PMFBY Rabi 2026-27: हरियाणा में फसल बीमा — 1.5% प्रीमियम, 31 दिसंबर अंतिम तारीख
रबी की बुवाई के साथ ही हरियाणा के किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि अगर ओलावृष्टि, बेमौसम बारिश, सूखा या कीट-रोग से फसल खराब हो गई तो भरपाई कैसे होगी। इसका जवाब है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) — केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना, जिसमें रबी फसलों के लिए किसान को बीमा राशि का सिर्फ 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है और बाकी प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकार मिलकर भरती हैं। रबी 2026-27 के लिए नामांकन आमतौर पर 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होता है और 31 दिसंबर 2026 अंतिम तारीख मानी जाती है। PMFBY Rabi 2026 Haryana की पूरी जानकारी इस लेख में दी गई है।
यह लेख हरियाणा के किसानों के लिए लिखा गया है। इसमें योजना क्या है, कौन पात्र है, कौन-सी फसलें कवर होती हैं, कितना प्रीमियम लगेगा, कौन-से दस्तावेज़ चाहिए, ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन कैसे करें और नुकसान होने पर क्लेम कैसे मिलेगा — यह सब विस्तार से बताया गया है।
जरूरी सावधानी: PMFBY में हर मौसम की अंतिम तारीख, अधिसूचित फसलें, बीमा राशि और बीमा कंपनी राज्य की अधिसूचना से तय होती हैं। इस लेख में दी गई 31 दिसंबर की तारीख पूरे देश में रबी के लिए अपनाया जाने वाला सामान्य पैटर्न है। हरियाणा के लिए अपने जिले और अपनी फसल की सही अंतिम तारीख, अधिसूचित फसल की सूची और बीमा राशि आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in पर जरूर जांच लें। पोर्टल पर दिख रही जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी।
एक नजर में — PMFBY रबी 2026-27
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) |
| योजना का प्रकार | केंद्र सरकार की योजना (केंद्रीय योजना) — हरियाणा में राज्य अधिसूचना के अनुसार लागू |
| संचालन | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार |
| शुरुआत | 18 फरवरी 2016 |
| रबी मौसम | रबी 2026-27 |
| नामांकन की अवधि | आमतौर पर 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 (राज्य अधिसूचना से पुष्टि करें) |
| रबी फसलों पर किसान का प्रीमियम | बीमा राशि का अधिकतम 1.5% |
| आधिकारिक पोर्टल | pmfby.gov.in (राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल) |
| क्लेम हेल्पलाइन | 14447 (कृषि रक्षक हेल्पलाइन, टोल-फ्री) |
PMFBY क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भारत सरकार की राष्ट्रीय फसल बीमा योजना है, जिसे 18 फरवरी 2016 को शुरू किया गया था। इसका मकसद है कि प्राकृतिक आपदा या अन्य रोकी न जा सकने वाली वजह से फसल खराब होने पर किसान को आर्थिक सुरक्षा मिले और वह अगले मौसम की बुवाई के लिए फिर से खड़ा हो सके।
यह योजना बुवाई से पहले के जोखिम, खड़ी फसल के नुकसान और कटाई के बाद के निर्धारित नुकसान — तीनों चरणों को कवर करती है। यानी सिर्फ खेत में खड़ी फसल ही नहीं, बल्कि बुवाई न हो पाने और कटाई के बाद खेत में पड़ी फसल को हुए निर्धारित नुकसान पर भी नियमानुसार दावा किया जा सकता है।
यह हरियाणा सरकार की योजना नहीं है। यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसे हरियाणा में राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत लागू किया जाता है। राज्य सरकार तय करती है कि किस जिले में कौन-सी फसल अधिसूचित होगी, बीमा राशि कितनी होगी और किस बीमा कंपनी को कौन-सा क्षेत्र मिलेगा। इसलिए हरियाणा के किसान को अपनी फसल का बीमा कराने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसकी फसल उसके जिले में इस रबी मौसम के लिए अधिसूचित है या नहीं। अगर फसल अधिसूचित नहीं है, तो आवेदन करने पर भी वैध कवर नहीं मिलेगा।
हरियाणा में रबी 2026-27 में कौन-सी फसलें कवर होती हैं?
