देश की रक्षा करते हुए शहीद होने वाले हरियाणा के सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के परिवारों के लिए राज्य सरकार की सबसे बड़ी आर्थिक सहायता एक्स-ग्रेशिया अनुदान है। हरियाणा सरकार ने इस राशि को ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दिया है। इस गाइड में इसे शहीद सैनिक सम्मान के नाम से समझाया गया है — सरकारी रिकॉर्ड में यह सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण विभाग की एक्स-ग्रेशिया अनुदान नीति है।
यह राशि कोई साधारण मुआवज़ा नहीं है। यह राज्य की ओर से शहीद के परिवार के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है, ताकि परिवार को अचानक आई आर्थिक मुश्किल में सहारा मिल सके। इस लेख में आपको पूरी और सत्यापित जानकारी मिलेगी — कितनी राशि मिलेगी, कौन पात्र है, राशि परिवार में कैसे बँटती है, दिव्यांग सैनिकों को क्या मिलता है, अग्निवीरों पर क्या नियम है, और दावा कैसे किया जाता है।
हरियाणा शहीद सैनिक सम्मान ₹1 करोड़
योजना एक नज़र में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | शहीद सैनिक सम्मान — एक्स-ग्रेशिया अनुदान (Ex-Gratia Grant) |
| राज्य | हरियाणा |
| विभाग | सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण विभाग, हरियाणा |
| शहीद के परिवार को राशि | ₹1 करोड़ |
| पहले की राशि | ₹50 लाख |
| बढ़ोतरी की घोषणा | बजट 2024-25, 23 फरवरी 2024 |
| मंत्रिमंडल की मंज़ूरी | 28 दिसंबर 2024 |
| लागू होने की तारीख | 23 फरवरी 2024 से |
| किन्हें कवर करती है | सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) |
| सबसे ज़रूरी शर्त | भर्ती के समय हरियाणा का अधिवास (Domicile) होना |
| दावा कहाँ करें | अपने ज़िले का ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय |
| हेल्पलाइन | 0172-5210277 (सोमवार–शनिवार, सुबह 9:30–शाम 5:30) |
यह सहायता किन मामलों में मिलती है?
एक्स-ग्रेशिया अनुदान हर मौत पर नहीं मिलता। यह उन्हीं मामलों में मिलता है, जहाँ जवान की मौत को रक्षा प्राधिकारियों या गृह मंत्रालय द्वारा बैटल कैज़ुअल्टी (Battle Casualty) घोषित किया गया हो। यानी जवान की मृत्यु कर्तव्य पालन के दौरान, ईमानदारी से की गई सरकारी ड्यूटी में हुई हो।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, इन परिस्थितियों में हुई मृत्यु इस दायरे में आती है:
- युद्ध या युद्ध जैसी कार्रवाई में मृत्यु
- आतंकवादी या उग्रवादी हमले में मृत्यु
- सीमा पर झड़प में मृत्यु
- आईईडी विस्फोट में मृत्यु
- संयुक्त राष्ट्र शांति सेना (UN Peacekeeping Force) में सेवा के दौरान मृत्यु
- एमटी दुर्घटना, हवाई दुर्घटना और हृदयाघात (Cardiac Arrest) से मृत्यु, जब वह कर्तव्य के दौरान हो
- प्राकृतिक आपदा में मृत्यु, जहाँ कर्तव्य निभाने में असाधारण साहस और निर्णय की ज़रूरत पड़ी हो
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों — जैसे बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और असम राइफल्स — के जवानों के मामले में भी यही नियम लागू होता है, क्योंकि वे गृह मंत्रालय के दायरे में आते हैं। चुनाव ड्यूटी, आंतरिक सुरक्षा ड्यूटी और बचाव अभियानों के दौरान हुई मृत्यु भी इस नीति के दायरे में आती है।
कितनी राशि मिलेगी?
शहीद के परिवार को मिलने वाली राशि और दिव्यांग सैनिकों को मिलने वाली सहायता की दरें अलग-अलग हैं। दोनों की पूरी जानकारी नीचे दी गई है।
| श्रेणी | राशि |
|---|---|
| शहीद (बैटल कैज़ुअल्टी) के परिजनों को एक्स-ग्रेशिया | ₹1 करोड़ |
| दिव्यांगता 70% या अधिक होने पर | ₹35 लाख |
| दिव्यांगता 50% से 69% होने पर | ₹25 लाख |
| दिव्यांगता 20% से 49% होने पर | ₹15 लाख |
| द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों और उनकी विधवाओं को मासिक सहायता | ₹10,000 प्रति माह |
राशि बढ़ने का इतिहास
एक्स-ग्रेशिया की राशि में यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई। 23 फरवरी 2024 को पेश किए गए बजट 2024-25 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शहीदों के परिजनों को मिलने वाली राशि ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹1 करोड़ करने की घोषणा की थी। इसके बाद 28 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंज़ूरी दी गई। अधिसूचना के अनुसार यह संशोधित राशि 23 फरवरी 2024 से लागू है। इससे पहले राशि में आखिरी संशोधन 2016 में हुआ था।
दिव्यांगता वाली सहायता में भी बदलाव हुआ है। पहले ₹35 लाख सिर्फ 75% या अधिक दिव्यांगता पर मिलता था, अब यह 70% या अधिक दिव्यांगता पर मिलता है। इसी तरह 50% से 69% और 20% से 49% दिव्यांगता के स्लैब तय किए गए हैं। एक ज़रूरी नियम यह भी है कि दिव्यांगता का प्रतिशत शुरुआती मेडिकल बोर्ड द्वारा तय किए गए स्थायी प्रतिशत के आधार पर माना जाएगा — बाद में रिव्यू मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रतिशत बदलने पर भी एक्स-ग्रेशिया की राशि नहीं बदलेगी।
₹1 करोड़ की राशि परिवार में कैसे बँटती है?
₹1 करोड़ की राशि पूरे परिवार को एक साथ नहीं दी जाती। अधिसूचना में इसका बँटवारा साफ तौर पर तय किया गया है, ताकि पत्नी, बच्चों और माता-पिता — तीनों को उनका हक मिले।
| परिवार का सदस्य | हिस्सा | राशि |
|---|---|---|
| पत्नी | 35% | ₹35 लाख |
| बच्चे | 35% | ₹35 लाख |
| माता-पिता | 30% | ₹30 लाख |
इस बँटवारे के कुछ खास नियम भी जानना ज़रूरी है:
- पत्नी को उसका 35% हिस्सा पुनर्विवाह के बाद भी मिलता है — यानी पत्नी के दोबारा विवाह करने पर भी उसका हिस्सा नहीं छिनता।
- बच्चों का 35% हिस्सा और माता-पिता का 30% हिस्सा उनकी निर्भरता पर निर्भर नहीं करता — चाहे माता-पिता आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों, तब भी उन्हें उनका हिस्सा मिलेगा।
- अविवाहित शहीद के मामले में पूरी राशि, यानी 100%, माता-पिता को मिलती है — माता और पिता के बीच बराबर-बराबर।
- अगर शहीद के कोई बच्चे न हों, तो विधवा और माता-पिता राशि को बराबर-बराबर बाँटते हैं — यानी दोनों पक्षों को 50-50%।
- माता-पिता का हिस्सा माता और पिता के बीच बराबर बाँटा जाता है। अगर माता-पिता में से कोई एक ही जीवित हो, तो उसका हिस्सा उसी को मिलता है।
कौन पात्र है? (Eligibility)
इस सहायता के लिए ये शर्तें पूरी होनी चाहिए:
- शहीद सैनिक या CAPF जवान सेना, नौसेना, वायुसेना या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल का सदस्य रहा हो।
- जवान की मृत्यु को रक्षा प्राधिकारियों या गृह मंत्रालय द्वारा बैटल कैज़ुअल्टी घोषित किया गया हो।
- जवान भर्ती के समय हरियाणा का अधिवासी (Domicile) रहा हो — यह सबसे ज़रूरी शर्त है। भर्ती के समय हरियाणा का निवासी होना ही पात्रता तय करता है, बाद का पता नहीं।
- दावा करने वाला व्यक्ति शहीद का परिजन या नेक्स्ट ऑफ किन (Next of Kin) हो — पत्नी, बच्चे या माता-पिता।
- दिव्यांगता वाली सहायता के लिए दिव्यांगता स्थायी होनी चाहिए और उसका प्रतिशत शुरुआती मेडिकल बोर्ड से तय हुआ हो।
अग्निवीरों के परिवार को भी ₹1 करोड़
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों के परिवारों को भी अब यही सम्मान मिलता है। 5 मई 2025 को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया कि शहीद अग्निवीर के परिजनों को भी ₹1 करोड़ का एक्स-ग्रेशिया दिया जाएगा। इस बारे में 17 जून 2025 को अधिसूचना जारी की गई।
इसका मतलब है कि अग्निवीरों को नियमित सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के बराबर दर्जा दिया गया है। अगर कोई अग्निवीर युद्ध, आतंकवादी हमले, सीमा पर झड़प या संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में सेवा के दौरान बैटल कैज़ुअल्टी होता है, तो उसके परिवार को भी ₹1 करोड़ की राशि मिलेगी। राशि का बँटवारा भी वही रहेगा — पत्नी 35%, बच्चे 35% और माता-पिता 30%।
इसी फैसले के साथ मंत्रिमंडल ने अग्निवीरों को मिलने वाले वीरता पुरस्कारों पर एकमुश्त नकद पुरस्कार भी मंज़ूर किया था — परमवीर चक्र पर ₹2 करोड़, महावीर चक्र और अशोक चक्र पर ₹1-1 करोड़, वीर चक्र पर ₹50 लाख, सेना मेडल पर ₹21 लाख और मेंशन-इन-डिस्पैच (वीरता) पर ₹10 लाख। यह पुरस्कार राशि एक्स-ग्रेशिया से अलग है और सिर्फ पुरस्कार पाने वाले अग्निवीरों को मिलती है।
शहीद के परिवार को मिलने वाले अन्य लाभ
एक्स-ग्रेशिया के अलावा शहीद के परिवार को सरकार की ओर से और भी सहायताएँ मिलती हैं। ये लाभ अलग-अलग नीतियों के तहत मिलते हैं, इसलिए इनके लिए अलग से जानकारी लेनी चाहिए।
अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी
पिछले 11 वर्षों में 418 शहीदों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी गई है — यह जानकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 23 मार्च 2026 को गुरुग्राम में शहीदी दिवस कार्यक्रम में दी थी। हरियाणा सरकार की अनुकंपा नियुक्ति नीति, 2023 के अनुसार, बैटल कैज़ुअल्टी के परिवार के एक पात्र सदस्य को हरियाणा सरकार में ग्रुप बी, सी या डी के पद पर नियुक्ति दी जा सकती है। परिवार में पत्नी, या अगर पत्नी नौकरी नहीं चाहती तो विवाहित या अविवाहित बच्चों में से कोई एक, इसके लिए पात्र होता है। इस नियुक्ति के लिए आवेदन बैटल कैज़ुअल्टी की तारीख से तीन साल के भीतर ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण अधिकारी के पास करना होता है। ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी की ज़िम्मेदारी है कि वह शहीद के परिवार से मिलकर सभी लाभ दिलाने में मदद करे, जिसमें आवेदन फॉर्म भरना और रक्षा या CAPF प्राधिकारियों से ज़रूरी दस्तावेज़ जुटाना भी शामिल है।
शहीदों के बच्चों को छात्रवृत्ति
जनवरी 2026 में सरकार ने शहीदों और बैटल कैज़ुअल्टी के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना की घोषणा की थी। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों को ₹60,000 सालाना, स्नातक के छात्रों को ₹72,000 सालाना और स्नातकोत्तर के छात्रों को ₹96,000 सालाना मिलते हैं — यानी महीने के हिसाब से ₹5,000 से ₹8,000 तक। यह छात्रवृत्ति सशस्त्र बलों और CAPF, दोनों के शहीदों के बच्चों को मिलती है।
द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों को मासिक सहायता
द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेने वाले हरियाणा के सैनिकों और उनकी विधवाओं को ₹10,000 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि पहले ₹4,500 प्रति माह थी, जिसे नवंबर 2017 में बढ़ाकर ₹10,000 किया गया था। मुख्यमंत्री ने मार्च 2026 में भी इस सहायता का उल्लेख किया था, जिससे साफ है कि यह लाभ अब भी जारी है।
दावा कैसे करें? (Claim Process — Step-by-Step)
यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है, इसलिए इसे ध्यान से पढ़ें। यह कोई ऑनलाइन फॉर्म भरने वाली योजना नहीं है। शहीद के परिवार को दावा अपने ज़िले के ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय (District Sainik and Ardh Sainik Welfare Office) के ज़रिए करना होता है। कार्यालय ही दस्तावेज़ों की जाँच करता है और मामले को आगे बढ़ाता है।
स्टेप 1: अपने ज़िले के सैनिक कल्याण कार्यालय से संपर्क करें। शहीद के गृह ज़िले का ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय ही इस काम के लिए सही कार्यालय है। अगर आपको अपने ज़िले के कार्यालय का पता या फोन नंबर नहीं पता, तो विभाग की हेल्पलाइन 0172-5210277 पर पूछें।
स्टेप 2: कार्यालय में दावा दर्ज कराएँ। परिजन या नेक्स्ट ऑफ किन कार्यालय में जाकर दावा दर्ज कराएँ। कई मामलों में ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी खुद शहीद के परिवार से मिलने जाता है और आवेदन फॉर्म भरने तथा दस्तावेज़ जुटाने में मदद करता है — इसलिए परिवार को अकेले भटकने की ज़रूरत नहीं है।
स्टेप 3: दस्तावेज़ जमा करें। नीचे दी गई दस्तावेज़ों की सूची तैयार रखें। कार्यालय मुख्यालय द्वारा जारी मानक चेकलिस्ट के अनुसार ज़िले के स्तर पर ही सभी दस्तावेज़ों की जाँच करता है। अगर कोई दस्तावेज़ अधूरा हो, तो कार्यालय बताएगा कि क्या और कहाँ से लाना है।
स्टेप 4: ज़िला स्तर पर जाँच। ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण अधिकारी पूरी तरह दस्तावेज़युक्त मामला उपायुक्त (Deputy Commissioner) के सामने रखता है। उपायुक्त ही ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय के अध्यक्ष भी होते हैं।
स्टेप 5: स्वीकृति। एक्स-ग्रेशिया अनुदान को स्वीकृत करने का अधिकार सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण विभाग के प्रशासनिक सचिव को है, और यह अधिकार संबंधित उपायुक्त को सौंपा गया है। भुगतान स्वीकृति पत्र पर ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर होते हैं।
स्टेप 6: राशि जारी होना। स्वीकृति पत्र की एक प्रति मुख्यालय को भेजी जाती है, जहाँ से बजट से राशि जारी की जाती है। इसके बाद राशि संबंधित ज़िले को ऑनलाइन भेजी जाती है।
स्टेप 7: पैसा खाते में। स्वीकृत राशि लाभार्थियों के आधार से लिंक्ड बैंक खातों में RTGS के ज़रिए सीधे भेजी जाती है। हर लाभार्थी को उसका हिस्सा अलग-अलग उसके अपने खाते में मिलता है — पत्नी, बच्चों और माता-पिता के हिस्से अलग-अलग खातों में जाते हैं। इसलिए दावा करते समय हर लाभार्थी का आधार से लिंक्ड और सक्रिय बैंक खाता तैयार रखना बहुत ज़रूरी है।
क्या ऑनलाइन आवेदन का कोई विकल्प है?
इस सवाल का साफ जवाब देना ज़रूरी है, क्योंकि कई वेबसाइटों पर गलत जानकारी फैली हुई है।
SARAL पोर्टल पर इस दावे की कोई ऑनलाइन सेवा सत्यापित नहीं हुई है। SARAL पर कोविड से हुई मौतों के परिजनों के लिए ₹50,000 की एक्स-ग्रेशिया सेवा ज़रूर थी, लेकिन वह एक अलग योजना थी। शहीद सैनिकों के एक्स-ग्रेशिया दावे के लिए SARAL पर कोई सेवा होने की पुष्टि हमारी जाँच में नहीं हुई — इसलिए SARAL को इस दावे का रास्ता मानकर न चलें।
CAPF के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल: 10 जुलाई 2026 को सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण मंत्री राव नरबीर सिंह ने गुरुग्राम में सेवानिवृत्त CAPF कर्मियों के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया था। खबरों के अनुसार इस पोर्टल से सेवानिवृत्त कर्मी ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं, और शहीद या दिव्यांग कर्मियों के परिवार भी इसके ज़रिए एक्स-ग्रेशिया सहायता, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य कल्याण लाभों के लिए आवेदन कर सकेंगे। लेकिन इस पोर्टल का सीधा वेब पता (URL) हमारी जाँच में किसी आधिकारिक या समाचार स्रोत से सत्यापित नहीं हो पाया है, इसलिए हम यहाँ कोई लिंक नहीं दे रहे हैं। सही लिंक के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या अपने ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय से पूछें — किसी अनजान वेबसाइट पर अपनी जानकारी न डालें।
सबसे सुरक्षित रास्ता यही है: दावा ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय से शुरू करें। वही कार्यालय आपको बताएगा कि आपके मामले में ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल करना है या नहीं।
ज़रूरी दस्तावेज़ (Documents Required)
नीचे दी गई सूची उन दस्तावेज़ों की है, जो ऐसे दावों में आमतौर पर माँगे जाते हैं। साफ कर दें — विभाग की आधिकारिक दस्तावेज़ चेकलिस्ट हमारी जाँच में ऑनलाइन प्रकाशित नहीं मिली है। इसलिए नीचे दी गई सूची को अंतिम न मानें — आपके ज़िले के कार्यालय की लाइव चेकलिस्ट ही अंतिम होगी और अगर कार्यालय कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ माँगे, तो वही मान्य होगा।
- शहीद की बैटल कैज़ुअल्टी प्रमाण पत्र — संबंधित रिकॉर्ड ऑफिस, सेवा मुख्यालय या गृह मंत्रालय से जारी
- शहीद का मृत्यु प्रमाण पत्र
- शहीद के सेवा विवरण (Service Particulars) — रैंक, यूनिट, सेवा संख्या आदि
- हरियाणा अधिवास का प्रमाण — भर्ती के समय हरियाणा का निवासी होने का सबूत
- नेक्स्ट ऑफ किन / कानूनी वारिस प्रमाण पत्र — सेवा मुख्यालय या रिकॉर्ड ऑफिस से, या तहसीलदार से जारी कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
- लाभार्थियों के आधार कार्ड
- बैंक पासबुक की कॉपी — आधार से लिंक्ड खाता, जिसमें RTGS से राशि आएगी
- परिवार पहचान पत्र (PPP) — अगर बना हुआ है
- लाभार्थियों की पासपोर्ट साइज़ फोटो
- दिव्यांगता के दावे के लिए मेडिकल बोर्ड का दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जिसमें स्थायी दिव्यांगता का प्रतिशत दर्ज हो
- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर — संपर्क और सूचना के लिए
दस्तावेज़ जमा करते समय हर दस्तावेज़ की मूल प्रति और फोटोकॉपी, दोनों साथ रखें। कार्यालय मूल दस्तावेज़ देखकर फोटोकॉपी अपने पास रखेगा।
पैसा कब मिलेगा और स्टेटस कैसे चेक करें?
समय-सीमा: एक्स-ग्रेशिया के भुगतान के लिए कोई तय समय-सीमा हमारी जाँच में किसी सत्यापित स्रोत से नहीं मिली है, इसलिए हम यहाँ कोई दिन गिनकर नहीं बता रहे हैं। भुगतान की रफ्तार इस बात पर निर्भर करती है कि दस्तावेज़ कितने पूरे हैं, बैटल कैज़ुअल्टी प्रमाण पत्र कितनी जल्दी मिलता है, और ज़िला व मुख्यालय स्तर पर जाँच कितनी जल्दी पूरी होती है। दस्तावेज़ पूरे होने पर मामला तेज़ी से आगे बढ़ता है — इसलिए पहली बार में ही सही और पूरे दस्तावेज़ देना सबसे अच्छा तरीका है।
स्टेटस कैसे चेक करें: इस दावे का कोई सार्वजनिक ऑनलाइन स्टेटस पेज सत्यापित नहीं हुआ है। स्टेटस जानने के लिए अपने ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय से सीधे संपर्क करें — आवेदन जमा करते समय मिलने वाली रसीद या संदर्भ संख्या संभालकर रखें, वही स्टेटस पूछने में काम आएगी। इसके अलावा विभाग की हेल्पलाइन 0172-5210277 पर भी जानकारी ली जा सकती है।
हेल्पलाइन और संपर्क
| संपर्क | विवरण |
|---|---|
| सैनिक कल्याण हेल्पलाइन (कॉल सेंटर) | 0172-5210277 |
| समय | सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक (सरकारी छुट्टियों को छोड़कर) |
| शुरू हुआ | 20 मार्च 2026 से |
| विभाग | सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण विभाग, हरियाणा |
| दावा कार्यालय | अपने ज़िले का ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय |
यह कॉल सेंटर सेवारत सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों, CAPF कर्मियों और उनके परिवारों की मदद के लिए बनाया गया है। यहाँ से योजनाओं की सही जानकारी और शिकायतों का निपटारा, दोनों की मदद मिलती है।
ध्यान रखने वाली बातें
- कोई दलाल या एजेंट पैसे लेकर दावा न करवाए: एक्स-ग्रेशिया का दावा सरकारी प्रक्रिया से होता है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। अगर कोई व्यक्ति पैसे लेकर राशि दिलाने का दावा करे, तो वह धोखाधड़ी हो सकती है — ऐसे व्यक्ति की शिकायत ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय या उपायुक्त कार्यालय में करें।
- OTP या बैंक विवरण किसी को न दें: सरकार कभी फोन पर OTP, बैंक खाता नंबर या पासवर्ड नहीं माँगती। ऐसा कोई कॉल आए तो उसे नज़रअंदाज़ करें और सीधे कार्यालय से संपर्क करें।
- गलत वेबसाइटों से बचें: दावा सिर्फ ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय या विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से करें। किसी अनजान लिंक पर अपनी या शहीद की जानकारी न डालें।
- बैंक खाता आधार से लिंक्ड रखें: राशि RTGS से आधार-लिंक्ड खाते में आती है। अगर खाता बंद हो या आधार से अनलिंक हो, तो भुगतान अटक सकता है। दावा करने से पहले हर लाभार्थी का खाता जाँच लें।
- दस्तावेज़ों की कॉपी संभालकर रखें: जमा किए गए हर दस्तावेज़ की एक कॉपी और कार्यालय से मिली रसीद अपने पास सुरक्षित रखें।
- जानकारी बदलने पर सूचित करें: अगर दावा प्रक्रिया के दौरान पता, बैंक खाता या मोबाइल नंबर बदलता है, तो तुरंत कार्यालय को बताएँ।
शहीद परिवारों के लिए अन्य हरियाणा योजनाएँ
शहीद के परिवार को एक्स-ग्रेशिया के अलावा राज्य की दूसरी योजनाओं से भी सहारा मिल सकता है। ये लेख भी देखें:
- मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना — गरीब परिवारों की सालाना आय बढ़ाकर कम से कम ₹1.80 लाख करने की योजना: मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना
- हरियाणा दिव्यांग पेंशन योजना — दिव्यांगजनों को ₹3,200 प्रति माह पेंशन: हरियाणा दिव्यांग पेंशन ₹3,200
- हैप्पी कार्ड योजना — अंत्योदय परिवार के हर सदस्य को साल में 1,000 KM मुफ्त बस यात्रा: हरियाणा हैप्पी कार्ड योजना
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: हरियाणा में शहीद सैनिक के परिवार को कितनी एक्स-ग्रेशिया मिलती है? उत्तर: ₹1 करोड़। यह राशि पहले ₹50 लाख थी, जिसे बढ़ाकर ₹1 करोड़ किया गया है। यह संशोधन 23 फरवरी 2024 से लागू है।
प्रश्न 2: ₹1 करोड़ की राशि किसे मिलती है और कैसे बँटती है? उत्तर: यह राशि शहीद के नेक्स्ट ऑफ किन को मिलती है — पत्नी को 35% (₹35 लाख), बच्चों को 35% (₹35 लाख) और माता-पिता को 30% (₹30 लाख)। अविवाहित शहीद के मामले में पूरी राशि माता-पिता को मिलती है, और अगर शहीद के कोई बच्चे न हों तो विधवा और माता-पिता राशि को बराबर-बराबर बाँटते हैं।
प्रश्न 3: इस सहायता के लिए सबसे ज़रूरी शर्त क्या है? उत्तर: शहीद सैनिक या CAPF जवान भर्ती के समय हरियाणा का अधिवासी रहा हो, और उसकी मृत्यु को रक्षा प्राधिकारियों या गृह मंत्रालय द्वारा बैटल कैज़ुअल्टी घोषित किया गया हो।
प्रश्न 4: दिव्यांग सैनिकों को कितनी सहायता मिलती है? उत्तर: 70% या अधिक दिव्यांगता पर ₹35 लाख, 50% से 69% दिव्यांगता पर ₹25 लाख और 20% से 49% दिव्यांगता पर ₹15 लाख। दिव्यांगता का प्रतिशत शुरुआती मेडिकल बोर्ड द्वारा तय स्थायी प्रतिशत से माना जाता है।
प्रश्न 5: क्या अग्निवीरों के परिवार को भी ₹1 करोड़ मिलता है? उत्तर: हाँ। 5 मई 2025 के मंत्रिमंडल के फैसले और 17 जून 2025 की अधिसूचना के अनुसार, शहीद अग्निवीर के परिजनों को भी ₹1 करोड़ का एक्स-ग्रेशिया मिलता है।
प्रश्न 6: दावा कैसे करें — क्या ऑनलाइन आवेदन होता है? उत्तर: दावा अपने ज़िले के ज़िला सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय के ज़रिए करना होता है — यह SARAL पर ऑनलाइन फॉर्म भरने वाली योजना नहीं है। जुलाई 2026 में CAPF के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च हुआ है, लेकिन उसका सीधा वेब पता सत्यापित नहीं हो पाया है, इसलिए दावा कार्यालय से ही शुरू करें।
प्रश्न 7: पैसा कैसे मिलेगा और स्टेटस कैसे चेक करें? उत्तर: स्वीकृति के बाद राशि लाभार्थियों के आधार से लिंक्ड बैंक खातों में RTGS के ज़रिए सीधे भेजी जाती है। भुगतान की कोई तय समय-सीमा सत्यापित नहीं हुई है। स्टेटस के लिए अपने ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय या हेल्पलाइन 0172-5210277 (सोमवार–शनिवार, सुबह 9:30–शाम 5:30) से संपर्क करें।
प्रश्न 8: क्या शहीद के परिवार को नौकरी भी मिलती है? उत्तर: हाँ। अनुकंपा नियुक्ति नीति, 2023 के अनुसार, शहीद के परिवार के एक पात्र सदस्य को हरियाणा सरकार में ग्रुप बी, सी या डी के पद पर नौकरी दी जा सकती है। इसके लिए बैटल कैज़ुअल्टी की तारीख से तीन साल के भीतर ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी के पास आवेदन करना होता है। पिछले 11 वर्षों में 418 आश्रितों को ऐसी नौकरियाँ दी गई हैं।
आधिकारिक स्रोत
- सैनिक और अर्ध सैनिक कल्याण विभाग, हरियाणा — आधिकारिक वेबसाइट: sainikwelfareharyana.gov.in
- हरियाणा सरकार की मंत्रिमंडल विज्ञप्ति (28 दिसंबर 2024) — एक्स-ग्रेशिया ₹50 लाख से ₹1 करोड़: 5 Dariya News
- द ट्रिब्यून (10 मई 2025) — एक्स-ग्रेशिया दोगुनी, दिव्यांगता स्लैब, बँटवारा और स्वीकृति अधिकारी: The Tribune
- द ट्रिब्यून (6 मई 2025) — अग्निवीरों के लिए ₹1 करोड़ एक्स-ग्रेशिया: The Tribune
- द ट्रिब्यून (10 जुलाई 2026) — सेवानिवृत्त CAPF कर्मियों के लिए ऑनलाइन पोर्टल: The Tribune
- द ट्रिब्यून (23 मार्च 2026) — 418 आश्रितों को सरकारी नौकरी, ₹10,000 मासिक सहायता: The Tribune
- द वीक / पीटीआई (15 अप्रैल 2026) — सैनिक कल्याण कॉल सेंटर 0172-5210277: The Week
- अंत्योदय SARAL पोर्टल (सामान्य जानकारी के लिए): saralharyana.gov.in
नोट: इस लेख की जानकारी 6 नवंबर 2026 तक की सत्यापित जानकारी पर आधारित है। राशि, पात्रता और प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है — दावा करने से पहले अपने ज़िला सैनिक कल्याण कार्यालय या विभाग की हेल्पलाइन से ताज़ा जानकारी ज़रूर जाँच लें।

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