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सरकारी योजनाएँ

हरियाणा कैशलेस चिकित्सा योजना 2026: कर्मचारियों को ₹5 लाख इलाज

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा कैशलेस चिकित्सा योजना 2026: कर्मचारियों को ₹5 लाख इलाज
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 7:16 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा कैशलेस चिकित्सा योजना क्या है?

हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य विभाग की कैशलेस चिकित्सा सुविधा — जिसे हरियाणा कर्मचारी कैशलेस स्वास्थ्य योजना (Haryana Employees Cashless Health Scheme — HECHS) भी कहा जाता है — राज्य के नियमित सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के लिए है। इसके तहत पात्र व्यक्ति सूचीबद्ध (empanelled) अस्पतालों में ₹5 लाख तक का इलाज बिना कोई पैसा चुकाए करा सकता है — अस्पताल का बिल सीधे सरकार चुकाती है।

यह योजना कोई “आवेदन करके लोन लेने” वाली योजना नहीं है — यह एक सेवा/सुविधा है। कर्मचारी को इसके लिए कोई अलग से आवेदन फॉर्म भरकर “योजना में शामिल” नहीं होना होता; पात्रता उसकी नौकरी/पेंशन से तय होती है, और लाभ लेने के लिए उसे अपना ई-कार्ड (CCHF कार्ड) बनवाकर सूचीबद्ध अस्पताल में दिखाना होता है। इस गाइड में हम यही समझा रहे हैं — कौन पात्र है, कार्ड कैसे बनता है, किन अस्पतालों में इलाज मिलेगा और अस्पताल में कैशलेस सुविधा का इस्तेमाल कैसे करें।

योजना का सफर — सीमित सुविधा से सभी कर्मचारियों तक

2017 — सीमित कैशलेस सुविधा: हरियाणा सरकार ने 20 नवंबर 2017 के पत्र से सीमित कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू की, जो 30 नवंबर 2017 से लागू हुई। इसमें सिर्फ 7 चिकित्सा स्थितियों के लिए कैशलेस इलाज मिलता था, और कुल सीमा ₹5 लाख थी। इससे ज़्यादा खर्च होने पर बाकी रकम मौजूदा चिकित्सा प्रतिपूर्ति (medical reimbursement) नीति के तहत क्लेम की जा सकती थी।

2023 — पायलट विस्तार: 1 नवंबर 2023 से कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को पायलट आधार पर मत्स्य पालन (Fisheries) और बागवानी (Horticulture) विभागों के सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रितों तक बढ़ाया गया।

2024 — सभी नियमित कर्मचारियों तक: जनवरी 2024 में सरकार ने इस सुविधा को राज्य के सभी नियमित सरकारी कर्मचारियों तक बढ़ा दिया। अब इसमें छह जानलेवा आपात स्थितियाँ — हृदय संबंधी आपातकाल, मस्तिष्क रक्तस्राव (cerebral haemorrhage), कोमा, बिजली का झटका (electric shock), कैंसर की तीसरी और चौथी अवस्था, और दुर्घटनाएँ — शामिल हैं, साथ ही सभी प्रकार के इनडोर इलाज और डे-केयर प्रक्रियाएँ भी कैशलेस हैं।

2026 — अस्पताल सूची का नवीनीकरण: 16 सितंबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों/निजी मेडिकल कॉलेजों के पैनल में शामिल करने की नई नीति (Empanelment Policy-2026) जारी की, जिसके तहत NABH या JCI मान्यता वाले अस्पताल ही सूची में शामिल हो सकते हैं।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम हरियाणा कर्मचारी कैशलेस स्वास्थ्य योजना (HECHS) / कैशलेस चिकित्सा सुविधा (CCHF)
विभाग स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा
लाभार्थी राज्य के नियमित सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रित
कवर राशि ₹5,00,000 तक कैशलेस इलाज
कार्ड ई-कार्ड / CCHF कार्ड (पेयी कोड, आधार नंबर या PPP नंबर से उपयोग)
अस्पताल सभी सरकारी अस्पताल, सरकारी मेडिकल कॉलेज और सूचीबद्ध निजी अस्पताल
इलाज का दायरा 6 जानलेवा आपात स्थितियाँ + सभी इनडोर इलाज + डे-केयर प्रक्रियाएँ
पैकेज दरें 1340 तय दर वाले पैकेज/इम्प्लांट या गैर-पैकेज दरें
आधिकारिक पोर्टल cashless.haryanahealth.gov.in; haryanahealth.nic.in
आवेदन कोई अलग आवेदन फॉर्म नहीं — पात्रता नौकरी/पेंशन से तय; ई-कार्ड बनवाना होता है

कौन पात्र है?

  • नियमित सरकारी कर्मचारी — हरियाणा सरकार के सभी विभागों के नियमित (regular) कर्मचारी।
  • पेंशनर — राज्य सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी (पेंशन भुगतान आदेश — PPO — के आधार पर)।
  • आश्रित — कर्मचारी/पेंशनर के पति/पत्नी और आश्रित परिजन। आश्रित की आय सीमा के बारे में स्वास्थ्य विभाग के 13 जुलाई 2026 के पत्र के अनुसार आश्रित की आय सीमा बढ़ाकर ₹9,000 प्रति माह कर दी गई है।
  • किसे नहीं मिलता: जो व्यक्ति पहले से किसी अन्य सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का लाभ ले रहा हो — जैसे CGHS, ECHS, रेलवे स्वास्थ्य सेवा, सशस्त्र बलों/अर्धसैनिक बलों की स्वास्थ्य सुविधा — वह इसके दायरे में नहीं आता। यही कारण है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को चिरायु योजना के दायरे से भी बाहर रखा गया है।

ध्यान दें: अनुबंध (contractual) या दैनिक वेतन वाले कर्मचारी इस सुविधा के दायरे में आते हैं या नहीं, इसकी पुष्टि अपने विभाग से करें — योजना की घोषणाएँ “नियमित कर्मचारियों” की बात करती हैं।

किन बीमारियों और इलाजों पर कैशलेस सुविधा मिलती है?

मूल सीमित सुविधा में 7 स्थितियाँ थीं; 2024 के विस्तार के बाद दायरा इस प्रकार है:

श्रेणी विवरण
जानलेवा आपात स्थितियाँ (6) हृदय आपातकाल (cardiac emergency), मस्तिष्क रक्तस्राव, कोमा, बिजली का झटका, कैंसर की तीसरी/चौथी अवस्था, दुर्घटनाएँ
इनडोर इलाज सभी प्रकार के अस्पताल में भर्ती होकर होने वाले इलाज
डे-केयर प्रक्रियाएँ वे प्रक्रियाएँ जिनमें भर्ती की ज़रूरत नहीं, लेकिन अस्पताल में ही होती हैं (जैसे डायलिसिस, CT स्कैन, MRI, कार्डियक कैथ लैब जाँच)
सरकारी अस्पताल सभी 67+ सरकारी अस्पताल, जिला अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज

₹5 लाख से ज़्यादा खर्च होने पर बाकी रकम मौजूदा चिकित्सा प्रतिपूर्ति नीति के तहत क्लेम की जा सकती है — यानी ₹5 लाख के बाद भी इलाज का खर्च पूरी तरह आपकी जेब से नहीं जाता, बस प्रक्रिया बदल जाती है।

ई-कार्ड (CCHF कार्ड) कैसे बनता है?

कैशलेस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए कर्मचारी/पेंशनर के पास ई-कार्ड (CCHF कार्ड) होना ज़रूरी है। कार्ड बनवाने की प्रक्रिया इस प्रकार है:

चरण 1: अपने विभाग से आधार-सक्षम पहचान पत्र बनवाएं। पेंशनरों के लिए पेंशन भुगतान आदेश (PPO) नंबर ज़रूरी होता है। विभागों को अपने कर्मचारियों के ये कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए थे।

चरण 2: कार्ड पर आपका पेयी कोड (Payee Code) दर्ज होता है। इसके अलावा लाभ लेने के लिए आधार नंबर या परिवार पहचान पत्र (PPP) नंबर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

चरण 3: अगर आपका ई-कार्ड अभी तक नहीं बना है, तो अपने विभाग के प्रशासन/स्थापना शाखा या जिला स्वास्थ्य कार्यालय से संपर्क करें और कार्ड जारी करवाएं। कार्ड बनने से पहले इलाज की ज़रूरत पड़ जाए, तो भी विभाग से तुरंत संपर्क करें — अस्पताल में भर्ती होने पर कार्ड की जानकारी बाद में भी दी जा सकती है, इसकी पुष्टि अस्पताल के हेल्प डेस्क से करें।

अस्पताल में कैशलेस इलाज कैसे लें? — स्टेप बाय स्टेप

चरण 1 — सूचीबद्ध अस्पताल चुनें: इलाज से पहले जाँच लें कि अस्पताल सूचीबद्ध है या नहीं। सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची cashless.haryanahealth.gov.in पर उपलब्ध है। सभी सरकारी अस्पताल और सरकारी मेडिकल कॉलेज स्वतः शामिल हैं।

चरण 2 — अस्पताल के हेल्प डेस्क पर जाएँ: सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में सरकार की ओर से हेल्प सेंटर बने होते हैं और एक नोडल अधिकारी नियुक्त होता है। भर्ती के समय अपना ई-कार्ड/CCHF कार्ड, आधार कार्ड और PPP नंबर दिखाएं।

चरण 3 — कैशलेस मंज़ूरी: अस्पताल आपकी पात्रता और इलाज की जाँच करके एकीकृत प्लेटफॉर्म के ज़रिए सरकार से मंज़ूरी लेता है। मंज़ूरी मिलने पर इलाज बिना अग्रिम भुगतान के शुरू हो जाता है।

चरण 4 — इलाज और छुट्टी: इलाज पूरा होने पर आपको ₹5 लाख तक का कोई बिल नहीं चुकाना होता — अस्पताल का भुगतान सरकार करती है। छुट्टी के समय डिस्चार्ज सारांश और बिल की कॉपी संभालकर रखें।

चरण 5 — ₹5 लाख से ज़्यादा खर्च हो तो: अगर इलाज का खर्च ₹5 लाख से ज़्यादा हो, तो बाकी रकम के लिए अपने विभाग में चिकित्सा प्रतिपूर्ति (reimbursement) का क्लेम लगाएं — इसके लिए मेडिकल बिल, डिस्चार्ज सारांश और डॉक्टर का प्रमाण पत्र लगेगा।

ज़रूरी दस्तावेज़

क्रम दस्तावेज़
1 ई-कार्ड / CCHF कार्ड (पेयी कोड सहित)
2 आधार कार्ड
3 परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी)
4 विभागीय पहचान पत्र (कर्मचारी के लिए) / PPO नंबर (पेंशनर के लिए)
5 आश्रित का प्रमाण (पति/पत्नी/बच्चों के लिए, जहाँ लागू हो)
6 डॉक्टर की सलाह/भर्ती का पर्चा

शुल्क और समय-सीमा

शुल्क: कर्मचारी/पेंशनर को इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता — पूरा खर्च ₹5 लाख तक सरकार वहन करती है। अस्पतालों को उनके बिल का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में किया जाता है (शुरुआती व्यवस्था में बिल मिलने के 60 दिनों के भीतर भुगतान का प्रावधान था)।

समय-सीमा: यह एक स्थायी सुविधा है, कोई अंतिम तिथि नहीं है। अस्पतालों की सूची समय-समय पर अपडेट होती रहती है — इलाज से पहले सूची ज़रूर जाँच लें, क्योंकि कोई अस्पताल सूची से हटाया भी जा सकता है।

