शनिवार, 7 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क  |  हिन्दी English
किसान

हरियाणा बागवानी विकास योजना 2026: बाग पर ₹1.4 लाख/एकड़ तक अनुदान

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा बागवानी विकास योजना 2026: बाग पर ₹1.4 लाख/एकड़ तक अनुदान
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 8:49 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: किसान
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा बागवानी विकास योजना क्या है?

गेहूँ-धान के चक्कर से बाहर निकलकर फल, सब्जी, मसाला, फूल और सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसानों के लिए हरियाणा बागवानी विभाग बागवानी फसलों की खेती पर प्रति एकड़ अनुदान देता है। सितंबर 2026 के आखिर में विभाग ने ‘Subsidy Provision for Cultivation of Horticulture Crops’ के तहत फल, सब्जी, मसाला, फूल और सुगंधित पौधों की खेती पर प्रति एकड़ सब्सिडी की घोषणा की है। इसी अनुदान व्यवस्था को आम बोलचाल में बागवानी विकास योजना कहा जाता है।

एक बात शुरुआत में ही साफ कर दें, क्योंकि इसी नाम को लेकर सबसे ज़्यादा भ्रम है — विभाग की आधिकारिक योजना सूची में ‘मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना’ नाम की कोई अलग योजना दर्ज नहीं है। विभाग की सूची में बागवानी विकास के लिए ये योजनाएँ हैं: एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH), एकीकृत बागवानी विकास योजना, भावांतर भरपाई योजना और मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना। इस गाइड में दिया गया अनुदान बागवानी फसलों की खेती पर मिलने वाली सब्सिडी (एकीकृत बागवानी विकास) है, जिसके लिए आवेदन बागवानी विभाग के Hortnet पोर्टल पर होता है। आवेदन करने से पहले Hortnet पर योजना का ताज़ा नाम और प्रति एकड़ दर ज़रूर देख लें — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

यह अनुदान बीमा नहीं है, बल्कि खेती की लागत पर सीधी मदद (grant) है — पैसा वापस नहीं करना होता। राशि DBT के माध्यम से सीधे किसान के सत्यापित बैंक खाते में आती है।

यह योजना बागवानी बीमा योजना से कैसे अलग है?

दोनों योजनाएँ बागवानी विभाग की ही हैं और दोनों के नाम मिलते-जुलते हैं, इसलिए किसान अक्सर इन्हें एक ही समझ लेते हैं। अंतर समझना ज़रूरी है, क्योंकि दोनों के लिए आवेदन अलग-अलग पोर्टल पर होता है:

अंतर बागवानी विकास (अनुदान) बागवानी बीमा (MBBY)
किस बात पर पैसा फसल लगाने/उगाने की लागत पर अनुदान फसल खराब होने पर मुआवज़ा (बीमा)
किसान को क्या देना होता है कुछ नहीं — यह अनुदान है प्रीमियम: सब्जी-मसाला ₹750/एकड़, फल ₹1,000/एकड़
अधिकतम लाभ फल बाग पर ₹1,40,000/एकड़ तक सब्जी-मसाला ₹30,000/एकड़, फल ₹40,000/एकड़ तक
फसलें फल, सब्जी, मसाला, फूल, सुगंधित पौधे 46 फल, सब्जी और मसाला फसलें
आवेदन कहाँ Hortnet पोर्टल (hortnet.hortharyana.gov.in) + मेरी फसल मेरा ब्योरा mbby.hortharyana.gov.in + मेरी फसल मेरा ब्योरा
पैसा कब मिलता है खेत सत्यापन के बाद फसल नुकसान के सर्वे के बाद

सीधे शब्दों में — विकास योजना फसल लगाने के लिए पैसा देती है, बीमा योजना फसल खराब होने पर पैसा देती है। समझदार किसान दोनों का लाभ लेता है: पहले अनुदान से बाग लगाता है, फिर उसी फसल का बीमा करवाता है। बीमा योजना की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना — हरियाणा।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम बागवानी फसलों की खेती पर सब्सिडी (एकीकृत बागवानी विकास)
सामान्य नाम हरियाणा बागवानी विकास योजना / Haryana Horticulture Subsidy Yojana
विभाग बागवानी विभाग, हरियाणा
लाभ फल बाग पर ₹24,500–₹1,40,000/एकड़; सब्जी ₹15,000/एकड़ (SC ₹25,500); मसाला ₹15,000–₹30,000; फूल ₹8,000–₹40,000; सुगंधित पौधे ₹8,000/एकड़
अधिकतम क्षेत्र 5 एकड़ तक (सब्जी में SC किसान के लिए 1 एकड़)
भुगतान DBT — सीधे बैंक खाते में, वापस नहीं करना
आवेदन ऑनलाइन — Hortnet पोर्टल + मेरी फसल मेरा ब्योरा
अंतिम तिथि कोई आधिकारिक अंतिम तिथि सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है
आधिकारिक पोर्टल hortharyana.gov.in, hortnet.hortharyana.gov.in, fasal.haryana.gov.in

कितना अनुदान मिलेगा? — फसलवार दरें

विभाग ने सितंबर 2026 की घोषणा में पाँच श्रेणियों के लिए प्रति एकड़ स्लैब तय किए हैं। ध्यान दें — ये दरें विभागीय घोषणा पर आधारित हैं; आवेदन से पहले Hortnet पर ताज़ा दर ज़रूर देख लें:

फसल श्रेणी अनुदान (प्रति एकड़) अधिकतम क्षेत्र
नया फलदार बाग (orchard) ₹24,500 से ₹1,40,000 (फल के हिसाब से स्लैब) 5 एकड़ तक
सब्जी (एकीकृत मॉडल पर) ₹15,000 (सामान्य); ₹25,500 (SC किसान) 5 एकड़ (SC: 1 एकड़)
मसाला फसल ₹15,000 से ₹30,000 5 एकड़ तक
फूल (फ्लोरीकल्चर) ₹8,000 से ₹40,000 5 एकड़ तक
सुगंधित पौधे ₹8,000 5 एकड़ तक

फल के बाग पर सबसे बड़ी रकम इसलिए है, क्योंकि यह बाग लगाने (establishment) — पौध, गड्ढे, शुरुआती खाद-पानी — पर मिलने वाली सब्सिडी है। 5 एकड़ पर पूरा बाग लगाने पर फल की किस्म के हिसाब से कुल सब्सिडी लगभग ₹1.2 लाख से ₹7 लाख तक हो सकती है। लेकिन यह भी याद रखें — बाग में फल आने में आमतौर पर 3–4 साल लगते हैं। यह लंबे समय का निवेश है, तुरंत आमदनी वाली योजना नहीं। सब्जी, मसाला और फूल में उसी सीज़न में रिटर्न दिखता है।

सब्जी वालों के लिए सबसे ज़रूरी शर्त — एकीकृत मॉडल

सब्जी की खेती पर ₹15,000 प्रति एकड़ की सब्सिडी सबसे सीधी लगती है, पर इसमें एक शर्त है जो बहुत से किसान मिस कर जाते हैं: यह सब्सिडी सिर्फ एकीकृत खेती मॉडल (integrated cultivation model) अपनाने पर मिलेगी। आम तरीके से सब्जी उगाने पर नहीं। एकीकृत मॉडल का मतलब है इनमें से आधुनिक तरीके अपनाना:

  1. मल्चिंग — खेत में प्लास्टिक या पुआल की परत बिछाना।
  2. लो टनल — पौधों पर छोटा पॉलीहाउस जैसा कवर।
  3. ड्रिप सिंचाई — बूँद-बूँद सिंचाई प्रणाली।
  4. बाँस स्टेकिंग — बेल वाली सब्जियों को बाँस का सहारा।

यह शर्त इसलिए है, क्योंकि विभाग चाहता है कि किसान आधुनिक और पानी-बचत वाले तरीके अपनाएँ। खेत सत्यापन (field verification) में अधिकारी यही देखेंगे कि मल्चिंग, ड्रिप या लो-टनल लगा है या नहीं। बिना एकीकृत मॉडल के सब्जी का दावा खारिज हो सकता है। अगर आप पहले से ड्रिप या मल्चिंग इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपके लिए यह सबसे आसान सब्सिडी है।

SC किसानों के लिए सब्जी श्रेणी में अलग और बेहतर स्लैब है — ₹25,500 प्रति एकड़, जो सामान्य श्रेणी से लगभग 70% ज़्यादा है। पर इसके साथ एक सीमा भी है — SC श्रेणी में सब्जी पर सब्सिडी अधिकतम 1 एकड़ तक ही मिलेगी, जबकि सामान्य श्रेणी 5 एकड़ तक ₹15,000 प्रति एकड़ ले सकती है (कुल ₹75,000)। SC प्रमाण-पत्र वैध और अपडेटेड होना चाहिए।

पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है?

  1. हरियाणा का किसान हो — अपने नाम की ज़मीन पर या अपने अधिकार वाली ज़मीन पर खेती करता हो।
  2. फल, सब्जी, मसाला, फूल या सुगंधित पौधों में से कोई एक या ज़्यादा श्रेणी अपना रहा हो।
  3. मेरी फसल मेरा ब्योरा और Hortnet — दोनों पोर्टल पर पंजीकृत हो। सिर्फ एक पर पंजीकरण से काम नहीं चलेगा।
  4. सब्जी श्रेणी में एकीकृत मॉडल (मल्चिंग/ड्रिप/लो-टनल/बाँस स्टेकिंग) अपना रहा हो।
  5. बैंक खाता परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) से लिंक्ड और सत्यापित हो, क्योंकि DBT भुगतान उसी खाते में आएगा।
  6. परिवार पहचान पत्र में दर्ज जानकारी सभी दस्तावेज़ों से मेल खानी चाहिए — नाम या नंबर में अंतर होने पर आवेदन अटक सकता है।

पात्र नहीं हैं: सिर्फ गेहूँ-धान की खेती करने वाले किसान जो बागवानी में शिफ्ट नहीं कर रहे; सब्जी में एकीकृत मॉडल की कोई प्रैक्टिस न अपनाने वाले; और जिनका दोनों पोर्टल पर पंजीकरण पूरा नहीं है।

ज़रूरी दस्तावेज़

क्रम दस्तावेज़ टिप्पणी
1 परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) सबसे अहम दस्तावेज़ — दोनों पोर्टल पर यही माँगा जाएगा
2 बैंक खाते की पूरी जानकारी खाता नंबर, बैंक का नाम, शाखा और IFSC कोड — गलत IFSC भुगतान अटकने की सबसे आम वजह है
3 SC प्रमाण-पत्र सिर्फ SC स्लैब का लाभ लेने वालों के लिए; वैध होना चाहिए
4 ज़मीन के कागज़ आधिकारिक सूची में इसका ज़िक्र नहीं है, पर खेत सत्यापन में माँगे जा सकते हैं — तैयार रखें
5 फसल/बागान का विवरण कौन सी फसल, कितने एकड़ — पोर्टल के फॉर्म में भरना होगा

आवेदन फॉर्म भरते समय पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम है — फॉर्म में जो दस्तावेज़ माँगा जाए, वही अपलोड करें। बैंक पासबुक की फोटो पहले से निकालकर रखें और IFSC कोड एक-एक अक्षर मिलाकर भरें।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप

आवेदन के लिए दो जगह पंजीकरण ज़रूरी है — यही इस योजना का सबसे प्रैक्टिकल पॉइंट है। बहुत से किसान सिर्फ मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकृत होते हैं और सोचते हैं कि हो गया। नहीं हुआ — बागवानी सब्सिडी के लिए Hortnet पर अलग से पंजीकरण ज़रूरी है।

चरण 1: मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर अपना पंजीकरण जाँचें। अगर पहले से पंजीकृत हैं, तो फसल और क्षेत्र की जानकारी अपडेट कर लें; नहीं हैं, तो पहले यही पंजीकरण पूरा करें।

चरण 2: Hortnet पोर्टल (hortnet.hortharyana.gov.in) खोलें और बागवानी विभाग के इस पोर्टल पर अलग से रजिस्टर करें। पंजीकरण में परिवार पहचान पत्र की जानकारी माँगी जाएगी।

चरण 3: अपनी श्रेणी चुनें — फल (बाग), सब्जी, मसाला, फूल या सुगंधित पौधे — और क्षेत्र (कितने एकड़) सही-सही भरें। एक से ज़्यादा श्रेणी के लिए अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग दावा बन सकता है — सटीक नियम Hortnet पर देखें।

चरण 4: दस्तावेज़ अपलोड करें — परिवार पहचान पत्र, बैंक विवरण (IFSC सहित), SC प्रमाण-पत्र (अगर लागू हो)। हर फील्ड दोबारा जाँच लें।

चरण 5: खेत सत्यापन का इंतज़ार करें — विभाग के अधिकारी आपके खेत में आकर बागान या अपनाई गई प्रैक्टिस (मल्चिंग/ड्रिप आदि) की जाँच करेंगे।

चरण 6: सत्यापन सफल होने पर सब्सिडी DBT के माध्यम से सीधे आपके बैंक खाते में आएगी।

बाग लगाने से पहले अपने ज़िला बागवानी अधिकारी से ज़रूर मिलें। वे बताएँगे कि आपके इलाके की मिट्टी और पानी में कौन सा फल सबसे बेहतर रहेगा — और फल की किस्म के हिसाब से ही आपकी प्रति एकड़ सब्सिडी का स्लैब तय होगा (₹24,500 से ₹1,40,000 के बीच)।

ऑफलाइन आवेदन का विकल्प

यह योजना मुख्य रूप से ऑनलाइन है, लेकिन अगर आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत आती है, तो अपने नज़दीकी CSC केंद्र या अटल सेवा केंद्र पर जाकर फॉर्म भरवा सकते हैं। वहाँ ऑपरेटर आपकी ओर से दोनों पोर्टल पर पंजीकरण और आवेदन में मदद कर सकता है। इसके अलावा, ज़िले के बागवानी विभाग कार्यालय (ज़िला बागवानी अधिकारी) से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है — खासकर यह तय करने के लिए कि आपके क्षेत्र में कौन सी फसल और कौन सा स्लैब लागू होगा।

आवेदन शुल्क और समय-सीमा

शुल्क: इस अनुदान के लिए कोई आवेदन शुल्क सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं है। फिर भी, फॉर्म जमा करते समय पोर्टल पर अगर कोई शुल्क दिखे, तो वही अंतिम माना जाए। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें — आवेदन सीधा और ऑनलाइन है।

समय-सीमा: इस घोषणा के लिए अब तक कोई आधिकारिक अंतिम तिथि सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हुई है। घोषणा सितंबर 2026 के आखिर में हुई है, इसलिए जल्दी आवेदन करना ही समझदारी है — ऐसी योजनाओं में अक्सर पहले आओ-पहले पाओ का असर होता है और बजट खत्म होने पर आवेदन रुक सकते हैं।

आवेदन की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?

  • Hortnet पोर्टल (hortnet.hortharyana.gov.in) पर लॉगिन करके अपने आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है — पोर्टल पर आवेदन का स्टेटस और सत्यापन की प्रगति दिखती है।
  • मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर भी फसल पंजीकरण की स्थिति देखी जा सकती है।
  • खेत सत्यापन के बाद अगर भुगतान में देरी हो, तो अपने ज़िला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें — बैंक खाते का IFSC और परिवार पहचान पत्र की जानकारी साथ रखें।
  • भुगतान DBT से होता है, इसलिए बैंक खाते में राशि आने पर SMS अलर्ट भी मिलेगा।

पैसे कैसे मिलेंगे?

सत्यापन सफल होने पर सब्सिडी की राशि DBT के माध्यम से सीधे आपके सत्यापित बैंक खाते में ट्रांसफर होगी। यह अनुदान है, लोन नहीं — इसे वापस नहीं करना होता। राशि एकमुश्त या विभागीय प्रक्रिया के अनुसार किस्तों में आ सकती है; पोर्टल पर दिख रही ताज़ा प्रक्रिया ही अंतिम मानी जाए। अगर भुगतान अटक जाए, तो सबसे पहले बैंक खाते का IFSC कोड और परिवार पहचान पत्र से लिंक की स्थिति जाँचें — गलत IFSC भुगतान अटकने की सबसे आम वजह है।

आवेदन से पहले ध्यान देने योग्य बातें

  • दोनों पोर्टल ज़रूरी हैं: सिर्फ मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण काफी नहीं — Hortnet पर अलग पंजीकरण अनिवार्य है।
  • सब्जी में एकीकृत मॉडल अनिवार्य: बिना मल्चिंग/ड्रिप/लो-टनल के खेत सत्यापन फेल होगा और दावा खारिज हो सकता है।
  • बाग लंबा खेल है: फल के बाग पर सबसे बड़ी सब्सिडी है, पर फल 3–4 साल बाद आएगा। पानी की पक्की व्यवस्था और लंबे समय तक टिकने की क्षमता हो, तभी बाग लगाएँ।
  • SC स्लैब की सीमा: SC श्रेणी में सब्जी पर ₹25,500 प्रति एकड़ सिर्फ 1 एकड़ तक है — 5 एकड़ की सीमा सामान्य स्लैब पर है।
  • बीमा अलग से करवाएँ: अनुदान से बाग लगाने के बाद उसी फसल का बीमा भी करवाएँ, ताकि खराब मौसम से नुकसान होने पर मुआवज़ा मिल सके।
  • फर्ज़ी वेबसाइटों से सावधान: आवेदन सिर्फ hortharyana.gov.in, hortnet.hortharyana.gov.in और fasal.haryana.gov.in से ही करें।

किसानों के लिए अन्य उपयोगी योजनाएँ

बागवानी के साथ-साथ इन योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है (हर योजना की अपनी पात्रता शर्तें लागू होंगी):

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हरियाणा बागवानी विकास योजना में फल के बाग पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

नए फलदार बाग लगाने पर फल की किस्म के हिसाब से ₹24,500 से ₹1,40,000 प्रति एकड़ तक सब्सिडी मिलती है, अधिकतम 5 एकड़ तक। 5 एकड़ पर कुल सब्सिडी लगभग ₹1.2 लाख से ₹7 लाख तक हो सकती है।

2. क्या बागवानी विकास योजना और बागवानी बीमा योजना एक ही हैं?

नहीं। बागवानी विकास (अनुदान) फसल लगाने की लागत पर सीधी मदद है — कोई प्रीमियम नहीं देना होता। बागवानी बीमा (MBBY) फसल खराब होने पर मुआवज़ा देने वाली बीमा योजना है, जिसमें ₹750–₹1,000 प्रति एकड़ प्रीमियम देना होता है। दोनों के आवेदन अलग-अलग पोर्टल पर होते हैं।

3. सब्जी पर ₹15,000 प्रति एकड़ की सब्सिडी के लिए क्या शर्त है?

सब्जी पर सब्सिडी सिर्फ एकीकृत खेती मॉडल अपनाने पर मिलेगी — जैसे मल्चिंग, ड्रिप सिंचाई, लो-टनल या बाँस स्टेकिंग। आम तरीके से सब्जी उगाने पर दावा खारिज हो सकता है।

4. आवेदन के लिए किन पोर्टल पर पंजीकरण ज़रूरी है?

दोनों पर — मेरी फसल मेरा ब्योरा (fasal.haryana.gov.in) और Hortnet (hortnet.hortharyana.gov.in)। बागवानी सब्सिडी के लिए Hortnet पर अलग से पंजीकरण अनिवार्य है।

5. SC किसानों को सब्जी पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

SC किसानों को सब्जी श्रेणी में ₹25,500 प्रति एकड़ मिलता है, जो सामान्य श्रेणी (₹15,000) से लगभग 70% ज़्यादा है — लेकिन यह सिर्फ 1 एकड़ तक ही मिलता है।

6. क्या यह सब्सिडी लोन है — क्या पैसा वापस करना होगा?

नहीं। यह अनुदान (subsidy/grant) है, लोन नहीं। राशि DBT से सीधे बैंक खाते में आती है और इसे वापस नहीं करना होता।

7. आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?

अब तक कोई आधिकारिक अंतिम तिथि सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हुई है। घोषणा सितंबर 2026 के आखिर में हुई है, इसलिए जल्दी आवेदन करना ही समझदारी है।

आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक

  • बागवानी विभाग, हरियाणा: hortharyana.gov.in
  • Hortnet पोर्टल (बागवानी सब्सिडी आवेदन): hortnet.hortharyana.gov.in
  • मेरी फसल मेरा ब्योरा: fasal.haryana.gov.in
  • बागवानी बीमा पोर्टल (MBBY): mbby.hortharyana.gov.in
  • बागवानी विभाग टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-180-2021; ईमेल: [email protected] (ये संपर्क विवरण प्रकाशित रिपोर्टों से लिए गए हैं — आवेदन से पहले विभाग की वेबसाइट पर सत्यापित कर लें)

अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा बागवानी विभाग की वेबसाइट, विभाग की योजना सूची और सितंबर 2026 की सब्सिडी घोषणा पर आधारित है। ‘मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना’ नाम की कोई अलग योजना विभाग की आधिकारिक सूची में दर्ज नहीं मिली है — इस गाइड में बागवानी फसलों की खेती पर मिलने वाले अनुदान (एकीकृत बागवानी विकास/Hortnet) की जानकारी दी गई है। प्रति एकड़ दरें और शर्तें विभागीय घोषणा के अनुसार हैं; आवेदन करने से पहले Hortnet पोर्टल पर योजना का लाइव फॉर्म और ताज़ा निर्देश ज़रूर देख लें — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *