हरियाणा: पराली पर सख्ती, किसानों को ₹1200 प्रति एकड़ प्रोत्साहन; झज्जर में विशेष अभियान तेज
हरियाणा में धान की कटाई के मौसम में पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने सख्ती तेज कर दी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के जिले झज्जर में उपायुक्त वर्षा खंगवाल के निर्देश पर औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क व निर्माण धूल और खुले कूड़े के साथ-साथ फसल अवशेष जलाने पर विशेष निगरानी शुरू की गई है। जिले के आठ गांवों को फसल अवशेष जलाने के मामले में विशेष निगरानी में रखा गया है और संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का कड़ाई से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं।
राज्य स्तर पर हरियाणा सरकार किसानों को पराली के समुचित प्रबंधन पर प्रति एकड़ 1200 रुपये का प्रोत्साहन दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार सरकार अब तक इस मद में 10 लाख किसानों को 909 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे चुकी है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के बुलेटिन के मुताबिक 15 सितंबर से अब तक राज्य में सिर्फ आठ पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुई हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 18 मामले थे — यानी बड़ी गिरावट आई है। आईसीएआर के महानिदेशक ने पराली जलाने पर अंकुश के लिए हरियाणा की सराहना भी की है।
वहीं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब व हरियाणा के 34 जिलों (हरियाणा के 16 जिले समेत) में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर तक फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं, जो रोजाना जमीनी स्थिति की रिपोर्ट देंगे। हर जिले में ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ भी काम कर रही है, और देर शाम गश्त व ड्रोन निगरानी से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जा रही है।
पराली जलाने पर 5,000 से 30,000 रुपये तक का जुर्माना, एफआईआर और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री जैसी कार्रवाई का प्रावधान है। सरकार का संदेश साफ है — जो किसान मशीनों से पराली का प्रबंधन करेगा, उसे प्रोत्साहन मिलेगा; जो जलाएगा, उस पर कार्रवाई होगी।