ध्यान देने योग्य बातें

  • यह लोन या नकद योजना नहीं है — इसमें आपके खाते में कोई पैसा नहीं आता; लाभ सीधे अस्पताल को भुगतान के रूप में मिलता है।
  • सूचीबद्ध अस्पताल ही: सिर्फ सूचीबद्ध (empanelled) अस्पतालों में ही कैशलेस सुविधा मिलती है। बिना सूची वाले अस्पताल में इलाज कराने पर पहले खुद भुगतान करना पड़ सकता है, और बाद में प्रतिपूर्ति का क्लेम लगाना होगा।
  • कार्ड पहले से बनवाकर रखें: आपात स्थिति में कार्ड न होने से दिक्कत हो सकती है — इसलिए ई-कार्ड पहले से बनवाकर रखना सबसे अच्छा है।
  • चिरायु से अलग है: चिरायु योजना आम परिवारों के लिए है; सरकारी कर्मचारी और पेंशनर चिरायु के दायरे से बाहर हैं, क्योंकि उनके लिए यही कैशलेस सुविधा है।
  • फर्ज़ी एजेंटों से सावधान: ई-कार्ड बनवाने के नाम पर कोई पैसे माँगे, तो अपने विभाग से शिकायत करें। कार्ड विभाग के ज़रिए बनता है, किसी एजेंट के ज़रिए नहीं।

सरकारी कर्मचारियों और परिवारों के लिए अन्य योजनाएँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हरियाणा कैशलेस चिकित्सा योजना में कितना इलाज मुफ्त मिलता है?

₹5 लाख तक का इलाज सूचीबद्ध अस्पतालों में पूरी तरह कैशलेस है। इससे ज़्यादा खर्च होने पर बाकी रकम चिकित्सा प्रतिपूर्ति (reimbursement) के तहत क्लेम की जा सकती है।

2. कौन-कौन इस योजना का लाभ ले सकता है?

हरियाणा सरकार के सभी नियमित कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रित। अनुबंध कर्मचारियों की पात्रता के बारे में अपने विभाग से पुष्टि करें।

3. ई-कार्ड (CCHF कार्ड) कैसे बनेगा?

आपका विभाग आधार-सक्षम पहचान पत्र जारी करता है; पेंशनरों के लिए PPO नंबर ज़रूरी है। कार्ड पर पेयी कोड होता है, और आधार या PPP नंबर से भी लाभ लिया जा सकता है।

4. किन अस्पतालों में कैशलेस इलाज मिलेगा?

सभी सरकारी अस्पतालों, सरकारी मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में। पूरी सूची cashless.haryanahealth.gov.in पर देखी जा सकती है।

5. क्या इस योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है?

नहीं। यह कोई आवेदन वाली योजना नहीं है — पात्रता नौकरी/पेंशन से तय होती है। सिर्फ ई-कार्ड बनवाना होता है और सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज लेना होता है।

6. क्या सरकारी कर्मचारी चिरायु योजना का लाभ ले सकते हैं?

नहीं। सरकारी कर्मचारी, पेंशनर और उनके आश्रित चिरायु योजना के दायरे से बाहर रखे गए हैं, क्योंकि उनके लिए यही कैशलेस चिकित्सा सुविधा है।

7. अस्पताल का बिल सरकार कब चुकाती है?

अस्पतालों को उनके बिल का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में किया जाता है। मरीज़ को ₹5 लाख तक की सीमा में कोई भुगतान नहीं करना होता।

आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक

  • कैशलेस स्वास्थ्य पोर्टल (सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची): cashless.haryanahealth.gov.in
  • स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा: haryanahealth.nic.in
  • अंत्योदय सरल पोर्टल: saralharyana.gov.in
  • सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400 (सुबह 7 बजे – रात 8 बजे, सोमवार–शनिवार)

अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की घोषणाओं, कैशलेस स्वास्थ्य पोर्टल और योजना से जुड़े सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। अस्पतालों की सूची और पात्रता नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं — इलाज से पहले cashless.haryanahealth.gov.in पर ताज़ा सूची और अपने विभाग से अपनी पात्रता ज़रूर जाँच लें।

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