हरियाणा के किसानों के लिए भावांतर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojana — BBY) वह सुरक्षा कवच है, जो मंडी में भाव गिरने पर भी किसान की आमदनी को बचाता है। इस योजना के तहत सरकार हर फसल के लिए एक संरक्षित मूल्य (Protected Price) तय करती है। अगर किसान को मंडी में उससे कम भाव मिलता है, तो सरकार भाव के अंतर की भरपाई सीधे किसान के बैंक खाते में करती है।
खरीफ सीजन 2026-27 में इस योजना की सबसे बड़ी खबर बाजरा किसानों के लिए है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 7 अक्टूबर 2026 को धान-बाजरा खरीद की समीक्षा बैठक में घोषणा की कि बाजरा किसानों को ₹2,900 प्रति क्विंटल तक का भाव सुनिश्चित किया जाएगा। सरकारी खरीद ₹2,300 प्रति क्विंटल की दर से होगी और खुले बाजार में भाव ₹2,300 से अधिक रहने पर भी ₹2,900 तक के अंतर की भरपाई भावांतर भरपाई योजना के तहत की जाएगी — यानी अधिकतम ₹600 प्रति क्विंटल तक का लाभ। उस समय खुले बाजार में बाजरे का औसत भाव करीब ₹2,235 प्रति क्विंटल बताया गया था।
दूसरी बड़ी खबर रबी की सब्जियों के किसानों के लिए है। गाजर और मटर जैसी फसलों के लिए पंजीकरण की खिड़की योजना की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक खुली रहती है। आज 6 नवंबर 2026 है, यानी गाजर-मटर पंजीकरण की खिड़की अभी खुली हुई मानी जा रही है — लेकिन पंजीकरण करने से पहले मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर ताज़ा स्थिति ज़रूर देख लें, क्योंकि अंतिम तिथि में बदलाव संभव है।
एक नज़र में: भावांतर भरपाई योजना हरियाणा 2026
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | भावांतर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojana — BBY) |
| राज्य | हरियाणा |
| शुरू | 1 जनवरी 2018 |
| विभाग | बागवानी विभाग, हरियाणा एवं हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड |
| लाभार्थी | हरियाणा के किसान (भूमि मालिक, पट्टेदार और किरायेदार काश्तकार भी) |
| लाभ | मंडी भाव संरक्षित मूल्य से कम मिलने पर भाव के अंतर की भरपाई |
| बाजरा (खरीफ 2026-27) | ₹2,900/क्विंटल तक सुनिश्चित भाव; अधिकतम ₹600/क्विंटल भरपाई |
| पंजीकरण शुल्क | निःशुल्क |
| भुगतान | बिक्री के 15 दिन के अंदर आधार-लिंक्ड बैंक खाते में DBT से |
| मुख्य पोर्टल | मेरी फसल मेरा ब्यौरा — fasal.haryana.gov.in |
| हेल्पलाइन | 1800-180-2060 (विपणन बोर्ड/मेरी फसल मेरा ब्यौरा), 1800-180-2021 (बागवानी विभाग) |
भावांतर भरपाई योजना क्या है?
