1 नवंबर से GST के नए नियम लागू: कारोबारियों को 7 दिन में 90% रिफंड, छोटे विक्रेताओं को बड़ी राहत
केंद्र सरकार ने 1 नवंबर 2026 से GST से जुड़े तीन बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं, जिनसे देश के कारोबारियों, छोटे विक्रेताओं और निर्यातकों को सीधी राहत मिलेगी। ये बदलाव वित्त अधिनियम 2026 के तहत अमल में लाए गए हैं और इनका मकसद टैक्स प्रक्रिया को तेज, सरल और कारोबारी हितैषी बनाना है।
पहला बड़ा बदलाव रिफंड की रफ्तार से जुड़ा है। इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत आने वाले पात्र मामलों में अब 90 प्रतिशत तक की रिफंड राशि प्रोविजनल रूप से महज सात दिनों के भीतर मिल जाएगी। पहले रिफंड मिलने में लंबा समय लगता था, जिससे कारोबारियों की पूंजी अटक जाती थी। अब तेजी से पैसा वापस मिलने से छोटे और मझोले कारोबारियों की नकदी की दिक्कत कम होगी और वे अपना कारोबार आसानी से चला सकेंगे।
दूसरा बदलाव बिक्री के बाद दी जाने वाली छूट से जुड़ा है। अब तय नियम और शर्तें पूरी होने पर बिक्री के बाद की किसी भी छूट के लिए GST क्रेडिट नोट जारी करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा। इससे कंपनियों और दुकानदारों को हिसाब-किताब में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी और छूट से जुड़े विवाद भी कम होंगे।
तीसरा बदलाव निर्यातकों के लिए है। एक्सपोर्ट पर रिफंड पाने के लिए पहले 1000 रुपये की न्यूनतम सीमा की बाध्यता थी, जिसे अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि छोटे निर्यातक भी अब बिना किसी न्यूनतम सीमा की अड़चन के अपना रिफंड दावा कर सकेंगे। इससे छोटे स्तर पर निर्यात करने वाले कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके साथ ही GST पंजीकरण के नियमों में भी राहत दी गई है, जिससे छोटे विक्रेताओं के लिए सिस्टम से जुड़ना आसान होगा। सरकार का मकसद साफ है कि टैक्स व्यवस्था कारोबारी पर बोझ न बने, बल्कि उसके काम में मददगार साबित हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से देश में व्यापार करना और आसान होगा। रिफंड जल्दी मिलने से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी बढ़ेगी, निर्यातकों का भरोसा मजबूत होगा और छोटे विक्रेता बिना झिझक औपचारिक व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे। कुल मिलाकर ये सुधार मोदी सरकार के कारोबारी सुगमता के एजेंडे को आगे बढ़ाने वाला कदम है।
