हरियाणा के बासमती किसानों को बड़ी खुशखबरी: दाम 53% उछलकर ₹4,200 प्रति क्विंटल तक, खाड़ी देशों की बंपर खरीद
हरियाणा के बासमती किसानों के लिए इस बार का खरीफ सीजन खुशियों वाला साबित हो रहा है। बासमती धान के भाव पिछले साल के मुकाबले 53 फीसदी उछल गए हैं। पिछले साल शुरुआती किस्मों का जो बासमती ₹2,800 प्रति क्विंटल बिका था, इस बार PUSA 1509 और PUSA 1692 जैसी प्रीमियम किस्में ₹4,200 से ₹4,300 प्रति क्विंटल तक बिक रही हैं। कुछ मंडियों में भाव ₹4,400-4,500 प्रति क्विंटल तक भी पहुंचे हैं।
भाव में इस उछाल की वजह अंतरराष्ट्रीय हालात हैं। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के चलते खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश बासमती की घबराहट वाली खरीद (पैनिक बाइंग) कर रहे हैं। पहले ये देश अनाज का बड़ा भंडार नहीं रखते थे, लेकिन व्यापारिक रास्तों के बंद होने और प्रतिबंधों के डर से अब ये देश महीनों का आपात भंडार बना रहे हैं। चूंकि ईरान भारत के बासमती का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और 1509 व 1718 जैसी किस्में वहां काफी पसंद की जाती हैं, इसलिए पंजाब-हरियाणा के किसानों और निर्यातकों दोनों को इस बार ‘मांग की लहर’ का फायदा मिल रहा है।
किसानों की आमदनी पर असर बड़ा है — पिछले साल के मुकाबले प्रति क्विंटल करीब ₹1,500 ज्यादा मिलने से प्रति एकड़ लगभग ₹25,000 की अतिरिक्त आय का अनुमान है। बासमती का रकबा भी बढ़ा है — करीब 6.7 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 7.2 लाख हेक्टेयर हो गया है और औसत पैदावार 18 से बढ़कर 23-24 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गई है। अनुमान है कि इस बार कुल उत्पादन पिछले साल के 22.7 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर करीब 30 लाख मीट्रिक टन हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बासमती गैर-बासमती धान से बेहतर है — इसमें कम पानी लगता है, पराली कम निकलती है और यह जल्दी पक जाता है, जिससे पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन का समय मिल जाता है। हालांकि कुछ किसान इस भाव को लेकर सतर्क भी हैं, क्योंकि बासमती पर MSP की गारंटी नहीं है और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर हमेशा रहता है। फिर भी, कुल मिलाकर इस बार बासमती उगाने वाले किसानों के चेहरे पर मुस्कान है।
