प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का उद्घाटन करते हुए देश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा की एक बड़ी उपलब्धि देश के सामने रखी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है। पेरिस समझौते के तहत यह लक्ष्य 2030 के लिए तय किया गया था, लेकिन भारत ने इसे 2025 में ही, पूरे पांच साल पहले हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री ने इसे वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया और कहा कि भारत इस दिशा में एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना से काम कर रहा है।
यह चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय समिट 2 से 5 नवंबर तक भारत मंडपम में चल रहा है। इसकी थीम निवेश करें, नवाचार करें, प्रेरित करें रखी गई है। समिट में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और 400 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं। इनमें 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसी उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन इस एक्सपो का प्रमुख आकर्षण है। समिट के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की विधानसभा का नौवां सत्र और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित हो रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा के तीन बड़े मंच एक साथ आए हैं।
समिट के दौरान राजस्थान ने अपनी ऊर्जा योजनाओं को प्रमुखता से सामने रखा। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी की मौजूदगी में 50 से अधिक प्रमुख निवेशकों के साथ गोलमेज बैठक की। इसमें ब्रुकफील्ड, रीन्यू, आदित्य बिड़ला रिन्यूएबल्स, जिंदल समूह और अडावा जैसी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में देश में पहले स्थान पर है। राज्य में 51000 मेगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है, जिसमें 45000 मेगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता शामिल है। राजस्थान का लक्ष्य 2030 तक लगभग 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है, जिसमें सौर, पवन, हाइब्रिड परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने इस लक्ष्य के लिए कई नीतिगत कदम भी उठाए हैं। राज्य ने एकीकृत स्वच्छ ऊर्जा नीति लागू की है और बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता आसान बनाने हेतु राइट टू यूज नीति शुरू की है। राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना 2024 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन और सुविधाएं दी जा रही हैं। राज्य में बड़े सौर पार्क, रूफटॉप सौर प्रतिष्ठान, पवन ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। अतिरिक्त सौर बिजली के उपयोग और व्यस्त समय में ग्रिड प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है।
समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी टीम यूरोप पवेलियन भी पहुंचे, जहां यूरोपीय संघ के राजदूत ने उनकी मौजूदगी पर खुशी जताई। भारत और यूरोपीय संघ के बीच स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी की शुरुआत 2016 में हुई थी, और यह साझेदारी अब निवेश, नवाचार और नई तकनीकों के क्षेत्र में ठोस काम कर रही है। समिट का उद्देश्य साफ है — स्वच्छ ऊर्जा में वैश्विक निवेश बढ़ाना, उद्योगों की भागीदारी मजबूत करना और तकनीकी साझेदारियों को नई गति देना। भारत का पांच साल पहले लक्ष्य हासिल करना इस बात का संकेत है कि देश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में केवल लक्ष्य तय नहीं करता, बल्कि उन्हें समय से पहले पूरा भी करता है।

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