शनिवार, 7 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क  |  हिन्दी English
किसान

मेरा पानी मेरी विरासत योजना 2026: धान छोड़ने पर ₹8,000/एकड़

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: मेरा पानी मेरी विरासत योजना 2026: धान छोड़ने पर ₹8,000/एकड़
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 11:29 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: किसान
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

मेरा पानी मेरी विरासत योजना हरियाणा 2026: धान छोड़ने पर ₹8,000 प्रति एकड़

हरियाणा में धान की खेती ने भूजल को गहरे संकट में डाल दिया है। राज्य के कई ब्लॉकों में पानी का स्तर हर साल नीचे जा रहा है, और इसका सीधा कारण है धान जैसी ज्यादा पानी माँगने वाली फसल की लगातार खेती। इसी समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना शुरू की है। इस योजना के तहत जो किसान धान की जगह कम पानी वाली वैकल्पिक फसल उगाते हैं, उन्हें सरकार ₹8,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि देती है। दलहन, तिलहन और कपास उगाने पर ₹2,000 प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस भी मिलता है, यानी कुल सहायता ₹10,000 प्रति एकड़ तक पहुँच सकती है।

यह योजना हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही है। योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी। इसका मकसद सिर्फ पैसा देना नहीं है — मकसद है फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, भूजल बचाना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और जलवायु के अनुकूल खेती को आगे बढ़ाना। अक्टूबर 2026 में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया था कि अब तक इस योजना के तहत 1.59 लाख किसानों को ₹166.34 करोड़ की सहायता दी जा चुकी है और किसानों ने करीब 2.34 लाख एकड़ जमीन में धान की जगह दूसरी फसल अपनाई है।

महत्वपूर्ण सूचना — खरीफ 2026 की स्थिति: खरीफ 2026 के लिए इस योजना का पंजीकरण 20 मई 2026 से शुरू हुआ था। फसल पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 थी, और छूटे हुए किसानों के लिए पोर्टल 21 से 27 सितंबर 2026 तक दोबारा खोला गया था। नवंबर 2026 की शुरुआत तक खरीफ 2026 की पंजीकरण विंडो बंद हो चुकी है। इसलिए यह लेख एवरग्रीन गाइड के रूप में तैयार किया गया है — इसमें योजना की पूरी जानकारी, पात्रता, दस्तावेज़ और आवेदन प्रक्रिया विस्तार से दी गई है, ताकि अगले सीज़न (खरीफ 2027) में आप समय पर आवेदन कर सकें। खरीफ 2027 की तिथियाँ अभी घोषित नहीं हुई हैं; जैसे ही विभाग नई तिथियाँ जारी करेगा, यह लेख अपडेट किया जाएगा।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम मेरा पानी मेरी विरासत योजना
राज्य हरियाणा
शुरू हुई वर्ष 2020
विभाग कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा सरकार
प्रोत्साहन राशि ₹8,000 प्रति एकड़
अतिरिक्त बोनस दलहन, तिलहन और कपास पर ₹2,000 प्रति एकड़
अधिकतम सहायता ₹10,000 प्रति एकड़ तक
भुगतान का तरीका एक ही किस्त में सीधे बैंक खाते में (DBT)
आवेदन का माध्यम मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल (ऑनलाइन)
आधिकारिक पोर्टल fasal.haryana.gov.in
विभागीय पोर्टल agriharyana.gov.in
खरीफ 2026 पंजीकरण 20 मई 2026 से शुरू; अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 (पोर्टल 21–27 सितंबर 2026 तक दोबारा खुला)
खरीफ 2026 की वर्तमान स्थिति पंजीकरण विंडो बंद — अगले सीज़न की प्रतीक्षा करें

₹7,000 या ₹8,000 — सही राशि कौन सी है?

इंटरनेट पर इस योजना की राशि को लेकर दो अलग-अलग आँकड़े दिखते हैं — ₹7,000 प्रति एकड़ और ₹8,000 प्रति एकड़। यह भ्रम दूर करना ज़रूरी है। योजना की शुरुआत में किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसल उगाने पर ₹7,000 प्रति एकड़ की सहायता दी जाती थी। बाद में 2025-26 के बजट में इस राशि को बढ़ाकर ₹8,000 प्रति एकड़ कर दिया गया।

खरीफ 2026 के लिए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने 23–24 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट रूप से घोषणा की कि पिछले चार वर्षों से धान उगा रहे किसान यदि अब धान छोड़कर वैकल्पिक फसल अपनाते हैं तो उन्हें ₹8,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिलेगी, और दलहन, तिलहन व कपास पर ₹2,000 प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। यह जानकारी समाचार एजेंसी पीटीआई सहित कई राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित हुई है। इसलिए वर्तमान और सही राशि ₹8,000 प्रति एकड़ है (बोनस सहित अधिकतम ₹10,000 प्रति एकड़)। जो वेबसाइट या लेख अब भी ₹7,000 बता रहे हैं, वे पुरानी जानकारी पर आधारित हैं।

मेरा पानी मेरी विरासत योजना हरियाणा क्यों शुरू की गई?

हरियाणा देश के सबसे बड़े धान उत्पादक राज्यों में से एक है, लेकिन धान की खेती में बहुत ज्यादा पानी लगता है। लगातार धान उगाने से भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है और पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार हरियाणा के कई क्षेत्र “अति-दोहित” (ओवर-एक्सप्लॉइटेड) श्रेणी में आते हैं।

मेरा पानी मेरी विरासत योजना का उद्देश्य है:

  • भूजल संरक्षण — धान की जगह कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देकर पानी बचाना।
  • फसल विविधीकरण — किसान एक ही फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि मक्का, दलहन, तिलहन, कपास, सब्ज़ी और बागवानी जैसी फसलों की ओर बढ़ें।
  • मिट्टी की सेहत — लगातार धान से थकी मिट्टी को आराम और पोषण मिले; योजना के तहत ढैंचा के बीज भी वितरित किए जाते हैं।
  • किसान की आय — वैकल्पिक फसलों से किसान की आमदनी के नए रास्ते खुलें और प्रोत्साहन राशि से बदलाव का शुरुआती खर्च पूरा हो।
  • जलवायु अनुकूल खेती — कम पानी और कम संसाधनों में ज्यादा उपज वाली खेती को बढ़ावा।

कितनी सहायता मिलेगी? (राशि का पूरा हिसाब)

फसल की श्रेणी प्रोत्साहन राशि (प्रति एकड़)
कोई भी पात्र वैकल्पिक फसल (मक्का, सब्ज़ी, चारा, बागवानी, कृषि वानिकी आदि) ₹8,000
दलहन फसलें (मूँग, अरहर/तूर, उड़द, मोठ) ₹8,000 + ₹2,000 बोनस = ₹10,000
तिलहन फसलें (मूँगफली, तिल, अरंडी) ₹8,000 + ₹2,000 बोनस = ₹10,000
कपास ₹8,000 + ₹2,000 बोनस = ₹10,000
खेत खाली छोड़ने पर (पात्र क्षेत्रों में) ₹8,000

उदाहरण से समझें: यदि कोई किसान 5 एकड़ में धान की जगह मक्का उगाता है, तो उसे 5 × ₹8,000 = ₹40,000 मिलेंगे। यदि वही किसान 5 एकड़ में कपास उगाता है, तो उसे 5 × ₹10,000 = ₹50,000 मिलेंगे। पूरी राशि एक ही किस्त में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है।

ध्यान दें: खेत खाली छोड़ने पर सहायता मिलने की बात कई स्रोतों में दर्ज है, लेकिन एक रिपोर्ट में यह “पात्र क्षेत्रों में” शर्त के साथ कही गई है। इसलिए खाली खेत पर लाभ लेने से पहले अपने ज़िले के कृषि विभाग से पात्रता ज़रूर जाँच लें।

धान की जगह कौन सी फसलें उगा सकते हैं?

कृषि मंत्री की खरीफ 2026 की घोषणा के अनुसार, धान की जगह ये वैकल्पिक फसलें अपनाई जा सकती हैं:

फसल समूह पात्र फसलें
अनाज मक्का
खरीफ दलहन मूँग, अरहर/तूर, उड़द, मोठ
खरीफ तिलहन मूँगफली, तिल, अरंडी
रेशेदार फसल कपास
खरीफ सब्ज़ियाँ प्याज़ सहित अन्य खरीफ सब्ज़ियाँ
बागवानी फसलें बागवानी/उद्यान फसलें
चारा फसलें पशुओं के लिए चारा फसलें
कृषि वानिकी यूकेलिप्टस (सफेदा), पॉपलर सहित अन्य पेड़

इसके अलावा बाजरा, सूरजमुखी और अन्य कम पानी वाली फसलों का उल्लेख भी कुछ स्रोतों में मिलता है। अंतिम रूप से पात्र फसलों की सूची वही मान्य होगी जो आवेदन के समय मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दिखाई देगी — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

पात्रता (कौन आवेदन कर सकता है?)

  • आवेदक हरियाणा का स्थायी निवासी किसान होना चाहिए।
  • किसान की कृषि भूमि हरियाणा में होनी चाहिए।
  • पिछले चार वर्षों से धान की खेती कर रहा किसान यदि अब धान छोड़कर वैकल्पिक फसल अपनाता है, तो वह ₹8,000 प्रति एकड़ सहायता का पात्र होगा — यह शर्त कृषि मंत्री की खरीफ 2026 की घोषणा में स्पष्ट कही गई है।
  • जो किसान पिछले वर्ष इस योजना के तहत पात्र रहे थे, वे भी इस वर्ष (नियमों के अनुसार) दोबारा लाभ ले सकते हैं।
  • मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है — बिना पंजीकरण के लाभ नहीं मिलेगा।
  • आवेदक के पास वैध भूमि स्वामित्व या खेती के दस्तावेज़ होने चाहिए। पट्टे पर खेती करने वाले किसानों के लिए खेती का प्रमाण भी स्वीकार किया जाता है (पोर्टल के नियमों के अनुसार)।
  • बैंक खाता आधार से लिंक (सीडेड) और डीबीटी के लिए सक्षम होना चाहिए, क्योंकि भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है।

ध्यान दें: प्रति किसान अधिकतम कितने एकड़ पर सहायता मिलेगी, इसकी कोई सीमा आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। कुछ ज़िलों में ज़िला-वार लक्ष्य तय किए जाते हैं (जैसे रोहतक ज़िले का खरीफ 2026 का लक्ष्य 1,500 एकड़ बताया गया था)। अपने ज़िले का लक्ष्य और सीमा जानने के लिए ज़िला कृषि कार्यालय से संपर्क करें।

ज़रूरी दस्तावेज़ (पूरी सूची)

आवेदन से पहले ये दस्तावेज़ तैयार रखें:

  1. आधार कार्ड — किसान का 12 अंकों का आधार नंबर।
  2. परिवार पहचान पत्र (PPP / फैमिली आईडी) — हरियाणा में इस योजना के लिए फैमिली आईडी अनिवार्य है।
  3. निवास प्रमाण पत्र — हरियाणा का स्थायी निवासी होने का प्रमाण।
  4. भूमि के दस्तावेज़ — जमाबंदी / फर्द की प्रति; मुरब्बा नंबर, खेवट नंबर, खसरा नंबर और किले का नंबर।
  5. बैंक खाता विवरण — बैंक पासबुक की प्रति (बैंक का नाम, शाखा, खाता संख्या और IFSC कोड); खाता आधार से सीडेड और डीबीटी सक्षम होना चाहिए।
  6. मोबाइल नंबर — आधार और परिवार पहचान पत्र से लिंक सक्रिय मोबाइल नंबर (ओटीपी सत्यापन के लिए)।
  7. पासपोर्ट साइज़ फोटो — हाल की फोटो।

महत्वपूर्ण: पोर्टल पर आवेदन करते समय लाइव फॉर्म में जो दस्तावेज़ माँगे जाएँ, वही अंतिम माने जाएँगे। ऊपर दी गई सूची मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल की सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया और योजना से जुड़ी प्रकाशित जानकारी पर आधारित है।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)

मेरा पानी मेरी विरासत योजना के लिए कोई अलग आवेदन फॉर्म नहीं भरना होता — लाभ मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर फसल पंजीकरण के माध्यम से मिलता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:

चरण 1: आधिकारिक पोर्टल fasal.haryana.gov.in पर जाएँ।

चरण 2: होमपेज पर किसान पंजीकरण / फसल पंजीकरण का विकल्प चुनें। यदि आप पोर्टल पर पहले से पंजीकृत नहीं हैं, तो पहले किसान पंजीकरण पूरा करें।

चरण 3: परिवार पहचान संख्या (PPP ID) या आधार संख्या भरकर मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से सत्यापन करें।

चरण 4: अपनी व्यक्तिगत जानकारी, भूमि का विवरण (खेवट, खसरा, मुरब्बा और किले का नंबर, रकबा) और सिंचाई का स्रोत भरें।

चरण 5: फसल का विवरण भरें — जिस खेत में पिछले साल धान था, उसमें इस बार कौन सी वैकल्पिक फसल बोई है, यह चुनें। जिन खेतों में धान की जगह वैकल्पिक फसल है, वहाँ मेरा पानी मेरी विरासत योजना का विकल्प भी चुनें — ज़िला प्रशासन ने किसानों को विशेष रूप से यह विकल्प चुनने की सलाह दी है।

चरण 6: बैंक खाते का विवरण भरें और ज़रूरी दस्तावेज़ अपलोड करें या सत्यापित करें।

चरण 7: भरी गई सारी जानकारी ध्यान से जाँच लें, फिर फॉर्म सबमिट करें।

चरण 8: सबमिशन के बाद मिली पावती/रसीद को सहेजकर या प्रिंट करके रख लें — यह भविष्य में काम आएगी।

चरण 9: विभाग आपके खेत और फसल का सत्यापन करेगा (पटवारी/राजस्व अधिकारी द्वारा खेत में जाकर जाँच होती है)। सत्यापन सफल होने पर प्रोत्साहन राशि एक ही किस्त में डीबीटी से आपके बैंक खाते में भेज दी जाएगी।

याद रखें: पंजीकरण बुआई से पहले कराना अनिवार्य माना जाता है, ताकि बदलाव का सत्यापन हो सके। बुआई के बाद देर से किया गया पंजीकरण सत्यापन के नियमों में अटक सकता है। इसलिए अगले सीज़न में बुआई से पहले ही पंजीकरण पूरा करें।

ऑफलाइन आवेदन का विकल्प

जो किसान ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, उनके लिए ऑफलाइन रास्ता भी है:

  • अपने नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करवा सकते हैं। साथ में ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज़ ले जाएँ।
  • खरीफ 2026 में जब पोर्टल 21 से 27 सितंबर तक दोबारा खोला गया था, तब छूटे हुए किसानों को अपने एसडीएम (SDM) कार्यालय में आवेदन जमा करना था — जिसमें खेवट और खसरा नंबर सहित भूमि का पूरा विवरण देना था। एसडीएम कार्यालय पोर्टल पर विवरण दर्ज करता था और तीन दिन के भीतर राजस्व अधिकारियों से सत्यापन शुरू करवाता था। अगले सीज़न में यदि ऐसी कोई विशेष विंडो खुले, तो यही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
  • अपने ज़िला कृषि कार्यालय / उप कृषि निदेशक कार्यालय से भी योजना की जानकारी और मदद ली जा सकती है।

शुल्क और समय-सीमा

  • शुल्क: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण के लिए किसी शुल्क का उल्लेख आधिकारिक जानकारी में नहीं मिला है — यानी पंजीकरण निःशुल्क माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति आवेदन के नाम पर पैसे माँगे, तो उसे पैसे न दें और कृषि विभाग या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत करें।
  • समय-सीमा: खरीफ 2026 का पंजीकरण 20 मई 2026 से शुरू हुआ था, अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 थी, और पोर्टल 21–27 सितंबर 2026 तक दोबारा खुला था। सत्यापन के बाद भुगतान की कोई निश्चित दिन-संख्या आधिकारिक रूप से घोषित नहीं है — विभाग का कहना है कि सत्यापन के बाद पूरी राशि एक ही किस्त में डीबीटी से भेजी जाती है। खरीफ 2027 की तिथियाँ अभी घोषित नहीं हुई हैं।

भुगतान कैसे मिलेगा और स्टेटस कैसे चेक करें?

  • भुगतान: सत्यापन पूरा होने के बाद प्रोत्साहन राशि और बोनस (यदि लागू हो) एक ही किस्त में सीधे आपके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से आएगी। बीच में कोई बिचौलिया नहीं होता।
  • स्टेटस चेक: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल fasal.haryana.gov.in पर लॉगिन करके आप अपने फसल पंजीकरण और भुगतान की स्थिति देख सकते हैं। पोर्टल पर लॉगिन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर और ओटीपी का उपयोग करें। पोर्टल के मेन्यू/विकल्प समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए लाइव पोर्टल पर दिख रहा विकल्प ही मान्य होगा। यदि स्टेटस में कोई त्रुटि दिखे, तो तुरंत अपने ज़िला कृषि कार्यालय या टोल-फ्री नंबर पर संपर्क करें।
  • बैंक खाता जाँच लें: भुगतान अटकने का सबसे आम कारण आधार से लिंक न होना या गलत बैंक विवरण होता है। आवेदन से पहले बैंक में जाकर आधार-सीडिंग और डीबीटी स्थिति ज़रूर जाँच लें।

आवेदन में होने वाली आम गलतियाँ

  1. बुआई के बाद पंजीकरण — पंजीकरण बुआई से पहले कराना होता है; देर से पंजीकरण पर सत्यापन नहीं हो पाता।
  2. मेरा पानी मेरी विरासत का विकल्प न चुनना — फसल पंजीकरण करते समय योजना का विकल्प चुनना न भूलें; सिर्फ फसल दर्ज करने से लाभ नहीं मिलता।
  3. गलत खसरा/खेवट नंबर — भूमि का गलत विवरण भरने पर सत्यापन अटक जाता है।
  4. आधार से लिंक न हुआ बैंक खाता — भुगतान डीबीटी से आता है; खाता आधार से लिंक न हो तो पैसा अटक सकता है।
  5. पुरानी राशि पर भरोसा — कई पुराने लेख अब भी ₹7,000 बता रहे हैं; वर्तमान राशि ₹8,000 प्रति एकड़ है।

इससे जुड़ी अन्य योजनाएँ

  • सीधी बिजाई धान (DSR) तकनीक: जो किसान धान ही उगाना चाहते हैं लेकिन पानी बचाना चाहते हैं, वे सीधी बिजाई धान तकनीक अपनाकर ₹4,500 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि पा सकते हैं। इसके लिए भी मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण करते समय DSR विकल्प चुनना होता है।
  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई: सरकार ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई तकनीकों पर 85% तक की सब्सिडी दे रही है — यह जानकारी अक्टूबर 2026 की कृषि विभाग की घोषणाओं में सामने आई है।
  • धान की बिक्री और भुगतान से जुड़ी जानकारी के लिए पढ़ें: हरियाणा धान खरीद भुगतान स्थिति कैसे चेक करें
  • कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए पढ़ें: हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान सब्सिडी
  • बागवानी फसल अपनाने वाले किसानों के लिए: मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना हरियाणा

हेल्पलाइन और संपर्क

  • मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल टोल-फ्री नंबर: 1800-180-2117
  • हरियाणा कृषि विभाग: 0172-2571544
  • ईमेल हेल्पडेस्क: [email protected]
  • आधिकारिक पोर्टल: fasal.haryana.gov.in और agriharyana.gov.in

ध्यान दें: टोल-फ्री नंबर और ईमेल मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल के हैं, जिनके माध्यम से इस योजना का पंजीकरण होता है। योजना से जुड़ी विशेष जानकारी के लिए अपने ज़िले के कृषि कार्यालय से संपर्क करना सबसे अच्छा रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: मेरा पानी मेरी विरासत योजना में प्रति एकड़ कितनी राशि मिलती है?

उत्तर: धान की जगह वैकल्पिक फसल उगाने पर ₹8,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि मिलती है। दलहन, तिलहन और कपास उगाने पर ₹2,000 प्रति एकड़ का अतिरिक्त बोनस मिलता है, यानी कुल ₹10,000 प्रति एकड़ तक। योजना शुरू होने पर राशि ₹7,000 प्रति एकड़ थी, जिसे 2025-26 के बजट में बढ़ाकर ₹8,000 किया गया।

प्रश्न 2: इस योजना के लिए कौन पात्र है?

उत्तर: हरियाणा का स्थायी निवासी किसान, जिसकी कृषि भूमि हरियाणा में हो और जिसने पिछले चार वर्षों से धान की खेती की हो, यदि अब धान छोड़कर वैकल्पिक फसल अपनाता है तो वह पात्र होगा। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। पिछले वर्ष के पात्र किसान भी नियमों के अनुसार दोबारा लाभ ले सकते हैं।

प्रश्न 3: धान की जगह कौन सी फसलें उगा सकते हैं?

उत्तर: मक्का, खरीफ दलहन (मूँग, अरहर/तूर, उड़द, मोठ), खरीफ तिलहन (मूँगफली, तिल, अरंडी), कपास, खरीफ सब्ज़ियाँ (प्याज़ सहित), बागवानी फसलें, चारा फसलें और कृषि वानिकी (यूकेलिप्टस/सफेदा, पॉपलर)। कुछ स्रोतों में खेत खाली छोड़ने पर भी सहायता का उल्लेख है, लेकिन इसकी पात्रता अपने ज़िले से जाँच लें।

प्रश्न 4: आवेदन कैसे करें?

उत्तर: आवेदन मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर ऑनलाइन होता है। परिवार पहचान संख्या या आधार संख्या से लॉगिन करके किसान पंजीकरण करें, भूमि और फसल का विवरण भरें, और फसल पंजीकरण करते समय मेरा पानी मेरी विरासत योजना का विकल्प चुनें। ऑफलाइन मदद के लिए CSC या ज़िला कृषि कार्यालय जा सकते हैं।

प्रश्न 5: खरीफ 2026 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि क्या थी? क्या अब आवेदन कर सकते हैं?

उत्तर: खरीफ 2026 का पंजीकरण 20 मई 2026 से शुरू हुआ था और अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 थी। पोर्टल 21 से 27 सितंबर 2026 तक दोबारा भी खोला गया था। नवंबर 2026 की शुरुआत तक खरीफ 2026 की विंडो बंद हो चुकी है, इसलिए अभी नया आवेदन नहीं किया जा सकता। अगले सीज़न (खरीफ 2027) की तिथियाँ घोषित होते ही आवेदन करें — बुआई से पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य है।

प्रश्न 6: पैसा कब और कैसे मिलेगा?

उत्तर: फसल और भूमि का सत्यापन (पटवारी/राजस्व अधिकारी द्वारा) पूरा होने के बाद पूरी राशि एक ही किस्त में सीधे आपके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। भुगतान की कोई निश्चित दिन-संख्या आधिकारिक रूप से घोषित नहीं है। स्टेटस fasal.haryana.gov.in पर लॉगिन करके देखा जा सकता है।

प्रश्न 7: क्या खेत खाली छोड़ने पर भी सहायता मिलेगी?

उत्तर: कई स्रोतों में कहा गया है कि धान की जगह खेत खाली छोड़ने वाले किसान भी सहायता के पात्र हैं। लेकिन एक ज़िला-स्तरीय रिपोर्ट में यह “पात्र क्षेत्रों में” शर्त के साथ कहा गया है। इसलिए खाली खेत पर लाभ लेने से पहले अपने ज़िले के कृषि विभाग से पात्रता ज़रूर जाँच लें।

आधिकारिक स्रोत

इस लेख की जानकारी हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की घोषणाओं, समाचार एजेंसी पीटीआई की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट और आधिकारिक पोर्टलों पर आधारित है। आवेदन से पहले आधिकारिक जानकारी ज़रूर जाँच लें:

अस्वीकरण: योजना की राशि, पात्रता और तिथियाँ सरकार के निर्णय के अनुसार बदल सकती हैं। इस लेख में दी गई जानकारी 6 नवंबर 2026 तक सत्यापित स्रोतों पर आधारित है। आवेदन करने से पहले fasal.haryana.gov.in पर लाइव जानकारी या अपने ज़िले के कृषि कार्यालय से पुष्टि अवश्य करें। पोर्टल के लाइव फॉर्म में माँगे गए दस्तावेज़ और शर्तें ही अंतिम मानी जाएँगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *