हरियाणा में डॉक्टर नर्स फार्मासिस्ट के लिए डिजिटल आईडी अनिवार्य: 90 दिन में HPR आईडी नहीं बनवाई तो रुक जाएगी प्रैक्टिस
हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी पात्र पेशेवरों के लिए अब डिजिटल पहचान अनिवार्य कर दी गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के तहत डॉक्टरों, दंत चिकित्सकों, आयुष चिकित्सकों, नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य पात्र स्वास्थ्यकर्मियों के लिए हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री यानी एचपीआर में पंजीकरण जरूरी कर दिया है। यह व्यवस्था आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत लागू की जा रही है, ताकि प्रदेश में काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों का एक सत्यापित और मानकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके।
नए नियम के तहत संबंधित परिषदों में नया पंजीकरण कराने या पुराने पंजीकरण का नवीनीकरण कराने के समय एचपीआर आईडी होना जरूरी होगा। जिन स्वास्थ्यकर्मियों के पास आवेदन के समय यह आईडी नहीं होगी, उन्हें अधिकतम 90 दिन का अस्थायी पंजीकरण दिया जा सकेगा। इस अवधि में उन्हें जरूरी दस्तावेज एचपीआर पोर्टल पर जमा करके अपनी डिजिटल आईडी प्राप्त करनी होगी, और इस दौरान अन्य कानूनी शर्तें पूरी होने पर वे मरीजों का इलाज जारी रख सकेंगे।
समय पर आईडी न बनवाने पर सख्त परिणाम भी तय किए गए हैं। 90 दिन में एचपीआर आईडी नहीं बनवाने पर अस्थायी पंजीकरण बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के निलंबित कर दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित स्वास्थ्यकर्मी तब तक प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा, जब तक उसका पंजीकरण बहाल नहीं हो जाता। आईडी मिलने के बाद उसे 10 दिन के भीतर संबंधित परिषद में पंजीकरण बहाल कराने के लिए आवेदन करना होगा। आईडी बनवाने की प्रक्रिया के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को तीन बार याद भी दिलाया जाएगा — पहला संदेश 30 दिन के भीतर, दूसरा 30 से 60 दिन के बीच और तीसरा 60 से 75 दिन के बीच मोबाइल और ईमेल पर भेजा जाएगा।
यह व्यवस्था पांच पेशेवर परिषदों के माध्यम से लागू होगी — हरियाणा राज्य चिकित्सा परिषद, राज्य दंत परिषद, नर्स एवं नर्स-मिडवाइफ परिषद, भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा और राज्य फार्मेसी परिषद। अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशन के एक महीने बाद प्रभावी होगी। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल रजिस्ट्री से आम लोग किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की योग्यता और पंजीकरण की जांच कर सकेंगे, जिससे बिना पंजीकरण के इलाज करने वालों पर भी रोक लगेगी।
