मध्य प्रदेश के किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने धान उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 4 नवंबर 2026 कर दी है, ताकि जिन किसानों ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है, वे बुधवार तक अपना पंजीकरण करवाकर धान उपार्जन का लाभ उठा सकें। यह फैसला 3 नवंबर 2026 को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने फैसलों की जानकारी दी और कहा कि छूटे हुए किसानों को ध्यान में रखकर ही पंजीयन की तारीख बढ़ाई गई है।
कैबिनेट बैठक में नगरीय विकास एवं आवास, वन, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा तथा जल संसाधन विभाग की विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति को निरंतरता दी गई। इनमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये की राशि नए अस्पतालों के निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च की जाएगी। बैठक में प्रदेश के शहरी विकास के रोडमैप पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत नई शहरी विकास नीति के अंतर्गत इंदौर, भोपाल और उज्जैन सहित विभिन्न क्षेत्रों में 15 नए सैटेलाइट टाउन विकसित करने की योजना है। इन फैसलों से प्रदेश के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट में मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीणों की संपत्ति की रजिस्ट्री का पूरा खर्च मध्य प्रदेश सरकार वहन कर रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी स्वामित्व प्रमाण दस्तावेज मिल रहा है। अब तक प्रदेश में 15 लाख से अधिक रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं और 15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्रियां पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कुल आंकड़ा 60 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि दीपावली के बाद जिन गांवों में शत-प्रतिशत रजिस्ट्री हो गई है, वहां जाकर दीपावली और गोवर्धन पूजा मनाएं और दीपावली के बाद प्रदेशभर में रजिस्ट्री वितरण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा।
बैठक में यह भी तय हुआ कि दीपावली के बाद अगली कैबिनेट बैठक 18 नवंबर को मंदसौर जिले के गांधीसागर में डेस्टिनेशन कैबिनेट के रूप में आयोजित की जाएगी। यह बैठक किसान कल्याण वर्ष और उद्योग वर्ष के विषयों के अनुरूप कृषि और औद्योगिक विकास पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही 15 नवंबर को जननायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती प्रदेशभर में भव्य रूप से मनाई जाएगी। धान उपार्जन पंजीयन की बढ़ी हुई तिथि और रजिस्ट्री योजना जैसे फैसले सीधे किसानों और ग्रामीण परिवारों से जुड़े हैं, इसलिए पात्र किसानों को सलाह है कि वे 4 नवंबर से पहले अपना पंजीयन अवश्य पूरा कर लें।

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