प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का मेट्रो नेटवर्क पिछले बारह वर्षों में तेजी से बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने 5 नवंबर को सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि 2014 में देश के सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो की कुल लंबाई 248 किलोमीटर थी, जबकि अब यह नेटवर्क 26 शहरों में करीब 1200 किलोमीटर तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, मेट्रो के इस विस्तार ने शहरों में रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है और शहरी परिवहन की तस्वीर बदल दी है।
पुणे मेट्रो परियोजनाओं के साथ दिया था विस्तार का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने 3 नवंबर को पुणे में मेट्रो से जुड़ी परियोजनाओं का शुभारंभ किया था और उसी दौरान देश के मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि 2014 के बाद से मेट्रो नेटवर्क में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक और तेज शहरी परिवहन किसी भी बड़े शहर की तरक्की के लिए जरूरी है। पुणे मेट्रो की लाइन-3 और दूसरे चरण के कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शहर के भीतर आवाजाही को और सुगम बनाने की दिशा में कदम हैं।
2014 से पहले मेट्रो सेवा कुछ ही बड़े शहरों तक सीमित थी, लेकिन अब छोटे और मझोले शहरों में भी मेट्रो और रैपिड ट्रांजिट परियोजनाएं पहुंच रही हैं। इससे दफ्तर जाने वाले लोगों, छात्रों और व्यापारियों को समय पर और भरोसेमंद सफर की सुविधा मिल रही है। सड़कों पर गाड़ियों का दबाव कम होने से जाम और प्रदूषण में भी राहत मिलने की उम्मीद रहती है। मेट्रो स्टेशनों के आसपास व्यापार, रोजगार और आवासीय विकास को भी गति मिलती है, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
हरियाणा के लिए भी मेट्रो नेटवर्क का यह विस्तार अहम है, क्योंकि दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहर जुड़े हुए हैं और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लाखों लोग रोजाना इस सेवा का उपयोग करते हैं। देशभर में 26 शहरों तक पहुंचा मेट्रो नेटवर्क अब शहरी भारत की पहचान बन गया है। आने वाले समय में नई लाइनों और नए शहरों में मेट्रो के विस्तार से यात्रियों को और बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।
मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का असर सिर्फ सफर तक सीमित नहीं है। जिन शहरों में मेट्रो पहुंची है, वहां स्टेशनों के आसपास बाजार, दफ्तर और आवासीय इलाकों का विकास हुआ है। युवा और कामकाजी लोग अब लंबी दूरी का सफर भी तय समय में पूरा कर पाते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या आसान हुई है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने से शहरों में गाड़ियों की भीड़ कम होगी और हवा भी साफ रहेगी। इसी सोच के साथ देश के अलग-अलग शहरों में मेट्रो परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में और अधिक शहर इस सुविधा से जुड़ सकें।

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