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सरकारी योजनाएँ

प्राण वायु देवता पेंशन 2026: 75+ साल के पेड़ पर ₹3,000 सालाना

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: प्राण वायु देवता पेंशन 2026: 75+ साल के पेड़ पर ₹3,000 सालाना
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 12:24 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

प्राण वायु देवता पेंशन योजना क्या है

हरियाणा सरकार की प्राण वायु देवता पेंशन योजना देश की अपनी तरह की पहली योजना है, जिसके तहत 75 साल या उससे अधिक उम्र के पुराने पेड़ की देखभाल करने वाले व्यक्ति, ग्राम पंचायत या संस्था को हर साल पेंशन दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य उन बुजुर्ग पेड़ों को बचाना है, जो दशकों से ऑक्सीजन दे रहे हैं, छाया दे रहे हैं, मिट्टी को बाँधे हुए हैं और पक्षियों तथा कीटों को आश्रय दे रहे हैं, लेकिन जिनकी देखभाल के लिए उनके मालिक के पास अक्सर न समय होता है और न ही पैसा।

योजना का नाम ही इसका भाव बताता है। प्राण वायु का अर्थ है जीवन देने वाली हवा, और देवता का अर्थ है पूजनीय। सरकार का संदेश साफ है कि जिस तरह बुजुर्गों को सम्मान पेंशन मिलती है, उसी तरह बुजुर्ग पेड़ों को भी सम्मान और देखभाल मिलनी चाहिए। पेड़ की उम्र बढ़ने के साथ उसकी देखभाल की जरूरत भी बढ़ती है। उसे खाद, पानी, कीटों से सुरक्षा और कई बार सहारे की जरूरत पड़ती है। यह पेंशन उसी देखभाल का खर्च उठाने में मदद करती है।

यह योजना कोविड-19 महामारी के समय की याद से भी जुड़ी है, जब पूरे देश में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी गई थी। तब यह बात सबके सामने आई कि ऑक्सीजन सिलेंडर का कोई विकल्प नहीं है, लेकिन पेड़ प्राकृतिक रूप से ऑक्सीजन देते हैं। इसलिए पुराने पेड़ों को बचाना केवल पर्यावरण का काम नहीं है, बल्कि यह लोगों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा काम है।

योजना की मुख्य जानकारी एक नजर में

विवरण जानकारी
योजना का नाम प्राण वायु देवता पेंशन योजना
राज्य हरियाणा
शुरू 5 जून 2021, विश्व पर्यावरण दिवस
दोबारा शुभारंभ 26 अक्टूबर 2023
लाभ प्रति पेड़ प्रति वर्ष ₹3,000
पात्र पेड़ की उम्र 75 वर्ष या उससे अधिक
पात्र प्रजातियाँ लगभग 40 देसी प्रजातियाँ
अब तक चिह्नित पेड़ 3,819 पेड़ (एक अन्य रिपोर्ट में 3,876)
अधिकतम सीमा 4,000 पेड़
वित्त वर्ष 2026-27 में जोड़े जाने वाले पेड़ 1,541 पेड़
अब तक भुगतान ₹2 करोड़ 5 लाख से अधिक
आवेदन का तरीका जिला वन विभाग कार्यालय में ऑफलाइन
लागू करने वाला विभाग हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग
भुगतान का तरीका सीधे बैंक खाते में

योजना कब शुरू हुई और किसने शुरू की

प्राण वायु देवता पेंशन योजना की शुरुआत 5 जून 2021 को विश्व पर्यावरण दिवस के दिन हुई थी। उस समय हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर थे। योजना की औपचारिक घोषणा और अधिसूचना 2023 में आगे बढ़ी। 20 जून 2023 को वन एवं पर्यावरण मंत्री कंवर पाल ने बताया था कि सरकार 75 साल से अधिक उम्र के पेड़ों को भी बुजुर्गों की पेंशन की तर्ज पर पेंशन देगी। इसके बाद 26 अक्टूबर 2023 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने डिजिटल रूप से इस योजना का दोबारा शुभारंभ किया और पहले चरण में 3,810 पेड़ों के लिए पेंशन की शुरुआत की।

आज यह योजना मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने पेड़ों के लिए इस तरह की पेंशन योजना लागू की है। योजना शुरू में पाँच साल के लिए बनाई गई थी, जिसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।

पेड़ पर कितनी पेंशन मिलती है

इस योजना के तहत पात्र पेड़ के रखवाले को हर साल प्रति पेड़ ₹3,000 की पेंशन मिलती है। यह राशि पेड़ की देखभाल के लिए दी जाती है, न कि पेड़ की कीमत के रूप में। इस पैसे से पेड़ के आसपास की मिट्टी में खाद डालना, पानी देना, कीटों से बचाव करना और पेड़ की सामान्य देखभाल करना आसान होता है।

पेंशन की राशि समय के साथ बढ़ती रही है। यह हरियाणा की वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना से जुड़ी हुई है, इसलिए जब बुजुर्गों की पेंशन बढ़ती है, तो उसी अनुपात में पेड़ की पेंशन भी बढ़ती है।

समय प्रति पेड़ प्रति वर्ष पेंशन
शुरुआत में (2021) ₹2,500
2023 में दोबारा शुभारंभ के समय ₹2,750
2026 में अब ₹3,000

अगर आपके पास एक से अधिक पात्र पेड़ हैं, तो हर पात्र पेड़ के लिए अलग-अलग पेंशन मिल सकती है, बशर्ते हर पेड़ सभी शर्तें पूरी करता हो और जिला स्तरीय समिति से स्वीकृत हो। उदाहरण के लिए, अगर किसी के आँगन या खेत में तीन पात्र पेड़ हैं, तो तीनों के लिए कुल ₹9,000 प्रति वर्ष मिल सकते हैं। लेकिन यह पूरी तरह समिति की जाँच और स्वीकृति पर निर्भर करता है।

एक जरूरी बात यह भी समझ लें कि यह पेंशन हर महीने नहीं, बल्कि साल में एक बार दी जाती है। कई जगहों पर इसे गलती से मासिक पेंशन बताया जाता है, जो सही नहीं है। यह वार्षिक पेंशन है।

कौन से पेड़ पात्र हैं

सभी पेड़ इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं। सरकार ने लगभग 40 देसी प्रजातियों की सूची बनाई है, जिनका पारिस्थितिक या औषधीय महत्व है। इनमें पीपल, बरगद, नीम, आम, गूलर, इमली, कदंब, पिलखन, कैम, जाल और कृष्ण कदंब जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं।

पेड़ की उम्र 75 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। उम्र का आकलन वन विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर करते हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, उम्र का आकलन आँखों से देखकर और गाँव के बुजुर्गों से पूछताछ के आधार पर किया जाता है। इसके साथ ही पेड़ की ऊँचाई, तने की मोटाई, छत्र का व्यास, भौगोलिक स्थान और स्वास्थ्य की स्थिति भी दर्ज की जाती है।

पेड़ स्वस्थ होना चाहिए। गिरा हुआ, खोखला, सूखा, मरा हुआ या बीमार पेड़ इस योजना के लिए पात्र नहीं है। वन भूमि पर खड़ा पेड़ भी इस योजना में शामिल नहीं किया जाता है। पेड़ निजी जमीन, पंचायत की जमीन, धार्मिक स्थल, संस्था या सरकारी जमीन पर हो सकता है, लेकिन वह वन भूमि पर नहीं होना चाहिए।

एक ही बीज से उगा हुआ पेड़ों का झुरमुट भी एक ही पेड़ माना जाता है। उदाहरण के लिए, बरगद का झुरमुट एक ही पेड़ के रूप में गिना जाता है।

पात्रता की शर्तें

प्राण वायु देवता पेंशन के लिए आवेदन करने से पहले नीचे दी गई सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें। कोई एक शर्त पूरी न होने पर आवेदन स्वीकृत नहीं हो सकता है।

  • पेड़ हरियाणा राज्य में स्थित होना चाहिए।
  • पेड़ की उम्र 75 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • पेड़ सरकार द्वारा चिह्नित लगभग 40 प्रजातियों में से किसी एक का होना चाहिए।
  • पेड़ स्वस्थ होना चाहिए। गिरा हुआ, खोखला, सूखा, मरा हुआ या बीमार पेड़ पात्र नहीं है।
  • पेड़ वन भूमि पर खड़ा नहीं होना चाहिए।
  • आवेदक पेड़ का मालिक, देखभाल करने वाला, ग्राम पंचायत, धार्मिक संस्था या संबंधित संस्था होना चाहिए।
  • आवेदक के पास बैंक खाता होना चाहिए, क्योंकि पेंशन सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
  • पेड़ की उम्र, प्रजाति, स्वामित्व और स्वास्थ्य की पुष्टि जिला स्तरीय संरक्षण समिति की जाँच से होनी चाहिए।

