PM मोदी ने RSS शताब्दी समारोह में मोहन भागवत के भाषण की प्रशंसा की: ‘सेवा और राष्ट्र निर्माण की भावना प्रेरक’
नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के विजयादशमी उत्सव में सरसंघचालक मोहन भागवत के संबोधन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री ने भागवत के भाषण को ‘बेहद प्रेरणादायक’ बताया और कहा कि सेवा, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना से भरा यह संबोधन समाज को नई ऊर्जा देता है।
प्रधानमंत्री ने अपने हिंदी संदेश में कहा कि RSS ने अपनी स्थापना के 100 गौरवशाली वर्ष पूरे किए हैं, जिनमें असंख्य स्वयंसेवकों ने कर्तव्य भाव और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ सेवा की है। उन्होंने भागवत के संबोधन में राष्ट्रीय प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता, समाज के चरित्र निर्माण और ‘पंच परिवर्तन’ के संकल्प पर दिए गए जोर को खासतौर पर रेखांकित किया।
मोहन भागवत ने अपने विजयादशमी भाषण में राजनीतिक उथल-पुथल और शासन-परिवर्तन (रेजीम चेंज) वाले आंदोलनों को लेकर कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं करते — हाल में बांग्लादेश, नेपाल, फ्रांस और अल्बानिया में हुई उथल-पुथल इसका उदाहरण हैं। भागवत ने कहा कि कुछ ताकतें अपने स्वार्थ के लिए ऐसे साधनों से राजनीति बदलना चाहती हैं, जिनसे कोई वास्तविक समाधान नहीं निकलता।
गौरतलब है कि RSS की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन ही डॉ. के.बी. हेडगेवार ने नागपुर में की थी। शताब्दी वर्ष का यह विजयादशमी समारोह संगठन के इतिहास में विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कई मौकों पर RSS की सेवा परंपरा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान की सराहना कर चुके हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री का यह सार्वजनिक समर्थन RSS के सामाजिक कार्य और विचारधारा को लेकर केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नागपुर में आयोजित इस समारोह में देशभर से स्वयंसेवकों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
