कोयला गैसीकरण को ₹46,000 करोड़ का बड़ा पुश: केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी का ऐलान — यूरिया और गैस का आयात घटेगा
देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘अग्रसर भारत मंच’ कार्यक्रम में घोषणा की कि भारत कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाएगा, जिसके लिए 46,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस पहल से देश में ही उर्वरक और गैस का उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
कोयला गैसीकरण तकनीक के जरिए कोयले को सिंथेटिक गैस (सिनगैस), अमोनिया, यूरिया और मेथनॉल में बदला जाता है। मंत्री ने बताया कि व्यावसायिक स्तर की परियोजनाएं जल्द शुरू होंगी। केंद्र सरकार ने हाल ही में सतही कोयला गैसीकरण के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रीय लक्ष्य है कि 2030 तक 10 करोड़ टन कोयले का गैसीकरण किया जाए, जिससे एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के आयात में भारी कमी आएगी।
किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला आज भी भारत की प्राथमिक ऊर्जा जरूरतों का 55 प्रतिशत और बिजली उत्पादन का 74 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए कोयले के स्वच्छ और मूल्यवर्धित उपयोग से देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के साथ पर्यावरण मानकों का भी ध्यान रखा जा सकेगा।
इसके साथ ही मंत्री ने बताया कि सरकार महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की दिशा में भी काम कर रही है — अर्जेंटीना में खानों की खोज जारी है और अन्य देशों से भी बातचीत चल रही है। ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में यह दोहरा प्रयास भारत को आयात पर निर्भरता से मुक्ति की ओर ले जाने वाला साबित हो सकता है।
