हरियाणा चारा-बिजाई योजना क्या है?
हरियाणा में आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या के कारण गौशालाओं में चारे की भारी कमी हो गई थी। इस समस्या को हल करने के लिए हरियाणा सरकार ने 10 मई 2022 को ‘चारा-बिजाई योजना’ (Chaara-Bijaee Yojana) शुरू की थी। इसके तहत जो किसान चारा उगाकर गौशाला को देता है, उसे सरकार ₹10,000 प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता देती है।
यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा की नियमित योजना है। इसका मकसद दोहरा है — एक तरफ किसानों को चारा उगाने की आमदनी मिलती है, दूसरी तरफ गौशालाओं को चारे की कमी से राहत मिलती है।
योजना एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | चारा-बिजाई योजना (Chaara-Bijaee Yojana / Fodder Cultivation Scheme) |
| विभाग | कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा |
| शुरुआत | 10 मई 2022 — तत्कालीन कृषि मंत्री जे.पी. दलाल द्वारा |
| सहायता | ₹10,000 प्रति एकड़ |
| अधिकतम क्षेत्र | 10 एकड़ तक |
| अधिकतम कुल लाभ | ₹1,00,000 |
| भुगतान | DBT — सीधे बैंक खाते में |
| आवेदन | ऑनलाइन — मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) |
| आधिकारिक पोर्टल | fasal.haryana.gov.in |
क्या यह योजना सिर्फ गौशाला के लिए है?
हाँ — यही इस योजना की सबसे अहम शर्त है। ₹10,000 प्रति एकड़ की सहायता सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलती है जो गौशाला को चारा देने के लिए सहमत हों और गौशाला के साथ आपसी सहमति (mutual consent) से चारा आपूर्ति का समझौता करें।
सीधे शब्दों में:
- अगर आप चारा उगाकर अपने पशुओं को खिलाते हैं, तो इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- अगर आप चारा उगाकर बाज़ार में बेचते हैं, तो भी इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
- लाभ सिर्फ तभी मिलेगा जब आप चारा उगाकर गौशाला को देंगे — गौशाला के साथ आपसी सहमति से।
योजना की शर्त के अनुसार किसान गौशाला के आसपास की ज़मीन पर 10 एकड़ तक चारा उगाकर गौशाला को दे सकता है। गौशाला को चारा देना ही इस योजना का मूल उद्देश्य है — सरकार चाहती है कि गौशालाओं को चारे की कमी न हो और किसान को उसकी मेहनत का पैसा मिले।
कितना पैसा मिलेगा? — हिसाब
| क्षेत्र (एकड़) | सहायता (₹10,000/एकड़) |
|---|---|
| 1 एकड़ | ₹10,000 |
| 2 एकड़ | ₹20,000 |
| 5 एकड़ | ₹50,000 |
| 10 एकड़ | ₹1,00,000 (अधिकतम) |
10 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर चारा उगाने वाले किसान को भी सहायता सिर्फ 10 एकड़ तक ही मिलेगी — अधिकतम कुल लाभ ₹1,00,000 है। राशि DBT (Direct Benefit Transfer) से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है, इसलिए कोई बिचौलिया नहीं होता।
अप्रैल 2024 में सरकार ने हरियाणा की 569 गौशालाओं को चारे के लिए ₹13.44 करोड़ दिए थे — यह बताता है कि सरकार गौशालाओं के चारे पर कितना ध्यान दे रही है।
पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है?
- हरियाणा का किसान हो — अपनी ज़मीन पर चारा उगाता हो।
- चारा उगाने के लिए 10 एकड़ तक ज़मीन हो — 10 एकड़ से ज़्यादा पर भी लाभ सिर्फ 10 एकड़ तक मिलेगा।
- गौशाला को चारा देने के लिए सहमत हो — गौशाला के साथ आपसी सहमति से चारा आपूर्ति का समझौता होना चाहिए।
- मेरी फसल मेरा ब्योरा (MFMB) पोर्टल पर पंजीकृत हो और चारे की फसल का ब्योरा दर्ज हो।
- बैंक खाता परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) से लिंक्ड हो, क्योंकि भुगतान DBT से उसी खाते में आएगा।
- चारा उगाने वाली ज़मीन का विवरण सही-सही दर्ज होना चाहिए — गलत जानकारी पर आवेदन खारिज हो सकता है।
ज़रूरी दस्तावेज़
| क्रम | दस्तावेज़ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1 | परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) / आधार कार्ड | MFMB पंजीकरण के लिए |
| 2 | ज़मीन के कागज़ — फर्द/जमाबंदी | चारा उगाने वाली ज़मीन का विवरण |
| 3 | गौशाला के साथ आपसी सहमति का प्रमाण/समझौता | गौशाला को चारा देने की सहमति — योजना की सबसे अहम शर्त |
| 4 | बैंक खाते की जानकारी | DBT भुगतान के लिए |
| 5 | मोबाइल नंबर | MFMB पंजीकरण और SMS सूचना के लिए |
| 6 | फसल का ब्योरा | कौन सा चारा, कितने एकड़ — MFMB पर दर्ज करना होगा |
पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम है — फॉर्म में जो दस्तावेज़ माँगा जाए, वही अपलोड करें। गौशाला के साथ सहमति का प्रमाण पहले से तैयार रखें, क्योंकि यही इस योजना की सबसे खास शर्त है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप
आवेदन मेरी फसल मेरा ब्योरा (MFMB) पोर्टल — fasal.haryana.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:
चरण 1: सबसे पहले अपने इलाके की गौशाला से संपर्क करें और चारा आपूर्ति के लिए आपसी सहमति बनाएँ — कौन सा चारा, कितनी मात्रा, किस समय देना है। यह सहमति योजना की पहली शर्त है।
चरण 2: मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) खोलें। अगर पहले से पंजीकृत नहीं हैं, तो ‘किसान पंजीकरण’ पर क्लिक करके पंजीकरण करें — नाम, मोबाइल नंबर, परिवार पहचान पत्र, आधार नंबर और बैंक खाते की जानकारी भरनी होगी।
चरण 3: पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी चारे की फसल का ब्योरा दर्ज करें — कौन सा चारा उगाया है, कितने एकड़ में, किस खेत में।
चरण 4: चारा-बिजाई योजना के लिए आवेदन करें — गौशाला का नाम और आपसी सहमति का विवरण भरें। माँगे गए दस्तावेज़ अपलोड करें।
चरण 5: फॉर्म जमा (Submit) करें। जमा करने के बाद आपको Application Reference ID मिलेगी — इसे संभालकर रखें।
चरण 6: विभाग आपके आवेदन और फसल की जाँच करेगा — खेत में चारा उगा है या नहीं, और गौशाला को चारा दिया जा रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि होगी।
चरण 7: जाँच पूरी होने पर सहायता राशि DBT से सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
ऑफलाइन आवेदन का विकल्प
अगर ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत आती है, तो अपने नज़दीकी CSC केंद्र या अटल सेवा केंद्र पर जाकर मदद ले सकते हैं — वहाँ ऑपरेटर आपकी ओर से MFMB पंजीकरण और आवेदन में मदद कर सकता है। इसके अलावा, अपने ब्लॉक के कृषि विकास अधिकारी (ADO) या ज़िला कृषि कार्यालय से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है। गौशाला के साथ सहमति बनाने में भी कृषि विभाग के अधिकारी मदद कर सकते हैं।
आवेदन शुल्क और समय-सीमा
शुल्क: इस योजना के लिए कोई आवेदन शुल्क सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं है। फॉर्म जमा करते समय पोर्टल पर अगर कोई शुल्क दिखे, तो वही अंतिम माना जाए। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें — आवेदन सीधा और ऑनलाइन है।
समय-सीमा: चारा-बिजाई योजना के लिए कोई अंतिम तिथि सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है — आवेदन चारा बोने के मौसम के हिसाब से किए जाते हैं। चारा बोने से पहले ही MFMB पर फसल का ब्योरा दर्ज करवाना ज़रूरी है, इसलिए बोवाई से पहले आवेदन करें। देर से आवेदन करने पर उस सीज़न का लाभ नहीं मिल सकता।
आवेदन की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?
- मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर लॉगिन करके अपने आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है।
- आवेदन के हर चरण पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS भी भेजा जाता है।
- भुगतान की स्थिति बैंक खाते से भी जाँची जा सकती है — DBT से राशि आने पर SMS अलर्ट मिलेगा।
- अगर भुगतान में देरी हो, तो अपने ब्लॉक के कृषि विकास अधिकारी या ज़िला कृषि कार्यालय से संपर्क करें।
पैसे कैसे मिलेंगे?
जाँच पूरी होने पर सहायता राशि DBT के माध्यम से सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाती है। ₹10,000 प्रति एकड़ के हिसाब से, अधिकतम 10 एकड़ तक — यानी अधिकतम ₹1,00,000। राशि एकमुश्त या विभागीय प्रक्रिया के अनुसार आ सकती है; पोर्टल पर दिख रही ताज़ा प्रक्रिया ही अंतिम मानी जाए। अगर भुगतान अटक जाए, तो सबसे पहले बैंक खाते का IFSC कोड और परिवार पहचान पत्र से लिंक की स्थिति जाँचें।
चारा उगाने से पहले ध्यान देने योग्य बातें
- गौशाला से सहमति पहले: चारा बोने से पहले ही गौशाला से आपसी सहमति बना लें — बिना सहमति के लाभ नहीं मिलेगा।
- चारे की किस्म: गौशाला की ज़रूरत के हिसाब से चारा चुनें — ज्वार, बाजरा, मक्का, बरसीम, जई या नेपियर घास। कृषि विभाग के अधिकारी सही सलाह देंगे।
- गोबर की खाद: गौशाला के गोबर से बनी खाद (जैसे प्रॉम खाद/फॉस्फेट-युक्त जैविक खाद) रासायनिक खाद का विकल्प हो सकती है — पिंजौर, हिसार और भिवानी की गौशालाओं में ऐसी खाद तैयार की जा रही है।
- फसल का ब्योरा समय पर: MFMB पर फसल का ब्योरा बोवाई के समय ही दर्ज करवाएँ — देर से दर्ज करवाने पर लाभ नहीं मिल सकता।
- चारा काटने का समय: चारा सही समय पर काटकर गौशाला को दें — देर से काटा गया चारा सख्त हो जाता है और पशु कम खाते हैं।
- फर्ज़ी वेबसाइटों से सावधान: आवेदन सिर्फ fasal.haryana.gov.in से ही करें।
किसानों के लिए अन्य उपयोगी योजनाएँ
चारा-बिजाई के साथ-साथ इन योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है (हर योजना की अपनी पात्रता शर्तें लागू होंगी):
- हरियाणा पशुधन बीमा योजना: पशु के बीमे पर सिर्फ ₹100–₹300 प्रीमियम — SC परिवारों के लिए मुफ्त, अधिकतम 5 पशु।
- मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना: दूध उत्पादकों को प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि — चारा उगाने वाले किसान दूध उत्पादन से भी जुड़ सकते हैं।
- हरियाणा पशु किसान क्रेडिट कार्ड: पशुपालन के लिए ₹3 लाख तक का लोन, 4% प्रभावी ब्याज, ₹1.60 लाख तक बिना गारंटी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. चारा-बिजाई योजना में कितनी सहायता मिलती है?
गौशाला को चारा देने वाले किसान को ₹10,000 प्रति एकड़ की सहायता मिलती है, अधिकतम 10 एकड़ तक — यानी अधिकतम ₹1,00,000।
2. क्या यह सहायता सिर्फ गौशाला को चारा देने पर ही मिलती है?
हाँ। यह योजना की सबसे अहम शर्त है — लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलता है जो गौशाला के साथ आपसी सहमति से चारा आपूर्ति करते हैं। अपने पशुओं को खिलाने या बाज़ार में बेचने वाले चारे पर यह लाभ नहीं मिलता।
3. योजना कब शुरू हुई थी?
चारा-बिजाई योजना 10 मई 2022 को तत्कालीन कृषि मंत्री जे.पी. दलाल द्वारा शुरू की गई थी।
4. आवेदन कहाँ करें?
ऑनलाइन आवेदन मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर होता है। आवेदन से पहले गौशाला के साथ आपसी सहमति बना लें।
5. 10 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन पर चारा उगाने पर कितना पैसा मिलेगा?
10 एकड़ से ज़्यादा पर भी सहायता सिर्फ 10 एकड़ तक ही मिलेगी — अधिकतम कुल लाभ ₹1,00,000 है।
6. पैसा कैसे मिलेगा?
सहायता राशि DBT (Direct Benefit Transfer) से सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
7. क्या आवेदन की कोई अंतिम तिथि है?
कोई सार्वजनिक अंतिम तिथि घोषित नहीं है — आवेदन चारा बोने के मौसम के हिसाब से किए जाते हैं। बोवाई से पहले MFMB पर फसल का ब्योरा दर्ज करवाना ज़रूरी है।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा: agriharyana.gov.in
- मेरी फसल मेरा ब्योरा (ऑनलाइन आवेदन): fasal.haryana.gov.in
- योजना की शुरुआत: 10 मई 2022 को कृषि मंत्री जे.पी. दलाल द्वारा (PTI रिपोर्ट के अनुसार)
- अप्रैल 2024 में 569 गौशालाओं को चारे के लिए ₹13.44 करोड़ दिए गए (प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार)
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा कृषि विभाग, मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल और योजना की शुरुआत से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। ₹10,000 प्रति एकड़, अधिकतम 10 एकड़ और गौशाला-आपूर्ति की शर्त योजना की शुरुआत से ही दर्ज है। आवेदन करने से पहले MFMB पोर्टल पर योजना का लाइव फॉर्म और ताज़ा निर्देश ज़रूर देख लें — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

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