सोमवार, 9 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क  |  हिन्दी English
सरकारी योजनाएँ

हरियाणा भूतपूर्व सैनिक 60 वर्ष सहायता 2026: ₹600 महीना, विधवा को भी ₹600, पात्रता व आवेदन

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: हरियाणा भूतपूर्व सैनिक 60 वर्ष सहायता 2026: ₹600 महीना, विधवा को भी ₹600, पात्रता व आवेदन
  • तारीख़: 9 नवम्बर 2026, 12:22 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish Sharma
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

हरियाणा में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के भूतपूर्व सैनिक, जिन्हें किसी भी तरह की पेंशन नहीं मिलती, राज्य सरकार की एक पुरानी लेकिन आज भी लागू योजना के तहत हर महीने ₹600 की आर्थिक सहायता पा सकते हैं। यही सहायता उन सैनिकों की विधवाओं को भी मिलती है, जिनके पति को कोई पारिवारिक पेंशन नहीं मिल रही। यह योजना हरियाणा के सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग (राज्य सैनिक बोर्ड) की है, और इसका पैसा सीधे राज्य सरकार के बजट से दिया जाता है।

लेकिन इस योजना को समझने से पहले एक बात साफ कर लें — ₹600 महीना की दर साल 2006 की नीति में लिखी है, और विभाग की वेबसाइट पर आज भी वही नीति लगी हुई है। इसके बाद इस दर में कोई बढ़ोतरी हुई हो, इसका कोई आधिकारिक आदेश हमें नहीं मिला। इसलिए इस गाइड में ₹600 को नीति में लिखी दर के रूप में बताया गया है, और आवेदन करने से पहले अपने जिला सैनिक बोर्ड से मौजूदा दर ज़रूर पूछने को कहा गया है। साथ ही, यह रकम केंद्र सरकार की ₹8,000 वाली पेन्यूरी ग्रांट या हरियाणा की ₹3,200 वाली वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना से बिल्कुल अलग है — तीनों को एक समझने की गलती न करें।

योजना एक नज़र में

बिंदु विवरण
योजना का नाम Financial Assistance to Ex-Servicemen of and above the Age of 60 Years and their Widows (60 वर्ष व उससे अधिक आयु के भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को वित्तीय सहायता)
विभाग हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग (राज्य सैनिक बोर्ड), पंचकूला
सहायता (भूतपूर्व सैनिक, 60+) ₹600 प्रति माह (1 दिसंबर 2005 से लागू दर)
सहायता (विधवा) ₹600 प्रति माह; द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक की विधवा को ₹800 प्रति माह
किसे मिलेगी 60 वर्ष या अधिक के वे भूतपूर्व सैनिक जिन्हें कोई पेंशन नहीं मिलती, और बिना पारिवारिक पेंशन वाली उनकी विधवाएँ
निवास केवल हरियाणा के मूल निवासी (अधिवास प्रमाण पत्र ज़रूरी)
आवेदन अपने जिले के जिला सैनिक बोर्ड / जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय से (ऑफलाइन); मंज़ूरी राज्य सैनिक बोर्ड, पंचकूला से
अंतिम तारीख कोई नहीं — साल भर आवेदन किया जा सकता है

कितनी सहायता मिलेगी?

यह योजना मासिक सहायता देती है, एकमुश्त रकम नहीं। दरें अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग हैं, और सबकी तारीखें भी अलग-अलग हैं — इसलिए नीचे दी गई तालिका को ध्यान से देखें।

श्रेणी सहायता लागू तारीख आधार आदेश
भूतपूर्व सैनिक, 60 वर्ष व अधिक ₹600 प्रति माह 1 दिसंबर 2005 पत्र संख्या 34/5/90-3D-III, दिनांक 7 अप्रैल 2006
भूतपूर्व सैनिक की विधवा (31 अगस्त 1945 के बाद भर्ती) ₹600 प्रति माह 1 नवंबर 2006 पत्र संख्या 34/5/90-3D-III, दिनांक 31 अक्टूबर 2006
द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक की विधवा (31 अगस्त 1945 तक भर्ती) ₹800 प्रति माह 1 नवंबर 2006 पत्र संख्या 34/5/90-3D-III, दिनांक 31 अक्टूबर 2006
द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक (31 अगस्त 1945 से पहले भर्ती) ₹1,000 प्रति माह, फिर ₹4,500 प्रति माह (सितंबर 2015 से) 1 अप्रैल 2007; बढ़ोतरी सितंबर 2015 पत्र संख्या 23/1/2005-3D-III, दिनांक 24 मई 2007; वित्त विभाग की मंज़ूरी, सितंबर 2015

सहायता मंज़ूरी के अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होती है। मंज़ूरी से पहले के समय का कोई बकाया (एरियर) नहीं मिलता — सिवाय उस एक बार के बकाये के, जो 2005–2006 में दर बढ़ने पर तब के जीवित लाभार्थियों को जीवित होने के सत्यापन पर दिया गया था। हर साल अप्रैल के महीने में जीवित होने का प्रमाण देना ज़रूरी है — सर्पंच, नंबरदार, पटवारी, कानूनगो या तहसीलदार से सत्यापित प्रमाण पत्र, जिस पर किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर हों। जो लाभार्थी अप्रैल में यह प्रमाण नहीं देता, उसकी सहायता तुरंत रोक दी जाती है।

