मध्य प्रदेश: मोहन यादव ने 950 एमएसएमई इकाइयों को दिए 490 करोड़ रुपये, 100 से ज्यादा स्टार्टअप को भी मिली सहायता
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार 1 नवंबर को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उद्यम सम्मेलन में प्रदेश के छोटे उद्योगों और स्टार्टअप के लिए बड़ी आर्थिक सहायता वितरित की। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए प्रदेश के विभिन्न जिलों की 950 से ज्यादा एमएसएमई इकाइयों को 490 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी। इसके साथ ही स्टार्टअप नीति 2025 के तहत 100 से ज्यादा स्टार्टअप को करीब 1.50 करोड़ रुपये की सहायता भी स्वीकृत और वितरित की गई।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने की। उन्होंने बताया कि जिन इकाइयों को यह प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, उन्होंने प्रदेश में 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है और 17 हजार से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहे हैं। यह सहायता मध्य प्रदेश एमएसएमई विकास नीति के तहत दी गई है, जिसका मकसद छोटे उद्योगों को पूंजी की कमी से उबारकर उन्हें विस्तार का मौका देना है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को भूमि आवंटन के आशय पत्र भी सौंपे। साथ ही मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के लाभार्थियों को ऋण राशि के चेक दिए गए। यह योजना उन युवाओं और नए उद्यमियों के लिए है, जिनके पास अपना कारोबार शुरू करने के लिए पर्याप्त पूंजी या बैंक गारंटी नहीं होती। सरकार की ओर से ऐसे उद्यमियों को रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे बिना बड़ी आर्थिक अड़चन के अपना काम शुरू कर सकें।
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए एक और बड़ी घोषणा की। उन्होंने एमएसएमई के लिए अलग औद्योगिक विकास कंपनी बनाने की बात कही, जो छोटे उद्योगों की जमीन और बुनियादी ढांचे की जरूरतों पर विशेष ध्यान देगी। साथ ही निजी निवेशकों को औद्योगिक पार्क विकसित करने पर 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक का अनुदान देने और अगले दो महीनों में सभी जिलों में औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी तय किया गया।
आंकड़ों के लिहाज से भी यह वितरण एक बड़ी कड़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में एमएसएमई इकाइयों को 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया था। 1 नवंबर के इस वितरण को मिलाकर वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 1,085 करोड़ रुपये का अनुदान वितरित हो चुका है। दोनों वित्त वर्षों को मिलाकर कुल 2,385 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि छोटे उद्योगों तक पहुंच चुकी है। प्रदेश में अब तक 2,081 स्टार्टअप को भारत सरकार से मान्यता मिल चुकी है और वित्त वर्ष 2026-27 में ही 1,302 नए स्टार्टअप पंजीकृत हुए हैं, जो राज्य में उद्यमिता की बढ़ती रफ्तार को दिखाता है।
