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e-Adhigam Yojana Haryana 2026: Class 10-12 Free Tablet

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: e-Adhigam Yojana Haryana 2026: Class 10-12 Free Tablet
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 9:47 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: शिक्षा
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए सितंबर 2026 में एक बड़ी खबर आई है। राज्य सरकार ने ई-अधिगम योजना (e-Adhigam Yojana) को दोबारा पूरी ताकत से चलाने का फैसला किया है। इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों के छात्रों को मुफ्त टैबलेट, उसमें पहले से लोड पढ़ाई का डिजिटल सामान और इंटरनेट के लिए डेटा सिम दिया जाता है।

यह योजना नई नहीं है — यह 2022 में शुरू हुई थी और अपने समय की देश की सबसे बड़ी स्कूल डिजिटल योजनाओं में से एक थी। लेकिन बीच में सिम का इंटरनेट बंद हो जाने से लाखों टैबलेट बेकार पड़े रह गए थे। अब 7 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हाई पावर्ड परचेज़ कमेटी (HPPC) की बैठक में 5 लाख डेटा सिम खरीदने की मंजूरी मिली है, और कक्षा 10 से 12 के 5 लाख छात्रों को फिर से टैबलेट देने की घोषणा हुई है।

इस लेख में योजना की पूरी और सही जानकारी दी गई है — योजना क्या है, किसे टैबलेट मिलेगा, टैबलेट कैसे मिलेगा, उसमें क्या-क्या मिलेगा, टैबलेट के नियम क्या हैं, बीच में दिक्कत क्यों आई और सितंबर 2026 में क्या बदला। दो बातों पर स्रोतों में मतभेद है — कक्षा का दायरा और नए प्लान का डेटा कोटा — उन दोनों को इस लेख में साफ-साफ लिखा गया है, ताकि कोई गलत जानकारी न फैले।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम ई-अधिगम योजना (e-Adhigam) — Advance Digital Haryana Initiative of Government with Adaptive Modules
शुरू हुई 5 मई 2022, रोहतक (महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, टैगोर ऑडिटोरियम)
शुरू करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
विभाग स्कूल शिक्षा विभाग, हरियाणा सरकार
लाभ मुफ्त टैबलेट + PAL (Personalised Adaptive Learning) पढ़ाई सामग्री + डेटा सिम
टैबलेट की संख्या लगभग 5 लाख
टैबलेट पर खर्च लगभग ₹620 करोड़ (सिम के लिए ₹47 करोड़ और PAL सॉफ्टवेयर के लिए ₹5 करोड़ अलग)
प्रति टैबलेट कीमत लगभग ₹12,500
शिक्षकों को भी 30,000 से अधिक शिक्षकों को भी टैबलेट दिए गए
पात्रता हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10, 11 और 12 में पढ़ने वाले छात्र (आधिकारिक घोषणा के अनुसार)
आवेदन कोई ऑनलाइन फॉर्म नहीं — स्कूल अपने दाखिला रिकॉर्ड से वितरण करता है
टैबलेट की मालिकी हरियाणा सरकार की संपत्ति — कक्षा 12 के बाद वापस करना होता है
ताज़ा अपडेट 7 सितंबर 2026 — HPPC बैठक में 5 लाख डेटा सिम की खरीद को मंजूरी, 5 लाख टैबलेट फिर से देने की घोषणा
आधिकारिक पोर्टल haryana.gov.in

ई-अधिगम योजना क्या है?

ई-अधिगम का पूरा नाम है — Advance Digital Haryana Initiative of Government with Adaptive Modules। यह हरियाणा सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग की योजना है, जिसका मकसद सरकारी स्कूलों के छात्रों को डिजिटल पढ़ाई से जोड़ना था। योजना की सोच यह थी कि गाँव या छोटे कस्बे के सरकारी स्कूल का छात्र भी वही डिजिटल किताबें, वीडियो लेक्चर और टेस्ट देख सके, जो शहर के बड़े निजी स्कूलों के छात्रों को मिलते हैं।

योजना की घोषणा अप्रैल 2022 में हुई थी। अप्रैल 2022 में ही सरकार ने 5 लाख टैबलेट की खरीद को लगभग ₹620 करोड़ की लागत से मंजूरी दी थी। इसके साथ सिम कार्डों के लिए ₹47 करोड़ और PAL सॉफ्टवेयर के लिए ₹5 करोड़ का अलग प्रावधान था। कुल मिलाकर यह योजना लगभग ₹700 करोड़ की थी। इसके बाद 5 मई 2022 को रोहतक में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय के टैगोर ऑडिटोरियम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने टैबलेट वितरण की शुरुआत की थी, और मई-जून 2022 में पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों में टैबलेट बाँटे गए।

टैबलेट का असली मकसद सिर्फ एक महँगा गैजेट देना नहीं था। इसके अंदर PAL — Personalised Adaptive Learning सॉफ्टवेयर डाला गया था। PAL का मतलब है कि टैबलेट पहले छात्र का टेस्ट लेकर यह समझता है कि उसे कौन-सा विषय कितना आता है, और फिर उसी के हिसाब से पढ़ाई का सामान दिखाता है। जिस छात्र की अंग्रेज़ी कमज़ोर है, उसे अंग्रेज़ी का आसान और बुनियादी सामान मिलता है; जो छात्र आगे है, उसे कठिन सवाल मिलते हैं। यही वजह है कि इस योजना को सिर्फ टैबलेट बाँटने की योजना नहीं, बल्कि पढ़ाई का तरीका बदलने की कोशिश कहा गया था।

किसे मिलेगा टैबलेट — पात्रता

आधिकारिक घोषणा के अनुसार टैबलेट उन्हीं छात्रों को मिलेगा, जो हरियाणा के सरकारी स्कूल में कक्षा 10, 11 या 12 में दाखिला लिए हुए हैं। सितंबर 2026 की घोषणा में भी इन्हीं तीन कक्षाओं का ज़िक्र है। निजी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र इस योजना के दायरे में नहीं आते, चाहे वे कक्षा 10, 11 या 12 में ही क्यों न हों।

इसमें एक बात साफ समझनी ज़रूरी है — कक्षा के दायरे को लेकर स्रोतों में मतभेद है। सरकार की सितंबर 2026 की आधिकारिक घोषणा और PTI, NDTV तथा ABP Live जैसी खबरों में सिर्फ कक्षा 10 से 12 की बात है। लेकिन एक एग्रीगेटर वेबसाइट (sarkariyojana.com) पर योजना का दायरा कक्षा 8 से 12 बताया गया है — और उसी पेज पर एक जगह 9.87 लाख छात्रों (कक्षा 8-12) और दूसरी जगह 5 लाख छात्रों (कक्षा 10-12) का आँकड़ा दिया गया है, यानी वह स्रोत खुद अपने आँकड़ों में एकमत नहीं है। द ट्रिब्यून के एक लेख में योजना का मूल दायरा कक्षा 9 से 12 भी बताया गया है। इसलिए इस लेख में आधिकारिक घोषणा के अनुसार कक्षा 10 से 12 ही लिखा गया है। अगर आपका बच्चा कक्षा 8 या 9 में पढ़ता है, तो इस बारे में अपने स्कूल से ही ज़रूर पूछ लें — स्कूल के पास ही सबसे ताज़ा और सही जानकारी होगी।

शिक्षकों के लिए भी योजना में प्रावधान था। 30,000 से अधिक शिक्षकों को भी टैबलेट दिए गए थे, ताकि वे कक्षा में डिजिटल तरीके से पढ़ा सकें। एक स्रोत के अनुसार कक्षा 10 से 12 को पढ़ाने वाले सभी 33,000 पीजीटी शिक्षकों को टैबलेट देने की बात थी।

टैबलेट कैसे मिलेगा — आवेदन की प्रक्रिया

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए कोई ऑनलाइन फॉर्म भरना ही नहीं है। न कोई वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन है, न कोई आवेदन की आखिरी तारीख है, और न ही कोई एजेंट या दलाल इसकी मदद कर सकता है। अगर कोई व्यक्ति पैसे लेकर टैबलेट दिलाने का दावा करे, तो वह ठगी है — उससे सावधान रहें।

वितरण का तरीका बहुत सीधा है:

  • स्कूल के पास हर छात्र का दाखिला रिकॉर्ड होता है — नाम, कक्षा, रोल नंबर और बाकी जानकारी।
  • स्कूल उसी रिकॉर्ड से पात्र छात्रों की सूची बनाता है।
  • सूची में नाम आने पर स्कूल खुद छात्र को बुलाकर टैबलेट देता है।
  • टैबलेट देते समय स्कूल उसका रिकॉर्ड भी रखता है — किस छात्र को कौन-सा टैबलेट (उसके नंबर सहित) दिया गया।

इस रिकॉर्ड के लिए पहले AVSAR पोर्टल का टैबलेट मैनेजमेंट मॉड्यूल इस्तेमाल होता था, जिससे वितरण और टैबलेट की निगरानी की जाती थी। बाद में ट्रैकिंग MIS पोर्टल से जुड़ी, जिस पर निगरानी उतनी प्रभावी नहीं रह गई थी — यह बात द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में सामने आई थी।

इसलिए माता-पिता और छात्रों को सिर्फ इतना करना है — अपने स्कूल के संपर्क में रहें। स्कूल से पूछें कि टैबलेट कब आएँगे और वितरण की क्या व्यवस्था है। स्कूल के अलावा किसी और जगह से जानकारी लेने की ज़रूरत नहीं है।

टैबलेट में क्या-क्या मिलेगा — स्पेसिफिकेशन और PAL

टैबलेट कोई साधारण डिवाइस नहीं था। उस समय की खबरों के अनुसार:

  • स्क्रीन: लगभग 8.7 इंच की स्क्रीन वाला एंड्रॉइड टैबलेट।
  • कीमत: प्रत्येक टैबलेट की कीमत लगभग ₹12,500 थी।
  • पहले से लोड सामग्री: डिजिटल पाठ्यपुस्तकें, वीडियो लेक्चर, PAL लर्निंग मॉड्यूल और ऑनलाइन असाइनमेंट।
  • PAL विषय: PAL सॉफ्टवेयर शुरुआत में अंग्रेज़ी, हिंदी और सामाजिक विज्ञान विषयों के लिए दिया गया था। इसमें ई-बुक्स, टेस्ट वीडियो और पाठ्यक्रम के अनुसार अध्ययन सामग्री शामिल थी।
  • डेटा सिम: टैबलेट के साथ एक्टिवेटेड सिम कार्ड दिया गया था, जिसमें रोज़ाना 2 GB मुफ्त डेटा मिलता था। इस सिम से सिर्फ इंटरनेट चलता था, कॉलिंग की सुविधा नहीं थी।
  • निगरानी: टैबलेट में मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम लगा था, जिससे इसका इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई तक सीमित रखा जा सके।

PAL की सबसे बड़ी खूबी यही थी कि यह हर छात्र को उसके स्तर के अनुसार पढ़ाता है। पहले एक छोटा टेस्ट होता है, जिससे यह पता चलता है कि छात्र को कौन-सा पाठ कितना आता है। फिर कमज़ोर हिस्सों के लिए आसान अभ्यास और सुधारात्मक सामग्री दी जाती है। इसका मकसद बोर्ड परीक्षा की तैयारी को मज़बूत करना था, खासकर उन छात्रों के लिए जिनके पास घर पर किताबों या ट्यूशन की सुविधा कम है।

टैबलेट के नियम — सरकारी संपत्ति, वापसी

टैबलेट को लेकर सबसे ज़रूरी नियम यह है कि टैबलेट छात्र की निजी संपत्ति नहीं बनता। यह हरियाणा सरकार की संपत्ति रहता है और इसे पुस्तकालय की किताब की तरह समझा जाता है — इस्तेमाल करो, पढ़ाई करो, और समय पूरा होने पर वापस कर दो।

  • कक्षा 12 पास करने के बाद टैबलेट स्कूल को वापस करना होता है।
  • जो छात्र स्कूल छोड़ देता है या परीक्षा में फेल हो जाता है, उसे भी टैबलेट वापस करना होता है।
  • वापस किए गए टैबलेट अगले शैक्षणिक सत्र के नए छात्रों को दिए जाते हैं।
  • स्कूल उन छात्रों को रोल नंबर तक न देने का निर्देश दे सकता है, जो टैबलेट वापस नहीं करते — ऐसा निर्देश शिक्षा निदेशालय ने पहले भी जारी किया था।

टैबलेट को संभालकर रखना छात्र की ज़िम्मेदारी है। फरवरी 2026 की रिपोर्टों के अनुसार कई टैबलेट की स्क्रीन टूटी हुई, बैटरी खराब या बिल्कुल चालू न होने की हालत में पाए गए थे। करनाल ज़िले में लगभग 32,000 टैबलेटों में से करीब 23,000 ही काम कर रहे थे, और कैथल में लगभग 27,000 में से करीब 20,000 ही चालू हालत में थे। इसलिए टैबलेट मिलने पर उसे गिरने, पानी और गलत इस्तेमाल से बचाएँ, और कोई दिक्कत हो तो तुरंत अपने शिक्षक को बताएँ।

सिम बंद क्यों हुई — टैबलेट अलमारी में क्यों पड़े रहे

योजना की शुरुआत बहुत अच्छी हुई थी, लेकिन कुछ ही सालों में यह ज़मीन पर लड़खड़ाने लगी। इसकी सबसे बड़ी वजह इंटरनेट था। टैबलेट का पूरा फायदा तभी था, जब उसमें इंटरनेट चले — PAL ऐप खुले, वीडियो लेक्चर चलें, टेस्ट हो सकें। बिना इंटरनेट के टैबलेट सिर्फ एक महँगा डिब्बा बनकर रह गया।

जो हुआ, उसकी समय-रेखा इस प्रकार है:

  • मई 2025: शिक्षा निदेशालय ने 23 मई 2025 को सभी ज़िला शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर टैबलेट के लिए सरकारी इंटरनेट बंद करने का निर्देश दिया। यह व्यवस्था 25 मई 2025 से लागू हुई। छात्रों से कहा गया कि वे घर का इंटरनेट इस्तेमाल करें या जहाँ उपलब्ध हो, वहाँ स्कूल का ब्रॉडबैंड इस्तेमाल करें।
  • मई 2025 (द प्रिंट): द प्रिंट की 29 मई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार सरकार सिम कार्ड रिचार्ज करने में नाकाम रही, जिससे छात्र PAL ऐप तक नहीं पहुँच पा रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 5 लाख टैबलेट धूल खा रहे थे।
  • फरवरी 2026 (द ट्रिब्यून): द ट्रिब्यून की 4 फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार करनाल और कैथल ज़िलों के कई सरकारी स्कूलों में ज़्यादातर टैबलेट छात्रों से वापस लेकर अलमारियों में रख दिए गए थे। वजह थी — वाई-फाई नहीं, सिम कार्ड नहीं, तकनीकी खराबी और सहारे की कमी। सात-आठ महीनों से ज़्यादातर टैबलेटों में न सिम थी, न स्कूलों में वाई-फाई लगा था। कक्षाएँ फिर से चॉक और ब्लैकबोर्ड पर लौट गई थीं।

इसके पीछे एक और वजह भी सामने आई थी — गलत इस्तेमाल। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार कुछ छात्र PAL ऐप की बजाय इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर ज़्यादा समय बिताने लगे थे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस दुरुपयोग को माना था, और विभाग ने इंटरनेट को स्कूल तक सीमित रखने तथा स्कूलों में लीज्ड लाइन देने का प्रस्ताव भेजा था, जो उस समय मंजूरी के इंतज़ार में था।

इसीलिए सितंबर 2026 का फैसला इतना अहम है — यह सिर्फ नए सिम खरीदने का फैसला नहीं है, बल्कि एक रुकी हुई योजना को दोबारा ज़िंदा करने का फैसला है।

सितंबर 2026 में क्या बदला — रीलॉन्च

2026 में शिक्षा विभाग ने पहले ज़मीनी हालत जानने के लिए जिलों के स्कूलों का सर्वे कराया था — रिपोर्टों के अनुसार 8 एचसीएस अधिकारियों ने स्कूलों का दौरा कर शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों से बात की थी, और उसी रिपोर्ट के आधार पर दोबारा शुरू करने की योजना बनी थी।

इसके बाद 7 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हाई पावर्ड परचेज़ कमेटी (HPPC) की बैठक हुई। इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें से एक शिक्षा से जुड़ा था:

  • 5 लाख डेटा सिम खरीदने की मंजूरी दी गई।
  • कक्षा 10 से 12 के 5 लाख छात्रों को फिर से टैबलेट देने की घोषणा की गई।
  • ये सिम उन्हीं टैबलेटों में डाली जाएँगी, ताकि छात्र ऑनलाइन पढ़ाई का सामान और शैक्षिक संसाधन इस्तेमाल कर सकें।

यह घोषणा मुख्यमंत्री ने खुद अपने सोशल मीडिया पोस्ट में भी साझा की थी, और PTI, NDTV, ABP Live, टाइम्स नाउ तथा पंजाब केसरी सहित कई बड़े समाचार माध्यमों ने इसे 7-8 सितंबर 2026 को प्रकाशित किया था।

लेकिन एक बात साफ समझनी चाहिए — 7 सितंबर 2026 का फैसला खरीद और वितरण की मंजूरी है, यह नहीं कि अगले ही दिन हर स्कूल में टैबलेट पहुँच गया। अभी तक कोई केंद्रीय वितरण तारीख घोषित नहीं हुई है। आपके स्कूल में टैबलेट कब मिलेगा, यह सिर्फ आपके स्कूल से ही पता चलेगा। रिपोर्टों के अनुसार नए प्लान में खराब टैबलेटों की मरम्मत करके उन्हें नए सिम के साथ देने की भी बात है।

नए प्लान में डेटा कितना मिलेगा — साफ़ चेतावनी

डेटा को लेकर भ्रम सबसे ज़्यादा है, इसलिए इसे साफ शब्दों में लिखना ज़रूरी है।

पुरानी योजना में रोज़ाना 2 GB मुफ्त डेटा मिलता था — यह बात विधानसभा में तत्कालीन शिक्षा मंत्री कंवर पाल के बयान और कई समाचार रिपोर्टों से पक्की है।

नए प्लान के डेटा कोटे को लेकर स्रोत एकमत नहीं हैं। एक एग्रीगेटर वेबसाइट पर नए प्लान में हर महीने 1 GB मुफ्त डेटा लिखा है, लेकिन सरकार की सितंबर 2026 की घोषणा या PTI, NDTV, ABP Live और टाइम्स नाउ की किसी भी खबर में नए डेटा कोटे का कोई आँकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए इस लेख में नए प्लान का डेटा कोटा तय आँकड़े के रूप में नहीं लिखा जा रहा — सही आँकड़ा अपने स्कूल या शिक्षा विभाग से ही पता चलेगा। अगर कोई वेबसाइट या व्यक्ति नए प्लान का डेटा कोटा पक्के तौर पर बता रहा है, तो उससे उसका आधिकारिक स्रोत ज़रूर माँगें।

छात्रों और माता-पिता को क्या करना चाहिए

  • स्कूल से संपर्क बनाए रखें — टैबलेट कब आएगा, यह सिर्फ स्कूल बता सकता है।
  • दाखिला रिकॉर्ड सही रखें — नाम, कक्षा और जानकारी स्कूल के रिकॉर्ड में सही होनी चाहिए, क्योंकि वितरण उसी रिकॉर्ड से होगा।
  • कोई फॉर्म या फीस न भरें — इस योजना के लिए न ऑनलाइन फॉर्म है, न कोई फीस। पैसे माँगने वाला कोई भी व्यक्ति ठग हो सकता है।
  • टैबलेट का इस्तेमाल सिर्फ पढ़ाई के लिए करें — पहले गलत इस्तेमाल की वजह से ही इंटरनेट पर पाबंदी लगी थी। PAL ऐप, वीडियो लेक्चर और टेस्ट पर ध्यान दें।
  • टैबलेट संभालकर रखें — टूटी स्क्रीन और खराब बैटरी वाले टैबलेट दोबारा इस्तेमाल नहीं हो पाते। कोई खराबी हो तो तुरंत शिक्षक को बताएँ।
  • वापसी का नियम याद रखें — कक्षा 12 के बाद या स्कूल छोड़ने पर टैबलेट वापस करना है, ताकि अगले छात्रों को मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: ई-अधिगम योजना में टैबलेट किसे मिलेगा?

उत्तर: आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कक्षा 10, 11 और 12 में पढ़ने वाले छात्रों को टैबलेट मिलेगा। निजी स्कूल के छात्र इसके दायरे में नहीं आते।

प्रश्न 2: टैबलेट के लिए ऑनलाइन फॉर्म कैसे भरें?

उत्तर: कोई ऑनलाइन फॉर्म है ही नहीं। स्कूल अपने दाखिला रिकॉर्ड से पात्र छात्रों को पहचानता है और सीधे टैबलेट बाँटता है। आपको कहीं भी आवेदन नहीं करना है।

प्रश्न 3: क्या कक्षा 8 या 9 के छात्र को भी टैबलेट मिलेगा?

उत्तर: सरकार की सितंबर 2026 की आधिकारिक घोषणा में सिर्फ कक्षा 10 से 12 की बात है। लेकिन कुछ स्रोतों में कक्षा 8 से 12 या कक्षा 9 से 12 का भी ज़िक्र है। इसलिए अगर आपका बच्चा कक्षा 8 या 9 में है, तो अपने स्कूल से ज़रूर पूछ लें — स्कूल के पास ही सबसे ताज़ा जानकारी होगी।

प्रश्न 4: क्या टैबलेट हमेशा के लिए मेरा हो जाएगा?

उत्तर: नहीं। टैबलेट हरियाणा सरकार की संपत्ति रहता है। कक्षा 12 पास करने के बाद, स्कूल छोड़ने पर या परीक्षा में फेल होने पर इसे स्कूल को वापस करना होता है।

प्रश्न 5: टैबलेट कब मिलेगा? कोई तारीख तय हुई है?

उत्तर: अभी तक कोई केंद्रीय वितरण तारीख घोषित नहीं हुई है। 7 सितंबर 2026 को सिर्फ 5 लाख डेटा सिम की खरीद और 5 लाख टैबलेट देने की मंजूरी मिली है। आपके स्कूल में टैबलेट कब आएगा, यह सिर्फ आपका स्कूल बता सकता है।

प्रश्न 6: नए सिम में कितना डेटा मिलेगा — 2 GB रोज़ या 1 GB महीना?

उत्तर: पुरानी योजना में रोज़ाना 2 GB मुफ्त डेटा मिलता था, यह पक्का है। नए प्लान में एक वेबसाइट पर हर महीने 1 GB डेटा लिखा है, लेकिन सरकार की घोषणा या किसी बड़ी न्यूज़ एजेंसी की खबर में नए कोटे का कोई आँकड़ा नहीं है। इसलिए सही आँकड़ा अपने स्कूल से ही पता करें।

प्रश्न 7: टैबलेट खराब हो जाए या स्क्रीन टूट जाए तो क्या करें?

उत्तर: टैबलेट को तुरंत अपने शिक्षक या स्कूल के प्रधानाचार्य को दिखाएँ। रिपोर्टों के अनुसार नए प्लान में खराब टैबलेटों की मरम्मत करके उन्हें नए सिम के साथ देने की बात है, लेकिन मरम्मत की प्रक्रिया हर स्कूल में अलग हो सकती है — इसलिए स्कूल से ही पूछें।

प्रश्न 8: क्या टैबलेट पर सिर्फ पढ़ाई ही कर सकते हैं?

उत्तर: टैबलेट में मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम लगा था, जिससे इसका इस्तेमाल पढ़ाई तक सीमित रखा जा सके। PAL ऐप, डिजिटल किताबें, वीडियो लेक्चर और टेस्ट ही इसका मुख्य मकसद हैं। पहले गलत इस्तेमाल (सोशल मीडिया पर ज़्यादा समय) की वजह से ही इंटरनेट पर पाबंदी लगी थी।

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आधिकारिक स्रोत

नोट: इस लेख की जानकारी 6 नवंबर 2026 तक की सार्वजनिक खबरों और रिपोर्टों पर आधारित है। वितरण की तारीख और नए डेटा कोटे जैसे बिंदुओं पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है — ताज़ा जानकारी के लिए अपने स्कूल या हरियाणा सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाँच लें।

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