हरियाणा में रबी मौसम की मुख्य फसलें गेहूं, सरसों (राया), चना और जौ हैं। इसके अलावा मसूर जैसी दलहनी फसलें भी रबी में बोई जाती हैं। पिछले मौसमों की अधिसूचनाओं के अनुसार हरियाणा में रबी के लिए आम तौर पर गेहूं, जौ, चना और सरसों (राया) अधिसूचित फसलें रही हैं।
| हरियाणा की मुख्य रबी फसल | किस्म / टिप्पणी |
|---|---|
| गेहूं | राज्य की सबसे बड़ी रबी फसल; लगभग हर जिले में बोई जाती है |
| सरसों (राया) | प्रमुख तिलहनी फसल; रबी खरीद में भी अहम |
| चना | दलहनी फसल; कम पानी वाले इलाकों में बोई जाती है |
| जौ | रबी की पारंपरिक फसल |
| मसूर व अन्य दलहन | जिले की अधिसूचना के अनुसार |
ध्यान दें: ऊपर दी गई सूची सामान्य जानकारी है। रबी 2026-27 के लिए हरियाणा की जिलेवार अधिसूचित फसलों की अंतिम सूची इस लेख के तैयार होने तक सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। आवेदन से पहले pmfby.gov.in पर अपने जिले की अधिसूचना जरूर देखें या अपने जिला कृषि कार्यालय व बैंक शाखा से पूछें।
बागवानी फसलों के लिए अलग व्यवस्था भी है — हरियाणा में बागवानी फसलों के लिए मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना चलती है, जिसकी जानकारी आप हमारी गाइड मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना, हरियाणा में पढ़ सकते हैं।
पात्रता — कौन बीमा करा सकता है?
PMFBY में वे सभी किसान पात्र हैं जो अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाते हैं। इसमें ये सभी श्रेणियां शामिल हैं:
- खुद की जमीन पर खेती करने वाले किसान — जिनके नाम जमीन का रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) है।
- किराएदार / बटाईदार किसान — जो दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं और जिनके पास किरायेदारी या बटाई का प्रमाण है।
- ऋणी किसान (Loanee) — जिन्होंने अधिसूचित फसल के लिए बैंक या सहकारी संस्था से फसल ऋण या किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लिया है।
- गैर-ऋणी किसान (Non-Loanee) — जिन्होंने कोई फसल ऋण नहीं लिया है; वे स्वेच्छा से बीमा कराते हैं।
2020 से ऋणी किसानों के लिए भी यह योजना स्वैच्छिक है। यानी बैंक से ऋण लेने वाले किसान भी चाहें तो योजना से बाहर रह सकते हैं — इसके लिए उन्हें अंतिम तारीख से कम से कम 7 दिन पहले अपने बैंक को लिखित घोषणा (ऑप्ट-आउट) देनी होती है। अगर किसान कोई घोषणा नहीं देता, तो बैंक ऋण देते समय नियमानुसार प्रीमियम काटकर नामांकन कर सकता है। गैर-ऋणी किसानों के लिए योजना शुरू से ही स्वैच्छिक है — उन्हें खुद आवेदन करना होता है।
क्या-क्या नुकसान कवर होता है?
PMFBY के तहत फसल को होने वाले नुकसान की मुख्य श्रेणियां इस प्रकार हैं:
| नुकसान का प्रकार | क्या कवर होता है |
|---|---|
| बुवाई न हो पाना (Prevented Sowing) | व्यापक सूखा या प्रतिकूल मौसमी हालात से बड़े क्षेत्र में बुवाई न हो पाए तो नियमानुसार दावा |
| खड़ी फसल का नुकसान | सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम बारिश, जलभराव, कीट व रोग से नुकसान |
| स्थानीय आपदा (Localised Calamity) | ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना, जलभराव जैसी स्थानीय घटनाएं — व्यक्तिगत खेत के आधार पर आकलन |
| कटाई के बाद का नुकसान | खेत में पड़ी कटी फसल को निर्धारित जोखिमों से हुआ नुकसान (नियमानुसार) |
| उपज में कमी (Yield Shortfall) | पूरे अधिसूचित क्षेत्र की औसत उपज तय सीमा से कम रहने पर क्षेत्र-आधारित दावा |
उपज में कमी वाले दावों में फसल कटाई प्रयोगों (Crop Cutting Experiments) से मिले आंकड़ों के आधार पर तय होता है कि कितना मुआवजा मिलेगा। ऐसे मामलों में अलग-अलग किसान की शिकायत पर नहीं, बल्कि पूरे अधिसूचित क्षेत्र की उपज के आधार पर सभी बीमित किसानों को एक समान प्रतिशत के हिसाब से भुगतान होता है।
