मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना क्या है?
मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना हरियाणा सरकार की वह योजना है, जिसके तहत खेती का काम करते समय हुई दुर्घटना में किसान, खेतिहर मजदूर या मंडी यार्ड मजदूर की मृत्यु या अंग-हानि होने पर उसके परिवार को ₹37,500 से ₹5 लाख तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका आधिकारिक नाम "मुख्य मंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013" है और यह 1 जनवरी 2014 से लागू है। इस तारीख के बाद हुई दुर्घटनाएँ इस योजना के तहत आती हैं।
यह योजना हरियाणा कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1961 की धारा 28 के खंड (xvii) के अंतर्गत शुरू की गई है और इसे हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (Haryana State Agricultural Marketing Board — HSAMB) अपनी मार्केट कमेटियों के माध्यम से चलाता है।
सबसे जरूरी बात — यह कोई बीमा पॉलिसी या पहले से रजिस्ट्रेशन कराने वाली योजना नहीं है। इसमें पहले से नामांकन नहीं कराना होता; दुर्घटना होने के बाद पीड़ित या उसके परिवार को दावा (claim) करना होता है। दावा संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव को दिया जाता है, जाँच के बाद सहायता राशि बैंक खाते में भेजी जाती है।
ध्यान दें — यह योजना फसल बीमा (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना — PMFBY) से बिल्कुल अलग है। PMFBY फसल के नुकसान की भरपाई करती है, जबकि यह योजना खेती के दौरान हुई दुर्घटना में किसान या मजदूर की मृत्यु या अंग-हानि पर परिवार को सहायता देती है। साथ ही, मध्य प्रदेश में इसी तरह के नाम की एक अलग योजना है (वहाँ ₹2 लाख तक का कवर) — यह गाइड सिर्फ हरियाणा की योजना के बारे में है, उसे इससे न मिलाएँ।
योजना एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | मुख्य मंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013 |
| लागू | 1 जनवरी 2014 से; हरियाणा राज्य में |
| विभाग/नोडल संस्था | हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB); दावे मार्केट कमेटी के माध्यम से |
| लाभ | दुर्घटना की गंभीरता के अनुसार ₹37,500 से ₹5,00,000 तक |
| मृत्यु पर सहायता | ₹5,00,000 |
| किसे लाभ | किसान, खेतिहर मजदूर और मंडी यार्ड मजदूर (पशुपालन, मुर्गीपालन व डेयरी कार्य सहित) |
| आयु सीमा | जून 2024 से कोई आयु सीमा नहीं (पहले 10–65 वर्ष थी) |
| दावा कहाँ करें | संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव के पास; अपील HSAMB के सचिव से |
| आधिकारिक स्रोत | hsamb.org.in (हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड) |
इस योजना का लाभ क्या-क्या है?
दुर्घटना की गंभीरता के अनुसार सहायता राशि इस प्रकार है:
| दुर्घटना का प्रकार | सहायता राशि |
|---|---|
| मृत्यु होने पर | ₹5,00,000 |
| रीढ़ की हड्डी टूट जाने या अन्य किसी वजह से पूर्ण रूप से अपंग हो जाने पर | ₹2,50,000 |
| शरीर के कोई दो अंग कट जाने या गहरी चोट आने पर | ₹1,87,500 |
| शरीर का कोई एक अंग कट जाने या गहरी चोट आने पर | ₹1,25,000 |
| सारी उंगलियाँ कट जाने पर | ₹75,000 |
| आधी उंगली कट जाने पर | ₹37,500 |
कौन-कौन सी दुर्घटनाएँ इस योजना में आती हैं? योजना की अधिसूचना के अनुसार, हरियाणा में खेतों, गाँवों और मार्केट यार्ड में कृषि कार्य के दौरान या ऐसे स्थानों पर जाते-आते समय हुई दुर्घटना कवर होती है, जिनमें ये शामिल हैं:
