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प्राकृतिक खेती एवं देसी गाय खरीद सब्सिडी हरियाणा 2026: देसी गाय पर ₹30,000 + 4 ड्रम के लिए ₹3,000

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: प्राकृतिक खेती एवं देसी गाय खरीद सब्सिडी हरियाणा 2026: देसी गाय पर ₹30,000 + 4 ड्रम के लिए ₹3,000
  • तारीख़: 7 नवम्बर 2026, 1:05 पूर्वाह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: सरकारी योजनाएँ
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

प्राकृतिक खेती एवं देसी गाय खरीद सब्सिडी क्या है?

प्राकृतिक खेती एवं देसी गाय खरीद सब्सिडी हरियाणा सरकार की वह योजना है, जिसके तहत प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को देसी गाय खरीदने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। यह योजना हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत चलती है। इसका मकसद है कि किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करें और गो-आधारित प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें — देसी गाय का गोबर और गोमूत्र ही जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसी प्राकृतिक खेती की सामग्री बनाने का आधार है।

सबसे जरूरी बात — ₹25,000 वाली राशि अब पुरानी हो चुकी है। योजना की शुरुआत 2022 में हुई थी, तब देसी गाय खरीद पर ₹25,000 तक की सब्सिडी (50 प्रतिशत) और जीवामृत बनाने के लिए 4 बड़े ड्रम मुफ्त दिए जाते थे। मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा के अनुसार, 2025 से देसी गाय की सब्सिडी बढ़ाकर ₹30,000 कर दी गई है और 4 ड्रमों की खरीद के लिए अब ₹3,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है। इसलिए इस गाइड में जहाँ भी राशि लिखी है, वह ताज़ा घोषणा के अनुसार है — पुरानी ₹25,000 वाली खबरों को देखकर आवेदन न करें।

ध्यान दें — यह गाइड सिर्फ हरियाणा की योजना के बारे में है। हिमाचल प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी प्राकृतिक खेती की योजनाएँ चलती हैं, लेकिन उनकी राशि, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया अलग है — उन्हें इस योजना से न मिलाएँ।

योजना एक नज़र में

विवरण जानकारी
योजना का नाम प्राकृतिक खेती — सतत कृषि रणनीतियों को बढ़ावा (प्राकृतिक खेती योजना)
विभाग कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा
शुरुआत 2022 में प्राकृतिक खेती योजना शुरू; देसी गाय सब्सिडी 2025 से बढ़कर ₹30,000
देसी गाय पर सहायता ₹30,000 तक (एक देसी गाय की खरीद पर)
4 ड्रम के लिए सहायता ₹3,000 (कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण के लिए 4 ड्रम की खरीद पर)
प्रति एकड़ प्रोत्साहन ₹4,000 प्रति एकड़ (जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार; नीचे टिप्पणी देखें)
प्रमाणित किसानों के लिए एपीडा (APEDA) से प्रमाणित प्राकृतिक/जैविक किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ प्रतिवर्ष, 5 वर्ष तक
पात्रता हरियाणा का स्थायी निवासी किसान; कम से कम 1 एकड़ भूमि (जून 2026 की घोषणा के अनुसार); मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण अनिवार्य
आवेदन कृषि विभाग की वेबसाइट agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन
प्रशिक्षण गाय का अनुदान मिलने के बाद 3 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य (कुरुक्षेत्र स्थित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान में)

इस योजना का लाभ क्या-क्या है?

देसी गाय खरीद पर ₹30,000 तक की सहायता: प्राकृतिक खेती अपनाने वाला किसान जब देसी नस्ल की गाय खरीदता है, तो उसे ₹30,000 तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा के अनुसार, अब तक इस योजना में 1,171 देसी गायों की खरीद के लिए किसानों के बैंक खातों में सीधे ₹2.97 करोड़ भेजे जा चुके हैं।

