छत्तीसगढ़: रावघाट पहुंची आजादी के बाद पहली ट्रेन — मोदी सरकार का बड़ा तोहफा, ₹1,628 करोड़ की लाइन पूरी
छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल रावघाट तक रेल पहुंच गई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 20 अक्टूबर को तड़ोकी-रावघाट (17.5 किलोमीटर) और अभनपुर-कुरुद (22 किलोमीटर) ब्रॉडगेज खंडों का उद्घाटन किया। इसके साथ ही डल्ली-राजहरा-रौघाट की 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पूरी तरह चालू हो गई, जिस पर ₹1,628 करोड़ की लागत आई है।
यह रावघाट के लिए ऐतिहासिक क्षण है — आजादी के बाद पहली बार यहां ट्रेन पहुंची है। लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहे इस दूर-दराज के इलाके के लिए रेल कनेक्टिविटी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए रास्ते खोलेगी। उद्घाटन कार्यक्रम में रेल मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े, जबकि मुख्यमंत्री साय स्वयं कार्यक्रम में मौजूद रहे।
इस मौके पर रावघाट-रायपुर और रायपुर-कुरुद नई यात्री ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई। रावघाट से रायपुर का किराया महज ₹55 रखा गया है, ताकि आम लोगों को सस्ती यात्रा मिल सके। रायपुर में 300 इंजन क्षमता वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव रखरखाव केंद्र का शिलान्यास भी किया गया, जो क्षेत्र में रेल प्रबंधन को नई मजबूती देगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस साल रेल बजट में छत्तीसगढ़ को ₹7,000 करोड़ से अधिक का आवंटन मिला है। उन्होंने रेल कनेक्टिविटी के विस्तार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया।
रेल मंत्री ने बताया कि केंड़ी-अभनपुर-राजिम-धमतरी गेज परिवर्तन, पेंड्रा रोड-बिलासपुर-उस्लापुर तीसरी लाइन (हाल ही में स्वीकृत) और खरसिया-परमलकासा दोहरी लाइन का काम भी प्रगति पर है। यह रेल लाइन भिलाई स्टील प्लांट के लिए लौह अयस्क की ढुलाई को भी सुगम बनाएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों में खुशी का माहौल देखा गया। लंबे समय से रेल का इंतजार कर रहे क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब पढ़ाई और इलाज के लिए बड़े शहरों तक पहुंचना आसान होगा, और स्थानीय उपज को बाजार तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