- कृषि मशीनरी, औजार, टूल्स या यंत्र पर काम करते समय दुर्घटना (थ्रेशर, चैफ कटर, गन्ना कोल्हू आदि)
- कुआँ खोदते, नलकूप लगाते या चलाते समय दुर्घटना; कुएँ या नलकूप में जहरीली गैस के कारण मृत्यु या अंग-हानि
- कृषि कार्य करते समय बिजली का करंट लगना
- कृषि उपज ले जाते समय पशु, पशु-ठेला, ट्रक या अन्य वाहन से दुर्घटना
- कृषि कार्य के दौरान कीटनाशक/खरपतवार-नाशक दवाई के प्रयोग, बिजली करंट या आग से दुर्घटना
- मार्केट यार्ड में कृषि उपज उतारते, शिफ्ट करते या तोलते समय दुर्घटना
- कृषि कार्य के दौरान साँप या अन्य जहरीले जीव के काटने से मृत्यु
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 16 मार्च 2026 के एक फैसले (CWP No. 22412-2025) में योजना की उदार व्याख्या करते हुए कहा है कि योजना का मकसद किसी भी दुर्घटना में किसान की मृत्यु पर परिवार को सहायता देना है — उस मामले में फसल बचाने के लिए नहर का मोगा बंद करते समय डूबकर हुई मृत्यु पर भी ₹5 लाख की सहायता का आदेश दिया गया। इसलिए अगर दुर्घटना कृषि कार्य से जुड़ी है, तो दावा खारिज होने पर अपील का रास्ता खुला है।
पात्रता — कौन दावा कर सकता है?
- हरियाणा का निवासी: पीड़ित किसान, खेतिहर मजदूर या मंडी यार्ड मजदूर हरियाणा का निवासी होना चाहिए।
- कृषि कार्य से जुड़ाव: दुर्घटना कृषि कार्य, कृषि धंधे (पशुपालन, मुर्गीपालन, डेयरी फार्मिंग सहित) या मार्केट यार्ड में कृषि कार्य के दौरान हुई हो।
- आयु सीमा नहीं: जून 2024 में सरकार ने आयु सीमा हटा दी है — अब 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति भी पात्र हैं। पहले आयु 10 से 65 वर्ष के बीच होना जरूरी था।
- मृत्यु होने पर वारिस दावा करेगा: मृत्यु की स्थिति में मृतक के आश्रित/कानूनी वारिस दावा करते हैं।
- दुर्घटना योजना में सूचीबद्ध प्रकार की हो: दुर्घटना ऊपर बताए गए कवर किए गए हादसों में से किसी एक प्रकार की होनी चाहिए।
जरूरी दस्तावेज
दावा करते समय आमतौर पर ये दस्तावेज माँगे जाते हैं — मार्केट कमेटी का लाइव फॉर्म और वहाँ माँगी गई सूची ही अंतिम है, फॉर्म में जो माँगा जाए वही जमा करें:
| क्रम | दस्तावेज | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1 | हरियाणा निवास का प्रमाण | पीड़ित के हरियाणा निवासी होने का प्रमाण |
| 2 | परिवार पहचान पत्र (PPP) | परिवार की पहचान के लिए |
| 3 | आधार कार्ड / वोटर आईडी / पैन कार्ड / ड्राइविंग लाइसेंस | पहचान प्रमाण (इनमें से कोई एक) |
| 4 | आवेदक की फोटो | दावा फॉर्म के साथ |
| 5 | बैंक खाता विवरण | सहायता राशि DBT के लिए; पासबुक की प्रति |
| 6 | खेतिहर मजदूर के लिए भूमि मालिक का हलफनामा | मजदूर होने का प्रमाण |
| 7 | विकलांगता की स्थिति में विकलांग प्रमाण-पत्र, OPD पर्ची और मेडिकल प्रमाण-पत्र | सरकारी अस्पताल/अधिकृत चिकित्सक से |
| 8 | मृत्यु की स्थिति में FIR की प्रति | दुर्घटना की FIR |
| 9 | मृत्यु की स्थिति में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट | अनिवार्य |
| 10 | मृत्यु की स्थिति में मृत्यु प्रमाण-पत्र | अनिवार्य |
दावा कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप
यह योजना मार्केट कमेटी के माध्यम से चलती है — दावा संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव को दिया जाता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:
चरण 1: दुर्घटना के बाद सबसे पहले पुलिस में FIR दर्ज कराएँ (मृत्यु के मामले में) और अस्पताल से इलाज/पोस्टमॉर्टम के कागजात संभालकर रखें। FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र दावे के सबसे अहम दस्तावेज हैं।
