मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना हरियाणा 2026: ₹750 प्रीमियम में ₹30,000 तक कवर
धान-गेहूं की फसल का बीमा तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से हो जाता है, लेकिन सब्ज़ी, फल और मसालों की खेती करने वाले किसान का क्या? एक रात की ओलावृष्टि या पाले से टमाटर, फूलगोभी या आम का पूरा बाग तबाह हो सकता है — और खेत की फसल की तरह बागवानी फसल का बीमा कराना पहले संभव नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana — MBBY) शुरू की थी।
यह योजना सितंबर 2021 में शुरू हुई थी और हरियाणा बागवानी फसलों का बीमा शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना था। शुरुआत में सिर्फ 21 फसलें कवर होती थीं, लेकिन अब 46 बागवानी फसलें — सब्ज़ियाँ, फल और मसाले — इस योजना के दायरे में आती हैं। किसान को सिर्फ 2.5% प्रीमियम देना होता है: सब्ज़ी और मसाला फसलों के लिए ₹750 प्रति एकड़ और फल फसलों के लिए ₹1,000 प्रति एकड़। इसके बदले में बीमा राशि ₹30,000 प्रति एकड़ (सब्ज़ी/मसाले) और ₹40,000 प्रति एकड़ (फल) तक मिलती है।
और अब इस योजना में एक बड़ी नई बात जुड़ गई है — अक्टूबर 2026 के अंत में मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को भी बागवानी बीमा के दायरे में लाया गया है। अब मधुमक्खी पालक सिर्फ ₹50 प्रति कॉलोनी के प्रीमियम पर अपनी मधुमक्खी कॉलोनी और बक्सों का बीमा करा सकते हैं।
इस लेख में आपको योजना की पूरी जानकारी मिलेगी — कितना प्रीमियम, कितना कवर, कौन सी 46 फसलें, कौन पात्र है, कौन से दस्तावेज़ चाहिए, mbby.hortharyana.gov.in से ऑनलाइन आवेदन कैसे करें, ऑफलाइन विकल्प क्या है, नुकसान होने पर दावा कैसे करें, और मधुमक्खी पालन बीमा का पूरा विवरण।
योजना एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना (Mukhyamantri Bagwani Bima Yojana — MBBY) |
| राज्य | हरियाणा |
| शुरुआत | सितंबर 2021 (हरियाणा देश का पहला राज्य) |
| संचालन विभाग | बागवानी विभाग, हरियाणा सरकार (Department of Horticulture) |
| कवर की जाने वाली फसलें | 46 बागवानी फसलें (सब्ज़ियाँ, फल, मसाले) |
| प्रीमियम | 2.5% — सब्ज़ी/मसाले ₹750 प्रति एकड़, फल ₹1,000 प्रति एकड़ |
| बीमा राशि (Sum Assured) | सब्ज़ी/मसाले ₹30,000 प्रति एकड़, फल ₹40,000 प्रति एकड़ |
| मधुमक्खी पालन | प्रीमियम ₹50 प्रति कॉलोनी/बक्सा, कवर ₹1,250 प्रति कॉलोनी/बक्सा |
| आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन (mbby.hortharyana.gov.in) — पहले मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण ज़रूरी |
| आधिकारिक पोर्टल | mbby.hortharyana.gov.in |
| हेल्पलाइन | 1800-180-2021 (बागवानी विभाग, टोल-फ्री) |
कितना फायदा मिलेगा? प्रीमियम और बीमा राशि
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा प्रीमियम है। किसान को बीमा राशि का सिर्फ 2.5 प्रतिशत ही देना होता है, बाकी खर्च सरकार उठाती है।
| फसल का प्रकार | प्रीमियम (प्रति एकड़) | बीमा राशि (प्रति एकड़) |
|---|---|---|
| सब्ज़ियाँ (Vegetables) | ₹750 | ₹30,000 |
| मसाले (Spices) | ₹750 | ₹30,000 |
| फल (Fruits) | ₹1,000 | ₹40,000 |
उदाहरण के लिए, अगर आपने 2 एकड़ में टमाटर लगाया है, तो कुल प्रीमियम सिर्फ ₹1,500 होगा और बीमा राशि ₹60,000 तक की होगी। अगर 1 एकड़ में आम का बाग है, तो प्रीमियम ₹1,000 और बीमा राशि ₹40,000 होगी। यानी बहुत छोटे खर्च पर फसल की सुरक्षा मिल जाती है।
नुकसान होने पर मुआवज़ा कैसे तय होता है?
