व्हाट्सएप पर इन दिनों एक ऐसा मैसेज तेजी से फैल रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार दिवाली के मौके पर प्रधानमंत्री के नाम पर हर व्यक्ति को 8000 रुपये का बोनस दे रही है। इस दावे की सच्चाई सामने आ गई है। भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक इकाई ने 2 नवंबर को साफ कर दिया है कि यह मैसेज पूरी तरह फर्जी है और सरकार की ओर से ऐसा कोई बोनस या योजना चलाई ही नहीं जा रही है। PIB ने लोगों से इस मैसेज पर बिल्कुल भरोसा न करने और इसमें दिए गए लिंक पर क्लिक न करने की अपील की है, क्योंकि यह एक सोची-समझी ऑनलाइन ठगी का तरीका है।
यह ठगी त्योहारों के मौसम का फायदा उठाकर की जा रही है। ठग पहले व्हाट्सएप पर एक आकर्षक मैसेज भेजते हैं, जिसमें 8000 रुपये के दिवाली बोनस का लालच दिया जाता है और रकम पाने के लिए एक लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है। उस लिंक पर क्लिक करते ही व्यक्ति एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जो दिखने में सरकारी पोर्टल जैसी लग सकती है। वहां उससे निजी जानकारी, बैंक से जुड़े विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारियां मांगी जाती हैं। कई मामलों में ठग प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे भी मांग लेते हैं, या फिर UPI से भुगतान की मंजूरी दिलवाकर खाते से रकम निकाल लेते हैं। कभी-कभी ऐसे लिंक से हानिकारक ऐप भी इंस्टॉल करवा दिया जाता है, जिससे फोन का नियंत्रण ठगों के हाथ में चला जाता है।
इस फर्जी मैसेज को लेकर सरकारी एजेंसियों ने भी चेतावनी जारी की है। हैदराबाद साइबर क्राइम यूनिट ने इस मैसेज के बारे में लोगों को सतर्क किया था, और उसी चेतावनी को PIB ने भी साझा किया है। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो ने भी साफ कहा है कि दिवाली बोनस का यह दावा एक फिशिंग स्कैम है, जिसका मकसद लोगों को धोखा देकर उनकी जानकारी और पैसा हथियाना है। PIB ने अपने संदेश में दो बातों पर खास जोर दिया है — किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और अपना OTP या UPI पिन किसी अनजान व्यक्ति के साथ कभी साझा न करें।
असली और फर्जी योजना में फर्क पहचानना भी बहुत आसान है। किसी भी सरकारी योजना की जानकारी हमेशा सरकार की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक पोर्टल पर ही मिलती है, न कि व्हाट्सएप पर आए किसी अनजान लिंक पर। अगर कोई मैसेज किसी योजना, बोनस या नकद लाभ का दावा करे और साथ में तुरंत लिंक पर क्लिक करने, जानकारी भरने या फीस देने का दबाव बनाए, तो उसे फर्जी समझना ही सुरक्षित है। ऐसे मैसेज को आगे फॉरवर्ड करना भी खतरनाक है, क्योंकि इससे ठगी का जाल और लोगों तक पहुंचता है। बेहतर यही है कि मैसेज मिलते ही उसे नजरअंदाज करें और अपने परिवार, खासकर बुजुर्गों और कम डिजिटल जानकारी रखने वाले परिजनों को भी इसके बारे में बता दें।
अगर आपको भी ऐसा कोई संदिग्ध मैसेज मिले, तो उसकी जानकारी PIB फैक्ट चेक को दी जा सकती है। इसके लिए व्हाट्सएप नंबर +91 8799711259 और ईमेल [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है। और अगर किसी व्यक्ति ने गलती से ऐसे लिंक पर क्लिक करके जानकारी साझा कर दी हो या पैसे गंवा दिए हों, तो उसे तुरंत अपने बैंक को सूचित करना चाहिए, राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करनी चाहिए और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने और ठगों पर कार्रवाई की संभावना उतनी ही अधिक रहेगी।
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