अंबाला में एशिया का सबसे बड़ा 1857 शहीद स्मारक तैयार: ₹800 करोड़ की लागत, 700 शहीदों के नाम सोने में — PM मोदी के हाथों उद्घाटन की तैयारी
हरियाणा के अंबाला छावनी में 1857 की प्रथम स्वतंत्रता क्रांति को समर्पित भव्य शहीद स्मारक उद्घाटन के लिए तैयार है। करीब ₹800 करोड़ की लागत से बना यह स्मारक एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक बताया जा रहा है। प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसके उद्घाटन की उम्मीद है।
मंत्री विज के अनुसार, स्मारक में 23 अत्याधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें 700 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के नाम सोने के अक्षरों में अंकित किए गए हैं। स्मारक की खासियतों में 360 डिग्री प्रोजेक्शन, ध्वनि एवं लेजर शो, 2,500 सीटों वाला ओपन-एयर थिएटर और 63 मीटर ऊंचा कमल के आकार का भव्य टावर शामिल है। करीब 22 एकड़ में फैले इस परिसर में गैलरियों की दीवारों पर सैनिकों और घोड़ों की चलती-फिरती आकृतियां नजर आएंगी।
यह स्मारक जीटी रोड पर उसी स्थान के पास बनाया गया है, जहां 10 मई 1857 को अंबाला में क्रांति की चिंगारी भड़की थी। गैलरियों में अंबाला, मेरठ, झांसी, कश्मीरी गेट जैसे क्रांति-केंद्रों और रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे जैसी विभूतियों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। एक विशेष श्रद्धांजलि क्षेत्र उन गुमनाम नायकों को समर्पित है, जिन्हें पारंपरिक इतिहास में उचित सम्मान नहीं मिला।
हाल ही में स्मारक का निरीक्षण करने पहुंचे मंत्री अनिल विज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 25 नवंबर के संभावित दौरे से पहले स्मारक को पूरी तरह तैयार करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है — यदि प्रधानमंत्री को समय मिला तो वे इसका उद्घाटन भी कर सकते हैं। मंत्री ने अधिकारियों को शेष निर्माण कार्य जल्द पूरा करने और प्रदर्शन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
उद्घाटन के बाद यह स्मारक आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। हरियाणा सरकार का लक्ष्य इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है, ताकि देश-विदेश से पर्यटक यहां आकर 1857 के वीरों की गाथा देख सकें।
