केंद्र सरकार की खादी ग्रामोद्योग विकास योजना (KGVY) खादी और ग्रामोद्योग से जुड़े कारीगरों, संस्थाओं और ग्रामीण उद्यमियों के लिए है। इसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के तहत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) चलाता है — KVIC संसद के अधिनियम से 1956 में बना एक सांविधिक निकाय है। योजना का मकसद खादी कारीगरों की उत्पादकता और मजदूरी बढ़ाना, बुनियादी ढाँचा सुधारना और खादी उत्पादों की बिक्री व निर्यात बढ़ाना है।
योजना के दो बड़े हिस्से
इस योजना के दो मुख्य हिस्से हैं — खादी विकास योजना (KVY) और ग्रामोद्योग विकास योजना (GVY)। खादी विकास योजना सूती, ऊनी, रेशमी और पॉलीवस्त्र खादी को बढ़ावा देती है। ग्रामोद्योग विकास योजना गाँवों के उद्योगों को साझा सुविधाओं, तकनीक उन्नयन, प्रशिक्षण और टूलकिट से सहारा देती है।
खादी विकास योजना में क्या-क्या मदद मिलती है
खादी विकास योजना में कई तरह की सहायता दी जाती है। संशोधित बाज़ार विकास सहायता (MMDA) के तहत खादी संस्थाओं को प्राइम कॉस्ट पर सब्सिडी मिलती है — सूती/मस्लिन, ऊन और पॉलीवस्त्र खादी पर 35 प्रतिशत और रेशम खादी पर 20 प्रतिशत। ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाणपत्र (ISEC) योजना में खादी संस्था को कार्यशील पूँजी ऋण पर सिर्फ 4 प्रतिशत ब्याज देना होता है, बाकी ब्याज सब्सिडी के रूप में मिलता है। खादी कारीगरों की वर्कशेड योजना में व्यक्तिगत वर्कशेड (20 वर्ग मीटर) के लिए ₹1,20,000 या लागत का 75 प्रतिशत तक सहायता मिलती है। कमजोर खादी संस्थाओं के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करने और मार्केटिंग ढाँचे के लिए ₹15 लाख तक की सहायता का प्रावधान है। इसके अलावा बिक्री केंद्रों के आधुनिकीकरण, गुणवत्ता जाँच और प्रदर्शनियों की मदद भी मिलती है।
ग्रामोद्योग विकास योजना में किन उद्योगों को मदद मिलती है
ग्रामोद्योग विकास योजना छह तरह के ग्रामीण उद्योगों को सहारा देती है — कृषि आधारित व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, खनिज आधारित उद्योग, वेलनेस व सौंदर्य प्रसाधन उद्योग, हस्तनिर्मित कागज चमड़ा व प्लास्टिक उद्योग, ग्रामीण इंजीनियरिंग व नई तकनीक उद्योग, और सेवा उद्योग। इसमें ग्रामीण कारीगरों और बेरोज़गार युवाओं को प्रशिक्षण, मशीनरी व टूलकिट की मदद मिलती है।
हरियाणा के कारीगरों को मदद कैसे मिलेगी
यह योजना सीधे व्यक्ति को नकद नहीं देती — मदद खादी संस्थाओं और राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्डों के जरिए मिलती है। हरियाणा के कारीगर को अपने जिले की खादी संस्था या हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड से संपर्क करना चाहिए। नई सूक्ष्म इकाई के लिए KVIC की अलग प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना है। मदद के नाम पर किसी बिचौलिए को पैसा न दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: खादी ग्रामोद्योग विकास योजना किसे मदद देती है?
उत्तर: खादी कारीगरों, खादी संस्थाओं और ग्रामोद्योग से जुड़े ग्रामीण कारीगरों व युवाओं को।
प्रश्न 2: MMDA में कितनी सब्सिडी मिलती है?
उत्तर: सूती/मस्लिन, ऊन और पॉलीवस्त्र खादी पर प्राइम कॉस्ट का 35 प्रतिशत और रेशम खादी पर 20 प्रतिशत।
प्रश्न 3: कारीगर की वर्कशेड के लिए कितनी मदद मिलती है?
उत्तर: व्यक्तिगत वर्कशेड (20 वर्ग मीटर) के लिए ₹1,20,000 या लागत का 75 प्रतिशत तक।
प्रश्न 4: क्या इस योजना में सीधे ऑनलाइन आवेदन होता है?
उत्तर: नहीं — मदद खादी संस्थाओं और राज्य खादी बोर्डों के जरिए मिलती है। अपने जिले की खादी संस्था या राज्य बोर्ड से संपर्क करें।
उपयोगी लिंक
- MSME मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट: https://msme.gov.in/
- खादी ग्रामोद्योग विकास योजना MyScheme पर: https://www.myscheme.gov.in/schemes/kvyoj
- केंद्र सरकार की सभी 726 योजनाओं की सूची

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