घर के अंदर होने वाली हिंसा — मारपीट, गाली-गलौज, दहेज के लिए ताने, पैसे पर पूरी रोक, या घर से निकालने की धमकी — यह कोई “घर का निजी मामला” नहीं है। भारत का कानून इसे अपराध मानता है और पीड़ित महिला को सीधे मजिस्ट्रेट के पास जाकर सुरक्षा माँगने का अधिकार देता है। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDVA) के तहत हरियाणा की कोई भी महिला — बिना FIR कराए — संरक्षण आदेश, घर में रहने का अधिकार, आर्थिक सहायता, बच्चों की कस्टडी और मुआवज़ा माँग सकती है। myScheme पर दर्ज “Protection Against Domestic Violence” योजना यही कानून है। इस गाइड में पूरी जानकारी है — कौन शिकायत कर सकता है, कौन-सी 5 राहतें मिलती हैं, संरक्षण अधिकारी से कैसे मिलें, हरियाणा के सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला थानों की सूची, और मुफ्त कानूनी सहायता कैसे लें।
अगर आप इस समय खतरे में हैं, तो पहले मदद लें — गाइड बाद में पढ़ें: तुरंत 112 (आपातकालीन सेवा) या 181 (महिला हेल्पलाइन, 24×7, निःशुल्क) पर कॉल करें। नज़दीकी महिला थाना, सखी वन स्टॉप सेंटर या किसी भी पुलिस थाने में जाकर मदद माँग सकती हैं। मदद माँगना आपकी गलती नहीं है — और आपकी पहचान गोपनीय रखी जाती है।
योजना एक नज़र में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना/कानून का नाम | घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 — PWDVA) |
| लागू | 26 अक्टूबर 2006 से पूरे भारत में, हरियाणा सहित |
| किस्म | केंद्रीय कानून — यह नकद लाभ की योजना नहीं, कानूनी सुरक्षा का अधिकार है |
| विभाग | महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार; हरियाणा में महिला एवं बाल विकास विभाग |
| लाभ | संरक्षण आदेश, आवास आदेश, आर्थिक सहायता, बच्चों की कस्टडी, मुआवज़ा — एक ही आवेदन में |
| कौन आवेदन कर सकता है | घरेलू संबंध में रहने वाली कोई भी महिला (विवाहित, या विवाह जैसे संबंध में); उसके लिए संरक्षण अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति भी आवेदन कर सकता है |
| कहाँ आवेदन करें | न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (धारा 12) — सीधे, या संरक्षण अधिकारी के माध्यम से |
| आवेदन शुल्क | कोई शुल्क नहीं — आवेदन निःशुल्क; मुफ्त कानूनी सहायता भी मिलती है |
| समय-सीमा | पहली सुनवाई आमतौर पर 3 दिन में; निपटान का लक्ष्य पहली सुनवाई से 60 दिन |
| अंतिम तिथि | कोई तय अंतिम तिथि नहीं — कानून में कोई समय-सीमा तय नहीं है |
| तुरंत मदद | महिला हेल्पलाइन 181; आपातकालीन 112; सखी वन स्टॉप सेंटर; महिला थाना |
| संपर्क | महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा — बेज़ 15-20, सेक्टर 4, पंचकूला — 0172-2560349 |
तुरंत मदद चाहिए तो — पहले ये करें
अगर हिंसा अभी हो रही है या जान का खतरा है, तो कानूनी प्रक्रिया का इंतज़ार न करें — पहले सुरक्षित जगह पर जाएँ और मदद बुलाएँ:
| मदद | नंबर / जगह | कब |
|---|---|---|
| आपातकालीन सेवा (ERSS) | 112 | तुरंत खतरा हो तो — पुलिस, एंबुलेंस, आग — एक ही नंबर |
| महिला हेल्पलाइन, हरियाणा | 181 (24×7, निःशुल्क); लैंडलाइन 0172-2587658 | किसी भी समय — शिकायत, सलाह, वन स्टॉप सेंटर तक पहुँच |
| पुलिस | 100 | तुरंत पुलिस मदद चाहिए तो |
| महिला थाना (Mahila Thana) | अपने जिले का महिला थाना (नीचे सूची देखें) | शिकायत दर्ज कराने या FIR के लिए |
| सखी वन स्टॉप सेंटर | हर जिले में एक (नीचे पूरी सूची देखें) | पुलिस, मेडिकल, कानूनी मदद, अस्थायी आश्रय — एक ही छत के नीचे |
| राष्ट्रीय महिला आयोग हेल्पलाइन | 7827 170 170 (24×7) | राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत के लिए |
| बाल हेल्पलाइन | 1098 | अगर बच्चे भी खतरे में हों तो |
याद रखें: मदद माँगने के लिए FIR कराना ज़रूरी नहीं है। PWDVA के तहत आप सीधे मजिस्ट्रेट से सुरक्षा माँग सकती हैं — पुलिस में शिकायत करना एक अलग रास्ता है, और दोनों रास्ते एक साथ भी चल सकते हैं।
घरेलू हिंसा क्या है?
अधिनियम की धारा 3 के तहत घरेलू हिंसा का मतलब सिर्फ मारपीट नहीं है — इसकी परिभाषा जानबूझकर बहुत व्यापक रखी गई है:
| हिंसा का प्रकार | क्या आता है |
|---|---|
| शारीरिक हिंसा | मारपीट, धक्का देना, जलाना, या कोई भी ऐसा काम जिससे शरीर को चोट पहुँचे या जान को खतरा हो |
| यौन हिंसा | बिना सहमति के यौन संबंध या यौन प्रकृति का कोई भी अपमानजनक व्यवहार |
| मौखिक और भावनात्मक हिंसा | गाली-गलौज, अपमान, ताने, धमकियाँ, चरित्र पर लांछन, या ऐसा व्यवहार जिससे मानसिक पीड़ा हो |
| आर्थिक हिंसा | पैसा या ज़रूरत की चीज़ें न देना, कमाई छीन लेना, नौकरी करने से रोकना, घर/संपत्ति से बेदखल करना, दहेज की माँग |
धमकी देना भी हिंसा है — अगर कोई आपको डराकर कुछ करने या न करने पर मजबूर करता है, तो वह भी इस कानून के दायरे में आता है। दहेज के लिए प्रताड़ना भी घरेलू हिंसा है।
कौन शिकायत कर सकता है?
- कोई भी महिला जो “घरेलू संबंध” में है — यानी पति, सास-ससुर, देवर-जेठ, या परिवार के किसी सदस्य के साथ एक ही घर में रह रही हो (विवाह, खून के रिश्ते, गोद लेने, या विवाह जैसे संबंध के आधार पर)।
- विवाह जैसे संबंध (live-in relationship) में रहने वाली महिला भी इस कानून के तहत सुरक्षा माँग सकती है।
- विधवा, तलाकशुदा या अलग रह रही महिला भी — अगर हिंसा घरेलू संबंध के दौरान हुई हो।
- आवेदन महिला खुद कर सकती है — या संरक्षण अधिकारी उसकी ओर से, या उसकी भलाई के लिए कोई अन्य व्यक्ति भी आवेदन कर सकता है।
- जिसके खिलाफ शिकायत हो (प्रतिवादी): परिवार का वयस्क पुरुष सदस्य। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में (हीरालाल पी. हरसोरा बनाम कुसुम नर्रोत्तमदास हरसोरा) “वयस्क पुरुष” शब्द को हटाकर यह साफ किया कि परिवार की महिला सदस्य भी प्रतिवादी बनाई जा सकती है।
- कोई आय सीमा नहीं, कोई उम्र सीमा नहीं — यह कानून हर महिला के लिए है।
दो रास्ते — सिविल और आपराधिक
घरेलू हिंसा से निपटने के दो अलग-अलग रास्ते हैं — दोनों एक साथ भी चल सकते हैं। इन्हें मिलाएँ नहीं:
| बिंदु | सिविल रास्ता — PWDVA 2005 | आपराधिक रास्ता — BNS धारा 85 |
|---|---|---|
| कानून | घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 | भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 (पहले IPC की धारा 498A) |
| क्या होता है | मजिस्ट्रेट सुरक्षा के आदेश देता है — हिंसा रोकना, घर में रहने देना, पैसे दिलाना | पुलिस FIR दर्ज करती है; दोषी को सज़ा हो सकती है |
| कहाँ जाएँ | संरक्षण अधिकारी / न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी | नज़दीकी पुलिस थाना / महिला थाना |
| FIR ज़रूरी? | नहीं — बिना FIR के भी सुरक्षा मिल सकती है | हाँ — FIR दर्ज करनी होती है |
| उद्देश्य | तुरंत सुरक्षा और राहत | अपराधी को दंड |
| शुल्क | निःशुल्क | निःशुल्क |
कौन-सा रास्ता चुनें? अगर आपको तुरंत हिंसा रुकवानी है, घर में बने रहना है या खर्चा चाहिए — तो PWDVA का सिविल रास्ता तेज़ है। अगर आप चाहती हैं कि हिंसा करने वाले को सज़ा मिले — तो FIR का आपराधिक रास्ता भी अपनाएँ। दोनों एक साथ चल सकते हैं; एक रास्ता चुनने से दूसरा बंद नहीं होता।
PWDVA के तहत मिलने वाली 5 राहतें
