शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 • हरियाणा 📱 WhatsApp Channel  |  मौसम  |  संपर्क
विकास

मोदी कैबिनेट के दो बड़े फैसले: ₹14500 करोड़ की ऊर्जा भंडारण योजना और ₹2814 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल योजना को मंजूरी

📌 ज़रूरी जानकारी

  • खबर: मोदी कैबिनेट के दो बड़े फैसले: ₹14500 करोड़ की ऊर्जा भंडारण योजना और ₹2814 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल योजना को मंजूरी
  • तारीख़: 4 नवम्बर 2026, 4:13 अपराह्न
  • लेखक: Harish
  • श्रेणी: विकास
  • स्रोत: विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल देखें — लिंक खबर के अंदर दिया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 4 नवंबर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की ऊर्जा और खनिज आत्मनिर्भरता से जुड़े दो बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद बताया कि मंत्रिमंडल ने 92 गीगावाट घंटे की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग योजना और क्रिटिकल मिनरल प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की कैपेक्स सहायता योजना को हरी झंडी दी है। दोनों योजनाओं पर कुल 17,314 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इनका क्रियान्वयन वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगा।

ऊर्जा भंडारण योजना का उद्देश्य देश में बिजली को बड़े पैमाने पर संग्रहीत करने की क्षमता बढ़ाना है। सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली बिजली की उपलब्धता मौसम और समय पर निर्भर करती है, इसलिए ग्रिड-स्तरीय भंडारण से दिन में बनी अतिरिक्त बिजली को शाम और रात के समय उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे नवीकरणीय ऊर्जा का ग्रिड में समावेश आसान होगा, बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली मिलने का रास्ता खुलेगा। यह योजना देश की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी।

दूसरी योजना क्रिटिकल मिनरल प्रसंस्करण से जुड़ी है। इसके तहत देश में चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने के लिए पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। इनमें दो लिथियम प्रसंस्करण संयंत्र होंगे, जिनमें प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन होगी, और दो निकल प्रसंस्करण संयंत्र होंगे, जिनमें प्रत्येक की न्यूनतम क्षमता 50 किलो टन होगी। एक लिथियम लाभार्थी को अधिकतम 500 करोड़ रुपये और एक निकल लाभार्थी को अधिकतम 900 करोड़ रुपये की सहायता मिल सकेगी। इसका मकसद खनिज अयस्क और मध्यवर्ती उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले यौगिकों में बदलने की घरेलू क्षमता विकसित करना है।

क्रिटिकल मिनरल वे खनिज हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और भारी मशीनरी के निर्माण में काम आते हैं। अब तक इन खनिजों के प्रसंस्करण के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर रहा है। घरेलू प्रसंस्करण क्षमता बनने से आयात निर्भरता घटेगी, देश में ही मूल्यवर्धन होगा और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। मंत्रिमंडल की बैठक में 24 चिन्हित क्रिटिकल खनिजों के प्रसंस्करण पर भी जोर दिया गया, जिनमें खनन से प्राप्त कच्चा माल और रीसाइक्लिंग से प्राप्त सामग्री दोनों शामिल होंगे।

इसी बैठक में देश की सांख्यिकी व्यवस्था के पुनर्गठन के लिए 4,371 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी गई, जिसके तहत सर्वेक्षण विधियों, आंकड़ों के सत्यापन और विश्वविद्यालय प्रमाणन पाठ्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा। कुल मिलाकर 4 नवंबर के ये फैसले आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम हैं — ऊर्जा भंडारण से बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, खनिज प्रसंस्करण से उद्योगों को कच्चा माल देश में ही मिलेगा और आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा व विनिर्माण क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी बनेंगे।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *