देवी रूपक योजना क्या है?
देवी रूपक योजना हरियाणा सरकार की एक पुरानी परिवार कल्याण योजना है, जो 25 सितंबर 2002 से लागू हुई थी। इसका नाम पूर्व उप-प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के नाम पर रखा गया था, और इसकी घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने देवीलाल जी की जयंती पर जींद में हुई एक रैली में की थी।
योजना का मकसद दोहरा था — बेटियों के प्रति सम्मान बढ़ाना और जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाना। उस समय हरियाणा में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या लगातार घट रही थी, और सरकार “हम दो, हमारा एक” का नारा देकर छोटे परिवार को बढ़ावा देना चाहती थी। इसलिए योजना में पहली बेटी के जन्म के बाद परिवार नियोजन अपनाने वाले दंपती को सबसे ज़्यादा प्रोत्साहन दिया गया।
योजना की मूल बात यह थी: जो दंपती पहले बच्चे के जन्म के बाद या दोनों बेटियों के जन्म के बाद स्थायी परिवार नियोजन विधि (नसबंदी — पुरुष नसबंदी या महिला नसबंदी) अपनाता है, उसे 20 साल तक हर महीने एक तय प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि सीधे दंपती के संयुक्त बैंक खाते में जमा की जाती थी।
सबसे ज़रूरी बात — कृपया इसे ध्यान से पढ़ें: यह एक 2002 की योजना है, जिसका नामांकन उस समय के नियमों के तहत ग्राम पंचायत या नगरपालिका में पंजीकरण से होता था। 2026 में SARAL पोर्टल पर इस योजना के नए नामांकन का कोई सबूत नहीं मिला है। इसलिए इस गाइड में हम “अभी आवेदन करें” जैसा कोई दावा नहीं कर रहे हैं। नीचे योजना की पूरी जानकारी, उसकी शर्तें और मौजूदा स्थिति — तीनों ईमानदारी से दिए गए हैं। अगर आप इस योजना के लाभार्थी हैं या बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने ज़िले के स्वास्थ्य विभाग (CMO कार्यालय) से ताज़ा स्थिति की पुष्टि करें।
योजना एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | देवी रूपक योजना (Devi Rupak Yojana) |
| लागू | 25 सितंबर 2002 से |
| विभाग | स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा |
| मकसद | एक बच्चे का मानदंड, बेटियों के प्रति सम्मान, जनसंख्या नियंत्रण |
| प्रोत्साहन अवधि | स्थायी विधि अपनाने की तारीख से 20 साल तक |
| भुगतान का तरीका | दंपती के संयुक्त बैंक खाते में मासिक जमा |
| नामांकन का तरीका (मूल नियम) | ग्राम पंचायत / नगरपालिका में विवाह के बाद पंजीकरण |
| SARAL पर नए नामांकन | 2026 में कोई सबूत नहीं मिला — जिला स्वास्थ्य कार्यालय से पुष्टि करें |
| आधिकारिक पोर्टल | haryanahealth.nic.in; saralharyana.gov.in (ताज़ा स्थिति जाँचने के लिए) |
प्रोत्साहन राशि — कितनी मिलती थी?
योजना के तहत मासिक प्रोत्साहन राशि इस प्रकार तय की गई थी:
| क्रम | किस स्थिति में | मासिक प्रोत्साहन |
|---|---|---|
| 1 | पहले बच्चे के रूप में बेटी के जन्म के बाद स्थायी विधि अपनाने पर | ₹500 प्रति माह |
| 2 | पहले बच्चे के रूप में बेटे के जन्म के बाद स्थायी विधि अपनाने पर | ₹200 प्रति माह |
| 3 | दूसरी बेटी के जन्म के बाद स्थायी विधि अपनाने पर (दोनों बच्चे बेटियाँ हों) | ₹200 प्रति माह |
यह राशि 20 साल तक हर महीने दी जानी थी। यानी पहली बेटी के बाद नसबंदी अपनाने वाले दंपती को 20 साल में कुल ₹1,20,000 (₹500 × 240 महीने) तक मिल सकते थे। राशि को जानबूझकर ₹500 प्रति माह तक सीमित रखा गया था, ताकि लाभार्थी आयकर के दायरे में न आएँ।
यह भी तय था कि अगर नसबंदी को उलटवाया (recanalisation) जाता है, तो सरकार को पूरी दी गई राशि वापस लेने का अधिकार होगा। साथ ही यह व्यवस्था थी कि माता-पिता में से किसी एक या दोनों की मृत्यु के बाद भी भुगतान जारी रहेगा, और अगर बच्चे की मृत्यु हो जाए, तो दंपती के पास भुगतान जारी रखने या सरकारी खर्च पर नसबंदी उलटवाने का विकल्प होगा।
पात्रता — मूल नियम क्या थे?
योजना के मूल नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें इस प्रकार थीं:
- पंजीकरण अनिवार्य — दंपती को विवाह के तुरंत बाद अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायत या नगरपालिका में पंजीकरण कराना होता था।
- आयकर दाता नहीं — दंपती में से कोई भी साथी आयकर दाता नहीं होना चाहिए।
- स्थायी विधि अपनाना — पहले बच्चे के जन्म के बाद या दोनों बेटियों के जन्म के बाद पुरुष नसबंदी (Vasectomy) या महिला नसबंदी (Tubectomy) अपनानी होती थी।
- 25 सितंबर 2002 से पहले विवाहित दंपती — पति की आयु 25.9.2002 को 45 साल या कम और पत्नी की आयु 40 साल या कम होनी चाहिए थी, और दोनों में से किसी की भी नसबंदी 25.9.2002 से पहले नहीं हुई होनी चाहिए थी। ऐसे दंपतियों को घोषणा के बाद सिर्फ तीन महीने का समय दिया गया था।
- 25 सितंबर 2002 के बाद विवाहित दंपती — इन्हें पंजीकरण कराकर यह शपथ-पत्र देना होता था कि वे विवाह के दो साल के भीतर कोई बच्चा पैदा नहीं करेंगे, और प्रसव के 90 दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना होता था। (2003 की रिपोर्टों के अनुसार सरकार इन शर्तों में ढील देने पर विचार कर रही थी, ताकि विवाह के पहले साल में बच्चा होने वाले दंपती भी योजना का लाभ ले सकें।)
- स्वैच्छिक निर्णय — परिवार नियोजन अपनाना पूरी तरह स्वैच्छिक था; योजना में किसी तरह की ज़बरदस्ती का प्रावधान नहीं था।
योजना का शुरुआती हाल
योजना की शुरुआत में इसे लेकर काफी चर्चा हुई थी, लेकिन अमल में चुनौतियाँ भी सामने आईं। 2003 की एक रिपोर्ट के अनुसार योजना के पहले कुछ महीनों में राज्य भर में सिर्फ 181 दंपतियों को ही इसका लाभ मिल पाया था, जबकि लगभग 3,000 दंपती स्वास्थ्य विभाग के पास पंजीकृत थे। अधिकारियों ने खुद माना था कि ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं से सही आँकड़े जुटाना और योजना की निगरानी करना एक बड़ी चुनौती थी।
समय के साथ परिवार नियोजन की नीतियाँ और स्वास्थ्य कार्यक्रम बदलते गए — जननी सुरक्षा योजना, आशा कार्यकर्ता व्यवस्था, मिशन परिवार विकास और बाद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत परिवार नियोजन सेवाएँ एक अलग ढाँचे में चलने लगीं। देवी रूपक जैसी पुरानी प्रोत्साहन योजना का नाम धीरे-धीरे सार्वजनिक चर्चा से गायब हो गया।
2026 में मौजूदा स्थिति — ईमानदार जानकारी
नए नामांकन के बारे में: 2026 में SARAL पोर्टल (saralharyana.gov.in) पर “देवी रूपक” नाम की कोई सक्रिय सेवा सूचीबद्ध होने का सबूत हमें नहीं मिला है। इसका मतलब यह है कि इस योजना के लिए ऑनलाइन “अभी आवेदन करें” का रास्ता मौजूद नहीं दिखता। योजना का मूल नामांकन ग्राम पंचायत/नगरपालिका पंजीकरण पर आधारित था, जो 2002 के समय का तरीका था।
पुराने लाभार्थियों के बारे में: योजना के तहत 20 साल की प्रोत्साहन अवधि तय थी। 2002–2003 में जुड़े दंपतियों की 20 साल की अवधि 2022–2023 के आसपास पूरी हो चुकी होगी। अगर कोई दंपती अब भी भुगतान पा रहा है या भुगतान रुका हुआ है, तो उसका रिकॉर्ड जिला स्वास्थ्य विभाग के पास होगा।
