ओडिशा: देश की पहली Agri-PV नीति, 2030 तक 1 GW लक्ष्य — किसानों को फसल के साथ बिजली की कमाई
ओडिशा ने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पहली एग्री-वोल्टिक्स (Agri-PV) नीति जारी की है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने 22 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 7वें एग्रीवोल्टिक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में इस नीति की घोषणा की। इस नीति के तहत ओडिशा ने 2030 तक 1 गीगावॉट एग्रीवोल्टिक्स क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
एग्री-वोल्टिक्स का मतलब है ‘एक खेत, दो फसल’ — यानी एक ही जमीन पर खेती के साथ-साथ सोलर पैनल से बिजली का उत्पादन। नीति में प्रावधान है कि पैनल लगाने के बाद भी 90 प्रतिशत जमीन पर खेती जारी रहेगी। साथ ही जमीन का कृषि वर्गीकरण और फसल बीमा की पात्रता भी बनी रहेगी, ताकि किसान किसी लाभ से वंचित न रहें।
किसानों के लिए दो विकल्प रखे गए हैं। पहला — किसान खुद अपने खेत में सोलर सिस्टम लगाकर फसल और बिजली दोनों से कमाई करें। दूसरा — डेवलपर को जमीन दीर्घकालिक किराए पर देकर नियमित आय पाएं। बिजली खरीद की गारंटी के लिए GRIDCO के साथ 25 साल के बिजली खरीद समझौते (PPA) का प्रावधान किया गया है।
उपमुख्यमंत्री सिंह देव ने कहा कि यह नीति किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने का रास्ता खोलेगी। ओडिशा के इस कदम को पूरे देश के लिए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह किसी भी भारतीय राज्य की इस विषय पर पहली समर्पित नीति है। यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ हरित ऊर्जा के लक्ष्य को भी मजबूती देगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एग्री-वोल्टिक्स से खेतों में पैनलों के नीचे छाया मिलने से कुछ फसलों को गर्मी से भी सुरक्षा मिलेगी।
