हरियाणा कुक्कुट पालन योजना क्या है?
मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) हरियाणा में कम लागत में शुरू होने वाला और जल्दी आमदनी देने वाला काम है — अंडे और मांस, दोनों की माँग हर दिन रहती है। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, हरियाणा इसीलिए दो तरह से मुर्गी पालन को बढ़ावा देता है: (1) बैकयार्ड पोल्ट्री यूनिट — गरीब परिवारों को घर के पीछे छोटे पैमाने पर मुर्गी पालने के लिए चूजे मुफ्त; और (2) पोल्ट्री यूनिट की स्थापना — बेरोज़गार ग्रामीण युवाओं के लिए बैंक लोन से बड़ी पोल्ट्री यूनिट।
इस गाइड में दोनों की पूरी जानकारी है। सबसे पहले वह योजना समझें जिसका लाभ सबसे ज़्यादा परिवारों को सीधे मिलता है — बैकयार्ड पोल्ट्री यूनिट।
योजना एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | बैकयार्ड पोल्ट्री यूनिट की स्थापना / पोल्ट्री यूनिट की स्थापना |
| विभाग | पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, हरियाणा |
| बैकयार्ड लाभ | 50 चूजे मुफ्त + 2 दाना-पानी के बर्तन (फीडर) + 2 पानी के बर्तन (ड्रिंकर) मुफ्त |
| चूजों की उम्र | 10 दिन के चूजे, सरकारी हैचरी (हिसार) से |
| चूजों की नस्ल | छाबरो (Chabro) और कैरी निर्भीक (Cari Nirbheek) — कम खर्च में पलने वाली मज़बूत नस्लें |
| बड़ी यूनिट | बैंक लोन से पोल्ट्री यूनिट; राज्य में 1,000 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य |
| आवेदन | ऑनलाइन — अंत्योदय सरल पोर्टल (saralharyana.gov.in) |
| डिलीवरी | चूजे लाभार्थी के दरवाज़े पर पहुँचाए जाते हैं |
| आधिकारिक पोर्टल | saralharyana.gov.in |
बैकयार्ड पोल्ट्री में क्या-क्या मुफ्त मिलता है?
पशुपालन विभाग की योजना सूची के अनुसार, बैकयार्ड पोल्ट्री यूनिट के तहत हर लाभार्थी परिवार को 50 चूजे, दो फीडर और दो ड्रिंकर बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं। चूजे 10 दिन की उम्र के होते हैं और हिसार की सरकारी हैचरी से आते हैं। चूजे लाभार्थी के घर के दरवाज़े पर पहुँचाए जाते हैं — आपको हैचरी जाकर लाने की ज़रूरत नहीं है।
यह योजना मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत चलाई जाती है। इसका उद्देश्य गरीब परिवारों, छोटे किसानों और भूमिहीन कृषि मज़दूरों की सामाजिक-आर्थिक और पोषण स्थिति सुधारना है — घर में अंडे मिलते हैं, खाने में प्रोटीन बढ़ता है, और बचे हुए अंडे या मुर्गियाँ बेचकर छोटी आमदनी भी होती है।
चूजों की नस्लें भी सोच-समझकर चुनी गई हैं — छाबरो और कैरी निर्भीक कम दाना-पानी में पलने वाली मज़बूत देसी-संकर नस्लें हैं, जो बैकयार्ड (खुले में, कम खर्च पर) पालन के लिए उपयुक्त हैं।
बड़ी पोल्ट्री यूनिट — बैंक लोन वाली योजना
अगर आप बड़े पैमाने पर मुर्गी पालन करना चाहते हैं, तो विभाग की दूसरी योजना है — पोल्ट्री यूनिट की स्थापना। यह एक क्रेडिट-आधारित (credit-based) योजना है:
- व्यावसायिक बैंकों से कृषि वित्त (agriculture finance) के तहत पोल्ट्री यूनिट के लिए लोन मिलता है।
- राज्य सरकार ने पूरे राज्य में 1,000 पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है।
- विभाग मुर्गी और उसके उत्पादों की मार्केटिंग में भी मदद करता है — अंडे और मुर्गियाँ कहीं भी, कभी भी नकद बेची जा सकती हैं।
- हिसार की सरकारी पोल्ट्री हैचरी को मज़बूत करने के लिए सरकार ने सेट्टर, हैचर और अन्य सामान की खरीद के लिए धन रखा है; वहीं से लाभार्थियों को चूजे दिए जाते हैं।
- कड़कनाथ चूजों की आपूर्ति पर भी सब्सिडी की व्यवस्था है — कड़कनाथ में रुचि रखने वाले किसान SARAL पोर्टल पर ताज़ा दर देखें।