एक और बात — जो भूतपूर्व सैनिक पहले से इस योजना के लाभार्थी हैं, उन्हें बढ़ी हुई दर अपने आप मिलती रही है; उन्हें दोबारा आवेदन करने की ज़रूरत नहीं है।

सबसे बड़ा भ्रम — ₹600, ₹8,000 और ₹3,200

इस योजना के बारे में इंटरनेट पर खोजने पर तीन अलग-अलग रकमें सामने आती हैं, और तीनों अलग-अलग योजनाओं की हैं। इन्हें एक समझना सबसे बड़ी गलती है।

  • ₹600 महीना — यह योजना (हरियाणा राज्य की वित्तीय सहायता, सैनिक कल्याण विभाग): 60+ भूतपूर्व सैनिक और विधवा; कोई पेंशन नहीं मिलनी चाहिए।
  • ₹8,000 महीना — केंद्रीय पेन्यूरी ग्रांट (केंद्रीय सैनिक बोर्ड, रक्षा मंत्रालय): 65+ बिना पेंशन वाले भूतपूर्व सैनिक व विधवाएँ; 1 नवंबर 2025 से ₹4,000 से बढ़कर ₹8,000।
  • ₹3,200 महीना — वृद्धावस्था सम्मान भत्ता (सामाजिक न्याय विभाग, हरियाणा): 60+ हरियाणा निवासी, सालाना आय ₹3 लाख तक; भूतपूर्व सैनिक भी पात्र हो सकते हैं — लेकिन दोनों एक साथ नहीं।

सबसे ज़रूरी चेतावनी: इस योजना की ₹600 वाली दर साल 2006 के आदेश में लिखी है। विभाग की वेबसाइट पर आज भी वही आदेश नीति के रूप में लगा है, और 2006 के बाद इस दर में बढ़ोतरी का कोई आदेश हमें किसी आधिकारिक स्रोत पर नहीं मिला। लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों की दर ज़रूर बढ़ी थी — ₹1,000 से ₹4,500 (सितंबर 2015)। इसलिए यह मुमकिन है कि 60+ वाली दर भी बदली हो और उसका आदेश ऑनलाइन न हो। आवेदन करने से पहले अपने जिला सैनिक बोर्ड से मौजूदा दर लिखित में पूछ लें। अगर दर ₹600 से ज़्यादा निकली, तो इस गाइड की जानकारी पुरानी समझें, गलत नहीं — दर वही होगी जो बोर्ड बताएगा।

दूसरी चेतावनी — दोनों में से एक ही चुननी होगी। इस योजना के नियम कहते हैं कि अगर लाभार्थी मंज़ूरी के बाद वृद्धावस्था पेंशन या किसी भी सरकारी स्रोत से कोई और वित्तीय सहायता लेता पाया गया, तो उसे राज्य व जिला सैनिक बोर्ड की सभी कल्याण योजनाओं से हमेशा के लिए बाहर कर दिया जाएगा। इसलिए ₹600 वाली इस सहायता और ₹3,200 वाले वृद्धावस्था सम्मान भत्ते में से एक ही ले सकते हैं — दोनों एक साथ नहीं।

कौन पात्र है?

भूतपूर्व सैनिक के लिए पात्रता की शर्तें 7 अप्रैल 2006 के आदेश के अनुबंध ‘क’ में लिखी हैं। नीचे दी गई हर शर्त पूरी होनी चाहिए — एक भी शर्त छूटी तो मामला राज्य सैनिक बोर्ड से लौट आएगा।

शर्त विवरण
उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक; ऊपर की कोई सीमा नहीं
पेंशन नहीं भारत सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग, या केंद्र/राज्य सरकार के नियंत्रण वाले किसी निकाय से किसी तरह की पेंशन या भरण-पोषण भत्ता नहीं मिलता हो; मंज़ूरी के बाद भी दूसरी सरकारी सहायता लेते पाए गए तो सभी सैनिक कल्याण योजनाओं से स्थायी रूप से बाहर
निवास हरियाणा का मूल निवासी; सक्षम अधिकारी का अधिवास प्रमाण पत्र + राशन कार्ड की सत्यापित प्रति
आवेदन का रास्ता अपने क्षेत्र के जिला सैनिक बोर्ड के माध्यम से
डिस्चार्ज बुक संबंधित रिकॉर्ड कार्यालय की जारी मूल डिस्चार्ज बुक जाँच के लिए देनी होगी (विचार के बाद जिला सैनिक बोर्ड से वापस मिलेगी)
जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रमाण पत्र हरियाणा के सामाजिक न्याय विभाग से कोई वित्तीय सहायता/पेंशन/विधवा पेंशन नहीं मिल रही — इसका प्रमाण पत्र

ध्यान दें — इस योजना में आय की कोई सीमा नहीं लिखी है। शर्त सिर्फ यह है कि कोई पेंशन या सरकारी भत्ता नहीं मिलता हो। वृद्धावस्था सम्मान भत्ते की तरह ₹3 लाख की आय-सीमा यहाँ लागू नहीं होती। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अमीर व्यक्ति भी ले सकता है — पेंशन न मिलने की शर्त ही यहाँ असली कसौटी है, क्योंकि ज़्यादातर भूतपूर्व सैनिकों को सेवा पेंशन मिलती है और वे इसी वजह से बाहर हो जाते हैं।

सेवा की अवधि की भी कोई एक न्यूनतम सीमा नहीं लिखी है — यह इस बात पर निर्भर करती है कि सैनिक कब सेवा से मुक्त हुआ था (विवरण “भूतपूर्व सैनिक की परिभाषा” वाले भाग में है)।

विधवा के लिए पात्रता

भूतपूर्व सैनिक की विधवा के लिए अलग आदेश है — पत्र संख्या 34/5/90-3D-III, दिनांक 31 अक्टूबर 2006। विधवा के लिए उम्र की कोई शर्त नहीं है — वह किसी भी उम्र की हो सकती है; 60 वर्ष की शर्त सिर्फ भूतपूर्व सैनिक पर लागू होती है, उसकी विधवा पर नहीं। विधवा को ये शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • वह किसी भूतपूर्व सैनिक की विधवा हो — पति की भर्ती 31 अगस्त 1945 के बाद हुई हो तो ₹600 महीना, 31 अगस्त 1945 तक हुई हो (द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक) तो ₹800 महीना।
  • उसे भारत सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग, या केंद्र/राज्य सरकार के नियंत्रण वाले किसी निकाय से कोई पेंशन, पारिवारिक पेंशन या भरण-पोषण भत्ता नहीं मिलता हो — और किसी भी नागरिक या सरकारी स्रोत से कोई वेतन या पारिश्रमिक भी नहीं।
  • वह हरियाणा की मूल निवासी हो — सक्षम अधिकारी का अधिवास प्रमाण पत्र देना होगा।
  • पति की मूल डिस्चार्ज बुक जाँच के लिए देनी होगी (विचार के बाद वापस मिलेगी)।
  • जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रमाण पत्र — हरियाणा के सामाजिक न्याय विभाग से कोई वित्तीय सहायता या वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल रही।
  • हलफ़नामा (शपथ पत्र) देना होगा, जिसमें ये बातें लिखी हों: वह भूतपूर्व सैनिक की विधवा है और पति की मृत्यु की तारीख; वह गाँव/शहर की स्थायी निवासी है; उसे किसी भी राज्य या केंद्र सरकार से कोई वित्तीय सहायता, पेंशन, पारिवारिक पेंशन या भत्ता नहीं मिल रहा; उसके पति सेना से सेवानिवृत्ति के बाद कहीं नौकरी नहीं करते थे और वह खुद भी इस समय किसी नौकरी में नहीं है; उसने किसी और सरकारी विभाग में वित्तीय सहायता या पेंशन के लिए आवेदन नहीं किया है; पति की मृत्यु के बाद उसने दोबारा विवाह नहीं किया है; और उसे हरियाणा सरकार से कोई वृद्धावस्था पेंशन या वित्तीय सहायता नहीं मिल रही।
  • मंज़ूरी के बाद अगर वह वृद्धावस्था पेंशन या कोई और सरकारी सहायता लेती पाई गई, तो उसे भी सभी सैनिक कल्याण योजनाओं से स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाएगा।
  • हर साल अप्रैल में जीवित होने का प्रमाण देना होगा, वरना सहायता रोक दी जाएगी।
  • दोबारा विवाह वाली शर्त सबसे अहम है। हलफ़नामे में साफ लिखा है — “पति की मृत्यु के बाद मैंने दोबारा विवाह नहीं किया है।” अगर विधवा दोबारा विवाह कर लेती है, तो वह इस सहायता की पात्र नहीं रहती। जो विधवाएँ दोबारा विवाह करती हैं, उनके लिए केंद्रीय सैनिक बोर्ड की विवाह/पुनर्विवाह ग्रांट (₹1,00,000, 1 नवंबर 2025 से) अलग से है — वह इस योजना से अलग है।

    एक और बात — हलफ़नामे में यह भी लिखना होता है कि पति सेवानिवृत्ति के बाद कहीं नौकरी नहीं करते थे और विधवा खुद भी इस समय किसी नौकरी में नहीं है। यानी यह सहायता उन विधवाओं के लिए है जिनके पास आय का कोई नियमित साधन नहीं है।

    कौन पात्र नहीं है?

    नीचे दी गई किसी भी स्थिति में आवेदन खारिज हो जाएगा — आवेदन करने से पहले खुद को इस सूची से जाँच लें।

    • सेवा पेंशन या पारिवारिक पेंशन मिलती हो — इस योजना की पहली शर्त ही है कि कोई पेंशन नहीं मिलनी चाहिए।
    • वृद्धावस्था सम्मान भत्ता या विधवा पेंशन मिलती हो — सामाजिक न्याय विभाग से कोई भी पेंशन/सहायता लेने वाला बाहर; जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रमाण पत्र इसी की जाँच करता है।
    • रक्षा सुरक्षा कोर, जनरल रिज़र्व इंजीनियर बल, लोक सहायक सेना या अर्ध सैनिक बलों में सेवा — परिभाषा के अनुसार ये भूतपूर्व सैनिक नहीं माने जाते।
    • सेवा में सिर्फ भर्ती हुए (रिक्रूट) और बिना सेवा के निकले — रिक्रूट भूतपूर्व सैनिक नहीं माने जाते।
    • बर्खास्तगी, दुराचार या अक्षमता के कारण निकाले गए — परिभाषा से बाहर; सम्मानजनक सेवा-मुक्ति ज़रूरी।
    • अपनी मर्ज़ी से सेवा छोड़ी (1979–1987 के बीच) और 5 साल की सेवा पूरी नहीं — उस अवधि की परिभाषा में 5 साल की सेवा ज़रूरी है।
    • दोबारा विवाह कर चुकी विधवा — हलफ़नामे की शर्त टूटती है, पात्रता खत्म।
    • नौकरी में लगी विधवा, या पति सेवानिवृत्ति के बाद नौकरी में था — हलफ़नामे के अनुसार आय का नियमित साधन नहीं होना चाहिए।
    • हरियाणा का मूल निवासी न हो — केवल हरियाणा के मूल निवासी पात्र।
    • दूसरी सरकारी सहायता लेते पाए गए (मंज़ूरी के बाद भी) — सभी सैनिक कल्याण योजनाओं से स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाता है।

    एक खास बात — अर्ध सैनिक बलों (सीएपीएफ — बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, असम राइफल्स) के सेवानिवृत्त जवान इस योजना की परिभाषा में भूतपूर्व सैनिक नहीं आते। हरियाणा सरकार ने जुलाई 2026 में सीएपीएफ के सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए विभाग की वेबसाइट पर अलग ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया है, और उन्हें सशस्त्र बलों के भूतपूर्व सैनिकों के बराबर कई लाभ देने की बात कही है — लेकिन यह 2006 वाली योजना उसी पुरानी परिभाषा पर चलती है, जिसमें अर्ध सैनिक बल शामिल नहीं हैं। सीएपीएफ के जवान अपने लाभ के लिए विभाग की वेबसाइट या अपने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से पूछें, इस योजना में आवेदन न करें।

    “भूतपूर्व सैनिक” की परिभाषा

    इस योजना में भूतपूर्व सैनिक का मतलब वही है जो भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के ज्ञापन (27 मार्च 1987) में लिखा है। परिभाषा इस बात पर बदलती है कि सैनिक कब सेवा से मुक्त हुआ था — इसलिए अपनी सेवा-मुक्ति की तारीख के हिसाब से पंक्ति देखें।

    सेवा-मुक्ति की तारीख भूतपूर्व सैनिक कौन
    1 जुलाई 1968 से पहले सशस्त्र बलों में किसी भी पद पर सेवा की हो और बर्खास्तगी या दुराचार/अक्षमता के कारण निकाले जाने के अलावा किसी और तरह से मुक्त हुआ हो
    1 जुलाई 1968 से 1 जुलाई 1979 के बीच सत्यापन (अटेस्टेशन) के बाद लगातार कम से कम 6 महीने सेवा की हो, और बर्खास्तगी या दुराचार/अक्षमता के कारण निकाले जाने के अलावा किसी और तरह से मुक्त हुआ हो
    1 जुलाई 1979 से 1 जुलाई 1987 के बीच सत्यापन के बाद लगातार कम से कम 6 महीने सेवा; अपनी मर्ज़ी से छोड़ने पर कम से कम 5 साल की सेवा ज़रूरी; बर्खास्तगी या दुराचार/अक्षमता से निकाला गया न हो
    1 जुलाई 1987 के बाद थल सेना, नौसेना या वायु सेना में सेवा की हो और (क) पेंशन अर्जित करके सेवानिवृत्त हुआ हो, या (ख) सैन्य सेवा से जुड़े कारणों से चिकित्सा आधार पर मुक्त हुआ हो और चिकित्सा या अन्य दिव्यांगता पेंशन मिली हो, या (ग) स्थापना में कटौती के कारण मुक्त हुआ हो, या (घ) नियत अवधि पूरी करके मुक्त हुआ हो (अपनी मर्ज़ी से या बर्खास्तगी से नहीं) और उपदान (ग्रेच्युटी) मिला हो

    1 जुलाई 1987 के बाद वाली श्रेणी में प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) के ये लोग भी आते हैं — लगातार सेवा के पेंशनधारक, सैन्य सेवा से जुड़ी दिव्यांगता वाले व्यक्ति, और शौर्य पुरस्कार विजेता। सेना डाक सेवा के वे कर्मी भी, जो नियमित सेना से मुक्त हुए हों, इसमें आते हैं।

    एक नियम और — किसी व्यक्ति का भूतपूर्व सैनिक होना उसी परिभाषा से तय होगा जो उसकी सेवा-मुक्ति के समय लागू थी; बाद में परिभाषा बदलने से उसका दर्ज़ा नहीं बदलेगा।

    ज़रूरी दस्तावेज़

    नीति के साथ लगी जाँच-सूची में 12 मदें लिखी हैं, जो नीचे 11 पंक्तियों में दी गई हैं (देरी की रिपोर्ट आवेदन पत्र वाली पंक्ति में शामिल है)। आवेदन जिला सैनिक बोर्ड को इन्हीं के साथ देना होता है — कोई एक कागज़ छूटा तो मामला अटक जाएगा।