अगर आप जानना चाहते हैं कि आप पात्र हैं या नहीं, तो क्या करें:
- अपने ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय या जिला स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें और पूछें कि देवी रूपक योजना के तहत नए नामांकन अभी खुले हैं या नहीं।
- अपने गाँव की ग्राम पंचायत या शहर की नगरपालिका से भी पूछा जा सकता है, क्योंकि मूल नियमों में पंजीकरण वहीं होता था।
- SARAL पोर्टल (saralharyana.gov.in) पर स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं की सूची में योजना का नाम खोजकर देखें — अगर वहाँ सूचीबद्ध हो, तो पोर्टल की प्रक्रिया ही अंतिम होगी।
- अपनी नज़दीकी आशा कार्यकर्ता या ANM से भी परिवार नियोजन से जुड़ी मौजूदा सुविधाओं के बारे में पूछा जा सकता है।
हमारी सलाह: इस योजना के नाम पर कोई भी व्यक्ति अगर पैसे लेकर “नामांकन करवाने” का दावा करे, तो वह धोखा हो सकता है। असली जानकारी सिर्फ जिला स्वास्थ्य विभाग से ही लें।
आज परिवार नियोजन के लिए क्या सुविधाएँ हैं?
देवी रूपक योजना के अलावा, आज परिवार नियोजन की सेवाएँ स्वास्थ्य विभाग के सामान्य ढाँचे से मिलती हैं — सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर नसबंदी सहित परिवार नियोजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, और इसके लिए आशा कार्यकर्ता व ANM मार्गदर्शन देती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए जननी सुरक्षा योजना और मुफ्त प्रसव की सुविधा (JSSK) भी उपलब्ध है, जिसकी जानकारी हमारी स्वास्थ्य योजनाओं की गाइडों में दी गई है।
ज़रूरी दस्तावेज़ (मूल नियमों के अनुसार)
योजना के मूल नियमों के तहत नामांकन के लिए ये चीज़ें ज़रूरी थीं:
| क्रम | दस्तावेज़/शर्त |
|---|---|
| 1 | ग्राम पंचायत / नगरपालिका में विवाह पंजीकरण का प्रमाण |
| 2 | शपथ-पत्र (विवाह के दो साल के भीतर बच्चा न पैदा करने का — 2002 के बाद विवाहित दंपतियों के लिए) |
| 3 | बच्चे के जन्म की सूचना — प्रसव के 90 दिनों के भीतर स्वास्थ्य विभाग को |
| 4 | नसबंदी का प्रमाण पत्र (सरकारी अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्र से) |
| 5 | संयुक्त बैंक खाते की जानकारी |
| 6 | आयकर दाता न होने का प्रमाण/घोषणा |
नोट: यह सूची 2002 के मूल नियमों पर आधारित है। अगर योजना के तहत कोई नई प्रक्रिया 2026 में मौजूद है, तो जिला स्वास्थ्य कार्यालय का लाइव फॉर्म ही अंतिम होगा।
ध्यान देने योग्य बातें
- यह “अभी आवेदन करें” वाली योजना नहीं है — 2026 में इसके नए नामांकन का कोई सबूत नहीं मिला है। इसे इतिहास और मौजूदा स्थिति के रूप में पढ़ें, न कि सक्रिय आवेदन वाली योजना के रूप में।
- प्रोत्साहन राशि 2002 के हिसाब से तय थी — ₹500/₹200 प्रति माह के आँकड़े योजना की घोषणा के समय के हैं; इनमें बाद में कोई बदलाव हुआ हो, तो उसकी जानकारी जिला स्वास्थ्य विभाग से ही मिलेगी।
- स्वैच्छिकता: परिवार नियोजन का फैसला पूरी तरह दंपती का अपना होता है। कोई भी योजना या व्यक्ति इस फैसले के लिए दबाव नहीं डाल सकता।
- फर्ज़ी दावों से सावधान: देवी रूपक योजना के नाम पर पैसे माँगने वाले किसी भी व्यक्ति या वेबसाइट पर भरोसा न करें।
