गुरुग्राम-स्टॉकहोम सिस्टर सिटी: स्वीडन मॉडल से सुलझेंगी जलभराव, कचरा और जाम की समस्याएं; मंत्री विपुल गोयल ने बताया प्लान
गुरुग्राम की बरसों पुरानी समस्याओं — जलभराव, कचरा निपटान और ट्रैफिक जाम — का समाधान अब स्वीडन के स्टॉकहोम मॉडल से निकाला जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के स्वीडन दौरे के दौरान गुरुग्राम और स्टॉकहोम के बीच हुए सिटी-टू-सिटी सहयोग समझौते को अब जमीन पर उतारने की तैयारी है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि स्टॉकहोम के टिकाऊ शहरी विकास मॉडल से प्रेरणा लेकर गुरुग्राम में पायलट प्रोजेक्ट चलाए जाएंगे।
गोयल के मुताबिक स्टॉकहोम ऊर्जा, पानी और कचरे को एक बंद चक्र (क्लोज्ड लूप) में जोड़ता है — वहां का हीटिंग नेटवर्क डेटा सेंटरों और सुपरमार्केटों से निकलने वाली बेकार गर्मी को वापस ग्रिड में पहुंचाता है। स्टॉकहोम के हैमरबी शोस्ताद जैसे टिकाऊ मॉडल से गुरुग्राम को सीख मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि स्टॉकहोम मॉडल का कितना हिस्सा गुरुग्राम में अपनाया जा सकेगा, यह फंडिंग और नगर निगम गुरुग्राम व गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण द्वारा पायलट प्रोजेक्ट उठाने पर निर्भर करेगा।
इसी दौरे में हरियाणा सरकार और स्वीडिश कंपनियों के बीच 4,000 करोड़ रुपये के आशय पत्रों (LoI) पर भी हस्ताक्षर हुए थे — इनमें 3,000 करोड़ रुपये का एक बड़ा प्रस्ताव और खुदरा व वेयरहाउसिंग क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये के समझौते शामिल हैं। स्वीडिश कंपनियों ने हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल प्रशिक्षण का आश्वासन भी दिया है।
गौरतलब है कि आशय पत्र निवेश की बाध्यकारी प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि इरादे का बयान होता है — कंपनियों के नाम, परियोजना स्थल और समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। फिर भी सरकार का मानना है कि यह दौरा हरियाणा को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत करेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोलेगा।
कुंडली-सोनीपत, मानेसर-गुरुग्राम और पलवल को जोड़ने वाले केएमपी एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के किनारे पांच नए शहरों की ‘पंचग्राम’ परिकल्पना के साथ यह स्वीडिश सहयोग हरियाणा के शहरी भविष्य की नींव रख सकता है।