सबसे अधिक पेंशन वाले पेड़ रेवाड़ी जिले में हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रेवाड़ी में 680, यमुनानगर में 536 और फतेहाबाद में 335 पेड़ इस योजना के तहत पेंशन पा रहे हैं। करनाल जिले में 112 पेड़ इस योजना में शामिल हैं, जिनमें से 111 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। करनाल में ही 55 और पेड़ों की पहचान की गई है, जिनकी पेंशन की प्रक्रिया चल रही है। फरीदाबाद जिले में 53 पेड़ इस योजना के तहत आते हैं।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

यहाँ एक ईमानदार चेतावनी देना जरूरी है। इस योजना की अधिसूचना में दर्ज दस्तावेजों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। नीचे दी गई सूची उन दस्तावेजों की तैयारी-सूची है, जो आमतौर पर इस तरह के आवेदन में माँगे जाते हैं और जिनका उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में मिलता है। जिला वन कार्यालय की मौके पर बताई गई जरूरत ही अंतिम मानी जाएगी। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने जिले के वन कार्यालय से दस्तावेजों की सूची जरूर पूछ लें।

  • आवेदक का आधार कार्ड
  • आवेदक की पासपोर्ट साइज फोटो
  • बैंक पासबुक की प्रति या बैंक खाते का विवरण
  • आधार से जुड़ा हुआ मोबाइल नंबर
  • निवास प्रमाण पत्र या पते का प्रमाण
  • राशन कार्ड, यदि माँगा जाए
  • पेड़ के स्वामित्व या देखभाल का प्रमाण, जैसे जमीन के कागजात या पंचायत का प्रमाण पत्र
  • पेड़ की फोटो और उसका स्थान, जैसे गाँव, खेत या आँगन का पता
  • पेड़ की उम्र से जुड़ी कोई जानकारी, यदि उपलब्ध हो, जैसे पुराने फोटो, गाँव के बुजुर्गों का बयान या पुराने रिकॉर्ड

आवेदन करते समय सभी दस्तावेजों की मूल प्रति साथ ले जाना अच्छा रहता है, ताकि जरूरत पड़ने पर अधिकारी जाँच कर सकें। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें। आवेदन का कोई शुल्क होने की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है, इसलिए अगर कोई व्यक्ति आवेदन के नाम पर पैसे माँगता है, तो जिला वन अधिकारी से इसकी पुष्टि करें।

आवेदन कैसे करें: पूरी प्रक्रिया

प्राण वायु देवता पेंशन के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल होने की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है। इस योजना का आवेदन जिला वन विभाग के कार्यालय में जाकर ऑफलाइन किया जाता है। अगर भविष्य में कोई ऑनलाइन पोर्टल शुरू होता है, तो उसकी जानकारी हरियाणा वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर आएगी।

चरण 1: पेड़ की जाँच खुद करें

पहले यह देखें कि आपका पेड़ 75 साल या उससे अधिक पुराना है या नहीं, वह स्वस्थ है या नहीं, और वह चिह्नित प्रजातियों में से है या नहीं। अगर पेड़ गिरा हुआ, खोखला या बीमार है, तो वह पात्र नहीं होगा।

चरण 2: जिला वन कार्यालय जाएँ

अपने जिले के जिला वन अधिकारी के कार्यालय में जाएँ। वहीं से प्राण वायु देवता पेंशन योजना का आवेदन फॉर्म मिलेगा। कार्यालय का पता और समय जानने के लिए हरियाणा वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें या जिला प्रशासन से पूछें।

चरण 3: फॉर्म भरें और दस्तावेज लगाएँ

फॉर्म में पेड़ का विवरण भरें, जैसे पेड़ की प्रजाति, अनुमानित उम्र, स्थान, गाँव, जमीन का विवरण और पेड़ के मालिक या देखभाल करने वाले का नाम। इसके साथ ऊपर बताए गए दस्तावेज लगाएँ। फॉर्म जमा करने पर रसीद या पावती जरूर लें और उसे संभालकर रखें।

चरण 4: मौके पर जाँच होगी

आवेदन मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी पेड़ का मौके पर निरीक्षण करेंगे। वे पेड़ की उम्र, प्रजाति, ऊँचाई, तने की मोटाई, छत्र का व्यास, स्वास्थ्य और स्वामित्व की जाँच करेंगे। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, वन विभाग हर पेड़ के लिए 21 कॉलम वाला एक फॉर्म भरता है, जिसमें देखभाल करने वाले का नाम, स्थान, प्रजाति, ऊँचाई, छत्र का व्यास, स्वास्थ्य की स्थिति, स्वामित्व और उम्र दर्ज की जाती है।

चरण 5: जिला स्तरीय समिति की स्वीकृति

हर आवेदन की जाँच पाँच सदस्यीय जिला स्तरीय समिति करती है। इस समिति में वन अधिकारी, उपायुक्त के प्रतिनिधि, पंचायत निकायों के प्रतिनिधि, राज्य जैव विविधता बोर्ड के प्रतिनिधि और रेंज अधिकारी शामिल होते हैं। समिति यह तय करती है कि पेड़ सभी शर्तें पूरी करता है या नहीं।

चरण 6: पेड़ पर हरी पट्टी और पेंशन की शुरुआत

स्वीकृति के बाद पेड़ को पेंशन के लिए चिह्नित किया जाता है। राज्य सरकार हर लाभार्थी पेड़ पर एक हरी पत्थर की पट्टी लगाती है, जिस पर पेड़ की प्रजाति, उम्र, गाँव और योजना में शामिल किए जाने का साल लिखा होता है। इसके बाद पेंशन की राशि पेड़ के मालिक या देखभाल करने वाले के बैंक खाते में भेजी जाती है।

शुल्क और समय-सीमा

आवेदन के लिए कोई शुल्क होने की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है। योजना से जुड़ी सरकारी घोषणाओं और रिपोर्टों में किसी आवेदन शुल्क का उल्लेख नहीं मिला है।

समय-सीमा के बारे में भी कोई निश्चित तारीख सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है। यह बात पाठकों को साफ-साफ जाननी चाहिए कि इस योजना में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। द प्रिंट की 2025 की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, राज्य भर के वन विभागों में सैकड़ों आवेदन लंबित हैं। मंगर बानी में चार पेड़ों के लिए भुगतान स्वीकृत होने के बाद भी पैसा नहीं मिला था। करनाल के तेजपाल के आम के पेड़ को 2023-24 की पेंशन मिली थी, लेकिन अगले साल का भुगतान देरी से हुआ। अनंगपुर में एक बरगद के पेड़ का निरीक्षण एक साल पहले हुआ था, लेकिन पेंशन नहीं मिली थी।

इसलिए अगर आप आवेदन करते हैं, तो यह उम्मीद न रखें कि पैसा कुछ ही दिनों में आ जाएगा। आवेदन की रसीद संभालकर रखें और समय-समय पर जिला वन कार्यालय में जाकर अपने आवेदन की स्थिति पूछें।

पेंशन कैसे मिलती है और स्थिति कैसे जाँचें

स्वीकृति के बाद पेंशन की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। यह राशि पेड़ के मालिक, ग्राम पंचायत या संबंधित संस्था के खाते में जाती है। उदाहरण के लिए, पुंडरक गाँव के शिव मंदिर के तीन पुराने बरगद के पेड़ों की पेंशन सरपंच के खाते में आई थी और सरपंच ने वह पैसा मंदिर और पेड़ों की देखभाल में लगाया था।

पेंशन की स्थिति जाँचने के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल होने की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए स्थिति जानने का सबसे भरोसेमंद तरीका अपने जिला वन अधिकारी के कार्यालय में जाकर पूछना है। साथ में आवेदन की रसीद, आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण ले जाएँ। अगर भुगतान में देरी हो रही है, तो कार्यालय में लिखित में पूछताछ करें और उसकी प्रति अपने पास रखें।

पेंशन मिलने के बाद भी पेड़ की देखभाल की जिम्मेदारी आपकी ही रहती है। पेंशन मिलने के बाद पेड़ को काटना या नुकसान पहुँचाना मना है। समिति की अनुमति के बिना पेड़ को किसी निर्माण या विकास कार्य के लिए काटा या नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता है।

योजना की सीमा और आगे की योजना

इस योजना की एक बड़ी सीमा यह है कि इसमें अधिकतम 4,000 पेड़ ही शामिल किए जा सकते हैं। यह सीमा तब तक लागू रहेगी, जब तक पाँच साल बाद योजना की समीक्षा नहीं हो जाती। अब तक 3,819 पेड़ चिह्नित किए जा चुके हैं, जबकि द प्रिंट की 2025 की रिपोर्ट में यह संख्या 3,876 बताई गई थी। दोनों आँकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि ये अलग-अलग समय की रिपोर्टें हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में 1,541 और पेड़ों को चिह्नित करके योजना में जोड़ा जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अगर आपके गाँव या इलाके में कोई पुराना पेड़ है, तो उसके लिए आवेदन करने का यह सही समय है, क्योंकि नए पेड़ों की पहचान का काम चल रहा है।

अब तक इस योजना के तहत ₹2 करोड़ 5 लाख से अधिक की पेंशन दी जा चुकी है। हरियाणा सरकार इस कार्यक्रम पर हर साल लगभग ₹1 करोड़ खर्च करती है।

ऑक्सी वन से क्या संबंध है

प्राण वायु देवता पेंशन योजना के साथ ही हरियाणा सरकार ने ऑक्सी वन की योजना भी शुरू की थी। ऑक्सी वन का अर्थ है ऑक्सीजन देने वाले जंगल। सरकार ने राज्य भर में ऐसे वन क्षेत्र चिह्नित किए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएँगे। अब तक 20 ऑक्सी वन बनाए जा चुके हैं, जो 5 से 100 एकड़ तक के क्षेत्र में फैले हुए हैं।

ऑक्सी वन और प्राण वायु देवता योजना का उद्देश्य एक ही है, और वह है हरियाणा की हरियाली को बचाना और बढ़ाना। हरियाणा देश के सबसे कम वन क्षेत्र वाले राज्यों में से एक है, इसलिए पुराने पेड़ों को बचाना और नए पेड़ लगाना दोनों ही जरूरी हैं।

किसानों और गाँवों के लिए यह योजना क्यों खास है

हरियाणा के गाँवों में पीपल, बरगद, नीम और आम के पुराने पेड़ अक्सर गाँव की चौपाल, मंदिर या खेत की मेड़ पर खड़े होते हैं। ये पेड़ गाँव की पहचान होते हैं। इनके नीचे पंचायत होती है, बच्चे खेलते हैं और बुजुर्ग आराम करते हैं। लेकिन कई बार इन पेड़ों को काटकर लकड़ी बेच दी जाती है या निर्माण के लिए जगह खाली कर दी जाती है।

यह योजना उन पेड़ों को एक आर्थिक कारण देती है कि वे खड़े रहें। जब पेड़ से हर साल ₹3,000 की पेंशन मिलती है, तो परिवार को लगता है कि पेड़ को बचाना फायदेमंद है। करनाल के पुंडरक गाँव में ही पाँच पेड़ों को पेंशन मिल रही है, जिनमें से दो निजी जमीन पर और तीन शिव मंदिर परिसर में हैं। इन पेड़ों की वजह से गाँव के लोगों में पुराने पेड़ों को बचाने की जागरूकता बढ़ी है।

अगर आप किसान हैं या गाँव में रहते हैं, तो अपने खेत या आँगन के पुराने पेड़ों पर ध्यान दें। हो सकता है कि आपके पास भी एक ऐसा पेड़ हो, जो इस योजना के लिए पात्र हो।

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हरियाणा सरकार की अन्य योजनाओं की जानकारी भी आपके काम आ सकती है। अगर आप किसान हैं, तो मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत बागवानी फसलों का बीमा करवा सकते हैं। कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान सब्सिडी की जानकारी पढ़ें। गाँव में आवास से जुड़ी मदद के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्राण वायु देवता पेंशन योजना क्या है?

यह हरियाणा सरकार की योजना है, जिसके तहत 75 साल या उससे अधिक उम्र के पुराने और स्वस्थ पेड़ की देखभाल करने वाले को हर साल प्रति पेड़ ₹3,000 की पेंशन दी जाती है। यह योजना 5 जून 2021 को शुरू हुई थी और 26 अक्टूबर 2023 को इसका दोबारा शुभारंभ किया गया था।

इस योजना में कितनी पेंशन मिलती है?

इस योजना में प्रति पेड़ प्रति वर्ष ₹3,000 की पेंशन मिलती है। शुरुआत में यह राशि ₹2,500 थी, 2023 में यह ₹2,750 हो गई और 2026 में यह बढ़कर ₹3,000 हो गई है। यह राशि वृद्धावस्था सम्मान भत्ते के साथ बढ़ती है।

कौन से पेड़ इस योजना के लिए पात्र हैं?

केवल वही पेड़ पात्र हैं, जिनकी उम्र 75 साल या उससे अधिक हो, जो स्वस्थ हों, जो सरकार द्वारा चिह्नित लगभग 40 देसी प्रजातियों में से हों और जो वन भूमि पर खड़े न हों। पीपल, बरगद, नीम, आम, गूलर, इमली और कदंब जैसी प्रजातियाँ इसमें शामिल हैं। गिरा हुआ, खोखला, सूखा या बीमार पेड़ पात्र नहीं है।

आवेदन कैसे करें?

आवेदन अपने जिले के जिला वन अधिकारी के कार्यालय में जाकर ऑफलाइन करना होता है। वहाँ से फॉर्म लेकर भरें, दस्तावेज लगाएँ और जमा करें। इसके बाद वन विभाग के अधिकारी पेड़ का निरीक्षण करेंगे और पाँच सदस्यीय जिला स्तरीय समिति आवेदन की जाँच करके स्वीकृति देगी। कोई ऑनलाइन पोर्टल होने की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है।

पेंशन कैसे मिलती है?

स्वीकृति के बाद पेंशन की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। यह राशि साल में एक बार मिलती है, हर महीने नहीं। पेंशन पेड़ के मालिक, ग्राम पंचायत या संबंधित संस्था के खाते में जाती है।

क्या आवेदन के लिए कोई शुल्क है?

आवेदन के लिए किसी शुल्क की पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो सकी है। सरकारी घोषणाओं और रिपोर्टों में किसी शुल्क का उल्लेख नहीं मिला है। अगर कोई व्यक्ति आवेदन के नाम पर पैसे माँगता है, तो जिला वन अधिकारी से इसकी पुष्टि करें और पैसे न दें।

पेंशन मिलने में कितना समय लगता है?

इसकी कोई निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है। द प्रिंट की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य भर में सैकड़ों आवेदन लंबित हैं और कई मामलों में भुगतान में महीनों की देरी हुई है। इसलिए आवेदन की रसीद संभालकर रखें और समय-समय पर जिला वन कार्यालय में जाकर स्थिति पूछें।

क्या एक व्यक्ति कई पेड़ों के लिए पेंशन ले सकता है?

हाँ, अगर किसी व्यक्ति के पास एक से अधिक पात्र पेड़ हैं और हर पेड़ सभी शर्तें पूरी करता है, तो हर पेड़ के लिए अलग-अलग पेंशन मिल सकती है। लेकिन हर पेड़ की अलग से जाँच और स्वीकृति जरूरी है। योजना की कुल सीमा 4,000 पेड़ों की है।

आधिकारिक स्रोत

इस गाइड की जानकारी हरियाणा सरकार और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर आधारित है। आवेदन करने से पहले जिला वन कार्यालय से ताजा जानकारी जरूर लें, क्योंकि नियम और दस्तावेजों की सूची समय के साथ बदल सकती है।

अस्वीकरण: इस गाइड में दी गई जानकारी 6 नवंबर 2026 तक सार्वजनिक स्रोतों से सत्यापित की गई है। दस्तावेजों की आधिकारिक सूची, आवेदन शुल्क, समय-सीमा और ऑनलाइन पोर्टल के बारे में सार्वजनिक रूप से सत्यापित जानकारी नहीं मिली है, इसलिए इन बिंदुओं पर जिला वन कार्यालय की जानकारी ही अंतिम मानी जाएगी।

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