    क्रम दस्तावेज़ टिप्पणी
    1 अग्रेषण पत्र (फॉरवर्डिंग लेटर) और भूतपूर्व सैनिक की दो संयुक्त फोटो जिला सैनिक बोर्ड को संबोधित
    2 वित्तीय सहायता का आवेदन पत्र निर्धारित प्रारूप में; 60 वर्ष पूरे होने के 1 साल बाद आवेदन करने पर देरी की रिपोर्ट (देरी का कारण) भी देनी होगी
    3 अनुबंध-I नीति के साथ लगा प्रारूप
    4 कल्याण आयोजक (W.O.) की सत्यापन रिपोर्ट (अनुबंध-II) जिला सैनिक बोर्ड के कल्याण आयोजक से सत्यापन
    5 हलफ़नामा (शपथ पत्र) विधवा के लिए अनुबंध ‘ग’ वाला हलफ़नामा; भूतपूर्व सैनिक के लिए भी शपथ पत्र ज़रूरी
    6 अधिवास / निवास प्रमाण पत्र हरियाणा सरकार के सक्षम अधिकारी से जारी
    7 राशन कार्ड की सत्यापित प्रति अटेस्टेड प्रति
    8 जिला समाज कल्याण अधिकारी का ताज़ा अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) सामाजिक न्याय विभाग से कोई पेंशन/सहायता नहीं मिल रही — इसका ताज़ा प्रमाण पत्र
    9 भूतपूर्व सैनिक की सेवा का विवरण सेवा रिकॉर्ड के अनुसार
    10 मूल डिस्चार्ज बुक जाँच के लिए मूल प्रति; विचार के बाद जिला सैनिक बोर्ड से वापस मिलेगी
    11 गैर-रोज़गार प्रमाण पत्र किसी नौकरी या नियमित आय में नहीं होने का प्रमाण

    विधवा के मामले में पति की मृत्यु का प्रमाण (मृत्यु प्रमाण पत्र) भी देना होगा — हलफ़नामे में पति की मृत्यु की तारीख लिखनी होती है, इसलिए मृत्यु प्रमाण पत्र साथ रखें। बैंक खाते की जानकारी नीति में अलग से नहीं लिखी है, लेकिन सहायता सीधे खाते में जाने की व्यवस्था के लिए बैंक पासबुक की प्रति साथ ले जाना बेहतर रहेगा — यह सलाह है, नीति की शर्त नहीं।

    आवेदन कैसे करें?

    इस योजना का आवेदन ऑफलाइन है — नीति में आवेदन का रास्ता जिला सैनिक बोर्ड लिखा है, और इस योजना के लिए कोई ऑनलाइन पोर्टल या सरल (SARAL) सेवा का नाम किसी आधिकारिक स्रोत पर सत्यापित नहीं हुआ है। इसलिए नीचे दिए गए चरणों से आवेदन करें।

    चरण क्या करें
    1 अपने जिले के जिला सैनिक बोर्ड / जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय जाएँ (जिलेवार सूची विभाग की वेबसाइट sainikwelfareharyana.gov.in पर है)
    2 वित्तीय सहायता का आवेदन पत्र, अनुबंध-I और हलफ़नामे का प्रारूप लें; सभी दस्तावेज़ जुटाएँ — अधिवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड की सत्यापित प्रति, मूल डिस्चार्ज बुक, जिला समाज कल्याण अधिकारी का ताज़ा NOC, गैर-रोज़गार प्रमाण पत्र
    3 हलफ़नामा बनवाएँ — विधवा के लिए अनुबंध ‘ग’ वाला हलफ़नामा (दोबारा विवाह न करने और कोई पेंशन न मिलने की शपथ के साथ)
    4 आवेदन जिला सैनिक बोर्ड में जमा करें; कल्याण आयोजक (W.O.) मामले का सत्यापन करेगा और सत्यापन रिपोर्ट (अनुबंध-II) लगाएगा
    5 जिला सैनिक बोर्ड मामले की जाँच करके, सचिव की सिफारिश के साथ पूरा मामला राज्य सैनिक बोर्ड, पंचकूला को मंज़ूरी के लिए भेजेगा
    6 राज्य सैनिक बोर्ड मंज़ूरी देगा; सहायता मंज़ूरी के अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होगी

    ऑनलाइन आवेदन के बारे में साफ बात: हरियाणा सरकार ने जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त सीएपीएफ कर्मियों के लिए विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया है — लेकिन वह सुविधा सीएपीएफ के लिए है, इस योजना के लिए नहीं। इस योजना का आवेदन पत्र सरल पोर्टल (saralharyana.gov.in) पर होने का कोई सत्यापित नाम हमें नहीं मिला, इसलिए गाइड में कोई सरल सेवा का नाम नहीं लिखा गया है। अगर कोई वेबसाइट या एजेंट इस योजना के नाम पर ऑनलाइन आवेदन का दावा करे, तो पहले जिला सैनिक बोर्ड से पूछ लें। अंत्योदय सरल केंद्र या अटल सेवा केंद्र से फॉर्म भरने में मदद मिल सकती है, लेकिन आवेदन अंत में जिला सैनिक बोर्ड के माध्यम से ही जाएगा।

    शुल्क, समय-सीमा और स्टेटस चेक

    • शुल्क: नीति में आवेदन का कोई शुल्क नहीं लिखा है। फॉर्म, हलफ़नामा और सत्यापन के लिए कोई सरकारी फीस तय नहीं है — अगर कोई शुल्क माँगे, तो जिला सैनिक बोर्ड से लिखित में पूछें।
    • समय-सीमा: नीति में दावे के निपटान की कोई समय-सीमा नहीं लिखी है — सिर्फ यह लिखा है कि सहायता मंज़ूरी के अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होगी। इस योजना के लिए सेवा का अधिकार (RTS) के तहत कोई समय-सीमा भी किसी पहुँच वाले आधिकारिक स्रोत पर नहीं मिली है, इसलिए कोई दिन गिनकर नहीं लिखा गया है। मंज़ूरी में देरी हो तो अपने जिला सैनिक बोर्ड के सचिव से लिखित में पूछें।
    • स्टेटस चेक: ऑनलाइन स्टेटस देखने की कोई सत्यापित व्यवस्था नहीं मिली है — स्थिति अपने जिला सैनिक बोर्ड / जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय से पूछें। सरल पोर्टल पर आवेदन किया हो, तो सरल हेल्पलाइन 0172-3968400 पर या SARAL <Application ID> लिखकर 7738299899 पर SMS करके स्थिति पूछी जा सकती है (यह सरल की सामान्य सुविधा है, इस योजना की अलग व्यवस्था नहीं)।
    • हर साल अप्रैल में जीवित प्रमाण: सहायता चालू रखने के लिए हर साल अप्रैल में जीवित होने का प्रमाण देना ज़रूरी है — सर्पंच, नंबरदार, पटवारी, कानूनगो या तहसीलदार से सत्यापित प्रमाण पत्र, जिस पर किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर हों। यह प्रमाण न देने पर सहायता तुरंत रोक दी जाएगी।
    • भुगतान का तरीका: नीति में भुगतान का तरीका (बैंक खाते में सीधे हस्तांतरण या अन्य) अलग से नहीं लिखा है, इसलिए गाइड में कोई दावा नहीं किया गया है — जिला सैनिक बोर्ड से पूछकर बैंक खाते की जानकारी आवेदन के साथ दे दें।

    द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक और विधवाएँ — ₹4,500 वाली अलग व्यवस्था

    द्वितीय विश्व युद्ध (31 अगस्त 1945 से पहले भर्ती हुए) के सैनिकों और उनकी विधवाओं के लिए दरें अलग हैं — और यही वह जगह है जहाँ दरें बदली भी हैं। 24 मई 2007 के आदेश से इनकी सहायता ₹800 से बढ़ाकर ₹1,000 महीना की गई थी (1 अप्रैल 2007 से)। फिर सितंबर 2015 में वित्त विभाग की मंज़ूरी से यह रकम बढ़ाकर ₹4,500 महीना कर दी गई — यह बढ़ोतरी सैनिकों और उनकी विधवाओं, दोनों पर लागू हुई। इससे पहले मई 2014 में यह रकम ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,000 की गई थी।

    2015 की उसी घोषणा में यह भी कहा गया था कि द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों की मृत्यु के बाद भी उनकी पोतियों के विवाह के लिए ₹51,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

    ईमानदार चेतावनी: ₹4,500 वाली रकम सितंबर 2015 की घोषणा की है — 2026 में यह रकम यही है या और बढ़ी है, इसका कोई ताज़ा आधिकारिक स्रोत हमें नहीं मिला है। आवेदन करने से पहले जिला सैनिक बोर्ड से मौजूदा दर पूछ लें। और ध्यान दें — ₹4,500 सिर्फ द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिकों और उनकी विधवाओं के लिए है; 1945 के बाद भर्ती हुए सैनिकों की विधवाओं के लिए ₹600 वाली दर ही लागू है।

    अंतर समझें — यह योजना बनाम दूसरी योजनाएँ

    सैनिक कल्याण की योजनाएँ एक-दूसरे से मिलती-जुलती लगती हैं, लेकिन हर योजना की शर्तें, रकम और देने वाला विभाग अलग है। गलत योजना में आवेदन करने से समय बर्बाद होगा।