चरण 2: अपने क्षेत्र की मार्केट कमेटी के कार्यालय जाएँ और "मुख्यमंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना" का दावा फॉर्म लें। फॉर्म वहीं से मुफ्त में मिलता है।
चरण 3: फॉर्म में पीड़ित की पूरी जानकारी भरें — नाम, पता, PPP नंबर, दुर्घटना की तारीख और जगह, दुर्घटना का विवरण, बैंक खाते की जानकारी और वारिस का विवरण (मृत्यु के मामले में)।
चरण 4: ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज फॉर्म के साथ लगाएँ — FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण-पत्र (मृत्यु के मामले में) या विकलांग प्रमाण-पत्र व मेडिकल रिपोर्ट (अंग-हानि के मामले में), पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण और बैंक विवरण। दस्तावेज साफ और पढ़ने योग्य होने चाहिए।
चरण 5: भरा हुआ फॉर्म सभी दस्तावेजों के साथ उसी मार्केट कमेटी के कार्यालय में जमा करें और जमा करने की रसीद/पावती संभालकर रखें।
चरण 6: मार्केट कमेटी के सचिव आपके दावे और दस्तावेजों की जाँच करेंगे। जाँच में दुर्घटना की पुष्टि होने पर दावा स्वीकृत किया जाता है।
चरण 7: स्वीकृति मिलने पर सहायता राशि सीधे लाभार्थी/वारिस के बैंक खाते में भेजी जाती है। रेवाड़ी जिले के कोसली में 29 अक्टूबर 2026 को इसी योजना के तहत पीड़ितों को ₹8.50 लाख के सहायता चेक वितरित किए गए थे — जिसमें एक मृतक की पत्नी को ₹5 लाख का चेक मिला था।
अगर दावा खारिज हो जाए तो: मार्केट कमेटी के सचिव के फैसले के खिलाफ हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सचिव के पास अपील की जा सकती है। उच्च न्यायालय के मार्च 2026 के फैसले में भी यही अपील का रास्ता अपनाया गया था।
महत्वपूर्ण: सरल (SARAL) पोर्टल पर इस योजना का ऑनलाइन दावा फॉर्म उपलब्ध होने का दावा कुछ गैर-सरकारी वेबसाइटों पर किया गया है, लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें। इस गाइड की जाँच में sewa.haryana.gov.in की सेवा सूची में इस योजना का कोई पेज नहीं मिला। इसलिए दावा करने से पहले अपनी मार्केट कमेटी या HSAMB कार्यालय से ताज़ा प्रक्रिया ज़रूर पूछ लें — मार्केट कमेटी में दिया गया दावा ही पक्का रास्ता है।
ऑफलाइन दावा का विकल्प
ऑनलाइन फॉर्म की पुष्टि न होने के कारण इस योजना का दावा ऑफलाइन ही मुख्य रास्ता है — अपने क्षेत्र की मार्केट कमेटी के कार्यालय में जाकर फॉर्म लें और वहीं जमा करें। अगर फॉर्म भरने में दिक्कत हो, तो नज़दीकी अंत्योदय सरल केंद्र (SARAL Kendra) या CSC/अटल सेवा केंद्र पर मदद ली जा सकती है — वहाँ ऑपरेटर फॉर्म भरने और दस्तावेज तैयार करने में मदद कर सकता है।
दावा शुल्क और समय-सीमा
शुल्क: दावा फॉर्म मार्केट कमेटी से मुफ्त में मिलता है। कुछ गैर-सरकारी साइटों पर CSC/अटल सेवा केंद्र से आवेदन पर ₹30 शुल्क का उल्लेख है, लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें।
समय-सीमा: दुर्घटना के बाद दावा कितने समय के अंदर करना है, इसकी कोई समय-सीमा इस गाइड की जाँच में आधिकारिक स्रोत से सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें। इसलिए दुर्घटना के बाद जितनी जल्दी हो सके, दस्तावेज तैयार करके दावा कर दें — देर करने से जाँच में दिक्कत आ सकती है। दावे के निपटारे की समय-सीमा भी आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें।
दावे की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?