स्वास्थ्य और महिलाओं से जुड़ी अन्य योजनाएँ
- मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना — हरियाणा: सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा।
- निरोगी हरियाणा योजना — मुफ्त स्वास्थ्य जाँच: मुफ्त स्वास्थ्य जाँच की योजना।
- लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता — हरियाणा: बेटियों के लिए सामाजिक सुरक्षा भत्ता योजना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. देवी रूपक योजना में कितने पैसे मिलते थे?
पहली बेटी के जन्म के बाद नसबंदी अपनाने पर ₹500 प्रति माह, पहले बेटे के जन्म पर ₹200 प्रति माह और दूसरी बेटी के जन्म पर ₹200 प्रति माह — 20 साल तक।
2. क्या देवी रूपक योजना में 2026 में आवेदन किया जा सकता है?
ईमानदार जवाब यह है कि 2026 में SARAL पोर्टल पर इस योजना के नए नामांकन का कोई सबूत नहीं मिला है। नए नामांकन की ताज़ा स्थिति अपने ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय या जिला स्वास्थ्य विभाग से ज़रूर जाँच लें।
3. देवी रूपक योजना कब शुरू हुई थी?
25 सितंबर 2002 से। इसकी घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने चौधरी देवीलाल की जयंती पर जींद में की थी।
4. इस योजना के लिए कहाँ पंजीकरण कराना होता था?
मूल नियमों के अनुसार दंपती को विवाह के बाद अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायत या नगरपालिका में पंजीकरण कराना होता था।
5. क्या नसबंदी उलटवाने पर पैसा वापस करना पड़ता था?
हाँ, मूल नियमों के अनुसार अगर दंपती नसबंदी उलटवाता था, तो सरकार को दी गई पूरी प्रोत्साहन राशि वापस लेने का अधिकार था।
6. यह योजना किस विभाग की थी?
स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा की। योजना का क्रियान्वयन जिला स्वास्थ्य विभाग और ग्राम पंचायतों/नगरपालिकाओं के माध्यम से होता था।
7. क्या इस योजना में ऑनलाइन आवेदन होता है?
मूल योजना में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं थी — पंजीकरण पंचायत/नगरपालिका स्तर पर होता था। 2026 में SARAL पर भी इसकी सक्रिय सूची नहीं मिली है।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा: haryanahealth.nic.in
- अंत्योदय सरल पोर्टल (ताज़ा स्थिति जाँचने के लिए): saralharyana.gov.in
- योजना की घोषणा और विवरण की समकालीन रिपोर्टें: टाइम्स ऑफ इंडिया (सितंबर 2002), इंडियन एक्सप्रेस (2003)
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी देवी रूपक योजना की 2002 की घोषणा, उसके मूल नियमों और समकालीन रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। 2026 में योजना के नए नामांकन की स्थिति की पुष्टि किसी आधिकारिक स्रोत से नहीं हो पाई है — इसलिए इसे सक्रिय “अभी आवेदन करें” वाली योजना के रूप में न पढ़ें। ताज़ा स्थिति के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग (CMO कार्यालय) से संपर्क करें; वहाँ की जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी।

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