दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार ने राजधानी के झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा करते हुए ‘दिल्ली झुग्गी-झोपड़ी पुनर्स्थापन और पुनर्वास नीति, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। यह नीति 4 नवंबर 2026 को दिल्ली गजट में प्रकाशित हुई है और इसके तहत राजधानी की करीब 675 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 4 से 5 लाख परिवारों, यानी लगभग 20 लाख लोगों को पक्का मकान मिलने का रास्ता खुल गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ झुग्गियों को हटाना नहीं है, बल्कि पात्र परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक स्थायी घर देना है। यह नीति सरकार की ‘जहां झुग्गी, वहां मकान’ योजना को नई गति देगी।
नीति के तहत पात्र परिवारों को एक बेडरूम, हॉल और किचन वाला फ्लैट मिलेगा, जिसका न्यूनतम कारपेट एरिया 25 वर्ग मीटर होगा। फ्लैट में एक बेडरूम के साथ लिविंग रूम, किचन, बाथरूम, टॉयलेट और बालकनी की सुविधा होगी। फ्लैट पाने के लिए पात्र परिवार को कुल 2 लाख रुपये का योगदान देना होगा — इसमें वैकल्पिक आवास के लिए 1.5 लाख रुपये और पहले पांच वर्षों के कॉमन एरिया के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये शामिल हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य की अधिसूचनाओं से इन राशियों में बदलाव किया जा सकता है। आवंटित फ्लैट पर 10 साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा, यानी इस दौरान फ्लैट को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
पात्रता की सबसे बड़ी शर्त कट-ऑफ तारीख है। नीति का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जिनकी झुग्गी 1 जनवरी 2025 से पहले संबंधित बस्ती में मौजूद थी। आवेदक का भारतीय नागरिक होना और उम्र कम से कम 18 साल होना जरूरी है। आवेदक का नाम कट-ऑफ तारीख से पहले जारी वोटर लिस्ट और आधिकारिक सर्वेक्षण वाले वर्ष की वोटर लिस्ट में दर्ज होना अनिवार्य है। पात्रता साबित करने के लिए निर्धारित 10 दस्तावेजों में से कम से कम एक देना होगा, जो 1 जनवरी 2025 से पहले जारी हुआ हो और उसी पते का प्रमाण हो — इनमें राशन कार्ड, बिजली बिल, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और बैंक या पोस्ट ऑफिस की पासबुक शामिल हैं। जिन परिवारों के पास देश में कहीं भी अपना पक्का मकान है, वे योजना से बाहर रहेंगे। सरकारी सेवा में कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी इसके पात्र नहीं होंगे।
नीति में यह भी तय किया गया है कि 1 जनवरी 2025 से पहले की बस्तियों को बिना वैकल्पिक आवास दिए हटाया नहीं जाएगा और जहां संभव होगा, वहीं पर पुनर्वास को प्राथमिकता दी जाएगी। दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) अपने-अपने क्षेत्राधिकार वाली भूमि पर इस नीति को लागू करेंगे। आवासों का आवंटन कंप्यूटरीकृत ड्रॉ के माध्यम से होगा और शिकायत निवारण व अपील की व्यवस्था भी बनाई जाएगी। पहले पांच वर्षों तक कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं और सुरक्षा का रखरखाव सरकार करेगी, उसके बाद यह जिम्मेदारी लाभार्थी संघों को सौंपी जाएगी। दिव्यांगजनों वाले परिवारों, अलग-अलग मंजिलों पर रहने वाले अलग परिवारों और अस्थायी आवास के लिए भी नीति में विशेष प्रावधान रखे गए हैं।
यह नीति दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड अधिनियम, 2010 के तहत जारी पहले के पुनर्वास दिशानिर्देशों और आदेशों की जगह लेगी। इससे पहले 23 जून 2026 को DUSIB की बैठक में कट-ऑफ तारीख 1 जनवरी 2015 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 करने का फैसला हुआ था, और अब गजट अधिसूचना से उसे कानूनी रूप मिल गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस नीति से झुग्गी बस्तियों का नियोजित पुनर्विकास होगा, समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी और भूमि का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q: दिल्ली में झुग्गी वालों को 2 लाख में फ्लैट कैसे मिलेगा?
A: दिल्ली सरकार की झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास नीति 2026 के तहत पात्र परिवारों को 1.5 लाख रुपये आवास और 50 हजार रुपये रखरखाव के लिए देने पर 25 वर्ग मीटर का 1-BHK पक्का फ्लैट मिलेगा। आवंटन कंप्यूटरीकृत ड्रॉ से होगा।
Q: दिल्ली झुग्गी पुनर्वास नीति में कौन से परिवार पात्र होंगे?
A: जिनकी झुग्गी 1 जनवरी 2025 से पहले बस्ती में मौजूद थी, जो भारतीय नागरिक हैं, उम्र 18 साल से अधिक है, नाम कट-ऑफ से पहले की वोटर लिस्ट में है और जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है।
Q: दिल्ली में मिलने वाला फ्लैट कितना बड़ा होगा और कितने पैसे देने होंगे?
A: फ्लैट का न्यूनतम कारपेट एरिया 25 वर्ग मीटर होगा, जिसमें एक बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, बाथरूम, टॉयलेट और बालकनी होगी। कुल 2 लाख रुपये देने होंगे — 1.5 लाख आवास और 50 हजार पांच साल के रखरखाव के लिए।
Q: क्या दिल्ली पुनर्वास नीति वाला फ्लैट बेचा जा सकता है?
A: नहीं। आवंटित फ्लैट पर 10 साल का लॉक-इन पीरियड रहेगा। इस दौरान फ्लैट को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
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