4 ड्रम की खरीद के लिए ₹3,000: जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत तैयार करने के लिए कच्चे माल के भंडारण और प्रसंस्करण हेतु जिन 4 ड्रमों की जरूरत पड़ती है, उनकी खरीद के लिए हर किसान को ₹3,000 दिए जाते हैं। घोषणा के अनुसार, अब तक 2,500 किसानों को 4 ड्रम की खरीद के लिए ₹75 लाख दिए जा चुके हैं। ध्यान दें — 2022 में ये 4 ड्रम मुफ्त दिए जाते थे; अब इनकी जगह ₹3,000 की सहायता दी जाती है।

प्रति एकड़ ₹4,000 की आर्थिक सहायता: जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी (अमर उजाला, सिरसा, 6 मार्च 2026) के अनुसार, प्राकृतिक खेती अपनाने पर किसानों को प्रति एकड़ ₹4,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। कुछ अन्य रिपोर्टों में यह राशि ₹4,500 प्रति एकड़ बताई गई है — इसलिए इस राशि की ताज़ा स्थिति आवेदन से पहले जिला कृषि कार्यालय से जाँच लें।

प्रमाणित किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़, 5 वर्ष तक: जिन किसानों की प्राकृतिक या जैविक खेती एपीडा (APEDA) से प्रमाणित है, उन्हें ₹10,000 प्रति एकड़ प्रतिवर्ष की दर से 5 वर्ष तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक खेती के प्रमाणीकरण के लिए अधिकृत निकाय बनाया जा रहा है।

प्रशिक्षण और बाज़ार की सुविधा: प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण गुरुकुल कुरुक्षेत्र, हामेटी जींद, मंगियाना सिरसा और घरौंडा करनाल के प्रशिक्षण केंद्रों पर दिया जाता है। घोषणा के अनुसार, प्राकृतिक और जैविक किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल की कृषि मंडियों में जगह दी जाएगी।

पात्रता — कौन आवेदन कर सकता है?

  1. हरियाणा का स्थायी निवासी: आवेदक किसान हरियाणा राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  2. भूमि: मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा के अनुसार, सब्सिडी उन किसानों को मिलती है जिनके पास कम से कम 1 एकड़ भूमि है। हालांकि, कृषि विभाग के पोर्टल पर दर्ज योजना विवरण में 2 से 5 एकड़ कृषि योग्य भूमि की शर्त का उल्लेख मिलता है — दोनों में अंतर है, इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल पर दिख रही ताज़ा शर्त ही अंतिम मानी जाए।
  3. मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण: किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर पंजीकरण अनिवार्य है।
  4. परिवार पहचान पत्र (PPP): किसान के पास परिवार पहचान पत्र होना आवश्यक है।
  5. प्राकृतिक खेती अपनाना: किसान को स्वेच्छा से प्राकृतिक खेती अपनानी होगी — योजना का लाभ सिर्फ उन्हीं को मिलता है जो प्राकृतिक खेती कर रहे हैं या करने जा रहे हैं।
  6. पहले से देसी गाय न हो: रिपोर्टों के अनुसार, जाँच में यह देखा जाता है कि किसान के पास पहले से कोई देसी गाय तो नहीं है — अगर पहले से देसी गाय है, तो सब्सिडी नहीं मिलेगी। इस शर्त की ताज़ा स्थिति जिला कृषि कार्यालय से जाँच लें।
  7. देसी नस्ल की गाय: सब्सिडी किसी भी गाय पर नहीं, सिर्फ देसी (स्वदेशी) नस्ल की गाय की खरीद पर मिलती है।

जरूरी दस्तावेज

आवेदन के समय आमतौर पर ये दस्तावेज माँगे जाते हैं — पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम है, फॉर्म में जो माँगा जाए वही अपलोड करें:

क्रम दस्तावेज टिप्पणी
1 मेरी फसल मेरा ब्योरा पंजीकरण विवरण पंजीकरण अनिवार्य है
2 परिवार पहचान पत्र (PPP) PPP नंबर अनिवार्य है
3 आधार कार्ड पहचान प्रमाण
4 बैंक पासबुक सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है (DBT)
5 मोबाइल नंबर OTP और सूचना के लिए
6 गाय बेचने वाले व्यक्ति का विवरण आवेदन के समय विक्रेता की पूरी जानकारी देनी होती है
7 भूमि का विवरण मेरी फसल मेरा ब्योरा से जुड़ा भूमि रिकॉर्ड

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? — स्टेप बाय स्टेप

आवेदन कृषि विभाग की वेबसाइट agriharyana.gov.in पर ऑनलाइन किया जाता है। योजना का नाम पोर्टल पर "प्राकृतिक खेती – सतत कृषि रणनीतियों को बढ़ावा" दर्ज है:

चरण 1: कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in पर जाएँ।

चरण 2: होम पेज पर FARMERS CORNER में जाएँ और Apply for Agriculture Schemes पर क्लिक करें।

चरण 3: योजनाओं की सूची में "प्राकृतिक खेती – सतत कृषि रणनीतियों को बढ़ावा" योजना के सामने VIEW बटन पर क्लिक करें।

चरण 4: AGREE विकल्प चुनें और "Click here for registration" पर क्लिक करें।

चरण 5: अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें या मेरी फसल मेरा ब्योरा रजिस्ट्रेशन से अपना विवरण खोजें।

चरण 6: प्राप्त OTP के माध्यम से लॉगिन करें।

चरण 7: आवेदन फॉर्म में माँगी गई जानकारी सही-सही भरें — व्यक्तिगत विवरण, भूमि का विवरण और गाय बेचने वाले व्यक्ति की जानकारी सहित — और जरूरी दस्तावेज अपलोड करके फॉर्म सबमिट करें।

महत्वपूर्ण: आवेदन के चरणों की यह सूची समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है — इस गाइड में पोर्टल का लाइव फॉर्म लॉगिन करके सत्यापित नहीं किया गया है। फॉर्म भरते समय पोर्टल पर दिख रही ताज़ा प्रक्रिया ही अंतिम मानी जाए।

आवेदन के बाद क्या होता है? — जाँच और प्रशिक्षण

फॉर्म जमा करने के बाद आवेदन की जाँच कई चरणों में होती है:

  1. खेत की जाँच: कृषि विभाग की टीम जाँच करती है कि किसान अपने खेत में प्राकृतिक खेती कर रहा है या नहीं, और मिट्टी के सैंपल भी लिए जाते हैं।
  2. जिला समिति की जाँच: आवेदन की जाँच तीन सदस्यीय जिला समिति के अधिकारी करते हैं — इसमें यह भी देखा जाता है कि किसान के पास पहले से कोई देसी गाय तो नहीं है।
  3. पशुपालन विभाग का सत्यापन: गाय खरीदने के बाद पशुपालन विभाग की गठित समिति सत्यापन करती है — जिस व्यक्ति से गाय खरीदी है उसका रिकॉर्ड देखा जाता है, गाय का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है और फोटो सहित रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
  4. 3 दिन का प्रशिक्षण: देसी गाय के लिए अनुदान मिलने के बाद किसान को प्राकृतिक खेती को लेकर 3 दिनों का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। यह प्रशिक्षण कुरुक्षेत्र स्थित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान (NFTI) में दिलाया जाता है।

ऑफलाइन आवेदन का विकल्प

इस योजना के लिए आवेदन ऑनलाइन ही किया जाता है — पोर्टल पर ऑफलाइन फॉर्म की कोई आधिकारिक जानकारी सत्यापित नहीं हुई है। अगर आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत आती है, तो अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय या नज़दीकी कृषि विकास अधिकारी (ADO) से मार्गदर्शन लें — वहाँ से पात्रता और पोर्टल की ताज़ा प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी मिलेगी।

आवेदन शुल्क और समय-सीमा

शुल्क: इस योजना के लिए आवेदन शुल्क सत्यापित नहीं हुआ है — विभाग से जाँच लें। फॉर्म जमा करते समय पोर्टल पर अगर कोई शुल्क दिखे, तो वही अंतिम माना जाए। किसी भी दलाल या एजेंट को पैसे न दें।

समय-सीमा: इस योजना के लिए कोई अंतिम तिथि सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1 लाख एकड़ में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया था, और 2025-26 के दौरान राज्य में 20,727 एकड़ में प्राकृतिक खेती की गई थी।

आवेदन की स्थिति (Status) कैसे चेक करें?