ध्यान दें: बड़ी यूनिट वाली योजना में सरकार सीधे नकद सब्सिडी नहीं देती — मदद बैंक लोन और हैचरी सुविधा के रूप में मिलती है। कुछ प्रकाशित जानकारियों में हैचरी सुदृढ़ीकरण के लिए ₹3 लाख और 50,000 चूजों के पालन के लिए ₹15 लाख जैसी विभागीय राशियाँ भी बताई गई हैं — ये राशियाँ विभागीय व्यवस्था की हैं, लाभार्थी को मिलने वाली नकद सब्सिडी नहीं। इन्हें अपनी जेब में आने वाला पैसा न समझें।
केंद्र सरकार की मदद भी है — NLM (राष्ट्रीय पशुधन मिशन)
बड़े स्तर पर पोल्ट्री उद्यम के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) उद्यमिता योजना के तहत भी मदद मिलती है — पैरेंट फार्म, हैचरी और ब्रूडर-सह-मदर यूनिट (कम से कम 1,000 पैरेंट लेयर) लगाने पर 50% तक पूँजीगत सब्सिडी, अधिकतम ₹25 लाख तक मिल सकती है। यह केंद्रीय योजना है; इसकी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया NLM पोर्टल पर देखें। छोटी बैकयार्ड यूनिट के लिए राज्य की मुफ्त चूजा योजना ही सबसे सीधा रास्ता है।
पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है?
विभागीय जानकारी और SARAL पोर्टल पर दर्ज शर्तों के अनुसार:
- हरियाणा का निवासी हो — राज्य के भीतर का किसान, या हरियाणा का किसान जो राज्य के बाहर रहता हो, वह भी लाभ ले सकता है।
- ग्रामीण क्षेत्र का बेरोज़गार व्यक्ति — पोल्ट्री यूनिट योजना मुख्य रूप से ग्रामीण बेरोज़गारों के लिए है।
- गरीबी रेखा से नीचे (BPL) परिवार — बैकयार्ड पोल्ट्री योजना मुख्य रूप से BPL परिवारों, छोटे किसानों, भूमिहीन मज़दूरों और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिए है।
- 2.5 एकड़ से कम ज़मीन वाले छोटे किसान भी पात्र माने जाते हैं; जिनके पास रहने की व्यवस्था है पर अपने पशु नहीं हैं और जो दूसरों के पशु पालते हैं, वे भी पात्र हो सकते हैं।
- सरकारी नौकरी वाले व्यक्ति पात्र नहीं हैं।
- बड़ी (लोन वाली) यूनिट के लिए बैंक की लोन पात्रता शर्तें भी लागू होंगी — बैंक आपकी चुकौती क्षमता और ज़मीन/जगह की व्यवस्था देखेगा।
ज़रूरी दस्तावेज़
| क्रम | दस्तावेज़ | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1 | परिवार पहचान पत्र (PPP फैमिली आईडी) / आधार नंबर | विभागीय प्रक्रिया के अनुसार — मोबाइल OTP से पंजीकरण |
| 2 | बैंक खाते की जानकारी | DBT/लोन प्रक्रिया के लिए |
| 3 | निवास प्रमाण | हरियाणा का निवासी होने का प्रमाण |
| 4 | BPL/आय प्रमाण-पत्र | बैकयार्ड योजना में प्राथमिकता के लिए (अगर लागू हो) |
| 5 | पासपोर्ट साइज़ फोटो, मोबाइल नंबर | फॉर्म के लिए |
| 6 | बैंक लोन के कागज़ (बड़ी यूनिट के लिए) | बैंक की माँग के अनुसार — ज़मीन/जगह के कागज़, प्रोजेक्ट विवरण |
पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम है — फॉर्म में जो दस्तावेज़ माँगा जाए, वही अपलोड करें। विभाग की प्रक्रिया के अनुसार किसान अपने मोबाइल नंबर (OTP से सत्यापित) से पंजीकरण करके PPP आईडी/आधार नंबर और बैंक खाते की जानकारी भरता है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप
आवेदन अंत्योदय सरल पोर्टल (saralharyana.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन किया जाता है। प्रक्रिया इस प्रकार है:
चरण 1: सरल पोर्टल saralharyana.gov.in पर जाएँ। नए उपयोगकर्ता हों तो ‘Register’ पर क्लिक करके खाता बनाएँ — नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और आधार से जुड़ी जानकारी भरनी होगी।
चरण 2: अपनी यूज़र आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करें।
चरण 3: ‘Apply for Services’ पर क्लिक करें और ‘View all available services’ में योजना खोजें — ‘Scheme for Establishment of Backyard Poultry Units’ (बैकयार्ड यूनिट के लिए) या ‘Scheme for Establishment of Poultry Units’ (बड़ी यूनिट के लिए)।
