पशु संजीवनी 1962 क्या है?
पशु संजीवनी 1962 कोई नकद सब्सिडी या अनुदान वाली योजना नहीं है — यह हरियाणा सरकार की मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा है, जिसमें बीमार पशु के लिए घर बैठे इलाज मिलता है। पशुपालक को पशु को लेकर अस्पताल नहीं जाना पड़ता; सरकार की मोबाइल पशु चिकित्सा वैन (mobile veterinary van) डॉक्टर और सहायक के साथ पशुपालक के दरवाज़े पर आती है।
इस सेवा की सबसे बड़ी पहचान इसका टोल-फ्री नंबर 1962 है। पशुपालक इस नंबर पर कॉल करता है, कॉल सेंटर नज़दीकी मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई को सूचना भेजता है, और वैन पशु का इलाज करने पहुँचती है। यह व्यवस्था राष्ट्रीय गोकुल मिशन से जुड़ी पशु संजीवनी पहल का हिस्सा है, जिसके तहत राज्यों में 1962 हेल्पलाइन के माध्यम से पशु चिकित्सा एंबुलेंस सेवा चलाई जाती है।
हरियाणा में इस सेवा की औपचारिक घोषणा 24 मई 2026 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और पशुपालन विभागों की पाँच वर्षीय कार्यान्वयन रूपरेखा (Vision 2047) की समीक्षा बैठक में की थी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और सहायकों से लैस मोबाइल वैन जल्द ही पशुपालकों के दरवाज़े पर इलाज की सेवा देंगी।
सेवा एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| सेवा का नाम | पशु संजीवनी — मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा |
| हेल्पलाइन | टोल-फ्री 1962 |
| सेवा का समय | रोज़ाना सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक |
| पहुँचने का लक्ष्य | कॉल के 30 मिनट के भीतर दरवाज़े पर |
| वैन में क्या होता है | पशु चिकित्सा विशेषज्ञ, सहायक, दवाइयाँ, लैब जाँच की सुविधा |
| विभाग | पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, हरियाणा |
| भविष्य की योजना | धीरे-धीरे 24 घंटे की सेवा में विस्तार |
| आवेदन का तरीका | कोई फॉर्म नहीं — सिर्फ 1962 पर कॉल करें |
| शुल्क | हेल्पलाइन टोल-फ्री है; इलाज की फीस के बारे में कॉल पर या वैन आने पर पूछें |
क्या-क्या इलाज और सुविधाएँ मिलती हैं?
मोबाइल पशु चिकित्सा वैन एक चलता-फिरता पशु अस्पताल है। गुरुग्राम में इस सेवा की एंबुलेंस वैनों को हरी झंडी दिखाते समय पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया था कि इन वैनों के माध्यम से ये सुविधाएँ मिलती हैं:
- बीमार पशु का मौके पर इलाज — बुखार, दस्त, चोट, थनैला (mastitis), पेट फूलना जैसी आम बीमारियों का दरवाज़े पर इलाज।
- कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) — अच्छी नस्ल के लिए AI की सुविधा।
- लैब जाँच — खून और अन्य नमूनों की जाँच की सुविधा।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता की जाँच — पशु की इम्युनिटी आँकने की सुविधा।
- आपातकालीन देखभाल — गंभीर हालत में पशु को तुरंत राहत और आगे के इलाज की सलाह।
एक बात साफ रखें — वैन में छोटी-मोटी सर्जरी और जटिल ऑपरेशन की सुविधा नहीं होती। ऐसे मामलों में वैन के डॉक्टर पशु को नज़दीकी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सालय ले जाने की सलाह देंगे।
1962 पर कॉल कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप
इस सेवा के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म, कोई पंजीकरण और कोई आवेदन नहीं भरना है। पूरी प्रक्रिया सिर्फ एक फोन कॉल से शुरू होती है:
चरण 1: अपने फोन से टोल-फ्री नंबर 1962 डायल करें। यह नंबर सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक, हर दिन काम करता है।
चरण 2: कॉल सेंटर को बताएँ — आपका नाम, गाँव और पूरा पता, आपका मोबाइल नंबर, पशु का प्रकार (गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर आदि), पशु की उम्र और बीमारी के लक्षण (कब से बीमार है, क्या-क्या दिख रहा है)।
चरण 3: कॉल सेंटर आपकी जानकारी नज़दीकी मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई को भेजेगा। वैन में बैठे डॉक्टर और सहायक आपके पते पर रवाना होंगे।
चरण 4: वैन के पहुँचने का लक्ष्य कॉल के 30 मिनट के भीतर है। वैन आने तक पशु को छाँव में रखें, साफ पानी पिलाएँ और घबराएँ नहीं — डॉक्टर को लक्षण सही-सही बताना ही सबसे बड़ी मदद है।
चरण 5: डॉक्टर पशु की जाँच करेंगे, ज़रूरत पड़ने पर लैब जाँच करेंगे, दवा देंगे और आगे की देखभाल (खुराक, परहेज़, दोबारा जाँच की तारीख) समझाकर जाएँगे।
ध्यान दें: 1962 हेल्पलाइन पर कॉल करते समय अपना पता सही-सही बताएँ — गाँव का नाम, नज़दीकी पहचान (स्कूल, मंदिर, चौपाल) और मोबाइल नंबर। गलत पते पर वैन देर से पहुँचेगी या गलत जगह जाएगी।
यह सेवा किनके लिए है?
- हरियाणा के सभी पशुपालक — गाय, भैंस, बकरी, भेड़, सूअर या मुर्गी पालने वाले किसान और पशुपालक परिवार।
- गौशालाओं के संचालक भी बीमार पशुओं के लिए इस सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- कोई आय सीमा, ज़मीन की सीमा या श्रेणी की शर्त इस सेवा के लिए सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं है — यह सेवा सभी पशुपालकों के लिए है।
- सेवा पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जा रही है — अगर आपके इलाके में वैन अभी नहीं पहुँचती है, तो 1962 पर कॉल करके अपने क्षेत्र की स्थिति पूछें।
70 एंबुलेंस और सेवा का विस्तार
हरियाणा सरकार ने पशुओं को दरवाज़े पर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए 70 एंबुलेंस वैन ₹11.20 करोड़ की लागत से खरीदी थीं। गुरुग्राम ज़िले को इनमें से दो वैन मिली थीं, जिन्हें सोहना और पटौदी उप-मंडल के पशुपालकों की सेवा के लिए हरी झंडी दिखाई गई थी। ये वैन टोल-फ्री हेल्पलाइन 1962 से संचालित होती हैं।
मुख्यमंत्री ने 24 मई 2026 की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इस सुविधा को धीरे-धीरे 24 घंटे की सेवा में बदला जाए, ताकि रात में भी पशुओं को समय पर चिकित्सा मिल सके। पशुपालन विभाग ने साथ ही पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण, रोग निगरानी व्यवस्था मज़बूत करने और राज्य में हर साल चार पशु मेले आयोजित करने की योजना भी बताई है। अभी के लिए सेवा का समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक है — रात 10 बजे के बाद की आपात स्थिति में नज़दीकी पशु अस्पताल से संपर्क करें।
ऑफलाइन विकल्प — वैन नहीं पहुँचे तो क्या करें?
- नज़दीकी पशु चिकित्सालय/पशु अस्पताल: हर गाँव-ब्लॉक में सरकारी पशु चिकित्सालय है। 1962 पर कॉल न लगने पर सीधे वहाँ जाएँ या वहाँ के डॉक्टर से फोन पर सलाह लें।
- ज़िला पशुपालन कार्यालय: अपने ज़िले के उप-निदेशक, पशुपालन (Deputy Director, Animal Husbandry) के कार्यालय से सेवा की जानकारी ली जा सकती है।
- गौशाला संचालक: गौशाला में बीमार पशु होने पर गौशाला प्रबंधन 1962 पर कॉल कर सकता है — सेवा गौशालाओं के लिए भी उपलब्ध है।
शुल्क और समय-सीमा
शुल्क: हेल्पलाइन 1962 पूरी तरह टोल-फ्री है — कॉल करने का कोई पैसा नहीं लगता। वैन से मिलने वाले इलाज या दवाओं की फीस के बारे में कोई सार्वजनिक दर-सूची जारी नहीं हुई है; कॉल करते समय या वैन आने पर डॉक्टर से पूछ लें। किसी भी व्यक्ति को इस सेवा के नाम पर पैसे न दें — 1962 पर कॉल ही असली रास्ता है।
समय-सीमा: यह कोई अंतिम तिथि वाली योजना नहीं है — यह नियमित सेवा है जो हर दिन सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक चलती है। कोई आवेदन विंडो नहीं है; जब भी पशु बीमार हो, कॉल करें।
सेवा की स्थिति कैसे जानें?
- वैन के पहुँचने का समय जानने के लिए 1962 पर दोबारा कॉल करें और अपना नाम व पता बताकर पूछें।
- कॉल सेंटर से वैन की अनुमानित पहुँच का समय पूछा जा सकता है।
- अगर वैन 30 मिनट में न पहुँचे, तो दोबारा कॉल करके स्थिति की जानकारी लें — हो सकता है कि वैन किसी और आपात मामले में लगी हो।
पशु बीमार होने पर पहले क्या करें? — ज़रूरी सावधानियाँ
- लक्षण नोट करें: पशु कब से बीमार है, खाना-पीना बंद है या नहीं, बुखार है या नहीं, दस्त या खून है या नहीं — ये बातें डॉक्टर को बताने से इलाज तेज़ होता है।
- पशु को अलग रखें: संक्रामक बीमारी का शक हो तो बीमार पशु को दूसरे पशुओं से अलग बाँधें।
- खुद दवा न दें: बिना डॉक्टर की सलाह के इंसानों वाली दवा या ज़्यादा मात्रा में दवा न दें — इससे हालत बिगड़ सकती है।
- टीकाकरण का रिकॉर्ड रखें: पशु के टीके (FMD, HS, BQ आदि) का रिकॉर्ड संभालकर रखें — डॉक्टर को दिखाने से इलाज में मदद मिलती है।
- पशु बीमा करवाएँ: इलाज के खर्च से बचने के लिए पशु का बीमा करवाना समझदारी है।
पशुपालकों के लिए अन्य उपयोगी योजनाएँ
पशु स्वास्थ्य के साथ-साथ इन योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है (हर योजना की अपनी पात्रता शर्तें लागू होंगी):
- हरियाणा पशुधन बीमा योजना: पशु के बीमे पर सिर्फ ₹100–₹300 प्रीमियम — SC परिवारों के लिए मुफ्त, अधिकतम 5 पशु।
- हरियाणा पशु किसान क्रेडिट कार्ड: पशुपालन के लिए ₹3 लाख तक का लोन, 4% प्रभावी ब्याज, ₹1.60 लाख तक बिना गारंटी।
- मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना: दूध उत्पादकों को प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. पशु संजीवनी 1962 क्या है — क्या यह कोई सब्सिडी योजना है?
नहीं। यह कोई नकद सब्सिडी या अनुदान योजना नहीं है। यह हरियाणा सरकार की मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा है — टोल-फ्री 1962 पर कॉल करने पर डॉक्टर वाली वैन पशु का इलाज करने आपके दरवाज़े पर आती है।
2. 1962 पर कॉल किस समय की जा सकती है?
रोज़ाना सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक। मुख्यमंत्री ने इसे धीरे-धीरे 24 घंटे की सेवा में बदलने का निर्देश दिया है, लेकिन अभी सेवा का समय सुबह 6 से रात 10 बजे तक ही है।
3. कॉल करने के कितनी देर में वैन पहुँचती है?
सरकारी घोषणा के अनुसार वैन कॉल के 30 मिनट के भीतर लाभार्थी के दरवाज़े पर पहुँचने का लक्ष्य है। दूरी और वैन की उपलब्धता के हिसाब से इसमें थोड़ा अंतर आ सकता है।
4. क्या इस सेवा के लिए कोई फॉर्म भरना या पंजीकरण कराना होता है?
नहीं। इस सेवा के लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म, पंजीकरण या आवेदन नहीं है — सिर्फ 1962 पर कॉल करना होता है।
5. वैन में कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलती हैं?
वैन में पशु चिकित्सा विशेषज्ञ और सहायक होते हैं। मौके पर इलाज के साथ-साथ कृत्रिम गर्भाधान, लैब जाँच और पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता आँकने की सुविधा भी मिलती है।
6. क्या 1962 पर कॉल करने का कोई पैसा लगता है?
नहीं। 1962 पूरी तरह टोल-फ्री हेल्पलाइन है — कॉल करने का कोई शुल्क नहीं है। इलाज या दवाओं की फीस के बारे में कॉल पर या वैन आने पर डॉक्टर से पूछ लें।
7. रात 10 बजे के बाद पशु बीमार हो जाए तो क्या करें?
रात 10 बजे के बाद 1962 सेवा बंद रहती है। ऐसे में नज़दीकी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सालय से संपर्क करें, या सुबह 6 बजे पहली कॉल करें। गंभीर आपात स्थिति में पशु को तुरंत नज़दीकी पशु अस्पताल ले जाएँ।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, हरियाणा — विभाग की वेबसाइट और ज़िला कार्यालयों से सेवा की ताज़ा स्थिति जाँचें
- टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1962 (सुबह 6 बजे – रात 10 बजे, प्रतिदिन)
- अंत्योदय सरल पोर्टल (पशुपालन विभाग की अन्य योजनाओं के लिए): saralharyana.gov.in
- सेवा की घोषणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा 24 मई 2026 की समीक्षा बैठक में (PTI रिपोर्ट के अनुसार)
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा सरकार की 24 मई 2026 की घोषणा और पशुपालन विभाग से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। सेवा का समय (सुबह 6–रात 10 बजे), 30 मिनट में वैन पहुँचने का लक्ष्य और 70 एंबुलेंस की जानकारी इन्हीं स्रोतों से ली गई है। इलाज या दवाओं की फीस के बारे में कोई सार्वजनिक दर-सूची जारी नहीं हुई है — 1962 पर कॉल करके ही ताज़ा जानकारी लें। सेवा आपके इलाके में कब से उपलब्ध है, यह भी हेल्पलाइन पर ही पूछें।

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