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हर खेत-स्वस्थ खेत हरियाणा: मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड ऐसे पाएँ

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हर खेत-स्वस्थ खेत हरियाणा: मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड ऐसे पाएँ
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 9:51 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: किसान
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हर खेत-स्वस्थ खेत क्या है?

‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ हरियाणा सरकार का अभियान है, जिसके तहत राज्य के हर एकड़ खेत की मिट्टी की जाँच करके हर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) दिया जाता है। कार्ड पर लिखा होता है कि आपकी मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कितने हैं, कौन से कम हैं, और किस फसल के लिए कितनी खाद डालनी चाहिए।

यह अभियान केंद्र सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (2015) का हरियाणा संस्करण है। हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इसके लिए 26 मई 2022 को ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल शुरू किया था, ताकि किसान अपनी मिट्टी की जाँच की जानकारी ऑनलाइन देख सकें।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
अभियान का नाम हर खेत-स्वस्थ खेत (Har Khet-Swasth Khet)
विभाग कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा
पोर्टल शुरू 26 मई 2022
मिट्टी के नमूने लिए गए लगभग 70 लाख
नमूनों की जाँच पूरी लगभग 55 लाख
मृदा स्वास्थ्य कार्ड बाँटे गए 86.65 लाख से ज़्यादा
प्रयोगशालाएँ 17 स्थायी मिट्टी-पानी जाँच प्रयोगशालाएँ + 54 छोटी (मिनी) प्रयोगशालाएँ
जाँच के पैरामीटर 12 — pH, EC, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जस्ता, मैंगनीज़, लोहा, ताँबा, बोरॉन
जाँच का शुल्क मुफ्त
लक्ष्य 3–4 साल में हर एकड़ की मिट्टी की जाँच, हर किसान को कार्ड
सम्मान मृदा स्वास्थ्य कार्ड परियोजना को 2022 में स्कोच (Skoch) स्वर्ण पदक
आधिकारिक पोर्टल agriharyana.gov.in; राष्ट्रीय पोर्टल soilhealth.dac.gov.in

मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्या होता है और इससे क्या फायदा है?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड आपकी मिट्टी की रिपोर्ट कार्ड है। मिट्टी के नमूने की जाँच में 12 पैरामीटर देखे जाते हैं — pH (अम्लीयता/क्षारीयता), EC (विद्युत चालकता), जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जस्ता, मैंगनीज़, लोहा, ताँबा और बोरॉन। कार्ड पर दो बातें लिखी होती हैं:

  1. मिट्टी में क्या है — कौन सा पोषक तत्व कितना है, कौन सा कम है।
  2. क्या डालना है — किस फसल के लिए प्रति एकड़ कितनी खाद और उर्वरक डालना चाहिए।

इसके फायदे सीधे-सीधे हैं:

  • खाद का खर्च घटता है: ज़रूरत से ज़्यादा खाद डालना बंद होता है — सिर्फ वही खाद डालते हैं जो मिट्टी में कम है।
  • पैदावार बढ़ती है: सही मात्रा में खाद डालने से फसल की पैदावार बढ़ती है।
  • मिट्टी स्वस्थ रहती है: गलत खाद डालने से मिट्टी खराब नहीं होती।
  • पानी की बचत: स्वस्थ मिट्टी में पानी ज़्यादा देर तक रहता है।
  • बीमारी कम: संतुलित पोषण वाली फसल में बीमारी कम लगती है।

यमुनानगर के जगाधरी स्थित मिट्टी जाँच प्रयोगशाला के अधिकारियों के अनुसार, मिट्टी की जाँच बिल्कुल मुफ्त है — किसान सीधे प्रयोगशाला में नमूना लाकर भी जाँच करवा सकते हैं।

मिट्टी का नमूना कैसे लें? — सही तरीका

सही रिपोर्ट के लिए सही नमूना लेना सबसे ज़रूरी है। गलत नमूना लिया तो रिपोर्ट भी गलत आएगी। मानक तरीका इस प्रकार है:

चरण 1: खेत के अलग-अलग हिस्सों से 8–10 जगहों से मिट्टी लें — एक ही जगह से नमूना न लें। खेत के कोने, बीच और किनारे, सब जगह से लें।

चरण 2: हर जगह से 15–20 सेंटीमीटर गहराई (लगभग एक बालिश्त) से मिट्टी खोदकर निकालें। ऊपर की सूखी पत्तियाँ और कचरा हटा दें।

चरण 3: सभी जगहों की मिट्टी को एक साफ बर्तन में मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें। इसमें से लगभग 500 ग्राम मिट्टी एक साफ पॉलीथीन थैली में डालें।

चरण 4: थैली पर अपना नाम, गाँव, खेत का खसरा नंबर, फसल का नाम और मोबाइल नंबर लिखें।

चरण 5: नमूना ताज़ा ही प्रयोगशाला तक पहुँचाएँ — ज़्यादा दिन रखी हुई मिट्टी की जाँच सही नहीं आती।