प्रीमियम कितना देना होगा? — रबी में सिर्फ 1.5%
PMFBY की सबसे बड़ी खासियत इसका कम प्रीमियम है। किसान को बीमा राशि का एक छोटा, तय हिस्सा ही देना होता है; बाकी वास्तविक प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भरती हैं।
| फसल की श्रेणी | किसान का प्रीमियम (बीमा राशि का) |
|---|---|
| खरीफ — खाद्यान्न व तिलहन | अधिकतम 2% |
| रबी — खाद्यान्न व तिलहन | अधिकतम 1.5% |
| वाणिज्यिक व बागवानी फसलें | अधिकतम 5% |
बाकी बचा प्रीमियम (लगभग 95% से 98.5%) केंद्र और राज्य सरकार के बीच आमतौर पर 50:50 के अनुपात में बांटा जाता है। यानी अगर किसी किसान की बीमा राशि 50,000 रुपये है, तो रबी फसल पर उसे सिर्फ 750 रुपये प्रीमियम देना होगा — यह एक उदाहरण है, असली बीमा राशि जिले की अधिसूचना से तय होती है।
बीमा राशि (Sum Insured) कैसे तय होती है?
बीमा राशि किसान खुद तय नहीं करता। यह जिले की वित्तमान (Scale of Finance) के बराबर होती है, जिसे जिला स्तरीय तकनीकी समिति हर साल हर फसल के लिए तय करती है और राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCCCI) अधिसूचित करती है। किसान की कुल बीमा राशि इस प्रकार निकलती है:
बीमा राशि = प्रति हेक्टेयर वित्तमान × बीमित क्षेत्र (हेक्टेयर में)
सिंचित और असिंचित क्षेत्र के लिए बीमा राशि अलग-अलग हो सकती है। सही बीमा राशि जानने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध प्रीमियम कैलकुलेटर का उपयोग करें या अपनी बैंक शाखा से पूछें। हरियाणा के लिए रबी 2026-27 की जिलेवार प्रति हेक्टेयर बीमा राशि के आंकड़े इस लेख के तैयार होने तक सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं, इसलिए यहां कोई जिलेवार रुपये की राशि नहीं दी गई है — गलत आंकड़ा देने से बेहतर है कि किसान आधिकारिक पोर्टल से ही सही राशि जांचे।
दस्तावेज़ — आवेदन से पहले ये तैयार रखें
आवेदन एक ही बार में पूरा हो जाए, इसके लिए ये दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें। ध्यान दें कि पोर्टल पर चल रहा लाइव फॉर्म ही अंतिम होता है — अगर फॉर्म में कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ मांगा जाए, तो वही मान्य होगा।
| दस्तावेज़ | किस काम आता है |
|---|---|
| आधार कार्ड | पहचान और बैंक खाते से जोड़ने के लिए |
| बैंक पासबुक की प्रति | खाता संख्या व IFSC; क्लेम की राशि इसी खाते में आएगी |
| जमीन का रिकॉर्ड — खसरा / खतौनी | बीमित जमीन पर हक साबित करने के लिए |
| किरायेदारी / बटाई का समझौता | बटाईदार या किराएदार किसान के लिए |
| बुवाई का प्रमाण / घोषणा | कौन-सी फसल, कितने क्षेत्र में बोई गई है |
| पासपोर्ट साइज फोटो | आवेदन के साथ, अगर मांगा जाए |
| मोबाइल नंबर | आधार से जुड़ा हुआ, OTP व सूचना के लिए |
बैंक खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए, क्योंकि क्लेम की राशि सीधे उसी खाते में भेजी जाती है। खाता किसान के अपने नाम पर होना चाहिए — किसी और के खाते में भुगतान अटक सकता है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? — स्टेप-बाय-स्टेप
गैर-ऋणी किसान खुद ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आधिकारिक पोर्टल राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) है — pmfby.gov.in।
- पोर्टल खोलें — ब्राउजर में pmfby.gov.in खोलें और Farmer Corner / किसान लॉगिन पर जाएं।
- नए किसान के रूप में रजिस्टर करें — पहली बार आवेदन कर रहे हैं तो “Register for New Farmer User” पर क्लिक करें। नाम, पता, मोबाइल नंबर, आधार नंबर और बैंक खाते की जानकारी भरें।