    योजना रकम किसके लिए इस योजना से अंतर
    यह योजना — 60+ भूतपूर्व सैनिक व विधवा (राज्य) ₹600 महीना 60+ बिना पेंशन वाले भूतपूर्व सैनिक; बिना पारिवारिक पेंशन वाली विधवा —
    दिव्यांग भूतपूर्व सैनिक सहायता (राज्य) ₹1,000 महीना (13 दिसंबर 2006 से) चिकित्सा आधार पर मुक्त दिव्यांग सैनिक, दिव्यांगता सेवा से जुड़ी न हो, कोई पेंशन न मिलती हो उम्र की शर्त नहीं; जो पहले से 60+ योजना पर है, वह नई मंज़ूरी तक उसी दर पर रहेगा
    द्वितीय विश्व युद्ध सैनिक व विधवा (राज्य) ₹4,500 महीना (सितंबर 2015 से) 31 अगस्त 1945 से पहले भर्ती सैनिक व उनकी विधवाएँ सिर्फ विश्व युद्ध के सैनिक; पोती के विवाह पर ₹51,000 भी (2015 की घोषणा)
    युद्ध विधवा सहायता (राज्य) रकम सत्यापित नहीं युद्ध/सैन्य कार्रवाई में शहीद सैनिक की विधवा मृत्यु युद्ध में हुई हो — यह योजना सामान्य मृत्यु वाली विधवा की है
    अतिरिक्त पेंशन — विधवा (बच्चे हों / न हों) व 100% दिव्यांग सैनिक (राज्य) रकम सत्यापित नहीं बच्चों वाली विधवा; बिना बच्चे वाली विधवा; 100% दिव्यांग सैनिक जिसके बच्चे हों तीन अलग योजनाएँ (myScheme क्रमांक 28, 62, 29); किसी की भी रकम आधिकारिक स्रोत से सत्यापित नहीं हुई — इस योजना की ₹600 वाली दर से न जोड़ें
    युद्ध में दिव्यांग सैनिक की बेटी का विवाह अनुदान (राज्य) रकम सत्यापित नहीं 50% से अधिक दिव्यांग युद्ध-सैनिक की बेटी का विवाह एकमुश्त विवाह अनुदान है, मासिक सहायता नहीं
    केंद्रीय पेन्यूरी ग्रांट (केंद्रीय सैनिक बोर्ड) ₹8,000 महीना (1 नवंबर 2025 से) 65+ बिना पेंशन वाले भूतपूर्व सैनिक व विधवाएँ, हवलदार या नीचे का रैंक केंद्र की योजना; उम्र 65+; केएसबी पोर्टल से आवेदन; राज्य की ₹600 वाली योजना से अलग
    केंद्रीय शिक्षा व विवाह ग्रांट (केंद्रीय सैनिक बोर्ड) शिक्षा ₹2,000 महीना प्रति बच्चा; विवाह ₹1,00,000 एकमुश्त (1 नवंबर 2025 से) दो बच्चों तक पढ़ाई; दो बेटियों तक विवाह; विधवा के पुनर्विवाह के लिए भी केंद्र की योजनाएँ; राज्य की ₹600 वाली मासिक सहायता से अलग
    ध्वज दिवस निधि (राज्य, 15 मई 2025 के दिशा-निर्देश) ₹1,000 महीना / ₹20,000 एकमुश्त 40% से अधिक दिव्यांग बच्चा; विधवा/तलाकशुदा बेटी (आय ₹1,20,000 से कम); सैनिक के अंतिम संस्कार पर विधवा को ₹20,000 निधि से मामला-दर-मामला सहायता; यह योजना नहीं
    वृद्धावस्था सम्मान भत्ता व विधवा पेंशन (राज्य) ₹3,200 महीना (वृद्धावस्था: 1 नवंबर 2025 से) 60+ हरियाणा निवासी (आय ₹3 लाख तक); विधवा व निराश्रित महिलाएँ सामाजिक न्याय विभाग; इस योजना के साथ दोनों में से कोई भी एक साथ नहीं मिल सकती

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

    1. 60 वर्ष से ऊपर के भूतपूर्व सैनिक को कितनी सहायता मिलेगी?

    ₹600 प्रति माह — विभाग की 7 अप्रैल 2006 की नीति के अनुसार, 1 दिसंबर 2005 से लागू दर। शर्त यह है कि उसे किसी भी तरह की पेंशन या भरण-पोषण भत्ता नहीं मिलता हो, और वह हरियाणा का मूल निवासी हो। ध्यान दें — यह दर 2006 की है; आवेदन से पहले जिला सैनिक बोर्ड से मौजूदा दर ज़रूर पूछ लें।

    2. क्या विधवा को भी ₹600 महीना मिलेगा, और उसकी उम्र की कोई शर्त है?

    हाँ, ₹600 महीना — अगर उसके पति की भर्ती 31 अगस्त 1945 के बाद हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के सैनिक की विधवा को ₹800 महीना मिलता है। विधवा के लिए उम्र की कोई शर्त नहीं है — 60 वर्ष की शर्त सिर्फ भूतपूर्व सैनिक पर लागू होती है। लेकिन विधवा को कोई पेंशन, पारिवारिक पेंशन या भत्ता नहीं मिलना चाहिए, उसने दोबारा विवाह नहीं किया होना चाहिए, और वह किसी नौकरी में नहीं होनी चाहिए।

    3. क्या ₹600 के साथ ₹8,000 वाली पेन्यूरी ग्रांट भी मिल सकती है?

    नहीं — लगभग तय है कि नहीं। ₹8,000 वाली पेन्यूरी ग्रांट केंद्र सरकार (केंद्रीय सैनिक बोर्ड) की है, 65+ बिना पेंशन वाले सैनिकों व विधवाओं के लिए, 1 नवंबर 2025 से। राज्य की इस योजना की शर्त है कि लाभार्थी को भारत सरकार के किसी विभाग से भी कोई पेंशन या भत्ता नहीं मिलना चाहिए — इसलिए केंद्रीय ग्रांट लेने वाला राज्य की इस सहायता का पात्र नहीं रहेगा। दोनों में से एक ही चुनें, और जिला सैनिक बोर्ड से लिखित में पूछकर फैसला करें।

    4. क्या वृद्धावस्था सम्मान भत्ता (₹3,200) के साथ यह सहायता भी मिलेगी?

    नहीं। नीति साफ कहती है — मंज़ूरी के बाद अगर लाभार्थी वृद्धावस्था पेंशन या किसी और सरकारी स्रोत से कोई सहायता लेता पाया गया, तो उसे सभी सैनिक कल्याण योजनाओं से स्थायी रूप से बाहर कर दिया जाएगा। आवेदन के समय जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रमाण पत्र भी इसी बात का माँगा जाता है कि सामाजिक न्याय विभाग से कोई पेंशन नहीं मिल रही।

    5. क्या सीएपीएफ (बीएसएफ, सीआरपीएफ) के सेवानिवृत्त जवान आवेदन कर सकते हैं?