ध्यान दें: खाद डालने के तुरंत बाद या सिंचाई के तुरंत बाद नमूना न लें — कम से कम 15–20 दिन का अंतर रखें। अलग-अलग फसलों वाले खेतों के नमूने अलग-अलग थैलियों में रखें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड कैसे पाएँ? — स्टेप बाय स्टेप

कार्ड पाने के तीन रास्ते हैं:

रास्ता 1 — विभाग की टीम नमूना ले जाती है (सबसे आसान):
हर खेत-स्वस्थ खेत अभियान के तहत कृषि विभाग के कर्मचारी खुद गाँव-गाँव जाकर खेतों से मिट्टी के नमूने लेते हैं और प्रयोगशाला में जाँच करवाते हैं। जाँच पूरी होने पर मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसान को दिया जाता है। आपको कुछ नहीं करना है — जब विभाग की टीम आपके गाँव आए, तो उन्हें अपने खेत का नमूना लेने दें और अपना मोबाइल नंबर सही-सही दें।

रास्ता 2 — खुद नमूना लेकर प्रयोगशाला जाएँ:
अगर विभाग की टीम अभी आपके गाँव नहीं आई है, तो ऊपर बताए गए तरीके से मिट्टी का नमूना लेकर अपने ज़िले की मिट्टी जाँच प्रयोगशाला या ज़िला कृषि कार्यालय में जमा करें। नमूना जमा करते समय अपना नाम, गाँव, खसरा नंबर और मोबाइल नंबर लिखवाएँ। जाँच पूरी होने पर आपको मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलेगा।

रास्ता 3 — ऑनलाइन देखें:
जाँच पूरी होने के बाद अपना कार्ड राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल (soilhealth.dac.gov.in) पर देखा जा सकता है। हरियाणा के ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल पर भी मिट्टी जाँच की जानकारी उपलब्ध है। कार्ड देखने के लिए अपना राज्य, ज़िला, गाँव और किसान का विवरण चुनना होता है।

पात्रता — कौन कार्ड पा सकता है?

  1. हरियाणा का हर किसान — जिसके नाम पर खेती की ज़मीन है, वह मृदा स्वास्थ्य कार्ड पा सकता है।
  2. ज़मीन के आकार की कोई सीमा नहीं है — छोटे और बड़े, सभी किसानों के खेतों की जाँच होती है।
  3. पट्टे पर खेती करने वाले किसान भी अपने खेत की मिट्टी की जाँच करवा सकते हैं — ज़मीन के कागज़ और पट्टे का विवरण साथ रखें।
  4. कार्ड के लिए कोई शुल्क नहीं है — जाँच और कार्ड, दोनों मुफ्त हैं।

ज़रूरी दस्तावेज़ और जानकारी

क्रम जानकारी/दस्तावेज़ टिप्पणी
1 किसान का नाम और मोबाइल नंबर कार्ड पर दर्ज होगा; SMS सूचना के लिए
2 गाँव और खेत का खसरा नंबर नमूने की पहचान के लिए
3 ज़मीन के कागज़ — फर्द/जमाबंदी माँगे जाने पर दिखाने के लिए
4 परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) / आधार नंबर विभागीय रिकॉर्ड के लिए (अगर माँगा जाए)
5 फसल का नाम कार्ड पर खाद की सिफारिश फसल के हिसाब से होती है
6 मिट्टी का नमूना (500 ग्राम) ऊपर बताए गए तरीके से लिया गया

ध्यान दें: विभाग की टीम जब नमूना लेने आए, तो अपना मोबाइल नंबर सही-सही दें — कार्ड तैयार होने की सूचना उसी नंबर पर आती है।

ऑफलाइन विकल्प — प्रयोगशाला कहाँ है?

हरियाणा में 17 स्थायी मिट्टी और पानी जाँच प्रयोगशालाएँ और मंडियों में 54 छोटी प्रयोगशालाएँ खोली गई हैं। सिरसा और करनाल में मिट्टी, पानी, फल और सब्जियों में कीटनाशक अवशेष जाँचने के लिए दो विशेष प्रयोगशालाएँ भी बनाई गई हैं। अपने ज़िले की प्रयोगशाला का पता जानने के लिए अपने ब्लॉक के कृषि विकास अधिकारी (ADO) या ज़िला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। विभाग हर साल जागरूकता शिविर भी लगाता है — विभाग की टीमें ब्लॉक स्तर पर गाँवों में जाकर किसानों को मिट्टी जाँच और खाद की सही मात्रा के बारे में बताती हैं।

शुल्क और समय-सीमा

शुल्क: मिट्टी की जाँच और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पूरी तरह मुफ्त हैं। किसी भी व्यक्ति को नमूना लेने या कार्ड देने के नाम पर पैसे न दें।

समय-सीमा: यह कोई अंतिम तिथि वाली योजना नहीं है — यह नियमित अभियान है। सरकार का लक्ष्य 3–4 साल में राज्य के हर एकड़ की मिट्टी की जाँच करके हर किसान को कार्ड देना है। अब तक लगभग 70 लाख नमूने लिए जा चुके हैं और 86.65 लाख से ज़्यादा कार्ड बाँटे जा चुके हैं। अगर आपका कार्ड अभी नहीं बना है, तो ऊपर बताए गए रास्ते 2 से खुद नमूना देकर बनवाएँ — इंतज़ार न करें।

कार्ड मिलने के बाद क्या करें?

  • कार्ड को संभालकर रखें — यह आपकी मिट्टी की रिपोर्ट है, हर सीज़न में काम आएगी।
  • कार्ड के अनुसार ही खाद डालें — जिस पोषक तत्व की कमी लिखी है, सिर्फ वही डालें। ज़्यादा खाद डालना पैसे की बर्बादी है और मिट्टी को नुकसान भी पहुँचाता है।
  • हर 2–3 साल में दोबारा जाँच करवाएँ — मिट्टी की हालत बदलती रहती है, इसलिए कार्ड को अपडेट रखना ज़रूरी है।
  • दुकानदार की सलाह से नहीं, कार्ड से खाद लें — खाद की दुकान पर कार्ड दिखाकर उसी के अनुसार खाद खरीदें।
  • जैविक खाद भी डालें — कार्ड में रासायनिक खाद के साथ-साथ गोबर की खाद और हरी खाद की सिफारिश भी होती है।

किसानों के लिए अन्य उपयोगी योजनाएँ

मिट्टी की सेहत के साथ-साथ इन योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है (हर योजना की अपनी पात्रता शर्तें लागू होंगी):

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. मृदा स्वास्थ्य कार्ड क्या होता है?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड आपकी मिट्टी की रिपोर्ट है — इसमें मिट्टी के 12 पोषक तत्वों की स्थिति और किस फसल के लिए कितनी खाद डालनी चाहिए, यह लिखा होता है।

2. मिट्टी की जाँच के लिए कितना पैसा लगता है?

कुछ नहीं — मिट्टी की जाँच और मृदा स्वास्थ्य कार्ड पूरी तरह मुफ्त हैं।

3. कार्ड पाने के लिए क्या करना होता है?

तीन रास्ते हैं — विभाग की टीम आपके खेत से नमूना ले जाती है; आप खुद नमूना लेकर ज़िले की मिट्टी जाँच प्रयोगशाला में जमा कर सकते हैं; या जाँच पूरी होने के बाद कार्ड ऑनलाइन (soilhealth.dac.gov.in) देख सकते हैं।

4. मिट्टी का नमूना कैसे लेना चाहिए?

खेत के 8–10 अलग-अलग हिस्सों से 15–20 सेंटीमीटर गहराई से मिट्टी लेकर मिलाएँ, उसमें से 500 ग्राम साफ थैली में डालें और उस पर नाम, गाँव, खसरा नंबर और फसल का नाम लिखें।

5. अब तक कितने कार्ड बाँटे जा चुके हैं?

हरियाणा में लगभग 70 लाख मिट्टी के नमूने लिए गए हैं, 55 लाख नमूनों की जाँच पूरी हुई है और 86.65 लाख से ज़्यादा मृदा स्वास्थ्य कार्ड बाँटे जा चुके हैं।

6. मिट्टी की जाँच में कौन-कौन से पैरामीटर देखे जाते हैं?

कुल 12 — pH, EC, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जस्ता, मैंगनीज़, लोहा, ताँबा और बोरॉन।

7. मेरा कार्ड अभी नहीं बना है — क्या करूँ?

विभाग की टीम का इंतज़ार न करें — ऊपर बताए गए तरीके से मिट्टी का नमूना लेकर अपने ज़िले की मिट्टी जाँच प्रयोगशाला या ज़िला कृषि कार्यालय में जमा करें।

आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक

  • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा: agriharyana.gov.in
  • राष्ट्रीय मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल (कार्ड देखने के लिए): soilhealth.dac.gov.in
  • ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल — विभाग द्वारा 26 मई 2022 को शुरू किया गया
  • कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा द्वारा 10–11 फरवरी 2025 को दी गई जानकारी के अनुसार 70 लाख नमूने, 55 लाख जाँचें और 86.65 लाख कार्ड

अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा कृषि विभाग, ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ अभियान से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों और फरवरी 2025 में कृषि मंत्री द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। नमूनों और कार्डों की संख्या फरवरी 2025 की स्थिति के अनुसार है — ताज़ा आँकड़े विभाग की वेबसाइट पर देखें। ‘हर खेत-स्वस्थ खेत’ पोर्टल का सीधा URL इस गाइड में नहीं दिया गया है, क्योंकि वह सार्वजनिक स्रोतों से सत्यापित नहीं हुआ है — कार्ड देखने के लिए राष्ट्रीय पोर्टल soilhealth.dac.gov.in या अपने ज़िला कृषि कार्यालय से संपर्क करें।

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