- OTP से सत्यापन करें — आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आया OTP डालकर रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
- लॉगिन करें — रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर व पासवर्ड से लॉगिन करें।
- फसल बीमा के लिए आवेदन चुनें — मौसम (रबी 2026-27), राज्य (हरियाणा), जिला, फसल और क्षेत्र की जानकारी भरें।
- जमीन व बुवाई की जानकारी दें — खसरा-खतौनी, फसल का नाम, बोया गया क्षेत्र (हेक्टेयर में) और सिंचित/असिंचित स्थिति भरें।
- दस्तावेज़ अपलोड करें — मांगे गए दस्तावेज़ साफ स्कैन करके अपलोड करें।
- प्रीमियम जांचें और भुगतान करें — पोर्टल पर दिख रही प्रीमियम राशि जांचें और ऑनलाइन भुगतान करें। रबी फसलों पर यह बीमा राशि का अधिकतम 1.5% होगी।
- पावती (Acknowledgement) संभालकर रखें — आवेदन जमा होने के बाद मिली पावती संख्या व रसीद को संभालकर रखें। इसी से आप आवेदन की स्थिति जांच सकेंगे।
आवेदन की स्थिति पोर्टल पर “Application Status” से जांची जा सकती है। फसल बीमा की जानकारी व स्थिति देखने के लिए किसान Crop Insurance ऐप का भी उपयोग कर सकते हैं।
ऑफलाइन आवेदन — बैंक या CSC से
जिन किसानों को ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत होती है, वे ऑफलाइन तरीके से भी बीमा करा सकते हैं:
- बैंक शाखा से — अपनी बैंक शाखा या प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS) में जाकर PMFBY का प्रस्ताव फॉर्म भरें। ऋणी किसानों का नामांकन बैंक ऋण देते समय ही पोर्टल के जरिए कर देता है।
- CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) से — नजदीकी जन सेवा केंद्र पर जाकर भी नामांकन कराया जा सकता है। CSC पर सेवा शुल्क लग सकता है, जबकि पोर्टल पर खुद आवेदन करना निःशुल्क होता है।
- बीमा कंपनी के अधिकृत एजेंट से — जिले के लिए अधिकृत बीमा कंपनी के एजेंट या चैनल पार्टनर के जरिए भी आवेदन किया जा सकता है।
ऑफलाइन आवेदन में भी अंतिम तारीख वही रहती है — प्रस्ताव फॉर्म भरना और प्रीमियम जमा करना अंतिम तारीख तक पूरा होना चाहिए। अंतिम दिनों में बैंक व CSC पर भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए आखिरी तारीख का इंतजार न करें; कम से कम एक हफ्ता पहले आवेदन कर लें।
ऋणी बनाम गैर-ऋणी किसान — अंतर समझें
| बिंदु | ऋणी किसान (Loanee) | गैर-ऋणी किसान (Non-Loanee) |
|---|---|---|
| परिभाषा | फसल ऋण / KCC लिया है | कोई फसल ऋण नहीं लिया है |
| नामांकन | बैंक ऋण देते समय करता है | किसान को खुद आवेदन करना होता है |
| स्वैच्छिक या अनिवार्य | 2020 से स्वैच्छिक | शुरू से स्वैच्छिक |
| बाहर निकलना | अंतिम तारीख से 7 दिन पहले बैंक को घोषणा दें | आवेदन ही न करें |
| प्रीमियम | ऋण खाते से काटा जा सकता है | किसान खुद भुगतान करता है |
समय-सीमा — एक नजर में
| काम | समय-सीमा |
|---|---|
| रबी नामांकन | आमतौर पर 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 |
| प्रीमियम जमा / कटौती | अंतिम तारीख तक |
| बैंक द्वारा बीमा कंपनी को विवरण भेजना | प्रीमियम कटौती की अंतिम तारीख से 15 दिन के भीतर (ऋणी) / 7 दिन के भीतर (गैर-ऋणी) |
| स्थानीय आपदा की सूचना | घटना के 72 घंटे के भीतर |
| सर्वेक्षक की नियुक्ति | सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर |
| नुकसान का आकलन पूरा | 10 दिन के भीतर |
| क्लेम का भुगतान | सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर (प्रीमियम व सब्सिडी मिलने की शर्त पर) |
ऊपर दी गई बैंक व सर्वे से जुड़ी समय-सीमाएं योजना के दिशानिर्देशों पर आधारित हैं। हरियाणा के लिए रबी 2026-27 की फसलवार अंतिम तारीखें राज्य अधिसूचना से ही अंतिम रूप से तय होंगी।
फसल खराब हो जाए तो क्लेम कैसे मिलेगा?
सबसे अहम नियम है 72 घंटे का। स्थानीय आपदा — जैसे ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन, बादल फटना या खेत में पड़ी कटी फसल का नुकसान — होने पर किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देनी होती है। देर से सूचना देना क्लेम खारिज होने की सबसे आम वजह मानी जाती है।
क्लेम की सूचना देने के तरीके
- टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 — कृषि रक्षक हेल्पलाइन पर कॉल करके सूचना दें।
- Crop Insurance ऐप — ऐप से सीधे नुकसान की सूचना दर्ज करें।
- pmfby.gov.in पोर्टल — पोर्टल पर जाकर नुकसान की जानकारी दें।
- बैंक शाखा — ऋणी किसान अपनी बैंक शाखा को भी सूचना दे सकते हैं।
- बीमा कंपनी या कृषि विभाग — जिले की बीमा कंपनी या स्थानीय कृषि विभाग कार्यालय को सूचना दें।
सूचना देते समय खेत की फोटो व वीडियो उसी दिन ले लें — हो सके तो लोकेशन के साथ। खेत को सूचना देने से पहले साफ न करें, ताकि सर्वे में नुकसान का सही आकलन हो सके।
क्लेम की प्रक्रिया
- किसान 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देता है।
- बीमा कंपनी सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर सर्वेक्षक नियुक्त करती है।
- सर्वेक्षक, कृषि विभाग व राजस्व कर्मचारियों के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करता है; यह आकलन 10 दिन के भीतर पूरा होना होता है।
- जिला स्तरीय संयुक्त समिति की रिपोर्ट व राज्य सरकार के उपज आंकड़ों के आधार पर बीमा कंपनी क्लेम की राशि तय करती है।
- स्वीकृत क्लेम की राशि सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है — बशर्ते किसान का प्रीमियम व सरकार की सब्सिडी मिल चुकी हो।
क्लेम का पैसा कैसे मिलता है?
स्वीकृत क्लेम की राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के जरिए भेजी जाती है। इसमें कोई बिचौलिया नहीं होता। इसलिए आवेदन करते समय बैंक खाते की जानकारी सही भरना बहुत जरूरी है। अगर खाता संख्या या IFSC गलत हुआ, तो भुगतान अटक सकता है।
ध्यान दें कि व्यापक उपज हानि (पूरे क्षेत्र की उपज कम होना) वाले दावों में अलग प्रक्रिया होती है — वहां व्यक्तिगत सूचना की जरूरत नहीं होती, बल्कि फसल कटाई प्रयोगों के आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र के सभी बीमित किसानों को भुगतान होता है।
आम गलतियां — जिनसे बचना है
- अंतिम तारीख का इंतजार करना — आखिरी दिनों में पोर्टल धीमा हो जाता है और दस्तावेज़ में गलती सुधारने का समय नहीं मिलता।
- अधिसूचित फसल की जांच न करना — जो फसल जिले में अधिसूचित नहीं है, उसका बीमा मान्य नहीं होगा।
- गलत बैंक खाता देना — क्लेम का पैसा उसी खाते में जाएगा जो आवेदन में लिखा है; खाता आधार से जुड़ा होना चाहिए।
- 72 घंटे की सूचना में देरी — स्थानीय आपदा में देर से सूचना देना क्लेम खारिज होने की सबसे आम वजह है।
- बटाईदार का प्रमाण न देना — दूसरे की जमीन पर खेती करने वाले किसान को किरायेदारी या बटाई का प्रमाण जरूर देना चाहिए।
- पावती न संभालना — आवेदन संख्या के बिना स्थिति जांचना व शिकायत करना मुश्किल हो जाता है।
हरियाणा के किसानों के लिए जुड़ी हुई जानकारियां
फसल बीमा के साथ-साथ ये जानकारियां भी काम आ सकती हैं:
- बागवानी फसलें बोते हैं तो मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना, हरियाणा देखें — यह फलों व सब्जियों के लिए राज्य की अलग बीमा योजना है।
- रबी फसल की बिक्री व भुगतान से जुड़ी जानकारी के लिए धान खरीद भुगतान स्थिति जांचें पढ़ें — इसमें मंडी भुगतान की स्थिति जांचने का तरीका बताया गया है।
- खेती के यंत्रों पर अनुदान के लिए हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान सब्सिडी देखें।
- किसान सम्मान निधि की किस्त से जुड़ी जानकारी के लिए PM किसान 21वीं किस्त पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. PMFBY रबी 2026-27 की अंतिम तारीख क्या है?
रबी के लिए पूरे देश में आमतौर पर 31 दिसंबर अंतिम तारीख होती है, और रबी 2026-27 के लिए नामांकन आमतौर पर 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होता है। लेकिन हरियाणा में फसलवार अंतिम तारीख राज्य अधिसूचना से तय होती है, इसलिए अपने जिले की सही तारीख pmfby.gov.in पर या बैंक शाखा से जरूर जांच लें। अंतिम तारीख के बाद आवेदन स्वीकार नहीं होता।
2. रबी फसल पर किसान को कितना प्रीमियम देना होगा?
रबी की खाद्यान्न व तिलहनी फसलों पर किसान को बीमा राशि का अधिकतम 1.5% प्रीमियम देना होता है। बाकी प्रीमियम केंद्र व राज्य सरकार भरती हैं। उदाहरण के लिए, 50,000 रुपये की बीमा राशि पर किसान का प्रीमियम 750 रुपये होगा — यह उदाहरण है, असली बीमा राशि जिले के वित्तमान से तय होती है।
3. क्या बटाईदार किसान भी फसल बीमा करा सकता है?
हां। बटाईदार व किराएदार किसान भी पात्र हैं, बशर्ते वे अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल उगाते हों और उनके पास किरायेदारी या बटाई का प्रमाण (समझौता या राज्य सरकार द्वारा मान्य दस्तावेज़) हो।
4. ऋण लेने वाले किसान का बीमा अपने आप हो जाता है?
ऋणी किसानों का नामांकन बैंक ऋण देते समय पोर्टल के जरिए कर देता है। लेकिन 2020 से यह योजना ऋणी किसानों के लिए भी स्वैच्छिक है — अगर किसान बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे अंतिम तारीख से कम से कम 7 दिन पहले बैंक को लिखित घोषणा देनी होगी।
5. फसल खराब होने पर क्लेम के लिए कितने समय में सूचना देनी होती है?
स्थानीय आपदा (ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन, बादल फटना, कटी फसल का नुकसान) होने पर 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होती है। सूचना टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447, Crop Insurance ऐप, pmfby.gov.in पोर्टल, बैंक शाखा या बीमा कंपनी के जरिए दी जा सकती है।
6. क्लेम का पैसा कैसे और कितने दिन में मिलता है?
स्वीकृत क्लेम की राशि सीधे किसान के आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए भेजी जाती है। स्थानीय आपदा वाले दावों में सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। व्यापक उपज हानि वाले दावों में फसल कटाई प्रयोगों के आंकड़ों के आधार पर भुगतान होता है, जिसमें अधिक समय लग सकता है।
7. क्या PMFBY हरियाणा सरकार की योजना है?
नहीं। PMFBY केंद्र सरकार की योजना है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय चलाता है। हरियाणा में इसे राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत लागू किया जाता है — राज्य तय करता है कि किस जिले में कौन-सी फसल अधिसूचित होगी और बीमा राशि कितनी होगी।
आधिकारिक स्रोत
इस गाइड की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित की गई है: राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल — pmfby.gov.in, PMFBY FAQ पेज — pmfby.gov.in/faq, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार। अंतिम तारीख, अधिसूचित फसलें, बीमा राशि और बीमा कंपनी से जुड़ी जिलेवार जानकारी के लिए आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल ही देखें। किसी एजेंट को पैसे देकर बीमा कराने से बचें — पोर्टल पर खुद आवेदन करना निःशुल्क है, और CSC पर सिर्फ निर्धारित सेवा शुल्क ही लगता है।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी 6 नवंबर 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक व आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। हरियाणा के लिए रबी 2026-27 की जिलेवार अधिसूचित फसल सूची, जिलेवार बीमा राशि और उस मौसम की बीमा कंपनी का नाम इस लेख के तैयार होने तक सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सका है — इन तीन बातों की पुष्टि आवेदन से पहले pmfby.gov.in या जिला कृषि कार्यालय से जरूर कर लें।

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