MLC चुनाव परिणाम 2026: चार राज्यों की 28 सीटों में NDA को 16 सीटें, BJP 13 के साथ सबसे बड़ी पार्टी
चार राज्यों की विधान परिषद की 28 सीटों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बढ़त मिली है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में हुए इन चुनावों में एनडीए ने कुल 16 सीटें जीती हैं। भारतीय जनता पार्टी अकेले 13 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को बैलट पेपर से मतदान हुआ था और परिणाम 28-29 अक्टूबर तक घोषित हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परिणामों के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि चार बड़े राज्यों की 28 सीटों पर विधान परिषद चुनाव बैलट पेपर से हुए हैं। उन्होंने यह सवाल उठाया कि बैलट पेपर से चुनाव के बावजूद कांग्रेस को कितनी सीटें मिलीं। कांग्रेस इन चुनावों में कुल एक ही सीट जीत सकी, जो महाराष्ट्र की नागपुर स्नातक सीट है। कर्नाटक में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला, जहां भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत लीं।
उत्तर प्रदेश की 11 सीटों में भाजपा ने छह और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटें जीतीं। बिहार की आठ सीटों में भाजपा को तीन, जनता दल (यूनाइटेड) को एक, राष्ट्रीय जनता दल को एक, जन सुराज पार्टी को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो सीटें मिलीं। जन सुराज पार्टी के लिए यह विधान परिषद में पहली जीत है। कर्नाटक की चार सीटों में भाजपा ने तीन और जनता दल (सेक्युलर) ने एक सीट जीती, जबकि सत्ताधारी कांग्रेस चारों सीटें हार गई।
महाराष्ट्र की पांच सीटों में विपक्षी महा विकास आघाड़ी को तीन सीटें मिलीं, जिसमें कांग्रेस की एक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की दो सीटें शामिल हैं। सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटें मिलीं, जिसमें भाजपा की एक और शिवसेना की एक सीट है। नागपुर स्नातक सीट पर कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3271 मतों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। वंजारी को 67231 और कोहले को 63960 मत मिले।
कुल मिलाकर भाजपा के 13, जनता दल (यूनाइटेड) के एक, जनता दल (सेक्युलर) के एक और शिवसेना के एक सीट के साथ एनडीए का आंकड़ा 16 पहुंचा। समाजवादी पार्टी पांच सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी रही। इन परिणामों को भाजपा के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं और शिक्षक-स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के ये नतीजे संगठन की जमीनी पकड़ का संकेत माने जाते हैं।
