हरियाणा वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम 2026: पुराने टैक्स बकाया पर 30 नवंबर तक राहत, ₹1 लाख तक का बकाया पूरी तरह माफ
हरियाणा के व्यापारियों और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने पुराने टैक्स बकायों के निपटारे के लिए चलाई जा रही वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम 2026 की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दी है। यह स्कीम उन कारोबारियों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो पुरानी टैक्स देनदारियों के बोझ से दबे थे और लंबे समय से लंबित विवादों को खत्म करना चाहते थे।
इस स्कीम के तहत ₹1 लाख तक की योग्य टैक्स देनदारी पूरी तरह माफ की जा रही है। इससे अधिक बकाया राशि पर भारी छूट दी जा रही है, और ब्याज तथा पेनल्टी से भी पूरी राहत मिलेगी। यह योजना सात पुराने टैक्स कानूनों के तहत बनी लंबित देनदारियों को कवर करती है। स्कीम की शुरुआत 1 जून 2026 को हुई थी, और कारोबारी समुदाय की उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद सरकार ने इसकी समयसीमा बढ़ाने का फैसला किया है।
झज्जर की उपायुक्त वर्षा खांगवाल ने व्यापारियों को इस बढ़ी हुई डेडलाइन का लाभ उठाने की अपील की है, ताकि वे अपनी लंबे समय से लंबित टैक्स देनदारियां निपटा सकें। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सितंबर के अंत में राज्य के स्वयं के टैक्स राजस्व को मजबूत करने पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में इस स्कीम के विस्तार की घोषणा की थी। गौरतलब है कि 2025 में चली इसी तरह की स्कीम से करीब 1.15 लाख व्यापारियों को लाभ मिला था।
इस बीच हरियाणा का जीएसटी संग्रहण लगातार बढ़ रहा है। अप्रैल से अगस्त 2026 तक राज्य का SGST संग्रहण 29 प्रतिशत बढ़कर ₹24,662 करोड़ पहुंच गया। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा है कि सरकार टैक्स की दरें बढ़ाने के बजाय टैक्स का आधार बढ़ाने पर ध्यान दे रही है, और 2030 तक राज्य के स्वयं के टैक्स राजस्व को सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के 10 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम के जरिए सरकार पुराने विवादों को निपटाकर मुकदमेबाजी का बोझ घटाना चाहती है। व्यापारियों को भी यह मौका मिल रहा है कि वे बिना ब्याज-पेनल्टी के भारी दबाव के अपनी किताबें साफ कर लें। जानकारों का मानना है कि डेडलाइन बढ़ने से छोटे और मझोले कारोबारी भी अब इस राहत का फायदा उठा सकेंगे, जो पहले दस्तावेजों की भागदौड़ में पीछे रह गए थे।