भावांतर भरपाई योजना की शुरुआत 1 जनवरी 2018 को हुई थी। इसका मकसद था — सब्जी और फल उगाने वाले किसानों को बाज़ार के भाव के उतार-चढ़ाव के जोखिम से मुक्त करना और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना।
योजना का सिद्धांत बहुत सीधा है। सरकार हर शामिल फसल के लिए एक संरक्षित मूल्य तय करती है। किसान अपनी फसल हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की मंडियों में बेचता है। अगर बिक्री अवधि के दौरान फसल का औसत दैनिक थोक मूल्य संरक्षित मूल्य से कम रहता है, तो सरकार उस अंतर की भरपाई करती है। भरपाई की गणना इस तरह होती है — (संरक्षित मूल्य − मंडी का औसत थोक भाव) × बेची गई मात्रा, जिसमें मात्रा जे-फार्म पर दर्ज बिक्री और प्रति एकड़ निर्धारित उत्पादन में से जो कम हो, वही मानी जाती है।
योजना का एक और बड़ा उद्देश्य यह है कि सूचीबद्ध फसलों पर किसान की प्रति एकड़ आमदनी ₹48,000 से ₹56,000 तक सुनिश्चित हो सके। यह आंकड़ा योजना के शुरुआती दस्तावेज़ों में दर्ज लक्ष्य है; आज की लागत और भाव के हिसाब से वास्तविक आमदनी फसल और बाज़ार पर निर्भर करती है।
बाजरा पर ₹600 प्रति क्विंटल: खरीफ 2026-27 की बड़ी घोषणा
बाजरा हरियाणा की प्रमुख खरीफ फसलों में से एक है, लेकिन इसका बाज़ार भाव अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चला जाता है। खरीफ 2026-27 में सरकार ने बाजरे के लिए यह व्यवस्था की है:
| बाजरा — खरीफ 2026-27 | दर (₹ प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| सुनिश्चित भाव (MSP) | ₹2,900 |
| सरकारी खरीद दर | ₹2,300 |
| भावांतर भरपाई (अधिकतम) | ₹600 |
| खुले बाजार का औसत भाव (अक्टूबर 2026 की शुरुआत में) | करीब ₹2,235 |
इसका मतलब समझिए। अगर किसान बाजरा सरकार को बेचता है, तो उसे ₹2,300 प्रति क्विंटल मिलते हैं और बाकी ₹600 तक की भरपाई भावांतर भरपाई योजना के तहत की जाती है, जिससे कुल ₹2,900 प्रति क्विंटल तक पहुँचता है। अगर किसान को खुले बाजार में ₹2,300 से अधिक भाव मिलता है — मान लीजिए ₹2,500 प्रति क्विंटल — तो भी ₹2,900 और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर, यानी ₹400 प्रति क्विंटल, भरपाई के रूप में मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए थे कि बाजरे की खरीद और भावांतर भरपाई का भुगतान मेरी फसल मेरा ब्यौरा में दर्ज रिकॉर्ड और जारी किए गए जे-फार्म के आधार पर सुनिश्चित किया जाए, और क्षेत्र सत्यापन (Area Verification) को प्राथमिकता पर किया जाए। साथ ही दूसरे राज्यों से बाजरा लाकर हरियाणा में बेचने की कोशिशों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
ध्यान दें: बाजरे की भरपाई मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण और जे-फार्म पर आधारित है — सब्जियों-फलों वाली BBY ई-पोर्टल पंजीकरण खिड़कियों से बाजरे की प्रक्रिया अलग चलती है। इसलिए बाजरा किसानों के लिए सबसे ज़रूरी काम मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर सही फसल पंजीकरण और जे-फार्म पर बिक्री है।
किन फसलों पर मिलता है लाभ? संरक्षित मूल्य सूची
शुरुआत में योजना में सिर्फ चार फसलें थीं — आलू, प्याज, टमाटर और फूलगोभी। बाद में गाजर, मटर, किन्नू, अमरूद, शिमला मिर्च और बैंगन जोड़े गए। अब इस सूची में 19 बागवानी फसलें शामिल हैं। नीचे दी गई तालिका योजना की निर्धारित सूची के अनुसार है — पंजीकरण के समय पोर्टल पर दिख रहा संरक्षित मूल्य ही अंतिम माना जाएगा।
| क्र. | फसल | संरक्षित मूल्य (₹/क्विंटल) | निर्धारित उत्पादन (क्विंटल/एकड़) |
|---|---|---|---|
| 1 | आलू | 500 | 120 |
| 2 | प्याज | 650 | 100 |
| 3 | टमाटर | 500 | 140 |
| 4 | फूलगोभी | 750 | 100 |
| 5 | गाजर | 700 | 100 |
| 6 | मटर | 1,100 | 50 |
| 7 | शिमला मिर्च | 900 | 80 |
| 8 | बैंगन | 500 | 110 |
| 9 | भिंडी | 1,050 | 70 |
| 10 | मिर्च | 950 | 70 |
| 11 | लौकी | 450 | 110 |
| 12 | करेला | 1,350 | 40 |
| 13 | हल्दी | 1,400 | 80 |
| 14 | पत्ता गोभी | 650 | 100 |
| 15 | लहसुन | 2,300 | 50 |
| 16 | मूली | 450 | 100 |
| 17 | अमरूद | 1,300 | 70 |
| 18 | आम | 1,950 | 50 |
| 19 | किन्नू | 1,100 | 104 |
इसके अलावा 2026 में मधुमक्खी पालन को भी भावांतर भरपाई योजना के दायरे में लाया गया है। शहद के लिए ₹120 प्रति किलो का संरक्षित मूल्य तय किया गया है। विश्व मधुमक्खी दिवस, 20 मई 2026 को सरकार ने मधुमक्खी पालकों के खातों में ₹1.02 करोड़ जारी किए थे। शहद के लिए पंजीकरण मधुक्रांति पोर्टल (madhukranti.in) और बागवानी विभाग के भावांतर भरपाई (शहद) पोर्टल पर होता है; 2026 के लिए पंजीकरण अवधि 1 जनवरी से 30 जून 2026 तय की गई थी, इसलिए शहद की अगली खिड़की का इंतज़ार करें।
पंजीकरण की तारीखें: कौन सी फसल, कब तक?
भावांतर भरपाई योजना में पंजीकरण सिर्फ निर्धारित अवधि में ही होता है। हर फसल की पंजीकरण, सत्यापन, अपील और बिक्री की अलग-अलग तारीखें तय हैं। नीचे दी गई समय-सारणी योजना की स्थायी निर्धारित सारणी के अनुसार है — किसी भी फसल का पंजीकरण करने से पहले पोर्टल पर चालू सीज़न की तारीखें ज़रूर जाँच लें।
| फसल | पंजीकरण अवधि | सत्यापन तक | अपील तक | बिक्री अवधि |
|---|---|---|---|---|
| आलू | 15 सितंबर – 31 अक्टूबर | 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 1 दिसंबर – 31 मार्च |
| प्याज | 15 दिसंबर – 15 फरवरी | 15 मार्च | 25 मार्च | 1 अप्रैल – 31 मई |
| टमाटर | 15 दिसंबर – 15 फरवरी | 15 मार्च | 25 मार्च | 1 अप्रैल – 15 जून |
| फूलगोभी | 15 सितंबर – 31 अक्टूबर | 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 1 दिसंबर – 31 मार्च |
| गाजर | 1 अक्टूबर – 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 31 दिसंबर | 1 दिसंबर – 28 फरवरी |
| मटर | 1 अक्टूबर – 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 31 दिसंबर | 1 दिसंबर – 28 फरवरी |
| शिमला मिर्च | 10 फरवरी – 15 मार्च | 31 मार्च | 15 अप्रैल | 15 अप्रैल – 30 जून |
| बैंगन | 10 फरवरी – 15 मार्च | 31 मार्च | 15 अप्रैल | 15 अप्रैल – 30 जून |
| भिंडी | 1 फरवरी – 31 मार्च | 31 मार्च | 15 अप्रैल | 15 अप्रैल – 30 जून |
| किन्नू | 1 सितंबर – 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 31 दिसंबर | 1 दिसंबर – 28 फरवरी |
| पत्ता गोभी | 1 अक्टूबर – 30 नवंबर | 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 1 दिसंबर – 31 मार्च |
| लहसुन | 1 अक्टूबर – 30 नवंबर | 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 1 अप्रैल – 15 मई |
| मूली | 1 अक्टूबर – 30 नवंबर | 30 नवंबर | 15 दिसंबर | 1 दिसंबर – 31 मार्च |
| अमरूद | 15 अप्रैल – 15 मई | 15 जून | 30 जून | 1 जुलाई – 31 अगस्त |
| आम | 1 मार्च – 15 मई | 15 मई | 31 मई | 15 जून – 31 अगस्त |
| हल्दी | 1 जून – 31 जुलाई | 15 अगस्त | 15 अगस्त | 1 अप्रैल – 30 अप्रैल |
आज 6 नवंबर 2026 की स्थिति में गाजर, मटर, किन्नू, पत्ता गोभी, लहसुन और मूली की पंजीकरण खिड़कियाँ निर्धारित सारणी के अनुसार खुली हुई हैं और 30 नवंबर को बंद होंगी। आलू और फूलगोभी की पंजीकरण अवधि 31 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है — अगर आपने इनका पंजीकरण नहीं कराया, तो इस सीज़न के लिए वह खिड़की बंद मानी जाएगी और अगली खिड़की का इंतज़ार करना होगा।
पात्रता: कौन ले सकता है लाभ?
- आवेदक हरियाणा का स्थायी निवासी और किसान होना चाहिए।
- फसल हरियाणा की ज़मीन पर उगाई गई हो और मेरी फसल मेरा ब्यौरा / BBY ई-पोर्टल पर पंजीकृत हो।
- योजना का लाभ भूमि मालिक, पट्टेदार (लीज़ पर खेती करने वाला) और किराये पर काश्त करने वाला किसान भी ले सकता है।
- पंजीकरण बुवाई अवधि के दौरान, निर्धारित तारीखों के भीतर ही होना चाहिए — देर से पंजीकरण स्वीकार नहीं होता।
- बिक्री हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की मंडियों में, निर्धारित बिक्री अवधि के दौरान, जे-फार्म पर होनी चाहिए।
- किसान का बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए, क्योंकि भरपाई की राशि सीधे उसी खाते में DBT से भेजी जाती है।
- बागवानी विभाग के अधिकारियों द्वारा क्षेत्र प्रमाणीकरण (Area Verification) कराया जाता है। अगर किसान प्रमाणित क्षेत्र से असंतुष्ट हो, तो निर्धारित अपील अवधि में अपील दायर कर सकता है।
ज़रूरी दस्तावेज़
पंजीकरण के लिए आमतौर पर ये दस्तावेज़ और जानकारी चाहिए होती है। पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा — फॉर्म में माँगा गया कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ भी देना पड़ सकता है।
- आधार कार्ड
- परिवार पहचान पत्र (PPP / Family ID)
- हरियाणा का निवास प्रमाण पत्र
- पहचान प्रमाण पत्र
- भूमि के दस्तावेज़ (जमाबंदी / खसरा-खतौनी या पट्टा/किराया संबंधी कागज़)
- बोई गई फसल और बीज की किस्म का विवरण
- बैंक पासबुक / बैंक खाते का विवरण (आधार-लिंक्ड खाता)
- मोबाइल नंबर (OTP सत्यापन के लिए)
- हाल की पासपोर्ट साइज़ फोटो
ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप
बागवानी फसलों (सब्जी-फल) के लिए पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल और BBY ई-पोर्टल के माध्यम से होता है। प्रक्रिया निःशुल्क है।
चरण 1: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर जाएँ
आधिकारिक पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in/ खोलें। होमपेज पर “किसान अनुभाग” या “किसान पंजीकरण / Farmer Login” का विकल्प चुनें। लॉगिन पेज https://fasal.haryana.gov.in/Home/Login पर भी सीधे जाया जा सकता है।
चरण 2: मोबाइल नंबर और OTP से लॉगिन करें
अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP से सत्यापन करें। इसके बाद पोर्टल पूछता है कि क्या आप अपनी परिवार पहचान पत्र (PPP) आईडी जानते हैं — अगर हाँ, तो Family ID दर्ज करें; अगर नहीं, तो आधार नंबर दर्ज करें। इसके बाद आपके परिवार का विवरण स्क्रीन पर दिखेगा।
चरण 3: फसल और भूमि का विवरण भरें
रजिस्ट्रेशन फॉर्म में किसान का विवरण, ज़मीन का विवरण (खसरा-खतौनी के अनुसार), बोई गई फसल का नाम, क्षेत्रफल (एकड़ में) और बीज की किस्म भरें। वही फसल चुनें, जिसके लिए आप भावांतर भरपाई चाहते हैं।
चरण 4: दस्तावेज़ अपलोड करें और सबमिट करें
माँगे गए दस्तावेज़ अपलोड करें, सारी जानकारी दोबारा जाँच लें और फॉर्म सबमिट करें। सबमिट करने के बाद पंजीकरण संख्या / रसीद संभालकर रखें — यही आगे स्टेटस देखने के काम आएगी।
चरण 5: क्षेत्र सत्यापन और अपील
बागवानी विभाग के अधिकारी आपके पंजीकृत क्षेत्र का सत्यापन करेंगे। अगर प्रमाणित क्षेत्र से आप असंतुष्ट हैं, तो निर्धारित अपील अवधि (ऊपर दी गई तालिका देखें) के भीतर अपील दायर करें।
चरण 6: मंडी में जे-फार्म पर बिक्री करें
निर्धारित बिक्री अवधि के दौरान अपनी फसल हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड की मंडी में जे-फार्म पर बेचें। जे-फार्म ही भरपाई का आधार है — बिना जे-फार्म की बिक्री पर भरपाई नहीं मिलती। बिक्री का विवरण BBY ई-पोर्टल पर अपलोड होता है; यह सुविधा संबंधित मार्केट कमेटी के कार्यालय में उपलब्ध होती है।
ऑफलाइन पंजीकरण का विकल्प
अगर आप ऑनलाइन फॉर्म खुद नहीं भर पा रहे हैं, तो पंजीकरण की सुविधा सर्व सेवा केंद्र (CSC), ई-दिशा केंद्र, मार्केटिंग बोर्ड कार्यालय, बागवानी विभाग, कृषि विभाग और इंटरनेट कियोस्क पर उपलब्ध है। वहाँ VLE या विभागीय कर्मचारी आपका फॉर्म भरने में मदद करेंगे। अपने साथ ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज़ और मोबाइल फोन (OTP के लिए) लेकर जाएँ। ध्यान रखें कि ऑफलाइन मदद लेने पर भी पंजीकरण सिर्फ निर्धारित तारीखों के भीतर ही होगा।
भरपाई की गणना कैसे होती है? उदाहरण सहित
भरपाई की राशि इस सूत्र से निकलती है:
भरपाई = (संरक्षित मूल्य − मंडी का औसत दैनिक थोक भाव) × मात्रा
(मात्रा = जे-फार्म पर बेची गई मात्रा और प्रति एकड़ निर्धारित उत्पादन में से जो कम हो)
उदाहरण 1 — बाजरा (खरीफ 2026-27): किसान ने बाजरा ₹2,300 प्रति क्विंटल की सरकारी दर पर बेचा। संरक्षित भाव ₹2,900 है, इसलिए अंतर ₹600 प्रति क्विंटल बना। अगर किसान ने 50 क्विंटल बाजरा बेचा, तो भरपाई ₹600 × 50 = ₹30,000 बनेगी।
उदाहरण 2 — टमाटर: टमाटर का संरक्षित मूल्य ₹500 प्रति क्विंटल है और निर्धारित उत्पादन 140 क्विंटल प्रति एकड़ है। मान लीजिए एक एकड़ के किसान ने 100 क्विंटल टमाटर बेचा और बिक्री अवधि में औसत थोक भाव ₹350 प्रति क्विंटल रहा। अंतर ₹150 प्रति क्विंटल बना। भरपाई = ₹150 × 100 = ₹15,000।
उदाहरण 3 — गाजर: गाजर का संरक्षित मूल्य ₹700 प्रति क्विंटल और निर्धारित उत्पादन 100 क्विंटल प्रति एकड़ है। अगर औसत थोक भाव ₹500 प्रति क्विंटल रहा और किसान ने एक एकड़ की 80 क्विंटल गाजर बेची, तो भरपाई = (₹700 − ₹500) × 80 = ₹16,000।
अगर मंडी भाव संरक्षित मूल्य से ऊपर चला जाता है, तो कोई भरपाई नहीं बनती — किसान को बाज़ार का ऊँचा भाव ही मिलता है, जो उसके लिए अच्छी बात है।
पैसा कैसे और कब मिलेगा? स्टेटस कैसे देखें?
- भरपाई की राशि बिक्री के 15 दिन के अंदर किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेजी जाती है।
- बिक्री का विवरण जे-फार्म के आधार पर BBY ई-पोर्टल पर अपलोड होता है; औसत दैनिक थोक मूल्य मंडी बोर्ड द्वारा चिन्हित मंडियों के दैनिक भाव के आधार पर तय किया जाता है।
- स्टेटस देखने के लिए BBY ई-पोर्टल (bby.hortharyana.gov.in) या मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर जाएँ। कुछ पोर्टल संस्करणों में “Kisan Details” / किसान विवरण विकल्प में किसान संख्या, मोबाइल नंबर या आधार नंबर डालकर पंजीकरण का विवरण देखा जा सकता है। पोर्टल का मौजूदा मेन्यू ही अंतिम माना जाए — विकल्प का नाम बदल सकता है।
- अगर 15 दिन के बाद भी पैसा न आए, तो पहले अपने बैंक खाते में आधार लिंकिंग और DBT स्थिति जाँचें, फिर जिला उद्यान अधिकारी या मार्केट कमेटी कार्यालय से संपर्क करें।
शुल्क और समय-सीमा
| मद | जानकारी |
|---|---|
| पंजीकरण शुल्क | निःशुल्क |
| भुगतान की समय-सीमा | बिक्री के 15 दिन के अंदर |
| भुगतान का तरीका | DBT — आधार-लिंक्ड बैंक खाते में सीधे |
| पंजीकरण | सिर्फ निर्धारित अवधि में |
| अपील | सत्यापन के विरुद्ध निर्धारित अपील अवधि में |
हेल्पलाइन और संपर्क
- बागवानी विभाग, हरियाणा — टोल-फ्री: 1800-180-2021
- मेरी फसल मेरा ब्यौरा / विपणन बोर्ड — टोल-फ्री: 1800-180-2060 और 1800-180-2117 (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक)
- ईमेल: [email protected]
- जिला स्तर पर: अपने जिले के जिला उद्यान अधिकारी (District Horticulture Officer) या मार्केट कमेटी कार्यालय से संपर्क करें।
- शहद/मधुमक्खी पालन: बागवानी विभाग के उप निदेशक, उद्यान (IBDC) या जिला उद्यान अधिकारी से संपर्क करें।
आम गलतियाँ जिनसे भरपाई रुक जाती है
- देर से पंजीकरण: खिड़की बंद होने के बाद पंजीकरण नहीं होता। गाजर-मटर के लिए 30 नवंबर की अंतिम तिथि को हल्के में न लें।
- बिना जे-फार्म बिक्री: नकद या बिना जे-फार्म की बिक्री पर भरपाई का कोई आधार नहीं बनता।
- गलत फसल या क्षेत्रफल: पोर्टल पर दर्ज फसल, किस्म और क्षेत्रफल वास्तविक बुवाई से मेल खाना चाहिए — सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर दावा अटक सकता है।
- बैंक खाता आधार से लिंक न होना: DBT भुगतान तभी होगा जब खाता आधार से लिंक हो।
- बिक्री अवधि से बाहर बिक्री: निर्धारित बिक्री अवधि से पहले या बाद में बेची फसल पर भरपाई नहीं मिलती।
- सत्यापन पर अपील न करना: अगर प्रमाणित क्षेत्र गलत लगे, तो अपील अवधि के भीतर अपील ज़रूर करें — बाद में मौका नहीं मिलता।
यह योजना किसके लिए सबसे ज़्यादा फायदेमंद है?
यह योजना उन किसानों के लिए सबसे ज़्यादा काम की है जो सब्जी-फल की खेती करते हैं, क्योंकि इन फसलों के भाव मौसम और आवक के हिसाब से बहुत तेज़ी से गिरते-चढ़ते हैं। टमाटर, प्याज, आलू जैसी फसलों में एक ही सीज़न में भाव आधा रह जाना आम बात है। भावांतर भरपाई योजना ऐसे में न्यूनतम आमदनी की गारंटी देती है। बाजरा किसानों के लिए 2026-27 की ₹600 प्रति क्विंटल वाली व्यवस्था भी इसी सुरक्षा का विस्तार है।
अगर आप धान की खरीद और उसके भुगतान की स्थिति देखना चाहते हैं, तो हमारी धान खरीद भुगतान गाइड भी पढ़ें: धान खरीद भुगतान स्टेटस कैसे चेक करें। बागवानी फसलों के लिए बीमा सुरक्षा के बारे में जानने के लिए देखें: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना हरियाणा। खेती के यंत्रों पर अनुदान के लिए पढ़ें: हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान सब्सिडी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
भावांतर भरपाई योजना क्या है?
यह हरियाणा सरकार की योजना है, जिसमें सरकार हर शामिल फसल के लिए एक संरक्षित मूल्य तय करती है। अगर किसान को मंडी में उससे कम भाव मिलता है, तो सरकार भाव के अंतर की भरपाई सीधे किसान के बैंक खाते में करती है। योजना 1 जनवरी 2018 से चल रही है।
बाजरा पर ₹600 प्रति क्विंटल की भरपाई किस सीज़न के लिए है?
खरीफ सीजन 2026-27 के लिए। सरकार बाजरे की खरीद ₹2,300 प्रति क्विंटल पर कर रही है और ₹2,900 तक के सुनिश्चित भाव के लिए अधिकतम ₹600 प्रति क्विंटल की भरपाई भावांतर भरपाई योजना के तहत की जाएगी। यह घोषणा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 7 अक्टूबर 2026 की समीक्षा बैठक में की थी।
गाजर और मटर का पंजीकरण कब तक कर सकते हैं?
निर्धारित समय-सारणी के अनुसार गाजर और मटर का पंजीकरण 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक होता है। 6 नवंबर 2026 की स्थिति में यह खिड़की खुली हुई है। पंजीकरण से पहले fasal.haryana.gov.in पर चालू सीज़न की अंतिम तिथि ज़रूर जाँच लें।
भावांतर भरपाई के लिए पंजीकरण कहाँ करें?
मुख्य रूप से मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल https://fasal.haryana.gov.in/ पर। बागवानी फसलों के लिए BBY ई-पोर्टल (bby.hortharyana.gov.in) और ई-खरीद पोर्टल (ekharid.haryana.gov.in) भी योजना से जुड़े आधिकारिक पोर्टल हैं। ऑफलाइन पंजीकरण CSC, ई-दिशा केंद्र, मार्केटिंग बोर्ड और बागवानी विभाग कार्यालयों में हो सकता है।
भरपाई का पैसा कब और कैसे मिलेगा?
बिक्री के 15 दिन के अंदर राशि किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में DBT से भेजी जाती है। शर्त यह है कि बिक्री निर्धारित बिक्री अवधि में, मंडी में, जे-फार्म पर हुई हो और फसल का पंजीकरण समय पर हुआ हो।
क्या पट्टेदार या किराये पर खेती करने वाला किसान भी लाभ ले सकता है?
हाँ। योजना का लाभ भूमि मालिक के साथ-साथ पट्टेदार और किराये पर काश्त करने वाला किसान भी ले सकता है, बशर्ते पंजीकरण और दस्तावेज़ सही हों और बागवानी विभाग का क्षेत्र सत्यापन पूरा हो।
अगर मंडी भाव संरक्षित मूल्य से ऊपर चला जाए तो क्या होगा?
तो कोई भरपाई नहीं बनती, क्योंकि किसान को पहले ही संरक्षित मूल्य से अधिक भाव मिल चुका है। भरपाई सिर्फ तब मिलती है जब औसत थोक भाव संरक्षित मूल्य से नीचे रहता है।
आधिकारिक स्रोत और ज़रूरी नोट
इस गाइड की जानकारी इन आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल (https://fasal.haryana.gov.in/), BBY ई-पोर्टल (bby.hortharyana.gov.in), ई-खरीद पोर्टल (ekharid.haryana.gov.in), हरियाणा बागवानी विभाग (https://hortharyana.gov.in/) और शहद के लिए मधुक्रांति पोर्टल (https://madhukranti.in/)। बाजरे की ₹600 प्रति क्विंटल वाली घोषणा मुख्यमंत्री कार्यालय की 7-8 अक्टूबर 2026 की समीक्षा बैठक की खबरों पर आधारित है।
ध्यान दें: फसलवार पंजीकरण तारीखें और संरक्षित मूल्य योजना की निर्धारित सारणी के अनुसार दिए गए हैं। सरकार समय-समय पर दरों और तारीखों में बदलाव कर सकती है, इसलिए पंजीकरण या बिक्री से पहले संबंधित आधिकारिक पोर्टल पर ताज़ा जानकारी ज़रूर देख लें। पोर्टल के लाइव फॉर्म में माँगे गए दस्तावेज़ और विवरण ही अंतिम माने जाएँगे।

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