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सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया 60 साल पुराना भाखड़ा बिजली विवाद, हिमाचल को 20 साल में मिलेगी 11,973 यूनिट बिजली

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया 60 साल पुराना भाखड़ा बिजली विवाद, हिमाचल को 20 साल में मिलेगी 11,973 यूनिट बिजली
  • तारीख़: 7 नवम्बर 2026, 6:53 अपराह्न
  • लेखक: Harish Sharma
  • श्रेणी: विकास
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के बीच 60 साल से चला आ रहा भाखड़ा-ब्यास बिजली विवाद आखिरकार खत्म कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के नकद-रहित समझौते को मंजूरी देते हुए पंजाब और हरियाणा को निर्देश दिया कि वे अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली दें। इस ऐतिहासिक फैसले से तीनों राज्यों के बीच दशकों पुराना बिजली बकाया विवाद पूरी तरह सुलझ गया है। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना भी शामिल थे। यह फैसला हिमाचल प्रदेश के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिसे 2011 में अपने पक्ष में फैसला मिलने के बावजूद अब तक उसका हक नहीं मिल पाया था।

यह विवाद 1966 से चला आ रहा था, जब पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली के बंटवारे पर सवाल उठा था। हिमाचल प्रदेश ने 1996 में संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। 27 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे भाखड़ा-नांगल परियोजना से 1 नवंबर 1966 से और ब्यास परियोजना से उत्पादन शुरू होने की तारीख से कुल बिजली का 7.19 प्रतिशत हिस्सा देने का आदेश दिया था। पंजाब का हिस्सा 51.80 प्रतिशत और हरियाणा का हिस्सा 37.51 प्रतिशत तय हुआ था। लेकिन यह फैसला कागजों पर ही रह गया और हिमाचल को 15 साल बाद भी उसका हक नहीं मिला।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को लागू करने का ठोस रास्ता तय कर दिया है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की गणना के अनुसार हिमाचल का कुल बकाया 13,066 मिलियन यूनिट था। इसमें से हिमाचल की परियोजनाओं की पूंजीगत लागत में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के एवज में 420.77 करोड़ रुपये की देनदारी को समायोजित किया गया। इसमें पंजाब का हिस्सा 249.23 करोड़ रुपये और हरियाणा का हिस्सा 171.55 करोड़ रुपये है। बिजली की कीमत 3.85 रुपये प्रति यूनिट मानते हुए इस देनदारी के बदले लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती की गई। इसके बाद शेष बकाया लगभग 11,973 मिलियन यूनिट रह गया, जो पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में हिमाचल को देंगे।

बिजली की आपूर्ति हर साल अक्टूबर से मार्च तक के कमजोर मौसम में लगभग 598 मिलियन यूनिट की दर से की जाएगी। भाखड़ा-नांगल परियोजना के लिए पंजाब और हरियाणा के बीच अनुपात 58:42 और ब्यास परियोजनाओं के लिए 60:40 रहेगा। कोर्ट ने यह अवधि पहले प्रस्तावित 15 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी है, ताकि पंजाब और हरियाणा पर बोझ कम पड़े। यह व्यवस्था अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि की अगुवाई में हुई बातचीत से तैयार हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि दशकों से लंबित फैसले को देनदार राज्यों की अनिच्छा के कारण बेकार नहीं होने दिया जा सकता।

इस फैसले से तीनों राज्यों के बीच सहयोग का नया अध्याय शुरू होगा और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं से जुड़ा सबसे पुराना विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया है। हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली यह बिजली राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी और विकास की योजनाओं को गति देगी। हरियाणा के लिए भी यह फैसला अहम है, क्योंकि राज्य भाखड़ा-नांगल परियोजना का एक प्रमुख भागीदार है और विवाद के समाधान से अंतरराज्यीय संबंधों में स्थिरता आएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने भाखड़ा बिजली विवाद में क्या फैसला दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा को निर्देश दिया है कि वे अगले 20 वर्षों में हिमाचल प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली दें। यह फैसला 60 साल पुराने भाखड़ा-ब्यास बिजली विवाद को खत्म करता है।

हिमाचल प्रदेश को कितने प्रतिशत बिजली का हिस्सा मिला है?
2011 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं की कुल बिजली का 7.19 प्रतिशत हिस्सा मिला है। पंजाब का हिस्सा 51.80 प्रतिशत और हरियाणा का 37.51 प्रतिशत है।

11,973 मिलियन यूनिट का आंकड़ा कैसे तय हुआ?
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने कुल बकाया 13,066 मिलियन यूनिट आंका था। इसमें से हिमाचल की 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत देनदारी के बदले लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती के बाद शेष बकाया 11,973 मिलियन यूनिट रह गया।

बिजली हिमाचल को कब और कैसे मिलेगी?
बिजली हर साल अक्टूबर से मार्च तक के कमजोर मौसम में लगभग 598 मिलियन यूनिट की दर से 20 वर्षों में दी जाएगी। भाखड़ा-नांगल के लिए पंजाब-हरियाणा अनुपात 58:42 और ब्यास के लिए 60:40 रहेगा।

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