पराली जलाने में हरियाणा की बड़ी सफलता: सिर्फ 8 मामले, ICAR ने किसानों की तारीफ की
पराली जलाने के मामले में हरियाणा ने देशभर में मिसाल कायम की है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से शुरू हुए मौजूदा सीजन में मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 354 पराली जलाने के मामले सामने आए हैं, जबकि पंजाब में 220 और उत्तर प्रदेश में 134 मामले दर्ज हुए। इसके मुकाबले हरियाणा में महज 8 मामले ही सामने आए हैं — छह राज्यों में सबसे कम।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, IARI की विशेष प्रयोगशाला हर सर्दी में 15 सितंबर से 30 नवंबर के बीच छह राज्यों — पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश — में पराली जलाने की घटनाओं पर उपग्रह से नजर रखती है। मौजूदा सीजन के आंकड़े हरियाणा के लिए राहत और गर्व, दोनों लेकर आए हैं।
द हिंदू बिज़नेसलाइन की 17 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इनमें गिरावट दर्ज हुई है। पंजाब में स्थिति लगभग स्थिर रही और राजस्थान में 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। यानी हरियाणा का प्रदर्शन पड़ोसी राज्यों से कहीं बेहतर रहा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मंगी लाल जाट ने गुरुवार को करनाल में हरियाणा की खुलकर तारीफ की। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, डॉ. जाट ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए हरियाणा ने कई टिकाऊ और सख्त उपाय अपनाए हैं, जिससे पिछले पांच वर्षों में पराली जलाने के मामले काफी घटे हैं। उन्होंने हरियाणा के किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि फसल अवशेष को जलाने के बजाय ‘कचरे से धन’ (वेस्ट टू वेल्थ) की पहल के तहत आय का नया स्रोत बनाया जाना चाहिए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हाल ही में हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में कमी पर संतोष जताया था। कमोडिटी टुडे के अनुसार, मंत्री ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावित जिलों में मिशन मोड पर विशेष कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कटाई का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है, इसलिए कमी वाले राज्यों को भी सतर्क रहना होगा। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें बिना देरी के पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
