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Haryana Parali Protsahan Yojana 2026: ₹1,200/एकड़ सहायता

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: Haryana Parali Protsahan Yojana 2026: ₹1,200/एकड़ सहायता
  • तारीख़: 6 नवम्बर 2026, 9:13 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: किसान
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा पराली प्रोत्साहन योजना 2026: पराली न जलाएँ, ₹1,200 प्रति एकड़ पाएँ

हर साल धान की कटाई के बाद हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की समस्या सामने आती है — धुआँ, खराब हवा, और किसानों पर कार्रवाई का डर। इस बार हरियाणा सरकार ने सख्ती के साथ-साथ इनाम का रास्ता भी साफ किया है: पराली प्रोत्साहन योजना (Parali Protsahan Yojana) के तहत जो किसान पराली नहीं जलाता और फसल अवशेष का सही प्रबंधन करता है, उसे ₹1,200 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि 2026-27 में बढ़ाई गई है — पहले यह ₹1,000 प्रति एकड़ थी।

इस लेख में आपको योजना की पूरी और सही जानकारी मिलेगी — कितनी सहायता मिलेगी, कौन पात्र है, कौन से दस्तावेज़ चाहिए, ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है, पैसा कब और कैसे मिलेगा, और पराली जलाने पर क्या कार्रवाई होगी। सबसे अहम बात: आवेदन की आखिरी तारीख को लेकर जो जानकारी हमें आधिकारिक तौर पर सत्यापित नहीं हो पाई, उसे हमने छिपाया नहीं है — नीचे “सबसे पहले पढ़ें” में साफ लिखा है कि इस समय क्या स्थिति है।

⚠️ सबसे पहले पढ़ें: 2026-27 में आवेदन की स्थिति क्या है

बात स्थिति (6 नवंबर 2026 तक)
प्रोत्साहन राशि ₹1,200 प्रति एकड़ — 2026-27 में लागू, आधिकारिक रूप से पुष्ट
आवेदन का तरीका मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पंजीकरण + कृषि विभाग के माध्यम से — नीचे पूरी प्रक्रिया देखें
आखिरी तारीख सार्वजनिक रूप से कोई अलग अंतिम तिथि सत्यापित नहीं हो पाई — इस प्रोत्साहन के लिए विभाग ने कोई अलग से आखिरी तारीख प्रकाशित नहीं की है; लाभ मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण और खेत के सत्यापन से जुड़ा है
कटाई का मौसम जारी है — यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में सितंबर से कटाई शुरू; सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक
मशीन सब्सिडी (CRM) खिड़की बंद — 2026-27 के लिए आवेदन 18 जुलाई से 3 अगस्त 2026 तक खुले थे

इसका सीधा मतलब यह है: अगर आपने इस खरीफ सीजन में धान बोया था और पराली नहीं जलाई है, तो आज ही मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर अपना पंजीकरण और फसल का ब्यौरा जाँच लें और अपने गाँव के कृषि विकास अधिकारी (ADO) या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। आखिरी तारीख का इंतज़ार न करें — सत्यापन खेत में जाकर होता है, और कटाई के बाद देर होने पर सत्यापन मुश्किल हो जाता है। अगर इस सीजन की खिड़की बंद हो चुकी है, तो यही तैयारी अगले सीजन में काम आएगी।

योजना एक नज़र में

जानकारी विवरण
योजना का नाम पराली प्रोत्साहन योजना (Parali Protsahan Yojana), हरियाणा
राज्य हरियाणा
संचालन विभाग कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा
वित्तीय वर्ष 2026-27
प्रोत्साहन राशि ₹1,200 प्रति एकड़ (पहले ₹1,000 प्रति एकड़ थी)
किसको मिलेगा हरियाणा के वे धान किसान जो पराली नहीं जलाते और फसल अवशेष का उचित प्रबंधन करते हैं
भुगतान का तरीका DBT — सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में
अनिवार्य शर्त मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर पंजीकरण
संबंधित मशीन सब्सिडी फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों पर 50% (व्यक्तिगत) / 80% (कस्टम हायरिंग सेंटर)
कार्य योजना का बजट 2026-27 के लिए ₹576 करोड़ की कार्य योजना
आधिकारिक पोर्टल fasal.haryana.gov.in (मेरी फसल मेरा ब्यौरा) और agriharyana.gov.in (कृषि विभाग)

पराली प्रोत्साहन योजना क्या है

पराली प्रोत्साहन योजना हरियाणा सरकार की वह योजना है जिसके तहत धान की पराली (फसल अवशेष) को जलाने की बजाय उसका सही तरीके से निपटान करने वाले किसानों को नकद प्रोत्साहन दिया जाता है। पराली को खेत में मिलाना, बेलर से गट्ठर बनवाकर बेचना या चारे के रूप में इस्तेमाल करना, हैप्पी सीडर या सुपर सीडर से बिना जलाए गेहूँ की बुआई करना — ये सभी सही प्रबंधन के तरीके माने जाते हैं।

सरकार का मकसद साफ है: पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकना और किसान को ऐसा विकल्प देना जिसमें उसे फायदा हो, नुकसान नहीं। 2026-27 के बजट में इस प्रोत्साहन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹1,200 प्रति एकड़ किया गया, और साथ ही पराली प्रबंधन की पूरी कार्य योजना के लिए ₹576 करोड़ का प्रावधान रखा गया।

यह योजना अकेली नहीं चलती — इसके साथ तीन और सहूलियतें जुड़ी हैं: फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों पर भारी सब्सिडी, सीधी बुआई (DSR) पर ₹4,500 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन, और धान की जगह कम पानी वाली फसल बोने पर मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत ₹8,000 प्रति एकड़ की सहायता। यानी पराली की समस्या से बचने के हर रास्ते पर सरकार ने कुछ न कुछ रखा है।

कितनी सहायता मिलेगी — पूरी गणना

रकबा (धान का खेत) प्रोत्साहन राशि (₹1,200/एकड़)
2 एकड़ ₹2,400
5 एकड़ ₹6,000
10 एकड़ ₹12,000
25 एकड़ ₹30,000

ध्यान दें: राशि उसी रकबे पर मिलती है जिसका सत्यापन हो — यानी जितने एकड़ में धान था और पराली नहीं जलाई गई, उतने एकड़ की राशि। अगर खेत के एक हिस्से में आग लगी पाई गई, तो उस हिस्से का लाभ नहीं मिलेगा और अलग से कार्रवाई भी हो सकती है।

जुड़ी हुई सहायता राशि
पराली न जलाने पर प्रोत्साहन ₹1,200 प्रति एकड़
सीधी बुआई (DSR) अपनाने पर ₹4,500 प्रति एकड़
धान की जगह वैकल्पिक फसल (मेरा पानी-मेरी विरासत) ₹8,000 प्रति एकड़
CRM मशीन — व्यक्तिगत खरीद पर सब्सिडी लागत का 50%
CRM मशीन — कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) पर सब्सिडी परियोजना लागत का 80%

पराली जलाने पर क्या होगा — सख्ती भी जान लें

2026-27 के सीजन में सरकार ने सिर्फ इनाम नहीं, सख्ती भी बढ़ाई है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में 24 सितंबर 2026 को राज्य की कार्य योजना की समीक्षा हुई, जिसमें ये फैसले लिए गए:

कार्रवाई विवरण
पराली सुरक्षा बल (Parali Protection Force) जिला और ब्लॉक स्तर पर तैनात — पुलिस, कृषि विभाग, प्रशासनिक अधिकारी, नोडल और क्लस्टर अधिकारी शामिल
ड्रोन निगरानी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर DRIISHYA के सहयोग से ड्रोन से निगरानी
देर शाम गश्त रात में जलाई जाने वाली पराली पकड़ने के लिए देर शाम की गश्त बढ़ाई गई
FIR पराली जलाने के हर सत्यापित मामले में FIR दर्ज होगी
चालान FIR के साथ चालान भी कटेगा
रेड एंट्री किसान के भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी) में “रेड एंट्री” दर्ज होगी

