हरियाणा में बनेगा सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर: सीएम सैनी का ऐलान, पुरातात्विक स्थलों को मिलेगा पर्यटन बूस्ट
हिसार/हांसी। हरियाणा सरकार राज्य के पुरातात्विक स्थलों को जोड़ने के लिए ‘सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर’ विकसित करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सात दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव 2026 के उद्घाटन अवसर पर यह ऐलान किया। इस प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य विरासत स्थलों के बीच पर्यटन कनेक्टिविटी मजबूत करना और एकीकृत पुरातात्विक पर्यटन को बढ़ावा देना है, ताकि हरियाणा की प्राचीन सभ्यता की पहचान देश-दुनिया तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में नूंह की पुरानी तहसील इमारत, लोहारू किला और तावडू के मकबरा परिसर को राज्य-संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। पंचकूला के सेक्टर-5 में अत्याधुनिक पुरातात्विक संग्रहालय भी स्थापित किया जा रहा है, जबकि सभी राज्य-संरक्षित स्मारकों के लिए साइट प्लान और बाहरी डिजाइन का ढांचा तैयार करने की परियोजना शुरू कर दी गई है।
राखीगढ़ी को भारत की प्राचीन सभ्यता का जीवंत प्रमाण बताते हुए सैनी ने कहा कि यह हड़प्पा स्थल हजारों वर्ष पूर्व की विकसित समाज व्यवस्था, शिल्प कौशल और सामूहिक प्रयासों का साक्ष्य है। ‘माटी से महोत्सव तक’ थीम पर आयोजित महोत्सव के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन संग्रहालय का निरीक्षण किया, कारीगरों के स्टॉल देखे और पुरातत्व विभाग के उत्खनन प्रदर्शन को भी देखा। विरासत एवं पर्यटन मंत्री अरविंद कुमार शर्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
गौरतलब है कि राखीगढ़ी संग्रहालय एवं व्याख्या केंद्र के अगले चरण के लिए 188 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसका नागरिक निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। राज्य सरकार राखीगढ़ी को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास भी कर रही है — यह केंद्र सरकार द्वारा चिह्नित पांच प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है। महोत्सव के दौरान हड़प्पा-सिंधु सभ्यता पर देश-विदेश के विद्वानों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित हो रहा है।
