अत्याचार पीड़ित SC/ST मुआवज़ा क्या है?
अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के किसी व्यक्ति के साथ जब जातिगत आधार पर अत्याचार होता है — जैसे मारपीट, हत्या, बलात्कार, ज़मीन पर कब्ज़ा, आगज़नी या सामाजिक बहिष्कार — तो उसे सिर्फ न्याय ही नहीं, तुरंत आर्थिक राहत भी मिलनी चाहिए। इसी के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और उसके तहत बने नियम, 1995 में पीड़ितों और उनके आश्रितों को आर्थिक राहत (monetary relief) देने का प्रावधान है।
हरियाणा में यह राहत अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के ज़रिए दी जाती है। ज़िला स्तर पर ज़िला कल्याण अधिकारी (District Welfare Officer) और उपायुक्त (Deputy Commissioner) इसकी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 2016 में केंद्र सरकार ने राहत की राशियाँ बढ़ाईं — अब राहत ₹85,000 से ₹8,25,000 तक है, जो अपराध की गंभीरता के अनुसार तय होती है।
सबसे ज़रूरी बात: यह राहत मुआवज़े का दावा नहीं है, जिसे “आवेदन करके पाना” हो — यह अपराध दर्ज होते ही पीड़ित को मिलने वाली कानूनी हकदारी है। FIR दर्ज होते ही प्रशासन को तय समय में राहत देनी होती है। इस गाइड में हम राहत की राशियाँ, भुगतान की किस्तें, दावा प्रक्रिया और ज़रूरी दस्तावेज़ — सब कुछ बता रहे हैं, ताकि पीड़ित परिवार को अपना हक पाने में कोई दिक्कत न हो।
योजना एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आर्थिक राहत |
| कानून | SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989; Rules, 1995 (2016 में संशोधित) |
| राहत की सीमा | ₹85,000 से ₹8,25,000 (अपराध के अनुसार) |
| किस्तें | अपराध के अनुसार — 50% तुरंत, बाकी चार्जशीट और मुकदमे के फैसले पर |
| तात्कालिक राहत | घटना की सूचना के 7 दिनों के भीतर राहत (नियम 12 के अनुसार) |
| हरियाणा आकस्मिक योजना | हरियाणा SC (अत्याचार निवारण) आकस्मिक योजना, 2006 — ₹5,000 तात्कालिक अनुदान |
| कॉर्पस फंड | राज्य स्तरीय सतर्कता समिति के तहत ₹2 करोड़ का कॉर्पस फंड (2017) |
| ज़िम्मेदार अधिकारी | ज़िला कल्याण अधिकारी, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक |
| आधिकारिक पोर्टल | haryanawelfareschemes.org; haryanascbc.gov.in; saralharyana.gov.in |
राहत की राशियाँ — 2016 के संशोधित नियम
केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल 2016 को SC/ST (अत्याचार निवारण) नियम, 1995 में संशोधन करके अपराधों की 47 श्रेणियाँ तय कीं और राहत की राशियाँ बढ़ा दीं। इससे पहले (2011 के नियमों में) राहत ₹60,000 से ₹5 लाख तक थी; अब यह ₹85,000 से ₹8.25 लाख तक है। मुख्य अपराधों की न्यूनतम राहत इस प्रकार है:
| अपराध | न्यूनतम राहत राशि |
|---|---|
| हत्या (Murder) | ₹8,25,000 |
| सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) | ₹8,25,000 |
| तेज़ाब हमला (चेहरा खराब होने पर) | ₹8,25,000 |
| बलात्कार (Rape) | ₹5,00,000 |
| स्थायी अक्षमता 100% / गंभीर चोट (30% से ज़्यादा) | ₹8,25,000 |
| अक्षमता 50% से ज़्यादा | ₹4,50,000 |
| सार्वजनिक स्थान पर जाने के अधिकार से वंचित करना / झूठा सबूत गढ़ना | ₹4,25,000 |
| यौन उत्पीड़न, पीछा करना, छेड़छाड़, निर्वस्त्र करने का प्रयास | ₹2,00,000 |
| अन्य अत्याचार (47 श्रेणियों की सूची के अनुसार) | ₹85,000 से ऊपर, अपराध के अनुसार |
पूरी 47 श्रेणियों की सूची नियम 12(4) की अनुसूची (Annexure-I) में दी गई है — ज़िला कल्याण अधिकारी के पास यही सूची होती है, और उसी के अनुसार राहत तय की जाती है।
2013 का हरियाणा संशोधन (इतिहास के लिए): इससे पहले हरियाणा सरकार ने डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय राहत योजना के तहत राशियाँ तय की थीं — कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर ₹5 लाख, न कमाने वाले सदस्य की मृत्यु पर ₹2 लाख, बलात्कार पर ₹2 लाख, आगज़नी से पूरी तरह बेघर होने पर ₹3 लाख, कमाने वाले सदस्य की पूर्ण स्थायी अक्षमता पर ₹3 लाख और न कमाने वाले की अक्षमता पर ₹1.5 लाख। 2016 के केंद्रीय संशोधन के बाद अब केंद्रीय सूची की बढ़ी हुई राशियाँ लागू होती हैं — इसलिए पुरानी राशियों को मौजूदा मानकर न चलें।
राहत का भुगतान — किस्तों में कैसे मिलता है?
राहत एकमुश्त नहीं, बल्कि किस्तों में दी जाती है, ताकि पीड़ित को मुकदमे के हर चरण में मदद मिलती रहे। मुख्य उदाहरण:
हत्या के मामले में:
- 50% राशि — पोस्टमार्टम के बाद तुरंत
- 50% राशि — चार्जशीट अदालत में दाखिल होने पर
बलात्कार के मामले में:
- 50% राशि — मेडिकल जाँच और मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि के बाद
- 25% राशि — चार्जशीट दाखिल होने पर
- 25% राशि — निचली अदालत में मुकदमे के फैसले पर
सामूहिक बलात्कार के मामले में:
- 50% राशि — मेडिकल जाँच और रिपोर्ट की पुष्टि के बाद
- 25% राशि — चार्जशीट दाखिल होने पर
- 25% राशि — मुकदमे के फैसले पर
नियमों के अनुसार पीड़ित, उसके परिवार और आश्रितों को घटना की सूचना के 7 दिनों के भीतर नकद या वस्तु के रूप में राहत दी जानी है — इसमें खाना, पानी, कपड़े, आश्रय, चिकित्सा सहायता, परिवहन और अन्य ज़रूरी चीज़ें शामिल हैं।
हरियाणा की आकस्मिक योजना, 2006 — तुरंत मदद
केंद्र के नियमों के अलावा हरियाणा सरकार ने 7 दिसंबर 2006 को हरियाणा अनुसूचित जाति (अत्याचार निवारण) आकस्मिक योजना, 2006 अधिसूचित की थी। इसके तहत:
- ₹5,000 का तात्कालिक अनुदान — हर पीड़ित को उपायुक्त के ज़रिए तुरंत दिया जाता है, ताकि तत्काल ज़रूरतें पूरी हो सकें।
- यात्रा भत्ता — जाँच, सुनवाई या मुकदमे में जाने के लिए रेल (द्वितीय श्रेणी) या साधारण बस का किराया, आने-जाने दोनों तरफ।
- दैनिक भत्ता — घर से बाहर रहने के दिनों के लिए ज़िले में कृषि मज़दूरों के लिए तय न्यूनतम मज़दूरी की दर से दैनिक भत्ता।
- भोजन भत्ता — पीड़ित, उसके आश्रित/सहायक और गवाहों को ₹30 प्रति दिन भोजन भत्ता।
- स्थानीय खर्च — बस स्टैंड/रेलवे स्टेशन से जाँच या सुनवाई स्थल तक आने-जाने के लिए हर बार ₹50।
इसके अलावा राज्य सरकार ने अत्याचार पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए ₹2 करोड़ का कॉर्पस फंड भी बनाया है। 2017 की जानकारी के अनुसार उस साल अक्टूबर तक 532 पीड़ितों को ₹6.22 करोड़ की सहायता दी जा चुकी थी।
दावा प्रक्रिया — स्टेप बाय स्टेप
चरण 1 — FIR दर्ज कराएं: सबसे पहले नज़दीकी थाने में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराएं। FIR दर्ज होते ही राहत की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। अगर थाना FIR दर्ज करने से मना करे, तो पुलिस अधीक्षक (SP) या उपायुक्त (DC) को शिकायत की जा सकती है।
चरण 2 — जाँच: अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जाँच उप-पुलिस अधीक्षक (DSP) या उससे ऊँचे पद के राजपत्रित अधिकारी द्वारा की जाती है।
चरण 3 — राहत का निर्धारण: ज़िला मजिस्ट्रेट/उपायुक्त या उप-मंडल मजिस्ट्रेट मामले की गंभीरता और नियम 12(4) की सूची के अनुसार राहत की राशि तय करते हैं।
चरण 4 — आवेदन जमा करें: पीड़ित या उसके आश्रित ज़िला कल्याण अधिकारी (District Welfare Officer) के कार्यालय में सादा आवेदन (Simple Application) जमा कर सकते हैं — हिसार ज़िला प्रशासन की सूची में इस योजना के लिए “Simple Application” ही फॉर्म बताया गया है। आवेदन के साथ FIR की कॉपी, जाति प्रमाण पत्र और बैंक खाते की जानकारी लगाएं।
चरण 5 — भुगतान: स्वीकृति के बाद राहत की राशि किस्तों के अनुसार पीड़ित या उसके आश्रित के बैंक खाते में DBT के ज़रिए भेजी जाती है। पहली किस्त (50%) तुरंत मिलनी चाहिए — अगर देरी हो, तो ज़िला कल्याण अधिकारी या उपायुक्त से संपर्क करें।
ऑनलाइन विकल्प: हरियाणा की योजनाएँ SARAL पोर्टल (saralharyana.gov.in) से जुड़ी हैं — पोर्टल पर SC/BC कल्याण विभाग की सेवाओं में इस राहत से जुड़ी सेवा खोजकर देखें। लेकिन FIR और जाँच की प्रक्रिया ऑफलाइन ही होती है, इसलिए ज़िला कल्याण कार्यालय से संपर्क करना सबसे ज़रूरी कदम है।
ज़रूरी दस्तावेज़
| क्रम | दस्तावेज़ |
|---|---|
| 1 | FIR की कॉपी (SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज) |
| 2 | जाति प्रमाण पत्र (अनुसूचित जाति/जनजाति का) |
| 3 | आधार कार्ड |
| 4 | परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) |
| 5 | बैंक खाते की जानकारी (पासबुक की कॉपी) |
| 6 | मेडिकल रिपोर्ट / पोस्टमार्टम रिपोर्ट (जहाँ लागू हो) |
| 7 | संपत्ति के नुकसान का प्रमाण (आगज़नी/कब्ज़े के मामलों में) |
| 8 | पासपोर्ट साइज़ फोटो |
कानूनी सहायता — अलग से मदद
अत्याचार के मामलों के अलावा, अनुसूचित जाति के लोगों को अपने कानूनी मामले लड़ने के लिए कानूनी सहायता योजना के तहत भी मदद मिलती है। नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम (PCR Act, 1955) के तहत ज़मीन से बेदखली या ज़मींदारों के शोषण जैसे मामलों में बचाव के लिए ₹11,000 तक की कानूनी सहायता दी जाती है (यह राशि पहले ₹5,500 थी, जिसे बढ़ाकर ₹11,000 किया गया था)। यह मदद भी ज़िला कल्याण अधिकारी के माध्यम से मिलती है।
आवेदन शुल्क और समय-सीमा
शुल्क: राहत के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है — यह पीड़ित का कानूनी हक है।
समय-सीमा: राहत घटना की सूचना के 7 दिनों के भीतर दी जानी है। FIR दर्ज कराने में देरी न करें — जितनी जल्दी FIR दर्ज होगी, उतनी जल्दी राहत की प्रक्रिया शुरू होगी।
ध्यान देने योग्य बातें
- राहत आपका हक है, दया नहीं: FIR दर्ज होते ही प्रशासन को राहत देनी होती है। अगर राहत न मिले, तो उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक या राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति से शिकायत की जा सकती है।
- पुरानी राशियों से भ्रम न पालें: 2013 की राज्य राशियाँ (मृत्यु पर ₹5 लाख आदि) अब लागू नहीं हैं — 2016 के केंद्रीय संशोधन के बाद बढ़ी हुई राशियाँ (हत्या पर ₹8.25 लाख आदि) लागू होती हैं।
- किस्तों का हिसाब रखें: राहत किस्तों में मिलती है — पहली किस्त के बाद चार्जशीट और फैसले पर बाकी किस्तें मिलती हैं। हर किस्त के लिए ज़िला कल्याण अधिकारी से संपर्क बनाए रखें।
- फर्ज़ी बिचौलियों से सावधान: राहत दिलाने के नाम पर कोई पैसे माँगे, तो वह धोखा है। आवेदन सीधे ज़िला कल्याण अधिकारी के कार्यालय में करें।
- गवाहों को भी भत्ता: पीड़ित के साथ-साथ उसके आश्रितों और गवाहों को भी यात्रा, दैनिक और भोजन भत्ता मिलता है — यह हक भी माँगना चाहिए।
SC समुदाय के लिए हरियाणा की अन्य योजनाएँ
- डॉ. अंबेडकर आवास नवीनीकरण योजना — ₹80,000: SC परिवारों के मकान की मरम्मत के लिए सहायता।
- अंतरजातीय विवाह शगुन योजना — हरियाणा: SC से अंतरजातीय विवाह पर प्रोत्साहन राशि।
- मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना — हरियाणा: बेटियों के विवाह पर आर्थिक सहायता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. SC/ST अत्याचार के मामले में कितनी राहत मिलती है?
2016 के संशोधित नियमों के अनुसार राहत ₹85,000 से ₹8,25,000 तक है — हत्या, सामूहिक बलात्कार और तेज़ाब हमले पर ₹8.25 लाख; बलात्कार पर ₹5 लाख; यौन उत्पीड़न/पीछा करने पर ₹2 लाख।
2. राहत कितने दिनों में मिलती है?
नियमों के अनुसार घटना की सूचना के 7 दिनों के भीतर राहत दी जानी है। पहली किस्त (50%) पोस्टमार्टम या मेडिकल रिपोर्ट के बाद तुरंत मिलती है।
3. राहत के लिए आवेदन कहाँ करना होगा?
ज़िला कल्याण अधिकारी (District Welfare Officer) के कार्यालय में सादा आवेदन (Simple Application) जमा करें। साथ में FIR की कॉपी, जाति प्रमाण पत्र और बैंक खाते की जानकारी लगाएं।
4. क्या राहत एकमुश्त मिलती है?
नहीं। राहत किस्तों में मिलती है — हत्या में 50% पोस्टमार्टम के बाद और 50% चार्जशीट पर; बलात्कार में 50% मेडिकल रिपोर्ट के बाद, 25% चार्जशीट पर और 25% मुकदमे के फैसले पर।
5. क्या पीड़ित को तुरंत कोई रकम मिलती है?
हाँ। हरियाणा की आकस्मिक योजना, 2006 के तहत हर पीड़ित को उपायुक्त के ज़रिए ₹5,000 का तात्कालिक अनुदान तुरंत दिया जाता है।
6. अगर थाना FIR दर्ज न करे तो क्या करें?
पुलिस अधीक्षक (SP) या उपायुक्त (DC) को शिकायत करें। SC/ST अधिनियम के मामलों की जाँच DSP या उससे ऊँचे पद के अधिकारी द्वारा की जाती है।
7. क्या गवाहों को भी भत्ता मिलता है?
हाँ। पीड़ित, उसके आश्रितों और गवाहों को यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और ₹30 प्रति दिन भोजन भत्ता मिलता है।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- हरियाणा SC/BC कल्याण योजनाएँ: haryanawelfareschemes.org
- हरियाणा अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग: haryanascbc.gov.in
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, हरियाणा: socialjusticehry.gov.in
- अंत्योदय सरल पोर्टल: saralharyana.gov.in
- सामाजिक न्याय विभाग हेल्पलाइन: 0172-2713277; सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989, उसके 2016 में संशोधित नियमों, हरियाणा की आकस्मिक योजना 2006 और ज़िला प्रशासन की सार्वजनिक सूचियों के आधार पर तैयार की गई है। राहत की राशियाँ नियम 12(4) की अनुसूची के अनुसार तय होती हैं — अपने मामले की सही राशि के लिए ज़िला कल्याण अधिकारी से पुष्टि करें; अधिकारी की जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी।

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