एक ही आवेदन (फॉर्म II) में आप ये सभी राहतें एक साथ माँग सकती हैं — अलग-अलग मुकदमे नहीं करने पड़ते:
| राहत | धारा | क्या मिलता है |
|---|---|---|
| संरक्षण आदेश | धारा 18 | मजिस्ट्रेट प्रतिवादी को हिंसा करने, धमकाने, संपर्क करने या घर में घुसने से रोक सकता है |
| आवास आदेश | धारा 19 | आपको साझा घर (shared household) में रहने का अधिकार — आपको घर से निकाला नहीं जा सकता; प्रतिवादी को घर से दूर रहने का आदेश भी हो सकता है |
| आर्थिक सहायता | धारा 20 | कमाई का नुकसान, इलाज का खर्च, संपत्ति के नुकसान की भरपाई, और आपके व बच्चों का भरण-पोषण (maintenance) |
| बच्चों की कस्टडी | धारा 21 | बच्चों की अस्थायी कस्टडी; प्रतिवादी से मिलने की शर्तें भी तय हो सकती हैं |
| मुआवज़ा | धारा 22 | हिंसा से हुई चोट, मानसिक पीड़ा और भावनात्मक कष्ट के लिए हर्जाना |
अंतरिम राहत (धारा 23): अगर खतरा तुरंत है, तो मजिस्ट्रेट आपके हलफनामे और घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) के आधार पर — दूसरी तरफ को सुने बिना भी (ex parte) — तुरंत अंतरिम संरक्षण, आवास या आर्थिक आदेश दे सकता है। अंतिम आदेश बाद में सुनवाई के बाद होता है।
संरक्षण अधिकारी — आपकी सबसे बड़ी मदद
संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) वह सरकारी अधिकारी है जो इस कानून को ज़मीन पर लागू करता है। हर जिले में राज्य सरकार संरक्षण अधिकारी नियुक्त करती है (धारा 8)। हरियाणा में जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) ही संरक्षण अधिकारी का काम करते हैं — राज्य सरकार ने 33 महिला थानों में DPO नियुक्त किए हैं, हर जिले में एक। संरक्षण अधिकारी के काम हैं (धारा 9 और 2006 के नियम):
- घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) फॉर्म I में दर्ज करना और उसकी प्रति मजिस्ट्रेट व पुलिस थाने को भेजना।
- आवेदन (फॉर्म II) तैयार करने में मदद करना और उसे मजिस्ट्रेट के पास भेजना।
- सुरक्षा योजना (Safety Plan, फॉर्म V) बनाना — खतरे से बचने की योजना।
- कानूनी सहायता दिलाना — मुफ्त वकील की व्यवस्था (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से)।
- आश्रय की व्यवस्था — ज़रूरत पड़े तो सुरक्षित जगह (शेल्टर होम / वन स्टॉप सेंटर) दिलाना।
- मेडिकल जाँच कराना — अगर चोट लगी हो तो।
- सेवा प्रदाताओं की सूची रखना — NGO, आश्रय गृह, काउंसलर आदि।
ध्यान दें: हरियाणा में संरक्षण अधिकारियों की कोई अलग से प्रकाशित सूची सत्यापित नहीं हुई है — अपने जिले के DPO कार्यालय से संपर्क करें; वही संरक्षण अधिकारी का काम देखते हैं। DPO के संपर्क नीचे “आधिकारिक लिंक और संपर्क” में नहीं, बल्कि अपने जिले के महिला एवं बाल विकास कार्यालय से पूछें — या 181 पर कॉल करें, वे आपको सही अधिकारी से जोड़ देंगे।
शिकायत कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप
पूरी प्रक्रिया इस प्रकार है — किसी भी चरण पर 181 या सखी वन स्टॉप सेंटर से मदद ले सकती हैं:
- मदद के लिए संपर्क करें: 181 पर कॉल करें, नज़दीकी सखी वन स्टॉप सेंटर जाएँ, अपने जिले के संरक्षण अधिकारी (DPO) से मिलें, या सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाएँ। संरक्षण अधिकारी से मिलना ज़रूरी नहीं है — आप सीधे अदालत भी जा सकती हैं।
- घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) दर्ज कराएँ: संरक्षण अधिकारी आपकी शिकायत पर फॉर्म I में DIR तैयार करेगा और उसकी प्रति मजिस्ट्रेट और पुलिस थाने को भेजेगा। मजिस्ट्रेट को आदेश देने से पहले इस रिपोर्ट पर विचार करना होता है।
- आवेदन दाखिल करें: धारा 12 के तहत फॉर्म II में मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दें — इसमें आप कौन-सी राहत चाहती हैं, यह लिखें (संरक्षण, आवास, आर्थिक सहायता, कस्टडी, मुआवज़ा — एक साथ माँग सकती हैं)। संरक्षण अधिकारी आवेदन तैयार करने में मदद करेगा।
- सही अदालत चुनें (धारा 27): आवेदन उस जगह के मजिस्ट्रेट के पास दे सकती हैं जहाँ आप रहती हैं (अस्थायी रूप से भी), जहाँ आप काम करती हैं, जहाँ प्रतिवादी रहता/काम करता है, या जहाँ हिंसा हुई थी।
- पहली सुनवाई: मजिस्ट्रेट आमतौर पर आवेदन मिलने के 3 दिन के भीतर पहली सुनवाई की तारीख तय करता है। प्रतिवादी को नोटिस 2 दिन के भीतर भेजा जाता है (धारा 13)।
- अंतरिम आदेश माँगें (अगर तुरंत खतरा है): धारा 23 के तहत हलफनामे (फॉर्म III) के साथ अंतरिम राहत माँगें — मजिस्ट्रेट दूसरी तरफ को सुने बिना भी तुरंत आदेश दे सकता है।
- अंतिम आदेश: मजिस्ट्रेट पहली सुनवाई से 60 दिन के भीतर आवेदन निपटाने का प्रयास करता है। आदेश का पालन न करना अपराध है (धारा 31) — 1 साल तक की कैद और/या ₹20,000 तक का जुर्माना।
ऑनलाइन आवेदन के बारे में: हरियाणा में PWDVA के तहत कोई ऑनलाइन आवेदन पोर्टल या SARAL सेवा सत्यापित नहीं हुई है — इसलिए इस गाइड में कोई ऑनलाइन चरण नहीं दिया गया है। सत्यापित तरीका ऑफलाइन है — संरक्षण अधिकारी, वन स्टॉप सेंटर, महिला थाना या सीधे मजिस्ट्रेट।
दस्तावेज़ क्या-क्या चाहिए?
शिकायत शुरू करने के लिए कोई दस्तावेज़ अनिवार्य नहीं है — संरक्षण अधिकारी आपके बयान पर भी DIR दर्ज कर सकता है। लेकिन आवेदन मज़बूत बनाने के लिए ये दस्तावेज़ मदद करते हैं — अंतिम सूची के लिए संरक्षण अधिकारी या वकील से पूछ लें:
| दस्तावेज़ | क्यों चाहिए |
|---|---|
| पहचान प्रमाण — आधार कार्ड / वोटर ID | आपकी पहचान के लिए |
| पते का प्रमाण | साझा घर और अधिकार क्षेत्र (jurisdiction) के लिए |
| विवाह प्रमाण — विवाह प्रमाण पत्र / फोटो / अन्य प्रमाण | घरेलू संबंध साबित करने के लिए |
| मेडिकल रिपोर्ट / चोट के प्रमाण | हिंसा के सबूत के लिए (अगर इलाज कराया हो तो) |
| फोटो, वीडियो, मैसेज, कॉल रिकॉर्ड | हिंसा/धमकी के सबूत के लिए (अगर उपलब्ध हों) |
| बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र | कस्टडी माँगने पर बच्चों की उम्र/पहचान के लिए |
| आय/खर्च का प्रमाण — सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, बिल | आर्थिक सहायता/भरण-पोषण तय करने के लिए |
| पासपोर्ट साइज़ फोटो | आवेदन पत्र के लिए |
नोट: दस्तावेज़ न होने पर भी शिकायत की जा सकती है — दस्तावेज़ों की कमी के कारण कोई भी अधिकारी आपकी शिकायत लेने से मना नहीं कर सकता।
शुल्क, समय-सीमा और स्थिति जाँच
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| आवेदन शुल्क (PWDVA) | कोई शुल्क नहीं — आवेदन निःशुल्क है |
| वकील का खर्च | मुफ्त कानूनी सहायता — जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) से; महिलाएँ मुफ्त कानूनी सेवा की हकदार हैं |
| पहली सुनवाई | आमतौर पर आवेदन मिलने के 3 दिन के भीतर (धारा 12(4)) |
| निपटान का लक्ष्य | पहली सुनवाई से 60 दिन के भीतर (धारा 12(5)) — यह वैधानिक लक्ष्य है; असल समय अदालत पर निर्भर करता है |
| आदेश का पालन न हो तो | धारा 31 — संज्ञेय, गैर-ज़मानती अपराध; 1 साल तक की कैद और/या ₹20,000 तक जुर्माना |
| स्थिति जाँच (ऑनलाइन) | कोई ऑनलाइन स्थिति पोर्टल सत्यापित नहीं — संरक्षण अधिकारी या अदालत से पूछें |
| स्थिति जाँच (ऑफ़लाइन) | संरक्षण अधिकारी (DPO) कार्यालय / संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत |
| अंतिम तिथि | कोई तय अंतिम तिथि नहीं — कानून में कोई समय-सीमा नहीं है; जारी या हाल की हिंसा के लिए कभी भी आवेदन किया जा सकता है |
हरियाणा के सखी वन स्टॉप सेंटर — पूरी सूची
सखी वन स्टॉप सेंटर (One Stop Centre) हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही छत के नीचे पुलिस मदद, मेडिकल सहायता, कानूनी सलाह, अस्थायी आश्रय (5 दिन तक) और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग देता है। यह 100% केंद्र प्रायोजित योजना है (निर्भया फंड, अप्रैल 2015 से)। हरियाणा के हर जिले में एक सेंटर है — महिला एवं बाल विकास विभाग की टेलीफोन निर्देशिका के अनुसार:
| क्र. | जिला | पता | फोन |
|---|---|---|---|
| 1 | अंबाला | #39 A, दुर्गा नगर, गणेश विहार, अंबाला पब्लिक स्कूल के पास, अंबाला शहर | 9518111212 |
| 2 | भिवानी | तोशाम रोड, जिला पुनर्वास केंद्र के पास, भिवानी | 7015932690 |
| 3 | चरखी दादरी | लोहारू रोड, वार्ड नं. 18, MC कॉलोनी, केनरा बैंक के पास, चरखी दादरी | 9813722646 |
| 4 | फरीदाबाद | B.K. सिविल अस्पताल NIT, फरीदाबाद | 9033758060 |
| 5 | फतेहाबाद | रेड क्रॉस भवन, ब्राह्मण धर्मशाला के पास, फतेहाबाद | 8396841445 |
| 6 | गुरुग्राम | बाल उद्यान, नेहरू स्टेडियम के पास, सिविल लाइन रोड, गुरुग्राम | 8684923568 |
| 7 | हिसार | वन स्टॉप सेंटर, मिनी सचिवालय, हिसार | 8059242425 |
| 8 | झज्जर | मकान नं. 406, वार्ड नं. 17, आर्य नगर, झज्जर | 9417614301 |
| 9 | जींद | कमरा नं. 133-134, पुराना भवन, सिविल अस्पताल, जींद | 9254679478 |
| 10 | कैथल | पद्मा सिटी मॉल गली, दिल्ली अस्पताल के पास, MITC रोड, कैथल | 7206274710 |
| 11 | करनाल | महिला आश्रम परिसर, पुराने बस स्टैंड के पीछे, करनाल | 9416384609 |
| 12 | कुरुक्षेत्र | 1495/12, आज़ाद नगर, कुरुक्षेत्र | 9896660260 |
| 13 | नूंह | B-1, पुराना कोर्ट परिसर, सिविल लाइन रोड, नूंह | 9636374141 |
| 14 | महेंद्रगढ़ | पुराना मिनी सचिवालय, कमरा नं. 7-8, नारनौल | 7217709090 |
| 15 | पलवल | सिविल अस्पताल, दूसरी मंज़िल, पंचवटी कॉलोनी, पलवल | 9815587684 |
| 16 | पंचकूला | कमरा नं. 27, दूसरी मंज़िल, नया मिनी सचिवालय, सेक्टर-1, पंचकूला | 8076721376 |
| 17 | पानीपत | रेड क्रॉस सोसाइटी भवन, G.T. रोड, पानीपत | 7082403278 |
| 18 | रेवाड़ी | पहली मंज़िल, जनता सर्विस स्टेशन, ट्रॉमा सेंटर के सामने, रेवाड़ी | 9812612047 |
| 19 | रोहतक | गांधी कैंप, महिला आश्रम वाली गली, D-पार्क, दिल्ली रोड, रोहतक | 9899716044 |
| 20 | सिरसा | B-10, कोर्ट परिसर के पास, मिनी सचिवालय, बरनाला रोड, सिरसा | 9017728550 |
| 21 | सोनीपत | एटलस रोड, सांघी अस्पताल के पास, सोनीपत | 7357428352 |
| 22 | यमुनानगर | मकान नं. 21, अशोक कॉलोनी, लाल द्वारा के पास, यमुनानगर | 9034177330 |
ध्यान दें: यह सूची महिला एवं बाल विकास विभाग की टेलीफोन निर्देशिका की प्रति पर आधारित है — जाने से पहले 181 पर कॉल करके सेंटर का पता और समय की पुष्टि कर लें। स्रोत में ईमेल पते जिलों के बीच गड़बड़ दिखे, इसलिए ईमेल इस गाइड में नहीं दिए गए हैं।
महिला थाना — जिलेवार मोबाइल नंबर
हर जिले में महिला थाना (Mahila Thana) है, जहाँ महिलाएँ सीधे शिकायत दर्ज करा सकती हैं। नीचे दिए नंबर हरियाणा राज्य महिला संसाधन केंद्र की 2019 की हेल्पबुक से लिए गए हैं — नंबर बदल गए हो सकते हैं; 181 पर कॉल करना सबसे भरोसेमंद तरीका है:
| जिला | महिला थाना मोबाइल | जिला | महिला थाना मोबाइल |
|---|---|---|---|
| पंचकूला | 9464661091 | हांसी | 7082901091 |
| यमुनानगर | 8818000108 | चरखी दादरी | 9466161091 |
| अंबाला | 7419341100 | भिवानी | 8814081091 |
| कुरुक्षेत्र | 8607000503 | रोहतक | 8222891091 |
| करनाल | 7027501091 | झज्जर | 8930500633 |
| कैथल | 7419352118 | रेवाड़ी | 7419757524 |
| जींद | 9306426167 | नारनौल | 8053017999 |
| पानीपत | 9467111091 | गुरुग्राम | 9205291091 |
| सोनीपत | 7496971091 | फरीदाबाद | 9953731091 |
| फतेहाबाद | 8814011750 | पलवल | 7027991091 |
| सिरसा | 8816901091 | मेवात (नूंह) | 9306412961 |
| हिसार | 7027491091 | पूरे हरियाणा के लिए | 8264591192 |
मुफ्त कानूनी सहायता — DLSA से वकील कैसे लें
पैसों की कमी के कारण कोई भी महिला कानूनी मदद से वंचित नहीं रहनी चाहिए। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत महिलाएँ मुफ्त कानूनी सेवा की हकदार हैं — इसमें मुफ्त वकील, कानूनी सलाह और अदालत की फीस शामिल है:
- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA): हर जिले की अदालत परिसर में DLSA का कार्यालय होता है — वहाँ जाकर मुफ्त वकील के लिए आवेदन करें। संरक्षण अधिकारी भी आपको DLSA से जोड़ सकता है।
- राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) हेल्पलाइन: 15100 — मुफ्त कानूनी सहायता के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन।
- वन स्टॉप सेंटर में कानूनी सलाह: हर सखी वन स्टॉप सेंटर में कानूनी सलाहकार होता है — वहाँ भी मुफ्त सलाह मिलती है।
- सेवा प्रदाता (NGO): पंजीकृत सेवा प्रदाता संस्थाएँ भी मुफ्त मदद करती हैं — इनकी सूची संरक्षण अधिकारी के पास होती है।
अंतर समझें — PWDVA बनाम BNS 85 बनाम महिला आयोग
| बिंदु | PWDVA 2005 (सिविल) | BNS धारा 85 (आपराधिक) | महिला आयोग |
|---|---|---|---|
| क्या करता है | मजिस्ट्रेट से सुरक्षा के आदेश — संरक्षण, आवास, पैसे, कस्टडी, मुआवज़ा | FIR पर पुलिस जाँच; दोषी को सज़ा (3 साल तक की कैद + जुर्माना) | शिकायत सुनता है, जाँच करता है, अधिकारियों को सिफारिश भेजता है |
| कहाँ जाएँ | संरक्षण अधिकारी / मजिस्ट्रेट | पुलिस थाना / महिला थाना | हरियाणा राज्य महिला आयोग, पंचकूला (0172-2584039) |
| समय | पहली सुनवाई ~3 दिन; निपटान लक्ष्य 60 दिन | जाँच और मुकदमा — लंबा समय लग सकता है | शिकायत पर कार्रवाई — कोई तय समय नहीं |
| किसके लिए | तुरंत सुरक्षा चाहिए तो | दोषी को सज़ा दिलानी हो तो | विभाग/पुलिस सुनवाई न करे तो |
तीनों रास्ते अलग-अलग हैं और एक-दूसरे को रोकते नहीं — ज़रूरत पड़े तो तीनों एक साथ अपनाए जा सकते हैं।
अपनी सुरक्षा योजना — पहले से तैयार रहें
अगर आप हिंसा का सामना कर रही हैं, तो पहले से कुछ तैयारी करके रखें — संरक्षण अधिकारी आपकी सुरक्षा योजना (फॉर्म V) बनाने में भी मदद करता है:
- ज़रूरी दस्तावेज़ों की कॉपी सुरक्षित जगह रखें: आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बच्चों के प्रमाण पत्र — किसी भरोसेमंद व्यक्ति के पास या ऑनलाइन (ईमेल/ड्राइव) में।
- आपातकालीन बैग तैयार रखें: कुछ पैसे, कपड़े, दवाएँ, ज़रूरी नंबर — ऐसी जगह जहाँ आप तुरंत पहुँच सकें।
- एक भरोसेमंद व्यक्ति को बताकर रखें: पड़ोसी, रिश्तेदार या दोस्त — जिसे खतरे में कॉल कर सकें।
- सबूत सहेजें: चोट के फोटो, धमकी वाले मैसेज, मेडिकल रिपोर्ट — ये अदालत में काम आते हैं।
- हेल्पलाइन नंबर याद रखें: 112 (आपातकाल), 181 (महिला हेल्पलाइन) — फोन में सेव करके रखें।
- बच्चों की सुरक्षा: बच्चों को भी बता दें कि खतरे में किसे कॉल करना है और कहाँ जाना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. घरेलू हिंसा की शिकायत के लिए FIR कराना ज़रूरी है?
नहीं। PWDVA 2005 के तहत आप बिना FIR के सीधे मजिस्ट्रेट से संरक्षण आदेश माँग सकती हैं। FIR आपराधिक रास्ते (BNS धारा 85) के लिए होती है — वह अलग रास्ता है, और दोनों एक साथ भी चल सकते हैं।
2. शिकायत कौन कर सकता है — क्या सिर्फ पत्नी ही?
नहीं। घरेलू संबंध में रहने वाली कोई भी महिला — पत्नी, माँ, बहन, बेटी, विधवा, या विवाह जैसे संबंध में रहने वाली महिला — शिकायत कर सकती है। महिला खुद, संरक्षण अधिकारी, या उसकी भलाई के लिए कोई अन्य व्यक्ति भी आवेदन कर सकता है।
3. क्या मुझे घर से निकाला जा सकता है?
नहीं। धारा 19 के तहत मजिस्ट्रेट आवास आदेश दे सकता है — आपको साझा घर में रहने का अधिकार है और आपको घर से निकाला नहीं जा सकता। प्रतिवादी को घर से दूर रहने का आदेश भी दिया जा सकता है।
4. आर्थिक सहायता में क्या-क्या मिलता है?
धारा 20 के तहत कमाई का नुकसान, इलाज का खर्च, संपत्ति के नुकसान की भरपाई और आपके व बच्चों का भरण-पोषण (maintenance) माँगा जा सकता है। धारा 22 के तहत मानसिक पीड़ा के लिए अलग से मुआवज़ा भी माँगा जा सकता है।
5. आवेदन करने में कितना खर्च आएगा?
कुछ नहीं — PWDVA के तहत आवेदन निःशुल्क है। वकील भी मुफ्त मिलता है (जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से; NALSA हेल्पलाइन 15100)। अगर कोई पैसे माँगे, तो सावधान रहें।
6. पहली सुनवाई और फैसला कितने दिन में होता है?
कानून के अनुसार पहली सुनवाई आमतौर पर आवेदन मिलने के 3 दिन के भीतर होती है, और निपटान का लक्ष्य पहली सुनवाई से 60 दिन है। यह वैधानिक लक्ष्य है — असल समय अदालत के कामकाज पर निर्भर करता है। तुरंत खतरा हो तो धारा 23 के तहत अंतरिम आदेश उसी दिन भी मिल सकता है।
7. संरक्षण अधिकारी कौन होता है और कहाँ मिलेगा?