चरण 4: आवेदन फॉर्म में अपनी जानकारी भरें — नाम, पता, परिवार पहचान पत्र, आधार नंबर, बैंक खाते की जानकारी और (बड़ी यूनिट के लिए) लोन व जगह का विवरण।
चरण 5: माँगे गए दस्तावेज़ अपलोड करें और फॉर्म जमा (Submit) करें। जमा करने के बाद आपको Application Reference ID मिलेगी — इसे संभालकर रखें।
चरण 6: विभाग आपके आवेदन की जाँच करेगा। बैकयार्ड योजना में स्वीकृति मिलने पर हिसार हैचरी से 50 चूजे, 2 फीडर और 2 ड्रिंकर आपके दरवाज़े पर पहुँचाए जाएँगे। बड़ी यूनिट में बैंक लोन की प्रक्रिया पूरी होने पर यूनिट स्थापना की मदद मिलेगी।
ऑफलाइन आवेदन का विकल्प
अगर ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत आती है, तो अपने नज़दीकी अंत्योदय सरल केंद्र (SARAL Kendra) या CSC केंद्र पर जाकर मदद ले सकते हैं — वहाँ ऑपरेटर आपकी ओर से फॉर्म भरने और दस्तावेज़ अपलोड करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, ज़िले के उप-निदेशक, पशुपालन (Deputy Director, Animal Husbandry) के कार्यालय से भी मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
आवेदन शुल्क और समय-सीमा
शुल्क: विभागीय जानकारी में इस योजना के लिए कोई आवेदन शुल्क दर्ज नहीं है। फॉर्म जमा करते समय पोर्टल पर अगर कोई शुल्क दिखे, तो वही अंतिम माना जाए। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें।
समय-सीमा: बैकयार्ड पोल्ट्री योजना के लिए कोई अंतिम तिथि सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं है — आवेदन साल भर खुले रहते हैं। बड़ी पोल्ट्री यूनिट योजना में बैंक लोन की प्रक्रिया समय ले सकती है, इसलिए जल्दी आवेदन करें।
आवेदन की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?
- सरल पोर्टल saralharyana.gov.in पर ‘Track Application / View Status of Application’ विकल्प से अपनी Application Reference ID डालकर स्थिति देखी जा सकती है।
- आवेदन के हर चरण पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS भी भेजा जाता है।
- चूजों की डिलीवरी में देरी हो तो अपने ज़िले के पशुपालन कार्यालय से संपर्क करें।
चूजे मिलने के बाद क्या करें? — पालन की बुनियादी बातें
- पहले 10 दिन सबसे नाज़ुक: चूजों को गर्म, सूखी और हवा से सुरक्षित जगह रखें। रात में बल्ब की गर्मी दें।
- साफ पानी और दाना: फीडर में दाना और ड्रिंकर में साफ पानी हर समय रखें। बर्तन रोज़ धोएँ।
- टीकाकरण: विभाग की सलाह के अनुसार चूजों के टीके (जैसे रानीखेत) समय पर लगवाएँ — नज़दीकी पशु चिकित्सालय से टीके की जानकारी लें।
- बीमारी दिखे तो: सुस्ती, खाना छोड़ना या दस्त दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें — टोल-फ्री 1962 पर भी मदद मिल सकती है।
- अंडे बेचना: अंडे देने वाली मुर्गियाँ 5–6 महीने में अंडे देना शुरू करती हैं। अंडे और मुर्गियाँ स्थानीय बाज़ार में बेची जा सकती हैं।
पशुपालकों के लिए अन्य उपयोगी योजनाएँ
मुर्गी पालन के साथ-साथ इन योजनाओं का लाभ भी लिया जा सकता है (हर योजना की अपनी पात्रता शर्तें लागू होंगी):
- हरियाणा पशुधन बीमा योजना: पशु के बीमे पर सिर्फ ₹100–₹300 प्रीमियम — SC परिवारों के लिए मुफ्त, अधिकतम 5 पशु।
- हरियाणा पशु किसान क्रेडिट कार्ड: पशुपालन के लिए ₹3 लाख तक का लोन, 4% प्रभावी ब्याज, ₹1.60 लाख तक बिना गारंटी।
- मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना: दूध उत्पादकों को प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि — डेयरी के साथ पोल्ट्री भी चलाई जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. बैकयार्ड पोल्ट्री योजना में क्या-क्या मुफ्त मिलता है?
हर लाभार्थी परिवार को 50 चूजे (10 दिन की उम्र के), 2 फीडर और 2 ड्रिंकर बिल्कुल मुफ्त दिए जाते हैं। चूजे हिसार की सरकारी हैचरी से आते हैं और दरवाज़े पर पहुँचाए जाते हैं।
2. कौन सी नस्ल के चूजे मिलते हैं?
छाबरो (Chabro) और कैरी निर्भीक (Cari Nirbheek) नस्ल के चूजे दिए जाते हैं — ये कम खर्च में पलने वाली मज़बूत नस्लें हैं, जो बैकयार्ड पालन के लिए उपयुक्त हैं।
3. बड़ी पोल्ट्री यूनिट के लिए कितनी सब्सिडी मिलती है?
बड़ी पोल्ट्री यूनिट योजना क्रेडिट-आधारित है — सरकार सीधे नकद सब्सिडी नहीं देती, बल्कि व्यावसायिक बैंकों से कृषि वित्त के तहत लोन मिलता है। राज्य में 1,000 पोल्ट्री यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य है।
4. क्या सरकारी नौकरी वाला व्यक्ति आवेदन कर सकता है?
नहीं। यह योजना मुख्य रूप से ग्रामीण बेरोज़गारों, BPL परिवारों, छोटे किसानों और भूमिहीन मज़दूरों के लिए है। सरकारी नौकरी वाले पात्र नहीं हैं।
5. आवेदन कहाँ करें?
ऑनलाइन आवेदन अंत्योदय सरल पोर्टल saralharyana.gov.in पर होता है। योजना का नाम खोजें — ‘Scheme for Establishment of Backyard Poultry Units’।
6. चूजे कब मिलेंगे?
आवेदन की स्वीकृति के बाद हिसार हैचरी से चूजे आपके दरवाज़े पर पहुँचाए जाएँगे। डिलीवरी का समय विभाग की व्यवस्था और हैचरी में चूजों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
7. कड़कनाथ मुर्गी पालन पर भी मदद मिलती है?
हाँ, कड़कनाथ चूजों की आपूर्ति पर सब्सिडी की व्यवस्था है। ताज़ा दर और शर्तें SARAL पोर्टल पर देखें।
आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक
- पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, हरियाणा — विभाग की योजना सूची (Details of Schemes): विभागीय दस्तावेज़ के अनुसार बैकयार्ड पोल्ट्री में 50 चूजे, 2 फीडर और 2 ड्रिंकर मुफ्त
- अंत्योदय सरल पोर्टल (ऑनलाइन आवेदन): saralharyana.gov.in
- सरल हेल्पलाइन: 0172-3968400 (सुबह 8 बजे – रात 8 बजे, सोमवार–शनिवार)
- राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) उद्यमिता योजना — बड़े पोल्ट्री उद्यम के लिए 50% तक पूँजीगत सब्सिडी
अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी हरियाणा पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की योजना सूची, SARAL पोर्टल और प्रकाशित योजना जानकारियों पर आधारित है। बैकयार्ड योजना में 50 चूजे, 2 फीडर और 2 ड्रिंकर मुफ्त — यह विभागीय दस्तावेज़ में दर्ज है। बड़ी यूनिट की लोन प्रक्रिया और कड़कनाथ की ताज़ा दरों के लिए आवेदन से पहले SARAL पोर्टल पर योजना का लाइव फॉर्म ज़रूर देख लें — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा।

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