राजस्थान समान अवसर नीति 2025: दिव्यांगजनों के लिए बड़ी सौगात, 5.5 लाख पेंशनधारकों को ₹75 करोड़
राजस्थान सरकार ने विशेष योग्यजनों के लिए समान अवसर नीति 2025 लागू की है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 1 नवंबर को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में सरकार ने विशेष योग्यजनों के लिए यह नीति लागू की है, ताकि उन्हें समान अवसर, भेदभाव से मुक्ति और समाज में सम्मानजनक भागीदारी मिल सके। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने इस नीति को दिव्यांगजन कल्याण की अपनी बड़ी पहल के रूप में पेश किया है।
यह नीति दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के ढांचे के तहत बनाई गई है। इस केंद्रीय कानून में दिव्यांगता की 21 श्रेणियां तय की गई हैं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत की गई है। इसके तहत रोजगार में आरक्षण, शिक्षा तक पहुंच, सुगम बुनियादी ढांचा और शिकायत निवारण की व्यवस्था पर जोर दिया जाता है, ताकि कोई दिव्यांगजन अवसरों से वंचित न रहे।
31 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित सपनों की उड़ान कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दिव्यांग युवाओं से संवाद किया और कहा कि सरकार उनके सपनों की सारथी बनेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 2.71 लाख यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अनुजा निगम के जरिए 7,000 लोगों को स्वरोजगार के लिए ऋण भी दिया गया है। इसी अवसर पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 5.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजी गई और सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
सरकार ने पहले भी दिव्यांगजन कल्याण के कई कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर मिलने वाली सहायता 5,000 रुपये से बढ़ाकर 6,500 रुपये की गई है, जबकि दिव्यांग गर्भवती महिलाओं को 10,000 रुपये दिए जाते हैं। विधवाओं, एकल महिलाओं और दिव्यांगजनों की मासिक पेंशन बढ़ाकर 1,250 रुपये की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांग भाई-बहन अपनी रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प से विकसित राजस्थान के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं.