हर जिले में राज्य सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी — हरियाणा में जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) ही संरक्षण अधिकारी का काम करते हैं। अपने जिले के DPO कार्यालय से संपर्क करें, या 181 पर कॉल करें — वे आपको सही अधिकारी से जोड़ देंगे।
8. वन स्टॉप सेंटर (सखी) में क्या-क्या मदद मिलती है?
एक ही छत के नीचे पुलिस मदद, मेडिकल सहायता, कानूनी सलाह, अस्थायी आश्रय (5 दिन तक) और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग। हरियाणा के हर जिले में एक सेंटर है — ऊपर पूरी सूची दी गई है।
9. अगर आदेश का पालन न हो तो क्या होगा?
संरक्षण आदेश का उल्लंघन अपराध है (धारा 31) — संज्ञेय और गैर-ज़मानती; 1 साल तक की कैद और/या ₹20,000 तक का जुर्माना हो सकता है। उल्लंघन होने पर तुरंत पुलिस या संरक्षण अधिकारी को बताएँ।
10. क्या शिकायत के बाद मुझे घर छोड़ना पड़ेगा?
नहीं — उल्टा है। इस कानून का मकसद ही यह है कि महिला अपने घर में सुरक्षित रह सके। आवास आदेश के तहत आपको घर में रहने का अधिकार मिलता है; ज़रूरत पड़े तो प्रतिवादी को घर से दूर रहने का आदेश दिया जाता है। अगर आप खुद सुरक्षित जगह जाना चाहें, तो वन स्टॉप सेंटर या शेल्टर होम में अस्थायी आश्रय भी मिलता है।
आधिकारिक लिंक और संपर्क
| काम | लिंक / संपर्क |
|---|---|
| myScheme — Protection Against Domestic Violence | myscheme.gov.in/schemes/padv (विवरण पेज client-rendered है और सीधे पढ़ा नहीं जा सका; सूची पेज भी देखें) |
| myScheme — हरियाणा योजनाएँ (सूची) | myscheme.gov.in/search/state/Haryana |
| महिला एवं बाल विकास मंत्रालय — PWDVA जानकारी | wcd.gov.in (8 नवंबर 2026 को सीधी जाँच धीमी रही — नोट सहित लिंक दिया गया है) |
| हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग | wcdhry.gov.in (8 नवंबर 2026 को पहली जाँच में साइट नहीं खुली, दोबारा जाँच में खुली — साइट अस्थिर रहती है) |
| हरियाणा राज्य महिला आयोग | hscw.in — बेज़ 39-40, CADA भवन, सेक्टर-4, पंचकूला; 0172-2584039, 0172-2583639; [email protected] |
| राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) | ncw.nic.in — हेल्पलाइन 7827 170 170 (24×7) |
| राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) | nalsa.gov.in — मुफ्त कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 |
| महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा (कार्यालय) | बेज़ 15-20, सेक्टर 4, पंचकूला – 134112 |
| फोन | 0172-2560349 (निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा) |
| महिला हेल्पलाइन | 181 (24×7, निःशुल्क); लैंडलाइन 0172-2587658; [email protected] |
| आपातकालीन सेवा | 112 (ERSS); पुलिस 100; बाल हेल्पलाइन 1098 |
संबंधित गाइड — यह भी पढ़ें: वर्किंग वुमन हॉस्टल (सखी निवास): किराया, पात्रता व आवेदन प्रक्रिया | महिला अधिकारिता योजना (NSKFDC): सफाई कर्मचारी महिलाओं के लिए ₹2 लाख तक का ऋण | हरियाणा वृद्धावस्था सम्मान भत्ता 2026: ₹3,200 प्रति माह | महिला श्रमिक स्वयं विवाह सहायता: ₹50,000 एकमुश्त
अस्वीकरण
यह गाइड 8 नवंबर 2026 को उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों — घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जानकारी, हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग की टेलीफोन निर्देशिका और myScheme पोर्टल — के आधार पर तैयार की गई है। यह गाइड कानूनी जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं है — अपने मामले के लिए संरक्षण अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के वकील या किसी अधिवक्ता से सलाह ज़रूर लें। हेल्पलाइन नंबर, सेंटरों के पते और अधिकारी समय के साथ बदल सकते हैं — संपर्क करने से पहले 181 पर कॉल करके ताज़ा जानकारी की पुष्टि कर लें। जहाँ स्रोतों में अंतर है या जानकारी सत्यापित नहीं हुई है, वहाँ गाइड में साफ-साफ कहा गया है। विकसित हरियाणा किसी भी सरकारी विभाग का आधिकारिक पोर्टल नहीं है।

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