- दावा जमा करने के बाद मिली रसीद/पावती संभालकर रखें — उसी के आधार पर मार्केट कमेटी कार्यालय से दावे की स्थिति पूछी जा सकती है।
- दावे की स्थिति जानने का सबसे पक्का तरीका संबंधित मार्केट कमेटी के सचिव के कार्यालय से संपर्क करना है।
- सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400 (सुबह 7 बजे – रात 8 बजे, सोमवार–शनिवार, सरकारी छुट्टियों को छोड़कर); ईमेल: [email protected]।
- हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड टोल-फ्री नंबर 1800-180-2060 कुछ साइटों पर दर्ज है, लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें।
सहायता राशि कैसे मिलेगी?
स्वीकृति के बाद सहायता राशि सीधे लाभार्थी या वारिस के बैंक खाते में भेजी जाती है (DBT)। इसलिए बैंक खाते की जानकारी सही भरें — खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय होना चाहिए। अगर बैंक खाता बदलता है, तो मार्केट कमेटी को सूचित करके जानकारी अपडेट कराएँ, वरना राशि रुक सकती है।
यह योजना फसल बीमा (PMFBY) से अलग है
कई लोग इस योजना को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से मिला देते हैं — दोनों अलग हैं। PMFBY फसल के नुकसान (सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि आदि) की भरपाई करती है, जबकि यह योजना खेती के दौरान हुई दुर्घटना में किसान या मजदूर की मृत्यु या अंग-हानि पर परिवार को सहायता देती है। दोनों के दावे अलग-अलग जगह होते हैं — PMFBY का दावा बीमा कंपनी/कृषि विभाग से होता है, इस योजना का दावा मार्केट कमेटी से।
ध्यान देने योग्य बातें
- पहले से रजिस्ट्रेशन नहीं: यह योजना दुर्घटना के बाद दावे वाली है — पहले से कोई नामांकन या प्रीमियम नहीं देना होता।
- आयु सीमा हट चुकी है: जून 2024 से 10 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी पात्र हैं — पुरानी जानकारी पर भरोसा न करें।
- राशि बढ़ाने की माँग चल रही है: भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने सितंबर 2026 में सरकार को ज्ञापन देकर मृत्यु पर सहायता ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करने की माँग की है — अभी तक लागू राशि ₹5 लाख ही है; कोई बढ़ोतरी घोषित नहीं हुई है।
- FIR और पोस्टमॉर्टम संभालकर रखें: मृत्यु के दावे में FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र के बिना दावा आगे नहीं बढ़ता।
- फर्ज़ी वेबसाइटों से सावधान: दावा केवल अपनी मार्केट कमेटी या आधिकारिक पोर्टल से ही करें; कोई भी व्यक्ति पैसे माँगे तो विभाग को सूचित करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. मुख्यमंत्री किसान जीवन सुरक्षा योजना में मृत्यु पर कितनी सहायता मिलती है?
मृत्यु होने पर मृतक के परिवार को ₹5,00,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है।
2. अंग-हानि होने पर कितनी राशि मिलती है?
रीढ़ की हड्डी टूटने या पूर्ण अपंगता पर ₹2,50,000; दो अंग कटने पर ₹1,87,500; एक अंग कटने पर ₹1,25,000; सारी उंगलियाँ कटने पर ₹75,000 और आधी उंगली कटने पर ₹37,500 मिलते हैं।
3. कौन इस योजना का लाभ ले सकता है?
हरियाणा के किसान, खेतिहर मजदूर और मंडी यार्ड मजदूर (पशुपालन, मुर्गीपालन व डेयरी कार्य सहित), जिनकी दुर्घटना कृषि कार्य के दौरान हुई हो।
4. क्या इस योजना में आयु सीमा है?
नहीं — जून 2024 में सरकार ने आयु सीमा हटा दी है। अब 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे और 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति भी पात्र हैं। पहले आयु 10 से 65 वर्ष के बीच होना जरूरी था।
5. दावा कहाँ और कैसे करें?
दावा अपने क्षेत्र की मार्केट कमेटी के सचिव को दिया जाता है — वहाँ से फॉर्म लेकर, दस्तावेज लगाकर जमा करें। SARAL पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म की उपलब्धता सत्यापित नहीं हुई है, इसलिए मार्केट कमेटी से ताज़ा प्रक्रिया पूछ लें।
6. दावा करने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
निवास प्रमाण, PPP, पहचान प्रमाण, बैंक विवरण, खेतिहर मजदूर के लिए भूमि मालिक का हलफनामा; मृत्यु पर FIR, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण-पत्र; अंग-हानि पर विकलांग प्रमाण-पत्र और मेडिकल रिपोर्ट।
7. दावा खारिज हो जाए तो क्या करें?
मार्केट कमेटी के सचिव के फैसले के खिलाफ हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) के सचिव के पास अपील की जा सकती है।
8. क्या यह योजना 2026 में चल रही है?
हाँ — 29 अक्टूबर 2026 को रेवाड़ी के कोसली में इसी योजना के तहत पीड़ितों को ₹8.50 लाख के सहायता चेक बाँटे गए थे, और मार्च 2026 में उच्च न्यायालय ने भी इस योजना के तहत ₹5 लाख का भुगतान का आदेश दिया था।
9. क्या यह योजना फसल बीमा (PMFBY) जैसी है?
नहीं — PMFBY फसल के नुकसान की भरपाई करती है; यह योजना खेती के दौरान दुर्घटना में मृत्यु या अंग-हानि पर परिवार को सहायता देती है।
10. दावा करने की कोई फीस है?
दावा फॉर्म मार्केट कमेटी से मुफ्त में मिलता है। CSC/अटल सेवा केंद्र पर ₹30 शुल्क का उल्लेख कुछ साइटों पर है, लेकिन यह सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) — आधिकारिक वेबसाइट: hsamb.org.in
- अंत्योदय सरल पोर्टल (सामान्य जानकारी): saralharyana.gov.in
- योजना का नाम: "मुख्य मंत्री किसान एवं खेतिहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना, 2013" — 1 जनवरी 2014 से लागू; हरियाणा कृषि उपज मण्डी अधिनियम, 1961 की धारा 28(xvii) के अंतर्गत
- आयु सीमा हटाने का फैसला: जून 2024, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक (PTI/इकोनॉमिक टाइम्स, 6 जून 2024)
- उच्च न्यायालय का फैसला: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, CWP No. 22412-2025, 16 मार्च 2026 — ₹5 लाख भुगतान का आदेश
- सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400; ईमेल: [email protected]
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी योजना की अधिसूचना (2013), पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के 16 मार्च 2026 के फैसले, जून 2024 की सरकारी घोषणा और अक्टूबर 2026 की खबरों के आधार पर तैयार की गई है। SARAL पोर्टल पर ऑनलाइन दावा फॉर्म, CSC शुल्क (₹30), दावे की समय-सीमा और HSAMB टोल-फ्री नंबर इस गाइड में आधिकारिक स्रोत से सत्यापित नहीं हुए हैं — दावा करने से पहले अपनी मार्केट कमेटी या HSAMB कार्यालय से ताज़ा प्रक्रिया ज़रूर पूछ लें; मार्केट कमेटी का लाइव फॉर्म और वहाँ के निर्देश ही अंतिम माने जाएँगे।

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