केंद्र सरकार ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के मामलों में तेज न्याय के लिए चलाई जा रही फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSC) की योजना को आगे बढ़ा दिया है। केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को पांच साल के लिए, यानी 31 मार्च 2031 तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। सरकार ने इसके लिए कुल ₹3,788 करोड़ का बजट तय किया है, ताकि देशभर में इन विशेष अदालतों का जाल और मजबूत हो सके।
779 से बढ़कर 850 होंगी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें
मंजूरी के बाद देश में फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़कर 850 हो जाएगी। यानी 71 नई अदालतें जोड़ी जाएंगी। यह योजना 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही है। इन अदालतों का मकसद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई को तेज करना है, ताकि पीड़ितों को लंबा इंतजार न करना पड़े और मामलों का निपटारा समय पर हो सके।
केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस योजना को 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए जारी रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि तेज न्याय से न सिर्फ पीड़ितों को राहत मिलेगी, बल्कि समाज में अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश भी जाएगा। फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों में मामलों की सुनवाई के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं, जिससे रोजाना सुनवाई और जल्दी फैसले की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।
महिला सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार कदम उठा रही है। फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों का विस्तार इसी दिशा में एक बड़ा फैसला माना जा रहा है। नई अदालतों के शुरू होने से लंबित मामलों की संख्या कम होगी और न्याय मिलने में लगने वाला समय घटेगा। इससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की योजना कब तक बढ़ाई गई है?
केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को 31 मार्च 2031 तक बढ़ाने को मंजूरी दी है।
इस योजना के लिए कितना बजट मंजूर किया गया है?
इस योजना के लिए कुल ₹3,788 करोड़ का बजट मंजूर किया गया है।
देश में अब कुल कितनी फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें होंगी?
अब इन अदालतों की संख्या 779 से बढ़कर 850 हो जाएगी, यानी 71 नई अदालतें जुड़ेंगी।
फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें किन मामलों की सुनवाई करती हैं?
ये अदालतें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की तेज सुनवाई करती हैं।
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