रेड एंट्री सबसे गंभीर बात है, क्योंकि भूमि रिकॉर्ड में ऐसी प्रविष्टि भविष्य में ऋण, सरकारी योजनाओं और जमीन के लेन-देन में दिक्कत पैदा कर सकती है। इसलिए ₹1,200 प्रति एकड़ का प्रोत्साहन सिर्फ कमाई नहीं है — पराली न जलाना अब सीधे-सीधे फायदे का सौदा है।

पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है

  • आवेदक हरियाणा का निवासी किसान हो।
  • किसान के नाम पर धान की फसल हो और उसका मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर पंजीकरण हो।
  • किसान ने अपनी पराली न जलाई हो — फसल अवशेष का प्रबंधन मशीन से, बेलर से, चारे के रूप में या खेत में मिलाकर किया हो।
  • किसान के पास परिवार पहचान पत्र (PPP / Family ID) हो — हरियाणा की कृषि योजनाओं में यह अनिवार्य माना जाता है।
  • किसान का बैंक खाता आधार से जुड़ा हो, क्योंकि भुगतान DBT से सीधे खाते में आता है।
  • खेत का सत्यापन विभागीय अधिकारी द्वारा हो — अधिकारी खेत में जाकर जाँच करते हैं कि पराली जलाई गई है या नहीं।

ध्यान दें: पात्रता की अंतिम शर्तें विभाग के लाइव फॉर्म और उस सीजन के दिशा-निर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं। आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर उस समय के नियम जरूर जाँच लें।

जरूरी दस्तावेज़ — पहले से तैयार रखें

दस्तावेज़ क्यों चाहिए
आधार कार्ड पहचान और DBT भुगतान के लिए
परिवार पहचान पत्र (PPP / Family ID) हरियाणा की योजनाओं में अनिवार्य पहचान
मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण फसल और रकबे का रिकॉर्ड — इसके बिना लाभ नहीं मिलता
भूमि रिकॉर्ड — जमाबंदी / फर्द / खसरा खेत के मालिकाना हक और रकबे की पुष्टि के लिए
बैंक पासबुक / खाता विवरण DBT भुगतान के लिए आधार से जुड़ा खाता
मोबाइल नंबर OTP और स्टेटस की जानकारी के लिए — आधार से जुड़ा नंबर रखें
पराली प्रबंधन का प्रमाण (यदि माँगा जाए) मशीन की रसीद, बेलर का बिल, CHC की पर्ची या संबंधित दस्तावेज़

महत्वपूर्ण: ऊपर दी गई सूची हरियाणा की कृषि योजनाओं की सामान्य प्रक्रिया पर आधारित है। पोर्टल पर दिखने वाला लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा — फॉर्म में जो दस्तावेज़ माँगे जाएँ, वही जमा करें, और कोई भी दस्तावेज़ अपलोड करने से पहले उसकी साफ स्कैन कॉपी तैयार रखें।

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें — स्टेप-बाय-स्टेप

पराली प्रोत्साहन का लाभ मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण और कृषि विभाग की प्रक्रिया से जुड़ा है। सामान्य ऑनलाइन प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. पोर्टल खोलें: अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर fasal.haryana.gov.in (मेरी फसल मेरा ब्यौरा) खोलें। विभाग की जानकारी के लिए agriharyana.gov.in भी देखा जा सकता है।
  2. किसान अनुभाग चुनें: होमपेज पर “किसान अनुभाग” (Farmer Section) पर क्लिक करें।
  3. लॉगिन करें: अपने मोबाइल नंबर या आधार नंबर से लॉगिन करें — OTP आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आएगा।
  4. फसल पंजीकरण जाँचें: अपनी धान की फसल का पंजीकरण और रकबा (खसरा/खेतवार विवरण) सही है या नहीं, यह जाँच लें। अगर फसल पंजीकृत नहीं है, तो पहले फसल पंजीकरण पूरा करें — बिना इसके प्रोत्साहन का दावा नहीं बनता।
  5. पराली प्रबंधन का विकल्प चुनें: पोर्टल पर पराली प्रोत्साहन / फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़ा विकल्प दिखे तो उसे चुनकर जानकारी भरें। अगर विकल्प सीधे न दिखे, तो अगले चरण में बताए गए तरीके से अपने ADO से संपर्क करें — कई बार यह लाभ जिला कृषि कार्यालय के माध्यम से दर्ज किया जाता है।
  6. दस्तावेज़ अपलोड करें: माँगे गए दस्तावेज़ (आधार, PPP, जमाबंदी, बैंक विवरण) अपलोड करें।
  7. फॉर्म जमा करें और पावती सहेजें: फॉर्म जमा करने के बाद मिलने वाली पावती / रसीद संख्या (Acknowledgement Number) नोट करके रखें — यही नंबर बाद में स्टेटस जाँचने और शिकायत करने में काम आएगा।
  8. सत्यापन का इंतज़ार करें: विभागीय अधिकारी खेत का सत्यापन करेंगे। सत्यापन के समय खेत में पराली बिना जली हुई स्थिति में होनी चाहिए।

अगर ऑनलाइन फॉर्म भरते समय कोई विकल्प समझ न आए या पोर्टल पर त्रुटि दिखे, तो फॉर्म को गलत भरने की बजाय नजदीकी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) या कृषि कार्यालय से मदद लें।

ऑफलाइन आवेदन — जिन्हें ऑनलाइन दिक्कत है

  • अपने गाँव के कृषि विकास अधिकारी (ADO) या जिला कृषि कार्यालय जाएँ और पराली प्रोत्साहन योजना के लिए आवेदन फॉर्म माँगें।
  • फॉर्म में नाम, PPP नंबर, गाँव, खसरा नंबर, धान का रकबा और पराली प्रबंधन का तरीका साफ-साफ भरें।
  • ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज़ों की फोटोकॉपी साथ ले जाएँ और मूल दस्तावेज़ भी दिखाने के लिए रखें।
  • फॉर्म जमा करने पर पावती जरूर लें — बिना पावती के बाद में स्टेटस पूछना मुश्किल हो जाता है।
  • नजदीकी CSC केंद्र पर भी फॉर्म भरवाया जा सकता है — CSC संचालक (VLE) मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण निःशुल्क करने में मदद करता है।

फीस और समय-सीमा

  • आवेदन शुल्क: मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर किसान पंजीकरण के लिए विभाग की ओर से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। CSC पर कोई सेवा शुल्क लगे तो उसकी रसीद जरूर लें — किसी भी व्यक्ति को योजना के नाम पर बड़ी रकम न दें।
  • भुगतान की समय-सीमा: भुगतान की कोई निश्चित तारीख आधिकारिक तौर पर प्रकाशित नहीं हुई है। भुगतान खेत के सत्यापन के बाद DBT से किया जाता है। नीचे CEEW अध्ययन में बताया गया है कि भुगतान में देरी एक वास्तविक समस्या रही है — इसलिए पावती सहेजकर रखना और समय-समय पर स्टेटस जाँचना जरूरी है।
  • आखिरी तारीख: जैसा ऊपर लिखा है, इस प्रोत्साहन के लिए कोई अलग अंतिम तिथि सत्यापित नहीं हो पाई है। कटाई का मौसम जारी है, इसलिए तुरंत पंजीकरण जाँचें और ADO से संपर्क करें — देर होने पर सत्यापन नहीं हो पाएगा।

स्टेटस कैसे चेक करें और पैसा कैसे मिलेगा

  1. fasal.haryana.gov.in पर लॉगिन करें और अपने आवेदन / फसल पंजीकरण का स्टेटस देखें।
  2. पावती संख्या से जिला कृषि कार्यालय में भी स्थिति पूछी जा सकती है।
  3. भुगतान DBT के माध्यम से सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में आता है — इसलिए बैंक खाते में आधार लिंक और मोबाइल नंबर अपडेट होना बहुत जरूरी है।
  4. अगर पैसा देर से आए या स्टेटस “लंबित” दिखे, तो अपने ADO या जिला कृषि कार्यालय में पावती संख्या के साथ शिकायत दर्ज कराएँ।

CEEW अध्ययन की चेतावनी: पैसा न मिलना भी एक हकीकत है

28 अक्टूबर 2026 को जारी CEEW (Council on Energy, Environment and Water) के स्वतंत्र अध्ययन ने इस योजना की असली तस्वीर सामने रखी है। जनवरी से मार्च 2026 के बीच 12 जिलों के 144 गाँवों में 1,588 किसानों का सर्वे किया गया था:

  • योजना के बारे में जागरूकता 80% है — किसान जानते हैं कि ₹1,200 प्रति एकड़ मिलता है।
  • लेकिन आवेदन सिर्फ 42% किसानों ने किया।
  • और आवेदन करने वालों में से सिर्फ 57% को ही भुगतान मिला।

यानी जानकारी होना ही काफी नहीं है — आवेदन करना और उसके बाद स्टेटस पर नजर रखना उतना ही जरूरी है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि पराली की गट्ठर (baling) बनाने वाले किसानों में से 87% एग्रीगेटर (बिचौलिए/संग्रहकर्ता) पर निर्भर हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 7% को ही खरीदार से भुगतान मिलता है — 62% किसान पराली मुफ्त में दे देते हैं और 31% तो खेत साफ कराने के लिए लगभग ₹1,000 प्रति एकड़ खुद खर्च करते हैं। इसलिए बेलर से गट्ठर बनवाते समय खरीदार और कीमत पहले से तय कर लें, और रसीद जरूर लें।

अच्छी खबर यह भी है कि बेलिंग या चारे के रूप में पराली इस्तेमाल करने वाले 80% किसान 2026 में भी यही तरीका जारी रखना चाहते हैं — यानी एक बार सही तरीका अपनाने पर किसान उसे छोड़ना नहीं चाहता, बस भुगतान समय पर मिलना चाहिए।

मशीन सब्सिडी: पराली प्रबंधन की मशीनें आधी कीमत पर

प्रोत्साहन राशि के अलावा, पराली प्रबंधन की मशीनें खरीदने पर केंद्र सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना के तहत भारी सब्सिडी मिलती है — यह सब्सिडी 2026 के दिशा-निर्देशों में भी जारी है:

श्रेणी सब्सिडी
व्यक्तिगत किसान (मशीन खरीद) लागत का 50%
कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) — परियोजना लागत पर 80%
मशीन काम
सुपर सीडर पराली वाले खेत में सीधे गेहूँ की बुआई
हैप्पी सीडर बिना जुताई बुआई, पराली मल्च के रूप में रहती है
स्मार्ट सीडर आधुनिक बुआई मशीन
मल्चर / स्ट्रॉ चॉपर पराली को काटकर खेत में मिलाना
बेलर और स्ट्रॉ रेक पराली के गट्ठर बनाना (बिक्री/चारे के लिए)
रिवर्सिबल MB प्लाऊ पराली को मिट्टी में दबाना

आँकड़े बताते हैं कि यह व्यवस्था हरियाणा में काम कर रही है: 2018-19 से 2025-26 के बीच (10 फरवरी 2026 तक) हरियाणा को CRM योजना में ₹1,156.71 करोड़ मिले, राज्य में 1,10,767 मशीनें बाँटी गईं, और कुल 15.91 लाख हेक्टेयर धान क्षेत्र में से लगभग 13.90 लाख हेक्टेयर का प्रबंधन मशीनों से किया गया।

लेकिन ध्यान दें: 2026-27 के लिए CRM मशीनों के ऑनलाइन आवेदन 18 जुलाई से 3 अगस्त 2026 तक ही खुले थे — यह खिड़की अब बंद हो चुकी है। अगली खिड़की के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण और PPP पहले से तैयार रखें, ताकि नोटिफिकेशन आते ही आवेदन कर सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. पराली प्रोत्साहन योजना में कितनी राशि मिलती है? 2026-27 में ₹1,200 प्रति एकड़ मिलती है। पहले यह राशि ₹1,000 प्रति एकड़ थी। राशि सत्यापित रकबे के हिसाब से DBT से सीधे बैंक खाते में आती है।

2. क्या पराली जलाने पर प्रोत्साहन मिलेगा? नहीं। योजना का पहला नियम ही यही है कि पराली न जलाई गई हो। जलाने पर न सिर्फ प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, बल्कि FIR, चालान और भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी हो सकती है।

3. आवेदन के लिए कौन सा पोर्टल है? मेरी फसल मेरा ब्यौरा — fasal.haryana.gov.in। इसके अलावा कृषि विभाग की वेबसाइट agriharyana.gov.in पर भी योजना की जानकारी देखी जा सकती है।

4. आवेदन की आखिरी तारीख क्या है? इस प्रोत्साहन के लिए कोई अलग अंतिम तिथि आधिकारिक तौर पर सत्यापित नहीं हो पाई है। लाभ मेरी फसल मेरा ब्यौरा पंजीकरण और खेत के सत्यापन से जुड़ा है, और कटाई का मौसम जारी है — इसलिए तुरंत पंजीकरण जाँचें और अपने ADO से संपर्क करें।

5. पैसा कब तक मिलेगा? भुगतान की कोई निश्चित तारीख प्रकाशित नहीं हुई है। खेत के सत्यापन के बाद राशि DBT से आती है। CEEW अध्ययन के अनुसार पिछले सीजन में सिर्फ 57% आवेदकों को भुगतान मिला था, इसलिए पावती सहेजकर रखें और पोर्टल पर स्टेटस नियमित जाँचते रहें।

6. क्या मशीन खरीदने पर भी सब्सिडी मिलती है? हाँ। CRM योजना के तहत व्यक्तिगत किसान को मशीन की लागत का 50% और कस्टम हायरिंग सेंटर को 80% तक सहायता मिलती है। लेकिन 2026-27 की मशीन आवेदन खिड़की (18 जुलाई – 3 अगस्त 2026) बंद हो चुकी है — अगली खिड़की की तैयारी अभी से रखें।

7. पराली का क्या करें — जलाने के अलावा विकल्प क्या हैं? सुपर सीडर या हैप्पी सीडर से बिना जलाए बुआई करें, बेलर से गट्ठर बनवाकर बेचें, पराली को चारे के रूप में इस्तेमाल करें, या मल्चर से खेत में मिलाएँ। इनमें से हर तरीके पर प्रोत्साहन या सब्सिडी का लाभ लागू होता है।

किसानों के लिए और उपयोगी जानकारी

आधिकारिक स्रोत

  • हरियाणा सरकार, जनसंपर्क विभाग — पराली सुरक्षा बल और ₹1,200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन (24 सितंबर 2026): prms.prharyana.gov.in/press-release/7164
  • CEEW — पराली अध्ययन प्रेस रिलीज़, 28 अक्टूबर 2026 (1,588 किसानों का सर्वे): ceew.in — Stubble Studies Press Release (PDF)
  • The New Indian Express — पराली सुरक्षा बल, ड्रोन और ₹1,200 प्रोत्साहन, 24 सितंबर 2026: newindianexpress.com
  • भारत सरकार, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग — CRM मशीन सब्सिडी 50%/80%, राज्यसभा प्रश्न 153, 13 फरवरी 2026 (PDF): sansad.in
  • मेरी फसल मेरा ब्यौरा — आधिकारिक पोर्टल: fasal.haryana.gov.in
  • कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा — आधिकारिक वेबसाइट: agriharyana.gov.in

नोट: इस लेख की जानकारी 6 नवंबर 2026 तक सत्यापित आधिकारिक स्रोतों पर आधारित है। आवेदन करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर उस समय के नियम, तारीखें और फॉर्म जरूर जाँच लें — पोर्टल पर दिखने वाला लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

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