    इस योजना में नहीं। नीति की परिभाषा के अनुसार रक्षा सुरक्षा कोर, जनरल रिज़र्व इंजीनियर बल, लोक सहायक सेना और अर्ध सैनिक बलों के कर्मी भूतपूर्व सैनिक नहीं माने जाते। हरियाणा सरकार ने जुलाई 2026 में सीएपीएफ के सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए विभाग की वेबसाइट पर अलग ऑनलाइन पंजीकरण शुरू किया है — सीएपीएफ के जवान अपने लाभ के लिए वहीं से जानकारी लें या अपने जिला सैनिक कल्याण कार्यालय से पूछें।

    6. आवेदन ऑनलाइन होगा या ऑफलाइन?

    ऑफलाइन — अपने जिले के जिला सैनिक बोर्ड / जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय से। नीति में आवेदन का यही रास्ता लिखा है। इस योजना के लिए सरल पोर्टल पर कोई सेवा का नाम सत्यापित नहीं हुआ है, इसलिए ऑनलाइन आवेदन का दावा करने वाली किसी भी वेबसाइट पर भरोसा करने से पहले जिला सैनिक बोर्ड से पूछ लें।

    7. आवेदन की कोई अंतिम तारीख है?

    नहीं। इस योजना की कोई अंतिम तारीख नहीं है — साल भर आवेदन किया जा सकता है। लेकिन एक बात ध्यान रखें — 60 वर्ष पूरे होने के 1 साल बाद आवेदन करने पर देरी की रिपोर्ट (देरी का कारण) भी देनी होगी। और हर साल अप्रैल में जीवित होने का प्रमाण देना ज़रूरी है, वरना सहायता रोक दी जाएगी।

    8. विधवा ने दोबारा विवाह कर लिया हो तो क्या होगा?

    वह इस सहायता की पात्र नहीं रहेगी। हलफ़नामे में साफ शपथ लेनी होती है — “पति की मृत्यु के बाद मैंने दोबारा विवाह नहीं किया है।” दोबारा विवाह करने वाली विधवाओं के लिए केंद्रीय सैनिक बोर्ड की विवाह/पुनर्विवाह ग्रांट (₹1,00,000 एकमुश्त, 1 नवंबर 2025 से) अलग से है।

    9. सहायता मंज़ूर होने में कितना समय लगेगा?

    नीति में दावे के निपटान की कोई समय-सीमा नहीं लिखी है, और इस योजना के लिए सेवा का अधिकार (RTS) के तहत कोई समय-सीमा भी किसी पहुँच वाले आधिकारिक स्रोत पर नहीं मिली है — इसलिए कोई दिन गिनकर नहीं बताया जा सकता। इतना तय है कि सहायता मंज़ूरी के अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होगी, और मंज़ूरी से पहले का कोई बकाया नहीं मिलेगा। देरी हो तो अपने जिला सैनिक बोर्ड के सचिव से लिखित में पूछें।

    10. क्या दिव्यांग भूतपूर्व सैनिक को ज़्यादा सहायता मिलेगी?

    हाँ — अलग योजना से। दिव्यांग भूतपूर्व सैनिकों के लिए अलग योजना है — ₹1,000 महीना (13 दिसंबर 2006 से), उन सैनिकों के लिए जो चिकित्सा आधार पर मुक्त हुए हों, जिनकी दिव्यांगता सेवा से जुड़ी न हो, और जिन्हें कोई पेंशन न मिलती हो। जो सैनिक पहले से 60+ वाली योजना पर है, वह नई मंज़ूरी मिलने तक उसी दर पर रहेगा, फिर दिव्यांग वाली योजना की दर पर आ जाएगा। उम्र की शर्त उसमें नहीं है।

    आधिकारिक लिंक और संपर्क

    नीचे दिए गए लिंक आधिकारिक स्रोतों के हैं। myScheme का विवरण पृष्ठ सत्यापित नहीं हुआ है, इसलिए myScheme को सूची के क्रमांक से बताया गया है, लिंक से नहीं।

    अस्वीकरण

    यह गाइड 8 नवंबर 2026 को उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों — हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग की वेबसाइट पर लगी नीति (पत्र संख्या 34/5/90-3D-III, 7 अप्रैल 2006 व 31 अक्टूबर 2006), द्वितीय विश्व युद्ध सैनिक नीति (24 मई 2007), ध्वज दिवस निधि दिशा-निर्देश (15 मई 2025) और सितंबर 2015 की वित्त विभाग की मंज़ूरी की खबर — से तैयार की गई है। सबसे अहम बात: ₹600 महीना की दर साल 2006 के आदेश में लिखी है; इसके बाद इस दर में बढ़ोतरी का कोई आदेश हमें किसी आधिकारिक स्रोत पर नहीं मिला है। सहायता राशि, पात्रता और प्रक्रिया बदल सकती है — आवेदन करने से पहले अपने जिला सैनिक बोर्ड / जिला सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण कार्यालय, या विभाग (0172-5210277, [email protected]) से ताज़ा जानकारी ज़रूर ले लें। जहाँ स्रोतों में अंतर है या जानकारी सत्यापित नहीं हुई है (खासकर मौजूदा दर, अतिरिक्त पेंशन वाली योजनाओं की रकम, ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था, RTS समय-सीमा और भुगतान का तरीका), वहाँ गाइड में साफ-साफ कहा गया है। विकसित हरियाणा किसी भी सरकारी विभाग का आधिकारिक पोर्टल नहीं है।

    Google पर Viksit Haryana को अपनी पसंदीदा खबर स्रोत बनाएँ — हमारी खबरें आपको सबसे पहले दिखेंगी।

    प्रातिक्रिया दे

    आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *