प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना: दिव्यांग पेंशन अब 40% दिव्यांगता पर, जन्म से मिलेगा लाभ — कैबिनेट का बड़ा फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश के गरीब और वंचित वर्गों के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने 14 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल और जारी रखने को मंजूरी दी है, जिसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का परिव्यय तय किया गया है। इस फैसले से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 3.20 करोड़ लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता रहेगा। कैबिनेट बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की घोषणा की।
इस फैसले के साथ कार्यक्रम का नाम भी बदल गया है — राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना (PMSSY) कहलाएगा। इसके चारों घटकों को भी नए नाम मिले हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना अब प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना और राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना अब प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना के नाम से जानी जाएगी।
फैसले का सबसे बड़ा बदलाव दिव्यांगजनों के लिए है। दिव्यांग पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा 80% से घटाकर 40% कर दी गई है — अब दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के बेंचमार्क स्तर वाले लाखों लोग इस दायरे में आ जाएंगे। साथ ही न्यूनतम आयु की शर्त भी खत्म कर दी गई है, यानी पात्र दिव्यांगजन को अब जन्म से ही पेंशन का लाभ मिलेगा, पहले यह लाभ 18 वर्ष से मिलता था। मासिक सहायता भी बढ़ाई गई है — 79 वर्ष तक के लाभार्थियों को अब 375 रुपये और 80 वर्ष से अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये महीना मिलेगा।
वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और पारिवारिक लाभ योजना अपने मौजूदा स्वरूप में ही जारी रहेंगी। कैबिनेट ने यह भी तय किया है कि दिव्यांग पेंशन के संशोधित नियमों, लाभार्थी संख्या और सहायता दरों से जुड़े नए दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर लागू कर दिए जाएंगे। गौरतलब है कि यह कार्यक्रम संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 41 के तहत गरीब परिवारों को सहायता देने के लिए 15 अगस्त 1995 को शुरू हुआ था और इसे शत-प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलती है।
