चिन्मय अमृत महोत्सव में PM मोदी: ‘बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना होगा’ — विकसित भारत 2047 का संकल्प
नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन का उद्घाटन किया। तीन दिन (23 से 25 अक्टूबर) चलने वाले इस सम्मेलन में देश-विदेश से नौ हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। यह कार्यक्रम चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर सालभर चल रहे समारोहों का समापन है। चिन्मय मिशन की स्थापना 1951 में स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज को उन ताकतों के खिलाफ एकजुट करना होगा जो समाज को बांटना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियां और समाज की नई बुराइयां उभरी हैं, और इन्हें सुलझाना हम सबकी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आत्मनिर्भरता की प्रेरणा लेने और विकसित भारत 2047 के संकल्प से हर व्यक्ति को जोड़ने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने कहा, “हमारा राष्ट्र ही हमारी संस्कृति की जन्मभूमि है।” उन्होंने लाखों युवाओं को भारत का सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर बनने की प्रेरणा दी और कहा कि युवा उनकी नीतियों के केंद्र में हैं। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा, मातृभाषा में शिक्षा और आधुनिक विज्ञान पर जोर दिया।
सम्मेलन का एक भावुक क्षण तब आया जब प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखा। उन्होंने फरवरी 1993 में वडोदरा में स्वामीजी से अपनी आखिरी मुलाकात याद की, जब उन्हें शिकागो विश्व धर्म संसद में आमंत्रित किया गया था। 33 साल पुरानी इस याद को याद करते हुए प्रधानमंत्री भावुक हो गए।
चिन्मय मिशन पिछले सात दशकों से वेदांत, आध्यात्मिकता और समाज सेवा के क्षेत्र में काम कर रहा है। इसके 75 वर्ष के समारोहों का यह वैश्विक सम्मेलन भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार का बड़ा मंच माना जा रहा है।
