवेदन सीधे मंजूर नहीं होता — उसकी जाँच जिला समिति करती है। प्रक्रिया इस प्रकार समझी जा सकती है:

  1. जाँच और सत्यापन: जिला समिति आवेदक के दावे की जाँच करती है। जेल रिकॉर्ड को संबंधित पुलिस अधीक्षक के माध्यम से सत्यापित किया जाता है। अगर जेल रिकॉर्ड नहीं है, तो सह-कैदी के प्रमाण-पत्र और FIR में नाम की जाँच की जाती है।
  2. समिति की सिफारिश: सत्यापन के बाद समिति अपनी सिफारिश देती है। नए आवेदकों का पेंशन दावा समिति की सिफारिश की तारीख से माना जाता है।
  3. मंजूरी और पेंशन शुरू: सिफारिश के बाद पेंशन मंजूर होती है और लाभार्थी को हर महीने ₹20,000 मिलने लगते हैं।

समय-सीमा के बारे में साफ बात: इस योजना के लिए कोई निश्चित समय-सीमा (जैसे 30 दिन या 60 दिन) सत्यापित स्रोतों में दर्ज नहीं मिली है। इसलिए यहाँ कोई निश्चित दिन नहीं बताए जा रहे हैं। आवेदन के बाद जिला कार्यालय से समय-समय पर अपने आवेदन की स्थिति पूछते रहें।

आवेदन की फीस कितनी है?

सत्यापित स्रोतों में इस योजना के आवेदन के लिए कोई शुल्क दर्ज नहीं है। अंत्योदय सरल पोर्टल को “फेसलेस, पेपरलेस और कैशलेस” सेवा के रूप में बताया गया है। अगर कोई व्यक्ति पेंशन दिलाने के नाम पर आपसे पैसे माँगे, तो उसे पैसे न दें और तुरंत जिला कार्यालय या सरल हेल्पलाइन पर शिकायत करें।

स्टेटस कैसे चेक करें और पैसे कैसे मिलेंगे?

  • स्टेटस चेक: सरल पोर्टल पर लॉगिन करके या पोर्टल के ट्रैक-एप्लिकेशन विकल्प में अपना आवेदन संदर्भ संख्या डालकर आवेदन की स्थिति जानी जा सकती है। सरल पोर्टल पर बिना लॉगिन के भी संदर्भ संख्या से स्टेटस देखने की सुविधा बताई गई है। ऑफलाइन आवेदन किया है, तो जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में जाकर या फोन पर अपनी रसीद संख्या बताकर स्थिति पूछी जा सकती है।
  • पैसे कैसे मिलेंगे: योजना की शुरुआत में लाभार्थियों को चेक के माध्यम से पेंशन दी गई थी। इस योजना के मौजूदा भुगतान माध्यम (DBT या बैंक खाता) का अलग से उल्लेख सत्यापित स्रोतों में नहीं मिला है। हरियाणा की अन्य पेंशन योजनाओं में राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में DBT के माध्यम से जाती है, इसलिए आवेदन में अपना बैंक खाता विवरण सही-सही भरें और यह सुनिश्चित करें कि खाता आधार से जुड़ा हो। भुगतान माध्यम की अंतिम जानकारी के लिए जिला कार्यालय से पुष्टि करें।

हेल्पलाइन और संपर्क

  • अंत्योदय सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400, ईमेल: [email protected] — यह सरल पोर्टल की सामान्य हेल्पलाइन है, जो सरल की आधिकारिक योजना-सूची में दर्ज है। पोर्टल या आवेदन से जुड़ी दिक्कत पर इसी पर संपर्क करें।
  • जिला कार्यालय: अपने जिले के जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय या उपायुक्त कार्यालय — योजना से जुड़े दावे और सत्यापन का काम यहीं से होता है।
  • ध्यान दें: समाज कल्याण विभाग की हेल्पलाइन इस योजना के लिए सही संपर्क नहीं है, क्योंकि यह योजना सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की है। गलत विभाग में संपर्क करने से समय बर्बाद होगा।

आवेदन में ये गलतियाँ न करें

  • ₹15,000 वाली पुरानी जानकारी पर भरोसा न करें: मौजूदा राशि ₹20,000 है। किसी पुराने फॉर्म या लेख के आधार पर कम राशि की उम्मीद न रखें।
  • गलत विभाग में आवेदन न करें: यह योजना समाज कल्याण विभाग की नहीं है। सरल पोर्टल पर जनसंपर्क (Public Relations) विभाग की सेवा खोजें।
  • जेल रिकॉर्ड या सह-कैदी प्रमाण के बिना आवेदन न करें: इस योजना में आंदोलन में भागीदारी का सबूत ही सबसे अहम है। बिना सबूत के दावा समिति से मंजूर नहीं होगा।
  • किसी एजेंट को पैसे न दें: आवेदन निशुल्क है। पैसे माँगने वाला व्यक्ति धोखा दे रहा है।
  • संदर्भ संख्या सँभालकर रखें: ऑनलाइन या ऑफलाइन — आवेदन की रसीद और संदर्भ संख्या के बिना स्टेटस पूछना मुश्किल होगा।
  • दूसरे राज्य की पेंशन छिपाएँ नहीं: अगर आप दूसरे राज्य से भी उसी उद्देश्य की पेंशन पा रहे हैं, तो यह जानकारी आवेदन में साफ लिखें। गलत जानकारी देने पर पेंशन रुक सकती है या वसूली हो सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन हरियाणा में कितनी मिलती है?

अब ₹20,000 प्रति माह मिलती है। यह राशि 1 जुलाई 2024 से लागू है और 28 दिसंबर 2024 को हरियाणा कैबिनेट ने इसे औपचारिक मंजूरी दी थी। इससे पहले यह राशि ₹15,000 थी और उससे पहले ₹10,000 थी।

मातृभाषा सत्याग्रही किसे कहते हैं?

1957 में हिंदी के सम्मान, प्रचार और लागू करने के लिए चले आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को मातृभाषा सत्याग्रही कहा जाता है। यह आंदोलन पंजाब आर्य प्रतिनिधि सभा के नेतृत्व में 30 अप्रैल 1957 से 27 दिसंबर 1957 तक चला था।

क्या सत्याग्रही की मृत्यु के बाद पेंशन बंद हो जाती है?

नहीं। सत्याग्रही की मृत्यु के बाद यह मासिक पेंशन उनके जीवित पति या पत्नी को मिलती रहती है। यह पेंशन आजीवन प्रकृति की है।

इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कहाँ करें?

अंत्योदय सरल पोर्टल saralharyana.gov.in पर। वहाँ जनसंपर्क (Public Relations) विभाग के तहत “Pension Scheme for Matribhasha Satyagrahi” सेवा खोजकर आवेदन किया जा सकता है। ऑफलाइन आवेदन जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय या उपायुक्त कार्यालय में किया जा सकता है।

जेल का रिकॉर्ड न मिले तो क्या आवेदन किया जा सकता है?

हाँ। फरवरी 2022 के संशोधन के अनुसार, अगर जेल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, तो एक सह-कैदी का प्रमाण-पत्र दिया जा सकता है, जिसमें लिखा हो कि आवेदक उन्हीं तारीखों में उनके साथ जेल में था। शर्त यह है कि सह-कैदियों का जेल रिकॉर्ड उपलब्ध हो और FIR में आवेदक का नाम दर्ज हो।

क्या इस योजना में आय सीमा या उम्र सीमा है?

सत्यापित स्रोतों में इस योजना के लिए कोई आय सीमा या उम्र सीमा दर्ज नहीं है। यहाँ मुख्य शर्त 1957 के हिंदी आंदोलन में भागीदारी और जिला समिति से उसकी पहचान है।

इस योजना के लाभार्थी कितने हैं?

योजना की शुरुआत में 194 मातृभाषा सत्याग्रहियों की पहचान की गई थी। दिसंबर 2024 में कैबिनेट के फैसले के समय 161 सत्याग्रही या उनके जीवित पति/पत्नी पेंशन पा रहे थे।

आवेदन की फीस कितनी है और पेंशन कब से मिलेगी?

सत्यापित स्रोतों में आवेदन के लिए कोई शुल्क दर्ज नहीं है। नए आवेदकों का दावा समिति की सिफारिश की तारीख से माना जाता है। मंजूरी की कोई निश्चित समय-सीमा सत्यापित स्रोतों में दर्ज नहीं मिली है, इसलिए आवेदन के बाद जिला कार्यालय से स्थिति पूछते रहें।

आधिकारिक स्रोत

इस लेख की जानकारी इन स्रोतों पर आधारित है। आवेदन करने से पहले इन पर ताजा जानकारी जरूर देख लें:

नोट: इस योजना का कोई अलग आधिकारिक वेबपेज या समर्पित ऑनलाइन फॉर्म सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सका है। इसलिए ऊपर दिए गए सरल पोर्टल और जिला कार्यालय ही आवेदन के सही माध्यम हैं। कार्यालय या पोर्टल पर दिख रही उस समय की शर्तें और दस्तावेज-सूची ही अंतिम मानी जाएँगी।

निष्कर्ष

मातृभाषा सत्याग्रही पेंशन योजना हरियाणा सरकार का उन लोगों के प्रति सम्मान है, जिन्होंने 1957 में अपनी मातृभाषा हिंदी के लिए जेल जाना मंजूर किया था। ₹20,000 प्रति माह की यह पेंशन सत्याग्रही को और उनके बाद उनके जीवनसाथी को आजीवन मिलती है। अगर आपके परिवार में कोई 1957 के हिंदी आंदोलन का सत्याग्रही है — या उसकी विधवा/विधुर जीवनसाथी है — तो जेल रिकॉर्ड, सह-कैदी प्रमाण-पत्र या FIR जैसे सबूत तैयार करके सरल पोर्टल या जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में आवेदन करें। और याद रखें: सही राशि ₹20,000 है, ₹15,000 नहीं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *