मेक इन इंडिया: सेना को मिले स्वदेशी नागास्त्र-2 कामिकेज़ ड्रोन, 650mm कवच भेदने की ताकत
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने भारतीय सेना को स्वदेशी नागास्त्र-2 एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम सौंप दिया है। यह डिलीवरी करीब एक महीने पहले 450 नागास्त्र-1R कामिकेज़ ड्रोन सौंपे जाने के बाद हुई है, जिन्हें सेना ने 2025 में ऑर्डर किया था।
नागास्त्र-2 की खासियतें इसे बेहद घातक बनाती हैं। इसमें दिन-रात निगरानी करने वाले कैमरे लगे हैं और 4 किलोग्राम का टैंडम शेप्ड-चार्ज वारहेड 650 मिलीमीटर तक के रोल्ड होमोजीनियस आर्मर को भेद सकता है — यानी दुश्मन के टैंक और बख्तरबंद वाहन इसके निशाने पर हैं।
रेंज की बात करें तो रिकवर-एंड-रियूज मोड में यह 25 किलोमीटर और फायर-एंड-फॉरगेट मोड में 50 किलोमीटर तक मार कर सकता है। एक बार उड़ान भरने के बाद यह 60 मिनट तक हवा में रह सकता है। सबसे अहम है इसकी ECCM तकनीक, जो इसे दुश्मन की जैमिंग और GPS स्पूफिंग से बचाती है।
कंपनी के मुताबिक अगस्त 2026 में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इसके तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हुए थे, जिसमें सभी परिचालन और ECCM मानदंडों की पुष्टि हुई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी कामिकेज़ ड्रोन सेना की सटीक हमला क्षमता को कई गुना बढ़ाएंगे और रक्षा आयात पर निर्भरता घटाएंगे।
