हरियाणा जिला अस्पताल अपग्रेड: ब्लड बैंक लैब और दवा जांच पर ₹3.26 करोड़ मंजूर, सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में फैसला
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों की सेहत सुधारने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में राज्य स्वास्थ्य खरीद विशेष स्थायी खरीद समिति (उच्च) की बैठक में करीब 3.26 करोड़ रुपये की खरीद और सेवा योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें जिला अस्पतालों का अपग्रेड, ब्लड बैंकों को मजबूती, जांच प्रयोगशालाओं की सुविधा और दवाओं की गुणवत्ता जांच का दायरा बढ़ाना शामिल है।
बैठक में ब्लड बैंक, स्क्रीनिंग और प्रयोगशाला सेवाओं को मजबूत करने के लिए करीब 1.09 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद को हरी झंडी मिली। इनमें 56.64 लाख रुपये की लागत से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखने वाले 25 डीप फ्रीजर, 34.02 लाख रुपये की लागत से 20 एलिसा रीडर विद वॉशर और 18.55 लाख रुपये की लागत से 15 डिजिटल एनालिटिकल बैलेंस शामिल हैं। इन उपकरणों से नमूनों और अभिकर्मकों के सुरक्षित भंडारण में सुधार होगा और जांच क्षमता मजबूत होगी।
दवाओं की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के लिए दो डिसॉल्यूशन मशीन और दो डिसइंटीग्रेशन उपकरण खरीदने की मंजूरी दी गई, जिन पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे विभाग की दवा परीक्षण क्षमता बढ़ेगी और गुणवत्ता मानकों की निगरानी प्रभावी होगी।
एक अहम निर्णय के तहत प्रदेश के सभी जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में लगे चिकित्सा उपकरणों के सर्वेक्षण, सत्यापन, प्रमाणीकरण और डिजिटलीकरण के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू होगा। इसके लिए चयनित एजेंसी पर करीब 22.42 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे उपकरणों की स्थिति और उपलब्धता की केंद्रीकृत डिजिटल सूची बनेगी, जिससे खरीद और रखरखाव की योजना बेहतर होगी।
समिति ने शवगृहों की क्षमता बढ़ाने और पोस्टमार्टम प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए नौ आधुनिक शवगृह चैंबर और 17 पेडेस्टल ऑटोप्सी टेबल की खरीद को भी मंजूरी दी, जिन पर कुल करीब 1.37 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पंचकूला स्थित हरियाणा चिकित्सा सेवा निगम के कार्यालय में साफ-सफाई के लिए तीन वर्षीय अनुबंध पर 32.40 लाख रुपये की भी स्वीकृति दी गई। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों से प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का प्रबंधन अधिक पारदर्शी होगा।