मुआवज़ा फसल के नुकसान के प्रतिशत के हिसाब से तय होता है। बागवानी विभाग के अधिकारी नुकसान का सर्वे करते हैं और उसके बाद बीमा राशि का तय हिस्सा सीधे किसान के बैंक खाते में भेजा जाता है।
| फसल का नुकसान | मिलने वाला मुआवज़ा | सब्ज़ी/मसाले (₹30,000 पर) | फल (₹40,000 पर) |
|---|---|---|---|
| 26% से 50% तक | बीमा राशि का 50% | ₹15,000 प्रति एकड़ | ₹20,000 प्रति एकड़ |
| 51% से 75% तक | बीमा राशि का 75% | ₹22,500 प्रति एकड़ | ₹30,000 प्रति एकड़ |
| 75% से ज़्यादा | बीमा राशि का 100% | ₹30,000 प्रति एकड़ | ₹40,000 प्रति एकड़ |
ध्यान दें: 25% या उससे कम नुकसान पर आमतौर पर मुआवज़ा नहीं बनता, क्योंकि योजना के नियमों में मुआवज़े की श्रेणियाँ 25%, 50%, 75% और 100% नुकसान के आधार पर तय की गई हैं। नुकसान का आकलन विभागीय सर्वे से होता है — किसान को खुद नुकसान का प्रतिशत तय नहीं करना होता।
किन खतरों से सुरक्षा मिलती है?
यह योजना प्रतिकूल मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर करती है। इसमें शामिल हैं:
- ओलावृष्टि (Hailstorm) — सब्ज़ी और फलों की फसल को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाने वाला कारण
- पाला (Frost) — सर्दियों में फल और सब्ज़ी की फसल को होने वाला नुकसान
- सूखा (Drought) और बाढ़ (Flood)
- अत्यधिक बारिश और अन्य प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियाँ
यानी मौसम की मार से फसल बर्बाद हो जाए, तो किसान को मुआवज़े के रूप में एक तय राशि मिल जाती है और वह अगली फसल की तैयारी कर सकता है।
कौन सी 46 फसलें कवर होती हैं?
योजना शुरू हुई थी तब सिर्फ 21 फसलें कवर होती थीं। अब यह संख्या बढ़कर 46 हो गई है। इनमें तीनों श्रेणियाँ शामिल हैं:
- सब्ज़ियाँ — जैसे आलू, प्याज़, टमाटर, फूलगोभी, मटर और अन्य मौसमी सब्ज़ियाँ
- फल — जैसे आम, अमरूद, केला, नींबू और अन्य फलदार फसलें
- मसाले — जैसे हल्दी, मिर्च, अदरक और अन्य मसाला फसलें
पूरी 46 फसलों की आधिकारिक सूची mbby.hortharyana.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है। आवेदन करने से पहले पोर्टल पर जाकर यह ज़रूर जाँच लें कि आपकी फसल सूची में है या नहीं — क्योंकि सूची में सीज़न के हिसाब से बदलाव भी हो सकता है।
पात्रता की शर्तें (Eligibility)
बागवानी बीमा योजना का लाभ लेने के लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- हरियाणा का किसान होना चाहिए और हरियाणा में बागवानी फसल की खेती कर रहा हो।
- फसल मेरी फसल मेरा ब्योरा (MFMB) पोर्टल — fasal.haryana.gov.in पर पंजीकृत होनी चाहिए। बिना MFMB पंजीकरण के बागवानी बीमा नहीं हो सकता।
- परिवार पहचान पत्र (PPP / Family ID) होना चाहिए — पोर्टल पर लॉगिन PPP ID, MFMB ID या मोबाइल नंबर से होता है।
- जमीन के आकार की कोई सीमा नहीं है — छोटे और बड़े, सभी बागवानी किसान इस योजना के पात्र हैं।