इस योजना के लिए आवेदन की स्थिति जाँचने की अलग से कोई प्रक्रिया सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें। आमतौर पर agriharyana.gov.in पोर्टल पर लॉगिन करके आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है, और आवेदन के चरणों की सूचना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजी जाती है — पोर्टल पर दिख रहा ताज़ा विकल्प ही अंतिम माना जाए। स्थिति जानने के लिए अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है।

सब्सिडी कैसे मिलेगी?

स्वीकृति और सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है (DBT)। मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा के अनुसार, 1,171 देसी गायों की खरीद के लिए ₹2.97 करोड़ और 2,500 किसानों को 4 ड्रम की खरीद के लिए ₹75 लाख सीधे बैंक खातों में भेजे जा चुके हैं। इसलिए बैंक खाते की जानकारी सही भरें — खाता सक्रिय होना चाहिए और उसमें दी गई जानकारी बैंक रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए।

ध्यान देने योग्य बातें

  • ₹25,000 अब पुरानी राशि है: 2022 की घोषणा में देसी गाय पर ₹25,000 (50 प्रतिशत सब्सिडी) और 4 ड्रम मुफ्त मिलते थे। 2025 से राशि बढ़कर ₹30,000 हो गई है और ड्रमों के लिए ₹3,000 की सहायता दी जाती है — पुरानी खबरों को देखकर ₹25,000 या मुफ्त ड्रम की उम्मीद न करें।
  • भूमि की शर्त में अंतर: मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा में कम से कम 1 एकड़ कहा गया है, जबकि पोर्टल पर दर्ज विवरण में 2 से 5 एकड़ का उल्लेख है — आवेदन से पहले पोर्टल पर ताज़ा शर्त ज़रूर देख लें।
  • ₹30,000 एक बार की खरीद सहायता है या सालाना — यह साफ नहीं है: मुख्यमंत्री की घोषणा में इसे गाय की खरीद पर मिलने वाली सब्सिडी बताया गया है, जबकि नवंबर 2025 की कुछ रिपोर्टों में इसे "सालाना ₹30,000" लिखा गया है। यह बात सत्यापित नहीं हुई है — विभाग से जाँच लें।
  • प्रति एकड़ राशि में अंतर: प्रति एकड़ प्रोत्साहन एक रिपोर्ट में ₹4,000 और दूसरी में ₹4,500 बताया गया है — ताज़ा राशि जिला कृषि कार्यालय से जाँच लें।
  • पहले से देसी गाय होने पर सब्सिडी नहीं: रिपोर्टों के अनुसार, अगर किसान के पास पहले से देसी गाय है, तो सब्सिडी नहीं मिलेगी — इस शर्त की ताज़ा स्थिति भी जाँच लें।
  • ब्रांडिंग/पैकेजिंग की ₹20,000 सहायता: कुछ रिपोर्टों में प्राकृतिक खेती उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग के लिए ₹20,000 की मदद का उल्लेख है — यह बात सत्यापित नहीं हुई है, इसलिए इसे पक्का लाभ न मानें।
  • फर्ज़ी वेबसाइटों से सावधान: आवेदन केवल agriharyana.gov.in से ही करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. हरियाणा में देसी गाय खरीद पर कितनी सब्सिडी मिलती है?

2025 से देसी गाय की खरीद पर सब्सिडी बढ़ाकर ₹30,000 कर दी गई है (मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा के अनुसार)। 2022 में यह राशि ₹25,000 थी।

2. 4 ड्रम मुफ्त मिलते हैं या उनके पैसे मिलते हैं?

2022 में 4 बड़े ड्रम मुफ्त दिए जाते थे। अब 4 ड्रमों की खरीद के लिए ₹3,000 की वित्तीय सहायता दी जाती है।

3. कौन इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है?

हरियाणा का स्थायी निवासी किसान, जिसके पास कम से कम 1 एकड़ भूमि हो (जून 2026 की घोषणा के अनुसार), जिसका मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण हो और जिसके पास परिवार पहचान पत्र (PPP) हो। पोर्टल पर दर्ज विवरण में 2 से 5 एकड़ की शर्त भी मिलती है — आवेदन से पहले पोर्टल पर ताज़ा शर्त देख लें।

4. आवेदन कहाँ करें?

कृषि विभाग की वेबसाइट agriharyana.gov.in पर — FARMERS CORNER में जाकर Apply for Agriculture Schemes पर क्लिक करें और "प्राकृतिक खेती – सतत कृषि रणनीतियों को बढ़ावा" योजना चुनें।

5. क्या मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण जरूरी है?

हाँ — किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (fasal.haryana.gov.in) पर पंजीकरण अनिवार्य है।

6. क्या गाय खरीदने के बाद प्रशिक्षण लेना जरूरी है?

हाँ — रिपोर्टों के अनुसार, देसी गाय के लिए अनुदान मिलने के बाद किसान को प्राकृतिक खेती को लेकर 3 दिनों का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है, जो कुरुक्षेत्र स्थित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण संस्थान (NFTI) में दिलाया जाता है।

7. क्या पहले से देसी गाय होने पर भी सब्सिडी मिलेगी?

रिपोर्टों के अनुसार, नहीं — जाँच में देखा जाता है कि किसान के पास पहले से कोई देसी गाय तो नहीं है; अगर पहले से देसी गाय है, तो सब्सिडी नहीं मिलेगी। इस शर्त की ताज़ा स्थिति जिला कृषि कार्यालय से जाँच लें।

8. प्रति एकड़ कितनी सहायता मिलती है?

जिला प्रशासन की जानकारी (अमर उजाला, 6 मार्च 2026) के अनुसार, प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रति एकड़ ₹4,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। एपीडा (APEDA) से प्रमाणित किसानों को ₹10,000 प्रति एकड़ प्रतिवर्ष, 5 वर्ष तक मिलता है।

9. सब्सिडी कैसे मिलेगी?

स्वीकृति और सत्यापन के बाद राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है (DBT)।

10. क्या यह योजना हिमाचल प्रदेश या किसी अन्य राज्य के किसानों के लिए भी है?

नहीं — यह गाइड सिर्फ हरियाणा की योजना के बारे में है। अन्य राज्यों की प्राकृतिक खेती योजनाओं की राशि और प्रक्रिया अलग है।

आधिकारिक स्रोत और महत्वपूर्ण लिंक

  • कृषि विभाग, हरियाणा (ऑनलाइन आवेदन): agriharyana.gov.in
  • मेरी फसल मेरा ब्योरा (पंजीकरण अनिवार्य): fasal.haryana.gov.in
  • अंत्योदय सरल पोर्टल: saralharyana.gov.in
  • मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा (₹30,000 गाय सब्सिडी, 4 ड्रम के लिए ₹3,000, एपीडा प्रमाणित किसानों को ₹10,000/एकड़): द स्टेट्समैन
  • जिला प्रशासन, सिरसा — प्रति एकड़ ₹4,000, 4 ड्रम के लिए ₹3,000, देसी गाय पर ₹30,000 तक: अमर उजाला
  • 2022 की मूल घोषणा (₹25,000 और 4 ड्रम मुफ्त): इंडियन एक्सप्रेस
  • आवेदन प्रक्रिया और 3 दिन के प्रशिक्षण की जानकारी: नया हरियाणा

अस्वीकरण: इस गाइड की जानकारी मुख्यमंत्री की जून 2026 की घोषणा, जिला प्रशासन की जानकारी और समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। agriharyana.gov.in पोर्टल का लाइव फॉर्म इस गाइड में लॉगिन करके सत्यापित नहीं किया गया है — आवेदन करने से पहले पोर्टल पर योजना का लाइव फॉर्म और ताज़ा निर्देश ज़रूर देख लें; पोर्टल का लाइव फॉर्म ही अंतिम माना जाएगा। राशि, पात्रता और समय-सीमा में बदलाव हो सकता है — ताज़ा जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय से जाँच लें।

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