- जिस सीज़न की फसल का बीमा कराना है, उसका पंजीकरण उसी सीज़न में होना चाहिए।
आवेदन के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
ऑनलाइन आवेदन से पहले ये दस्तावेज़ और जानकारियाँ तैयार रख लें। ध्यान दें — पोर्टल पर दिख रहा लाइव फॉर्म ही अंतिम होता है; अगर पोर्टल कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगता है, तो वही मान्य होगा:
- परिवार पहचान पत्र (Family ID / PPP) — PPP ID या फैमिली ID नंबर
- आधार कार्ड — आवेदक किसान का
- मेरी फसल मेरा ब्योरा (MFMB) पंजीकरण — फसल और बोए गए क्षेत्र का विवरण, जो fasal.haryana.gov.in पर दर्ज हो
- मोबाइल नंबर — OTP सत्यापन के लिए (पोर्टल पर लॉगिन मोबाइल नंबर से भी होता है)
- बैंक खाते की जानकारी — मुआवज़ा DBT से सीधे खाते में आता है, इसलिए खाता आधार से लिंक्ड और सक्रिय होना चाहिए
- भूमि का विवरण — खसरा/खेवट नंबर, जो MFMB पंजीकरण में पहले से दर्ज होता है
- पासपोर्ट साइज़ फोटो — अगर पोर्टल माँगे
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step)
बागवानी बीमा के लिए आवेदन दो चरणों में होता है — पहले मेरी फसल मेरा ब्योरा पर फसल का पंजीकरण, फिर बागवानी बीमा पोर्टल पर बीमा। दोनों चरण ज़रूरी हैं, एक से काम नहीं चलेगा।
स्टेप 1: मेरी फसल मेरा ब्योरा पर फसल पंजीकृत करें — सबसे पहले fasal.haryana.gov.in पर जाकर अपनी बागवानी फसल और बोए गए क्षेत्र का पंजीकरण करें। यही डेटा बागवानी बीमा पोर्टल में जाता है। अगर आपने पहले से MFMB पर फसल दर्ज कर रखी है, तो यह चरण पूरा है।
स्टेप 2: बागवानी बीमा पोर्टल खोलें — अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर mbby.hortharyana.gov.in खोलें।
स्टेप 3: लॉगिन करें — पोर्टल पर मोबाइल नंबर, PPP ID या MFMB ID से लॉगिन करें। OTP से सत्यापन होगा।
स्टेप 4: फसल चुनें — अपनी पंजीकृत फसल चुनें। स्क्रीन पर उस फसल का प्रीमियम (₹750 या ₹1,000 प्रति एकड़) और बीमा राशि (₹30,000 या ₹40,000 प्रति एकड़) दिख जाएगी।
स्टेप 5: प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान करें — पोर्टल पर दिख रही प्रीमियम राशि का ऑनलाइन भुगतान करें। भुगतान पूरा होते ही आपका बीमा पंजीकरण हो जाएगा।
स्टेप 6: रसीद सहेजकर रखें — भुगतान की रसीद और आवेदन संख्या नोट करके सुरक्षित रखें। यही संख्या बाद में स्टेटस चेक करने और दावा करने में काम आएगी।
ऑफलाइन आवेदन कहाँ करें?
अगर आप ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, तो अपने जिले के जिला बागवानी अधिकारी (District Horticulture Officer, DHO) के कार्यालय में जाकर मदद ले सकते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), अटल सेवा केंद्र या ई-दिशा केंद्र से भी ऑनलाइन आवेदन करवाया जा सकता है — वहाँ मामूली सेवा शुल्क लग सकता है।
रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख क्या है?
रजिस्ट्रेशन की अवधि सीज़न के हिसाब से बागवानी विभाग द्वारा तय और नोटिफाई की जाती है। पिछले सीज़नों में तकनीकी दिक्कतों या देर से बुवाई के कारण सरकार ने अंतिम तारीख एक महीने तक बढ़ाई भी है। 2026 का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर खुला है — लेकिन ताज़ा अंतिम तारीख के लिए आवेदन से पहले mbby.hortharyana.gov.in और fasal.haryana.gov.in पर ज़रूर जाँच लें। किसी पुराने ब्लॉग में छपी तारीख को अंतिम न मानें।
मधुमक्खी पालन बीमा — नई सुविधा (अक्टूबर 2026)
अक्टूबर 2026 के अंत में हरियाणा सरकार ने मधुमक्खी पालन (Beekeeping) को भी मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के दायरे में ला दिया है। यह खबर मधुमक्खी पालकों के लिए बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि बाढ़, आग या सड़क हादसे में एक साथ सैकड़ों कॉलोनियाँ बर्बाद हो सकती हैं।
मधुमक्खी पालन बीमा की मुख्य बातें
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| प्रीमियम | ₹50 प्रति मधुमक्खी कॉलोनी और ₹50 प्रति बक्सा |
| बीमा राशि (कवर) | ₹1,250 प्रति कॉलोनी और ₹1,250 प्रति बक्सा |
| अधिकतम सीमा | 250 कॉलोनियाँ + 250 बक्से प्रति मधुमक्खी पालक |
| अधिकतम कुल कवर | ₹3,12,500 कॉलोनियों के लिए + ₹3,12,500 बक्सों के लिए (कुल ₹6.25 लाख तक) |
| पंजीकरण | भावांतर भरपाई योजना–शहद (Bhavantar Bharpai–Honey) के तहत पंजीकरण ज़रूरी |
| कवर होने वाले खतरे | बाढ़, आग, परिवहन दुर्घटना, मधुमक्खियों में महामारी |
| हेल्पलाइन | 1800-180-2021 |
मधुमक्खी पालन बीमा की शर्तें
- मधुमक्खी पालक को भावांतर भरपाई योजना–शहद के तहत पंजीकृत होना चाहिए और हर बक्से की यूनिट संख्या (Unit Number) देनी होगी।
- परिवहन दुर्घटना का कवर तभी मिलेगा जब हादसा हरियाणा के भीतर हुआ हो और उसकी FIR या DDR (Daily Diary Report) दर्ज कराई गई हो।
- बाढ़ में बक्से/कॉलोनियों के डूबने, आग से नष्ट होने और महामारी से मधुमक्खियों के मरने पर भी कवर मिलता है।
- शहद के लिए भावांतर भरपाई योजना के तहत ₹120 प्रति किलो का संरक्षित मूल्य भी मिलता है, जो बाज़ार में भाव गिरने पर सुरक्षा देता है।
- अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें या 1800-180-2021 पर कॉल करें।
हरियाणा में 3,000 से ज़्यादा मधुमक्खी पालक राष्ट्रीय मधुक्रांति पोर्टल पर पंजीकृत हैं और राज्य इस मामले में देश में पहले स्थान पर है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक मधुमक्खी पालकों की संख्या 7,750 और शहद उत्पादन 15,500 मीट्रिक टन तक पहुँचाना है।
नुकसान होने पर दावा कैसे करें?
अगर आपकी बीमित फसल को मौसम या प्राकृतिक आपदा से नुकसान होता है, तो दावा करने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
स्टेप 1: जल्द से जल्द सूचना दें — नुकसान होते ही बागवानी बीमा पोर्टल mbby.hortharyana.gov.in पर या अपने जिले के जिला बागवानी अधिकारी को सूचना दें। देर करने पर सर्वे में दिक्कत हो सकती है।
स्टेप 2: विभागीय सर्वे — बागवानी विभाग के अधिकारी आपके खेत पर जाकर नुकसान का सर्वे करेंगे और नुकसान का प्रतिशत तय करेंगे।
स्टेप 3: मुआवज़ा DBT से — सर्वे के बाद तय स्लैब के हिसाब से मुआवज़ा सीधे आपके आधार से लिंक्ड बैंक खाते में भेजा जाता है।
स्टेप 4: स्टेटस चेक करें — अपने आवेदन और दावे का स्टेटस पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकते हैं। अगर स्टेटस लंबे समय से न बदले, तो जिला बागवानी अधिकारी से संपर्क करें।
बागवानी बीमा बनाम फसल बीमा (PMFBY) — फर्क समझें
कई किसान इस बात में उलझ जाते हैं कि बागवानी बीमा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में क्या फर्क है:
- PMFBY — धान, गेहूं, बाजरा, सरसों जैसी खेत की फसलों (Field Crops) के लिए है।
- MBBY (बागवानी बीमा) — सब्ज़ी, फल और मसालों जैसी बागवानी फसलों (Horticulture Crops) के लिए है।
यानी अगर आप धान के साथ-साथ सब्ज़ी भी उगाते हैं, तो धान का बीमा PMFBY से और सब्ज़ी का बीमा MBBY से कराना होगा। दोनों अलग-अलग योजनाएँ हैं और दोनों के पोर्टल भी अलग हैं।
किसानों के लिए संबंधित योजनाएँ
बागवानी के साथ-साथ खेती की दूसरी ज़रूरतों के लिए भी सरकार की योजनाएँ हैं, जिनकी पूरी जानकारी हमारी साइट पर उपलब्ध है: कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना (ट्रैक्टर सहित कई यंत्रों पर ₹3 लाख तक की सब्सिडी), दूध पर प्रोत्साहन राशि के लिए मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना (गर्मियों में ₹7 और सर्दियों में ₹5 प्रति लीटर), और धान की खरीद के पैसे की जाँच के लिए धान खरीद भुगतान स्टेटस गाइड देखें।
ध्यान रखने वाली बातें
पहले MFMB पंजीकरण, फिर बीमा: बागवानी बीमा कराने के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पर फसल का पंजीकरण अनिवार्य है। कई किसान सीधे बीमा पोर्टल पर जाते हैं और पंजीकरण न होने पर अटक जाते हैं। पहले fasal.haryana.gov.in पर फसल दर्ज करें, फिर mbby.hortharyana.gov.in पर बीमा कराएँ।
सीज़न की तारीख पोर्टल पर जाँचें: रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख सीज़न के हिसाब से बदलती रहती है। आवेदन करने से पहले पोर्टल पर ताज़ा तारीख ज़रूर देखें — पुरानी तारीख पर भरोसा न करें।
फर्ज़ी वेबसाइटों और दलालों से बचें: बीमा सिर्फ आधिकारिक पोर्टल mbby.hortharyana.gov.in या सरकारी केंद्र (CSC / अटल सेवा केंद्र / DHO कार्यालय) से कराएँ। प्रीमियम सिर्फ ₹750 या ₹1,000 प्रति एकड़ है — कोई भी व्यक्ति अगर ज़्यादा पैसे माँगकर बीमा कराने का दावा करे, तो वह धोखाधड़ी हो सकती है।
बैंक खाता आधार से लिंक्ड रखें: मुआवज़ा DBT से आता है, इसलिए बैंक खाता आधार से लिंक्ड और सक्रिय होना ज़रूरी है। खाते की जानकारी आवेदन में सही भरें।
सर्वे के समय खेत पर रहें: नुकसान का सर्वे विभागीय अधिकारी करते हैं। सर्वे के समय खेत पर मौजूद रहें और नुकसान की फोटो/वीडियो अपने पास सहेजकर रखें — इससे दावा प्रक्रिया में मदद मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना में कितना प्रीमियम देना होता है?
उत्तर: प्रीमियम बीमा राशि का सिर्फ 2.5% है — सब्ज़ी और मसाला फसलों के लिए ₹750 प्रति एकड़ और फल फसलों के लिए ₹1,000 प्रति एकड़।
प्रश्न 2: बागवानी बीमा में कितनी राशि का कवर मिलता है?
उत्तर: सब्ज़ी और मसाला फसलों पर ₹30,000 प्रति एकड़ और फल फसलों पर ₹40,000 प्रति एकड़ तक का कवर मिलता है।
प्रश्न 3: बागवानी बीमा योजना में कौन सी फसलें कवर होती हैं?
उत्तर: कुल 46 बागवानी फसलें कवर होती हैं, जिनमें सब्ज़ियाँ, फल और मसाले शामिल हैं। पूरी सूची mbby.hortharyana.gov.in पोर्टल पर देखें।
प्रश्न 4: बागवानी बीमा के लिए आवेदन कैसे करें?
उत्तर: पहले अपनी फसल मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर पंजीकृत करें, फिर mbby.hortharyana.gov.in पर मोबाइल नंबर, PPP ID या MFMB ID से लॉगिन करके फसल चुनें और प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान करें।
प्रश्न 5: मधुमक्खी पालन का बीमा कैसे कराएँ?
उत्तर: मधुमक्खी पालन को अक्टूबर 2026 में इस योजना में शामिल किया गया है। प्रीमियम ₹50 प्रति कॉलोनी और ₹50 प्रति बक्सा है, कवर ₹1,250 प्रति कॉलोनी/बक्सा है। इसके लिए भावांतर भरपाई योजना–शहद के तहत पंजीकरण ज़रूरी है। अधिकतम 250 कॉलोनियाँ और 250 बक्से बीमा हो सकते हैं।
प्रश्न 6: नुकसान होने पर मुआवज़ा कितना मिलेगा?
उत्तर: मुआवज़ा नुकसान के प्रतिशत पर निर्भर करता है — 26–50% नुकसान पर बीमा राशि का 50%, 51–75% पर 75% और 75% से ज़्यादा नुकसान पर पूरी 100% राशि मिलती है। सब्ज़ी फसल पर अधिकतम ₹30,000 और फल पर ₹40,000 प्रति एकड़ मिलता है।
प्रश्न 7: बागवानी बीमा और PMFBY में क्या फर्क है?
उत्तर: PMFBY धान-गेहूं जैसी खेत की फसलों के लिए है, जबकि बागवानी बीमा (MBBY) सब्ज़ी, फल और मसालों जैसी बागवानी फसलों के लिए है। दोनों के पोर्टल और प्रीमियम अलग हैं।
प्रश्न 8: बागवानी बीमा की अंतिम तारीख क्या है?
उत्तर: रजिस्ट्रेशन की अवधि सीज़न के हिसाब से बागवानी विभाग तय करता है। 2026 का रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर खुला है — ताज़ा अंतिम तारीख के लिए mbby.hortharyana.gov.in पर जाँच लें।
स्रोत: हरियाणा सरकार, बागवानी विभाग — आधिकारिक पोर्टल mbby.hortharyana.gov.in; मेरी फसल मेरा ब्योरा fasal.haryana.gov.in; Rural Voice (अंग्रेज़ी), 27 अक्टूबर 2026 (मधुमक्खी पालन विस्तार, ₹50 प्रीमियम, ₹1,250 कवर, हेल्पलाइन 1800-180-2021); UNI, 24 अक्टूबर 2026 (मधुमक्खी पालन विस्तार); द इंडियन एक्सप्रेस (योजना की शुरुआत, सितंबर 2021, 21 फसलें, प्रीमियम/बीमा राशि); सरकार की योजना जानकारी (46 फसलें, 2.5% प्रीमियम, मुआवज़ा स्लैब)। राशि और नियमों में समय-समय पर बदलाव हो सकता है — आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर ताज़ा जानकारी ज़रूर जाँच लें।

प्रातिक्रिया दे